Wednesday, 22 July 2020

352. हिमालयवासी गुरु के साये में- श्री एम

साधारण मनुष्य से असाधारण होने तक की आध्यात्मिक यात्रा
हिमालयवासी गुरु के साये में- श्री एम
    एक नवयुवक की भारत के दक्षिणी तट से हिमालय की रहस्यमयी ऊँचाईयों तक की रोमांचक यात्रा जहाँ से उसे अपने महान गुरु मिलते हैं- ज्ञानी, शक्तिवान् और स्नेहमय।

       आध्यात्मिक जीवन चरित पढने का यह मेरा प्रथम अवसर है। किसी के व्यक्तिगत जीवन‌ को पढना हमें तभी रूचिकर प्रतीत होता है, जब हम उस व्यक्ति के विषय में कुछ जानकारी रखते हैं या उस व्यक्ति से हमारा संबंध हो। इस दृष्टि से देखे तो उक्त जीवन चरित किसी भी दृष्टि से मेरे साथ संबंध नहीं रखता। मैंने तो 'श्री एम' का प्रथम बार नाम इस किताब से ही जाना है। 
       यह पुस्तक केरल के एक युवक की आध्यात्मिक 'रंक से राजा' होने की कहानी है कि कैसे वह अपने पूर्ण समर्पण, सच्ची लगन और एकनिष्ठा के आधार पर एक ओजस्वी योगी 'श्री एम' के रूप में विकसित हुआ। सरल भाषा में श्री एम अपनी मनमोहक हिमालयी यात्राओं और उनसे वापसी के वृतांत, औपनिषदिक दर्शन के गहरे ज्ञान और व्यक्तिगत अनुभवजन्य गहन आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि को मधुरता से पाठकों के साथ बांटते हैं- उन्हें एक अनूठी और विचारोत्तेजक यात्रा का अवसर प्रदान करते हैं। (फ्लैप कवर से) 

Thursday, 16 July 2020

351. शाही शिकार- अभिषेक सिंघल

राजा की मौत प्रेम, रंजिश या हवस
शाही शिकार- अभिषेक सिंघल

समय बदला और समय के साथ बहुत कुछ बदल गया। परतंत्र भारत अब एक स्वतंत्र देश बन गया। राजतंत्र तो खैर कब का ही खत्म हो गया था लेकि स्वतंत्रता के पश्चात तो राजतंत्र के अवशेष भी खत्म होने पर थे।
        शाही शिकार एक ऐसे ही राजा की कहानी है जो राजतंत्र से लोकतंत्र का सफर देखता है। वह बदले वक्त के साथ बदलने की कोशिश करता है लेकिन अपनी आदतों से विमुक्त होना इतना आसान न था। 

      शाही शिकार कहानी है राजा विक्रम सिंह की। जो लोकतंत्र में स्वयं को उसी अनुरूप बना लेते हैं और जनता का प्रिय विधायक बन जाते हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ अपनी प्रेयसी को नहीं छोड़ पाते, सत्ता में स्वयं का बेटा चुनौती बनकर खड़ा है, दिखाने के चक्कर में आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, महल होटल हो गया।
और एक दिन राजा विक्रमजीत सिंह अपने फार्म हाउस पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाये जाते हैं।
तब कथा में प्रवेश होता है थानेदार ऋषिपाल का। - थानेदार ऋषिपाल की यह पहली पोस्टिंग थी, सत्ताईस साल का नया जवान थानेदार जोश से भरा रहता था. जैसे ही उसने मुहर्रिर से विक्रमजीत को गोली लगने की खबर सुनी वैसे ही तुरंत वह जीप से सीधे विक्रमजीत के फार्म हाउस पहुंचता है।
- क्या विक्रमजीत सिंह ने आत्महत्या की थी?-
- क्या यह एक हत्या थी?
- विक्रमजीत सिंह को अपने पुत्र से राजनीति में चुनौती क्यों मिली?
      इस हत्या का कारण राजनीति था, हवस का परिणाम था या फिर कोई पुरानी रंजिश। यह तो खैर उपन्यास पढने पर ही पता चलता है।

