Thursday, 18 March 2021

424. किंबो- अनिल मोहन

एक खतरनाक जीव की कहानी
किंबो- अनिल मोहन

दृश्य- 01
कंगूरा आइलैण्ड
'फच्चाक...।' अगले ही पल आदिवासी शिकारी की नाभी में बड़ा सा सुराख हुआ और चीख गूंजती चली गई-"आह..."
'कड़ाक...'- तभी नाभी के रास्ते गुजरता किंबो नामक जीव पीछे पीठ की हड्डी तोड़ता बाहर जा उछला।


 दृश्य-02
'कड़ाक।' पहले आदिवासी के पृष्ठ भाग की खोपड़ी टूटी। उसमें चार इंच चौड़ी हड्डी टूटकर नीचे गिरी और उसके बाद किंबो बाहर की तरफ हवा में लहराता चला गया।
दृश्य-03
"किंबो मानव शरीर में कहीं से भी घुस सकता है। फिर भी जिस शरीर को इसने  अपना घर बनाना होता है यह उस शरीर में मुँह से प्रवेश करता है या नीचे गुप्तांग से। (पृष्ठ-17)



उक्त दहशत भरे दृश्य हैं रवि पॉकेट बुक्स से प्रकाशित लोकप्रिय साहित्य के सितारे अनिल मोहन जी द्वारा लिखित उपन्यास 'किंबो-एक अजूबा' नामक के। 

किंबो- अनिल मोहन
   लोकप्रिय साहित्य में यूं तो एक से बढकर एक उपन्यास लिखे गये हैं। पर किसी जानवर को आधार बना लिखा गया यह प्रथम उपन्यास है,मेरी दृष्टि में तो। हिंदी हाॅरर उपन्यास साहित्य में ऐसे प्रयोग अन्यत्र नहीं है। 

Saturday, 13 March 2021

423. शरीफ हत्यारा- श्री नारद जी

शरीफ हत्यारा- श्री नारद जी
लोकप्रिय उपन्यास आरम्भ इलाहाबाद से होता है। और इस के आरम्भिक दौर में उपन्यास पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे। ऐसे ही अपने समय की एक पत्रिका थी-जासूसी डायरी। जिसमें तात्कालिक लोकप्रिय साहित्य के लेखकों के रोचक और जासूसी उपन्यास प्रकाशित होते थे। 
NH911
 जासूसी डायरी के एक अंक में श्री नारद जी का उपन्यास 'शरीफ हत्यारा' प्रकाशित हुआ था।
   पहले प्रकाशक का कथन देख लें।
एक रक्षक ही जब भक्षक बन जाये तो फिर जनता का क्या होगा?
  मोमियों के नीच एव देशद्रोही एक उच्च अधिकारी की दास्तां जिसने रहस्यमय ढंग से गद्दारी की।
आज 'श्रीनारद जी' सर्वप्रिय उपन्यास लेखक हैं। क्योंकि संसार में अपराधियों का एक जाल सा बिछ गया है। जो एक देश से दूसरे देश में जाकर वहाँ षड्यंत्र द्वारा विज्ञान के नये-नये अनुसंधानों का सहारा लेकर ऐसी वारदातें करते हैं कि दांतों तले उंगली दबाना पड़ता है।
ऐसे ही एक रहस्यमय षड्यंत्र जिसका संचालन विदेशी कर रहे हैं, की रोचक, कहकहे से पूर्ण कहानी इस पुस्तक में लिखी ग ई है। पढकर आप आनंद विभोर हो उठेंगे।
                                         प्रकाशक
                              जासूसी डायरी, इलाहाबाद


