एक नवयुवक की भारत के दक्षिणी तट से हिमालय की रहस्यमयी ऊँचाईयों तक की रोमांचक यात्रा जहाँ से उसे अपने महान गुरु मिलते हैं- ज्ञानी, शक्तिवान् और स्नेहमय।
आध्यात्मिक जीवन चरित पढने का यह मेरा प्रथम अवसर है। किसी के व्यक्तिगत जीवन को पढना हमें तभी रूचिकर प्रतीत होता है, जब हम उस व्यक्ति के विषय में कुछ जानकारी रखते हैं या उस व्यक्ति से हमारा संबंध हो। इस दृष्टि से देखे तो उक्त जीवन चरित किसी भी दृष्टि से मेरे साथ संबंध नहीं रखता। मैंने तो 'श्री एम' का प्रथम बार नाम इस किताब से ही जाना है। यह पुस्तक केरल के एक युवक की आध्यात्मिक 'रंक से राजा' होने की कहानी है कि कैसे वह अपने पूर्ण समर्पण, सच्ची लगन और एकनिष्ठा के आधार पर एक ओजस्वी योगी 'श्री एम' के रूप में विकसित हुआ। सरल भाषा में श्री एम अपनी मनमोहक हिमालयी यात्राओं और उनसे वापसी के वृतांत, औपनिषदिक दर्शन के गहरे ज्ञान और व्यक्तिगत अनुभवजन्य गहन आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि को मधुरता से पाठकों के साथ बांटते हैं- उन्हें एक अनूठी और विचारोत्तेजक यात्रा का अवसर प्रदान करते हैं। (फ्लैप कवर से)