Wednesday, 15 July 2020

350. कानून का चैलेंज- सुरेन्द्र मोहन पाठक

बंद कमरे में कत्ल की पहेली
कानून का चैलेंज- सुरेन्द्र मोहन पाठक

कमरा अंदर से बंद था और पूर्णतः, अच्छी तरह से बंद था। उसमें मात्र दो शख्स थे जो अपनी मंत्रणा में व्यस्त थे। एक का कत्ल हो गया और दूसरा कातिल के तौर पर गिरफ्तार हो गया। लेकिन गिरफ्तार व्यक्ति का कहना है कि कत्ल के वक्त वह बेहोश था, उसे नहीं पता की कत्ल किसने किया लेकिन उसका यह भी मानना है की कमरा अंदर से बंद था। मात्र एक व्यक्ति को विश्वास था की गिरफ्तार व्यक्ति सच बोल रहा है और उसी ने 'कानून का चैलेंज' स्वीकार किया कि वह गिरफ्तार व्यक्ति को निर्दोष साबित करेगा?
- क्या यह संभव था?
- दो व्यक्ति कमरे में क्या मंत्रणा कर रहे थे?
- एक व्यक्ति बेहोश कैसे हुआ?
- दूसरे व्यक्ति का कत्ल कैसे हुआ?
- जब कमरा अंदर से बंद था तो कैसे संभव है बाहर से हत्यारा आया?
- आखिर बंद कमरे में हत्या कैसे हुयी?
- किसने संदिग्ध व्यक्ति को निर्दोष साबित करने की सोची?
       लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य में आदरणीय सुरेन्द्र मोहन पाठज जी को मर्डर मिस्ट्री उपन्यास लेखन में सिद्धहस्त माना जाता है और प्रस्तुत उपन्यास 'कानून का चैलेंज' इस का उदाहरण है। 

Friday, 10 July 2020

349. जगत की बेटी- कुमार कश्यप

जासूस मित्रो का कारनामा
जगत की बेटी- कुमार कश्यप

"सुन रहे हो पेरिस वासियो- मेरा नाम जिब्राल्टर हेंग है। मैं वैज्ञानिक अपराधी हूँ।........मिस्टर जगत तुम जहां भी हो, मैं तुम्हारा दुश्मन- शत्रु जिब्राल्टर हेंग तुम्हें चैलेंज करता हूँ कि तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते.....गुलनूर...तुम्हारी बेटी.....गुलनूर मेरे पास है। अगर ... उसे छुड़ा सके तो छुडा़ ले....।"
पता नहीं उपन्यास के आवरण पृष्ठ फिल्म सितारों और खिलाड़ियों की तस्वीरें क्यों हैं?
       लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में कुमार कश्यप के थ्रिलर उपन्यासों का एक समय था। यह वह दौर था जब उपन्यासों में कहानी में जासूस पात्रों के रोमांच कारनामे दर्शाये जाते थे। कभी- कभी तो उपन्यास में कहानी गौण और पात्र मुख्य हो जाये थे।
      प्रस्तुत उपन्यास 'जगत की बेटी' कुमार कश्यप का एक थ्रिलर उपन्यास है जो जासूस मित्रों के हैरत जनक कारनामों का दस्तावेज है।
आपने उक्त परिच्छेद पढा है यह 'जगत की बेटी' का एक दृश्य है और यही कहानी का मुख्य आधार है। भारत के प्रसिद्ध ठग/ जासूस जगत की बेटी का अपहरण कुख्यात अपराधी जिब्राल्टर हेंग कर लेता है और फिर जासूस मित्र मिलकर जिब्राल्टर से जा टकराते हैं।