    उपन्यास की कहानी बर्मा (वर्तमान म्यानमार) देश पर आधारित है। सन् 1935 से पूर्व बर्मा भारत का ही एक अंग था जो कि अंग्रेजी सत्ता के चलते एक अलग देश के रुप में स्थापित हुआ।
   बर्मा में तस्करी का काम बहुत ज्यादा होता था। और वहाँ की सरकार इसे रोकने में असमर्थ थी।
उन दिनों जापान धीरे-धीरे रंगून में उपद्रव की आग भड़का रहा था। कुछ ऐसे एजेंट थे जो भारतवर्ष से सोना खरीद कर जापान भेजते रहते थे। ऐसे एजेंट अधिकतर बर्मा के मोमियो निवासी थे। बर्मा का गुप्तचर विभाग जब उन एजेंटों को पकड़ने में सफल न हो सका तो विवश होकर सरकार ने मिस्टर हरीश को आदेश दिया।(उपन्यास अंश)
    मिस्टर हरीश सी. आई. डी. में कार्यरत हैं और वे अपने अधीनस्थ डेविड और विनोद के साथ बर्मा जाते हैं। लेकिन तस्करों का नेटवर्क भी बहुत मजबूत है।- यहाँ से जो भी जासूस उन बदमाशों का पता लगाने के लिए भेजा जाता था वह या तो रास्ते में ही खत्म कर दिया जाता था या दो-चार दिन बाद रंगून या मोमियो की किसी सड़क पर उसकी लाश मिलती थी। (उपन्यास अंश)
    लेकिन मिस्टर हरीश इन सब परिस्थितियों को जानते और समझते हुये भी उन तस्करों का पता लगाने के लिए बर्मा जाते हैं।
     शेष कहानी बर्मा में उन तस्करों को खोजने और पकड़ने का विवरण है।
    कैसे भारतीय सी. आई. डी. के अधिकारी अपने कार्य को अंजाम देते हैं और कौन लोग हैं जो उन तस्करों का साथ देते हैं‌? यह उपन्यास पढकर जाना जा सकता है।
   उपन्यास का कथानक रोचक है लेकिन प्रस्तुतिकरण कोई विशेष नहीं है। उपन्यास का अंत एकदम से हो जाता है और वह भी पूर्णतः नाटकीय तरीके से जो पाठक में खीझ सी पैदा कर जाता है।
     उपन्यास को इसलिए पढा जा सकता है कि यह लोकप्रिय साहित्य में पत्रिकाओं के समय की रचना है। 
उपन्यास- शरीफ हत्यारा
लेखक-   श्री नारद जी
प्रकाशक- जासूसी डायरी, इलाहाबाद

Tuesday, 9 March 2021

422. भगवान महावीर

मन पर विजय प्राप्त करने का मार्ग
भगवान महावीर- सर श्री

जैन समाज के चौबीसवें तीर्थंकर को लेकर सर श्री ने 'भगवान महावीर' नामक पुस्तक की रचना की है।
इस में भगवान रचना को कई खण्डों में विभक्त किया गया है और उनमें भगवान महावीर जी के जीवन का वर्णन है।
  एक तरफ जहाँ भगवान महावीर के जीवन का वर्णन है वहीं वर्तमान समय के साथ भी इस रचना को सबद्ध किया गया है।
     हमारा वर्तमान जीवन भौतिकता के चलते बहुत सी परेशानियां से घिरा रहता है उन समस्यों से हम जैसे मुक्ति पा सकते हैं यह विभिन्न उदाहरणों और भगवान जी के जीवन से हम समझ सकते हैं।
   इस रचना में बहुत से रोचक उदाहरण और भगवान महावीर के जीवन के कुछ प्रसंग दिये गये हैं।
   अगर हम संक्षिप्त रूप से भगवान महावीर को समझना चाहते हैं तो यह रचना काफि उपयोगी साबित हो सकती है।
   यह पुस्तक मुझे मेरे गांव के पुस्तकालय 'डॉक्टर भीमराब अम्बेडकर-बगीचा' से उपलब्ध हुयी थी।

रचना- भगवान महावीर- मन पर विजय प्राप्त करने का मार्ग
लेखक- सर श्री
प्रकाशक- मंजुल पब्लिकेशन हाउस



Saturday, 6 March 2021

421. धब्बा- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

एक मामूली बेऔकात 'धब्बा' जो कत्ल के हल की बुनियाद बना।
धब्बा- सुरेन्द्र मोहन पाठक, मर्डर मिस्ट्री
सुनील सीरीज -119
पाठक जी -    275

श्रीप्रकाश सिकंद नाम के एक स्वर्गवासी व्यक्ति की वसीयत का केस बड़ा दिलचस्प हो गया है। बीस करोड़ के विरसे का मामला है ...।(पृष्ठ-137)
       मैं जब भी कहीं सफर में होता हूँ तो मेरे थैले में दो-चार उपन्यास अवश्य होते हैं। जहाँ एक तरफ सफर में उपन्यास पढ लिये जाते हैं, वहीं लोगों तक यह संदेश भी जाता है कि उपन्यास संस्कृति अभी जिंदा है।
    इस बार विद्यालय से अवकाश लेकर घर (माउंट आबू से बगीचा-श्री गंगानगर) आया तो कोचीवैली-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस ट्रेन में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का उपन्यास 'धब्बा' पढा। 

धब्बा- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
धब्बा- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
प्रकाश खेमका 'सरकता आँचल' नाम से एक पत्रिका चलाता था। पत्रिका क्या थी वह पत्रिका की ओट में, पत्रिका के माध्यम से फ्रेण्डशिप क्लब चलाता था।
"वो आम मैगजीन नहीं है। सच पूछो तो मैगजीन‌ की शक्ल में फ्रेण्डशिप क्लब है। अनजान, एडवेंचरस लोगों में कम्यूनिकेशन का जरिया है। हर वर्ग के हर उम्र के लोगबाग कम्पैनियनशिप के लिए, दोस्ती के लिए...मैगजीन में विज्ञापन छपवाते हैं।(पृष्ठ-33)
     लेकिन एक बार एक विज्ञापन उसके गले की फांस बन गया और उसी फांस को निकलवाने के लिए वह रमाकांत के माध्यम से यूथ क्लब में 'ब्लास्ट' के पत्रकार सुनील से मिला।

Wednesday, 17 February 2021

420. शूर्पणखा- डाॅ. अशोक शर्मा

शूर्पणखा का नया रूप...
शूर्पणखा- डाॅ. अशोक शर्मा, उपन्यास

भारतीय जनमानस में दो महाग्रंथ अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। एक रामायण और द्वितीय महाभारत। सदियों पूर्व लिखे गये ये ग्रंथ आज भी प्रासंगिक है,ब्लकि वर्तमान समम में समस्याओं को देखते हुये इनका महत्व और भी बढ जाता है।
   इन दोनों ग्रंथों असंख्य टीका और इनके पात्रों को लेकर असंख्य रचनाएँ रची गयी हैं। बस फर्क इतना है कि हर लेखन का उसमें अपना दृष्टिकोण शामिल हो जाता है। नया लेखन -नया दृष्टिकोण।
    डाॅक्टर अशोक शर्मा जी ने रामायण के खल पात्र राक्षेन्द्र रावण की बहन शूपर्णखा का आधार बना 'शूर्पणखा- एक लड़की अलग सी' शीर्षक से रचना की है। 

www.svnlibrary.blogspot.com
   उपन्यास का कथानक चाहे आम भारतीय के लिए जाना पहचाना है लेकिन प्रस्तुत उपन्यास में शूपर्णखा को आधार बना कर लिया है तो कहानी का केन्द्र बिंदु यही पात्र है। शेष घटनाएं इसी के इर्द-गिर्द और इसी पात्र शूपर्णखा के कारण ही घटित होती हैं।
   शूर्पणखा के साथ उसकी एक और पारिवारिक बहन‌ कुम्भनसी भी है और यही दोनों रावण के विनाश के लिए रास्ता बनाती हैं।
   स्त्री के साथ अक्सर अत्याचार होते हैं और वह भाग्य लिखा का मान कर चुप हो जाती हैं। लेकिन यहाँ शूर्पणखा और कुम्भनसी चुप नहीं होती, वे तो अपने ऊपर हुये अत्याचार के लिए अत्याचारी को उसका दण्ड देने की इच्छुक हैं। वे स्पष्ट रूप से रावण को गलत मानती हैं। और अपने साथ हुये अत्याचार का बदला रावण से लेती हैं। 