Monday, 6 July 2020

348. खौफनाक आवाजें- एस. एन. कंवल

भूतेश्वर लिंगम और शहजादी सौगानिया की खौफनाक दुनिया
खौफनाक आवाजें- एस. एन. कंवल

धम..धम...धम...मानो किसी ने नगाड़े पर चोट लगा दी हो।
चि...चि...चि...चूहे के बोलने की आवाज आने लगी।
छम...छम...छम...जैसे अनगिनत नर्तकियों की पायलें झनझना उठी हों।
म्याऊ..म्याऊं..म्याऊं...मानों‌ कई बिल्लियां बोल रही हों।
हा...हा...हा... जैसे कोई जोर से अट्टहास कर उठा हो।
उसके बाद भयावह स्वर से चीख पड़ा हो....फिर कराहटों की आवाज सुनाई देने लगी....तत्पश्चात् वातावरण सिसकियों से भर गया।
.....और इंस्पेक्टर कैलाश इन विभिन्न डरावनी आवाजों को सुनकर सहमा जा रहा था...आज पहला दिन था....पिछले पांच दिन से रात के ठीक बारह बजे उसके कमरे में इसी प्रकार के विभिन्न स्वर गूंजते थे।
(उपन्यास अंंश)
उक्त दृश्य है एस.एन. कंवल जी के जासूसी उपन्यास 'खौफनाक आवाजें' का।
- वह आवाजें क्यों गूंज रही थी?
- उन आवाजों का क्या रहस्य था?
- इंस्पेक्टर कैलाश का उन आवाजों से क्या संबंध था? 



Sunday, 5 July 2020

347. पेशावर एक्सप्रेस- ओमप्रकाश शर्मा

एक थ्रिलर प्रेम कथा- अफगानिस्तान से पाकिस्तान
पेशावर एक्सप्रेस- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा

जगत सीरीज       जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी का कोई उपन्यास लंबे समय पश्चात पढा। डायमण्ड पॉकेट बुक्स से प्रकाशित उपन्यास 'पेशावर एक्सप्रेस' जगत सीरिज का एक 'थ्रिलर प्रेम कथानक' है।
       उपन्यास का कथानक प्रेम पर आधारित होने के साथ-साथ इसमें रोमांच का अदभुत मिश्रण भी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के तात्कालिक हालात का अच्छा चित्रण भी उपस्थित है। 

       कहानी है एक अफगान नौजवान की जो प्रेम के चलते पाकिस्तान में कैद हो जाता है। पाकिस्तान में 'मार्शल ला'( आपातकाल) है, अत्याचार है, भ्रष्टाचार है, बिना अपराध गोली मार दी जाती है। पाकिस्तान अफगानिस्तान को अपना दुश्मन मानता है और दुश्मन देश का एक लड़का उनकी कैद में है। वह प्रेम का पुजारी दुश्मन देश में जासूस साबित कर जेल में डाल दिया जाता है और जगत को इसी प्रेम कैदी को आजाद करवाना है और पाकिस्तान से बाहर निकालना है लेकिन प्रेम कैदी पाकिस्तान से बाहर निकलने को तैयार नहीं।

Saturday, 4 July 2020

Friday, 3 July 2020

345. सांपों‌ के शिकार- इब्ने सफी

 इमरान सीरीज का रोचक उपन्यास
सांपों‌ के शिकारी- इब्ने सफी
        हार्पर काॅलिंस ने इब्ने सफी के प्रसिद्ध पात्र 'इमरान' सीरिज के उपन्यास जे दो सैट प्रकाशित किये थे। जिसमें कुल सात उपन्यासों का संकलन था। यह प्रकाशन संस्थान का बहुत सराहनीय प्रयास था। उम्मीद है की अन्य प्रकाशन संस्थान इस कार्य को बढावा देंगे।
         दिल्ली के प्रसिद्ध 'रविवार पुस्तक बाजार' से ये सैट बहुत सस्ते में उपलब्ध हो गये थे। इस संकलन के उपन्यास समय-समय पढता रहा हूँ, दोनों में से एक-एक उपन्यास रह गया था जो 'मई-जून-2020'के ग्रीष्मकालीन अवकाश में पढे। दोनों उपन्यास रोचक हैं। वैसे भी इमरान सीरीज के हास्यप्रद उपन्यास काफी प्रसिद्ध रहे हैं।