Thursday, 11 February 2021

419. माया मिली न राम- संतोष पाठक

नाम और दाम के लिए चली अनोखी चाल...
माया मिली न राम- संतोष पाठक, उपन्यास

लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य में संतोष पाठक जी ने जो ख्याति अर्जित की है, वह प्रशंसनीय है। जितनी अच्छी कहानी है उतना ही तीव्रता से लेखन करने में वे सक्षम है।
  एक के बाद एक मर्डर मिस्ट्री लिखना,और वह भी रहस्य और रोमांच से परिपूर्ण। कभी कभी तो यूं प्रतीत होता है जैसे संतोष पाठक जी लेखन‌ की मशीन हो।
  मर्डर मिस्ट्री लेखन‌ में संतोष जी ने अपने नवसर्जित पात्रों और थ्रिलर के माध्यम से अपने सक्षम लेखन का सबूत दिया है प्रस्तुत उपन्यास 'न माया मिली न राम' के माध्यम से।
   यह कहानी एक ऐसे पुलिसकर्मी की जो हर हाल में नाम और दाम दोनों कमाना चाहता है। उसे तलाश है एक अच्छे मौके की और संयोग से यह मौका भी उसे मिल ही गया। 
 
दौलत और शोहरत दो ऐसी चीजें थीं, जिन्हें हासिल करने की खातिर सब-इंस्पेक्टर निरंकुश राठी किसी भी हद तक जा सकता था। स्याह को सफेद कर सकता था, बेगुनाह को फांस सकता था, मुजरिम के खिलाफ जाते सबूतों को नजरअंदाज कर सकता था। प्रत्यक्षतः वह ऐसा करप्ट पुलिसिया था जिसका नौकरी को लेकर कोई दीन ईमान नहीं था। ऐसे में एक रोज जब वह सड़क पर हुई एक मौत को अपने हक में करने की कवायद में जुटा, तो जल्दी ही यूं लगने लगा जैसे उसकी किस्मत रूठ गयी हो! जैसे ऊपरवाला उसके गुनाहों का हिसाब मांगने लगा हो।

Sunday, 7 February 2021

418. वे दिन- निर्मल वर्मा

कहां गये वो दिन...
वे दिन- निर्मल वर्मा, उपन्यास

हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर निर्मल वर्मा को पढने का अर्थ है उनके पात्रों में स्वयं को ढाल लेना, उन में जी लेना।
   शिमला में जन्में निर्मल वर्मा कथाकार और पत्रकार रहे हैं। उनकी रचनाओं को पढने से यह तो स्पष्ट होता है कि वे ठण्डे दिनों की बात अवश्य करते हैं, क्या यह उन पर शिमला का ही प्रभाव है। निर्मल वर्मा चेकोस्लोवाकिया रह चुके हैं, इसका प्रभाव 'वे दिन' रचना में दृष्टिगत होता है।
  मैंने सबसे पहले निर्मल वर्मा जी की रचना 'परिंदे' पढी थी। अवसाद से ग्रस्त पात्रों की मार्मिक रचना थी। उसके बाद लंबे समय पश्चात उपन्यास 'वे दिन' पढा। दोनों में बहुत समानता भी है और अंतर भी। 

वे दिन- निर्मल वर्मा
वे दिन- निर्मल वर्मा
   वे दिन उपन्यास चेकोस्लोवाकिया में रह रहे एक भारतीय विद्यार्थी की कथा है। क्रिसमस के दिनों में जब काॅलेज- यूनिवर्सिटियां बंद हो जाती हैं, तब भी कुछ प्रवासी विद्यार्थी होस्टल में रहते हैं। इन्हीं में से एक है भारतीय विद्यार्थी इंदी।
   एक आस्ट्रिया महिला रायना जो की अपने पति से अलग रहती है। वह अपने पुत्र मीता के साथ चेकोस्लोवाकिया के शहर प्राग में घूमने आती है। 

Thursday, 4 February 2021

417. मर्डर आॅन वैलंटाइंस नाइट- विजय कुमार बोहरा

प्रेम दिवस पर कत्ल की कहानी
मर्डर आॅन वैलेंटाइंस नाइट- विजय कुमार बोहरा
मर्डर मिस्ट्री

      आधी रात को सुनसान राह पर कत्ल हुआ। न कोई गवाह था और न कोई सबूत। ऐसी स्थिति में कातिल का पता लगना बहुत ही मुश्किल काम है। कातिल का पता तभी चलता है जब कोई सबूत या गवाह हो, लेकिन यहाँ तो कुछ भी न था। बस एक लाश थी...डिटेक्टिव साकेत अग्निहोत्री के समक्ष यही चुनौती थी की वह इस लाश के हत्यारे को खोजे तो कैसे खोजे। 

     राजस्थान के बेगूँ (चित्तौड़गढ़) के युवा उपन्यासकार विजय कुमार बोहरा द्वारा लिखा गया 'मर्डर आॅन वैलेंटाइंस नाइट' उनका प्रथम उपन्यास है। वैसे विजय जी online साइट आदि पर लिखते रहते हैं। इस उपन्यास की शुरुआत भी एक online प्लेटफॉर्म से ही हुयी थी जो बाद में हार्डकाॅपी में भी प्रकाशित हुआ।
   उपन्यास पढते वक्त कहीं से भी ऐसा नहीं लगता की यह कोई अपरिपक्व रचना है या लेखक का प्रथम उपन्यास है।

   उपन्यास की कहानी-

करीब 9 बजे जैसे ही साकेत तैयार हुआ, उसके मोबाइल पर एक कॉल आयी।
“हैलो !” कॉल रिसीव करते हुए साकेत बोला।
“हैलो ! अग्निहोत्री सर बोल रहे हैं ?” फोन के उस तरफ से एक महिला स्वर उभरा, “डिटेक्टिव साकेत अग्निहोत्री !” “बोल रहा हूँ, आप कौन ?”
“सर, मैं रागिनी बोल रही हूँ।”
“कौन रागिनी ?”
“आप मुझे नहीं जानते सर, लेकिन मैं आपको जानती हूँ।” “कैसे ?”
“जैसे पूरा शहर जानता है।”
“मैं समझा नहीं !”
“सर, आप शहर के सबसे अच्छे प्राइवेट डिटेक्टिव हैं ! मुझे आपकी मदद की जरूरत है ।”
“ओह !” साकेत को अब कुछ-कुछ समझ आया, “तो क्लाइंट हो !”
“जी सर !” रागिनी बोली, “आप ऐसा कह सकते हैं।” “कहिये, क्या मदद कर सकता हूँ आपकी?”
“फोन पर नहीं बता सकती। क्या हम कहीं मिल सकते हैं?” “ओके, मेरे घर आ जाओ।”
“ठीक है सर ! मैं बस आधे घंटे में पहुँचती हूँ।” (उपन्यास अंश)

Sunday, 31 January 2021

416. पवित्र पापी- नानक सिंह

पवित्र पापी- नानक सिंह, उपन्यास
मनुष्य से जाने और अनजाने में गलतियाँ हो जाती हैं। कभी मनुष्य उन गलतियों को स्वीकार कर लेता हैऔर कभी नहीं। 
   सच्चा मनुष्य वही है जो अपनी गलती को स्वीकार कर ले। लेकिन कभी-कभी परिस्थितियाँ कुछ और ही कहानी व्यक्त कर देती हैं। मनुष्य को स्वयं तो लगता है उस से गलती हुयी लेकिन अन्य लोग मानते हैं कि वह गलत नहीं, ऐसी स्थिति को आप क्या कहेंगे। 

पवित्र पापी- नानक सिंह
पवित्र पापी- नानक सिंह
       पंजाबी के चर्चित कथाकार हैं नानक सिंह। पंजाबी साहित्य को समृद्ध करने में उनका अतुलनीय योगदान है। उनका रचित साहित्य पंजाबी कथासाहित्य में श्री वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  मैं स्वयं पंजाबी हूँ, लेकिन पंजाबी में मैंने कभी विस्तृत साहित्य नहीं पढा। कहानियाँ और कविताओं के अतिरिक्त कभी नहीं। पंजाबी उपन्यास पढने का यह पहला अवसर है। पंजाबी उपन्यास और गुरुमुखी लिपि में।
  पंजाब के खन्ना शहर के मित्र नवनीश भट्टी जी ने मुझे दो पंजाबी उपन्यास भेजे थे। नानक सिंह द्वारा रचित 'पवित्र पापी' और कृशनचंदर का 'एक औरत हजार अफसाने'(पंजाबी में‌ अनूदित) मैं‌ नवनीश का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ ।
    अब चर्चा करते हैं प्रस्तुत उपन्यास की।

Tuesday, 19 January 2021

415. ढोलण कुंजकली- यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

 नारी के शोषण की करुणगाथा
ढोलण कुंजकली- यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

  शोषक और शोषित का संघर्ष अनादि काल से चला आ रहा है। और समय के साथ -साथ इसमें कुछ और भी बुराईयां शामिल होती चली गयी। शोषक-शोषित, अमीर-गरीब और जातिवाद जैसे बुराईयों ने भारतीय समाज के अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।
     रजवाड़ों‌ के समय में तो हाल बद से बदतर थे। एक तो गरीब दूसरा दूसरा शोषण और फिर जातिवाद का जहर। और इस कुचक्रें अगर किसी गरीब दलित की औरत फंस गयी तो उसका बाहर निकला मुश्किल था और अगर वह सौन्दर्य से परिपूर्ण हुयी तो उसका आंतरिक जीवन दलदल सा हो जाता था।
   यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र' ने राजस्थान के परिवेश और भारतीय नारी की स्थिति पर बहुत प्रासंगिक रचनाएं लिखी हैं। जथसे हजार घोडो़ का सवार, हूं गोरी किण पीव री, जमारो, ढोलण कुंजकली आदि।
    इनकी रचनाओं में नारी की विपन्न स्थिति, शोषित वर्ग का चित्रण, ब्रिटिश काल का अत्याचार आदि का बखूबी चित्रण मिलता है। इनकी रचनाएं काल्पनिक होते हुये भी यथार्थ के समीप होती हैं।  
ढोलण कुंजकली - यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'
   प्रस्तुत रचना 'ढोलण कुंजकली' एक ऐसी ही रचना है जो दलितवर्ग की स्त्री की मार्मिक गाथा को प्रस्तुत करती है। "कुंज की कली को कोई भी तोड़ मरोड़ सकता है। वही दसा मेरी है।" (पृष्ठ-105) 

Sunday, 17 January 2021

414. हत्या का रहस्य- कर्नल रंजीत

कर्नल रंजीत का प्रथम उपन्यास
हत्या का रहस्य- कर्नल रंजीत, 1967

    हिंदी लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में छद्मनाम का पहला प्रयोग हिंद पॉकेट बुक्स ने कर्नल रंजीत के नाम से आरम्भ किया था। यह प्रयोग बाद में इस साहित्य में छूत की बीमारी की तरह फैल गया।
    एक के बाद एक प्रकाशक छद्मनाम  और Ghost writing करवाने लगे, इस चक्कर में प्रतिभाशाली लेखक भी अपनी प्रतिभा का हनन करवा बैठे।
  लेकिन जो प्रसिद्ध कर्नल रंजीत के नाम‌ को प्राप्त हुयी वह अन्यत्र दुर्बल है। कर्नल रंजीत का अन्य नाम मखमूर जलंधरी था।
    हत्या का रहस्य
   उपन्यास की कहानी एक दैनिक समाचार पत्र के कार्टूनिस्ट से संबंध रखती है। जो कार्टूनिस्ट था, सेना का जवान भी रहा और एक दिन रहस्यमय परिस्थितियों में उसकी लाश पाई गयी। दैनिक पत्र के एक पत्रकार के कहने पर मेजर बलवंत इस रहस्यमय केस पर कार्य करने को सहमत होता है। 
हिंद पॉकेट बुक्स ने साधारण स्तर के जासूसी उपन्यास प्रकाशित करने की अपेक्षा अच्छे स्तर के आश्चर्यजनक जासूसी उपन्यास प्रकाशित करने का निश्चय किया है और इसके लिए विशेष रूप से कर्नल रंजीत का सहयोग प्राप्त है। वे आपके लिए जासूसी उपन्यासों की शृंखला शुरु कर रहे हैं।
   'हत्या का रहस्य' आपका पहला उपन्यास है जो निस्संदेह हिंदी में जासूसी साहित्य के राजपथ पर मील का पत्थर सा महत्व रखता है। (उपन्यास के आरम्भिक पृष्ठ से) 
हत्या का रहस्य- कर्नल रंजीत 

Saturday, 16 January 2021

413. डबल क्राॅस- प्रकाश भारती

प्रकाश भारती का प्रथम उपन्यास
डबल क्रॉस- प्रकाश भारती, थ्रिलर

           लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य में अनेक लेखक हुये हैं, जिन्होंने इस साहित्य को समृद्ध किया है। लेकिन अधिकांश लेखक एक अघोषित परम्परा से आगे नहीं बढ पाये। लेकिन कुछ ऐसे लेखक भी हुये जिन्होंने नये कीर्तिमान स्थापित जिये। ऐसा ही एक नाम है प्रकाश भारती।
   प्रकाश भारती जी ने लोकप्रिय उपन्यास में अपने लेखन का पदार्पण थ्रिलर उपन्यास से किया। इनके उपन्यास काल्पनिक होते हुये भी वास्तविकता के करीब होते थे। उपन्यास में स्थापित नायक कहीं से भी अमानवीय कार्य करते नजर नहीं आते। 
डबल क्राॅस- प्रकाश भारती, प्रथम उपन्यास
            डबल क्राॅस- प्रकाश भारती, प्रथम उपन्यास
   प्रकाश भारती जी का प्रथम उपन्यास 'डबल क्रॉस' पढा जो मुझे वास्तव में बहुत रूचिकर लगा।
यह कहानी अकस्मात मिले धन की। उस धन की जिसे पाने की जिसने भी कोशिश की वह जान से हाथ धो बैठा। और संयोग से यह धन एक युवा पहलवान को मिला और फिर कहानी में हैरत कर देने वाले घटनाक्रम आते चले गये।  

Wednesday, 13 January 2021

412. आठ दिन- सुरेन्द्र मोहन पाठक

ठग आदमी जब जासूस बना
आठ दिन - सुरेन्द्र मोहन पाठक

विकास गुप्ता सीरीज
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का नाम सम्मान से लिया जाता है। उनके द्वारा लिखित उपन्यास और रचित पात्र उपन्यास पाठकों के लिए एक उपहार की तहर हैं जिसे वे सजों कर रखते हैं।
     उनके चर्चित पात्र हैं पत्रकार सुनील, प्राइवेट जासूस सुधीर कोहली, विमल और जीता। इसके अतिरिक्त ऐसे भी पात्र रचे हैं जिन पर एक दो उपन्यास लिखे गये हैं। ऐसा ही एक पात्र है विकास गुप्ता।
  विकास गुप्ता के पर तक पाठक जी ने तीन उपन्यास लिखे हैं, 'धोखाधड़ी','बारह सवाल' और 'आठ दिन'
   मैंने इन दिनों सुरेन्द्र मोहन पाठक जी द्वारा रचित उपन्यास 'आठ दिन' यह विकास गुप्ता सीरीज का  तीसरा उपन्यास है।
    उपन्यास विकास गुप्ता नामक युवक और उनके साथी शबनम सेठी और मनोहर लाल पर आधारित है। तीनों पेशेवर ठग है। लेकिन एक बार गलती से विकास गुप्ता संयोग से एक कत्ल का गवाह बन बैठा और यही संयोग उसके दुर्दिन ले आया।। 
युवक का नाम विकास गुप्ता था और वो एक पेशेवर ठग और कॉनमैन था । ठगी ही उसकी रोजी रोटी का जरिया था और उसकी अमूमन हमेशा कामयाबी में सबसे बड़ा हाथ उसके आकर्षक व्यक्तित्व का और उसकी अक्ल और सूझबूझ का था । उसकी सूरत और रखरखाव को देखकर कभी कोई सपने में नहीं सोच सकता था कि वो ठग था, जो सोचता यही सोचता कि कोई प्रोफेसर था या इंजीनियर था या बिजनेस एग्जीक्यूटिव था।