          'सांपों के शिकारी' इमरान सीरीज का रहस्य-रोमांच से परिपूर्ण उपन्यास है। यह उपन्यास समाज में बैठे सफेदपोश लोग के काले धंधों से से समाज का विनाश कर रहे हैं। ये वो साँप आस्तिन के साँप हैं जो अपनों को ही खत्म कर देते हैं।
'कोबरा मैंशन' नामक साँपों की फर्म है जिसके पास हर तरह के साँप पाये जाते हैं। उपन्यास इसी फर्म और साँपों के इर्दगिर्द कुडली मार कर बैठा है। 

 

344. खौफ का सौदागर- इब्ने सफी

एक कहानी खौफ की
खौफ का सौदागर- इब्ने सफी

इब्ने सफी उपन्यास साहित्य में अपने जासूसी उपन्यासों के लिए लोकप्रिय साहित्य में हमेशा स्मरण रहेंगे। इनके छोटे कलेवर के परंतु रोचक उपन्यास पाठकों का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम होते थे।
        हालांकि ये उपन्यास मुख्यतः जासूस विशेष पर ही केन्द्रित होते थे, और खलनायक का प्रभाव ज्यादा होता था पर उपन्यास में प्रत्यक्ष भूमिका कम होती थी।  

       'खौफ का सौदागर' भी एक रहस्यम व्यक्ति की कहानी है जिसका एक क्षेत्र विशेष में 'खौफ' होता है और खौफ भी यहाँ तक की पुलिस को वहाँ एक बोर्ड तक लगवाना पड़ता है, कि यहाँ खतरा है।
रात के वक्त के वक्त वहाँ सन्नाटा छा जाता है और गलती से भी अगर कोई वहाँ चला गया तो वह रहस्यमयी शख्स कत्ल करने से भी नहीं चूकता।
"बाहर फैले हुए अंधेरे में एक खतरनाक आदमी की हुकूमत है और वह आदमी कभी-कभी यूं ही खेल-खेल में किसी न किसी को जरूर कत्ल कर देता है।"
- वह रहस्यमयी व्यक्ति कौन है?
- उसका खौफ क्यों है?
- वह कत्ल क्यों करता है? 

343. काली - नरेन्द्र नागपाल

जब विक्षिप्त खून बदला लेने निकला
काली- अर्जुन नागपाल
अर्जुन नागपाल सीरीज


- क्या कोई खून (रक्त, Blood) भी कोई दहशत मचा सकता है?
- क्या कोई खून भी बदला ले सकता है ?
- क्या कोई खून भी कातिल हो सकता है?
- मनुष्य के शरीर में दौड़ते रक्त की रक्तरंजित कहानी है -काली
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में बहुत कम उपन्यास हैं जो कुछ अलग हटकर लिखे गये हैं। अधिकांश उपन्यास एक निश्चित पैटर्न पर ही आधारित होते हैं, बस प्रस्तुतीकरण अलग हो जाता है। हालांकि ऐसी बात नहीं की कुछ नया और अलग हटकर लिखा नहीं गया, लिखा गया है लेकिन बस मेरी दृष्टि से चूक गया। (हां, अगर आपको कुछ अलग हटकर उपन्यास मिले तो कमेंट कर जरूर बतायें)
     नरेन्द्र नागपाल जी ने अपने उपन्यास 'काली' में कुछ अलग लिखने का प्रयास किया है और यह प्रयास सराहनीय है। यह कितना सफल रहा है यह पाठक के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है, मुझे उपन्यास बहुत पसंद आया।  क्या आपने टाइगर का उपन्यास 'लाश की जिंदा आंखें' और 'करिश्मा आँखों का' का उपन्यास पढे हैं ?  इन दोनों उपन्यासों की थीम अलग थी ठीक उसी तरह 'काली' उपन्यास की थीम अलग है, अलग हटकर है।

'काली' उपन्यास की कहानी एक विक्षिप्त हत्यारे की है जो चुनौती देकर, तय समय देकर कत्ल करता है लेकिन मजे की बात यह है यह सब 'खून' करवाता है। जी हां, खून, वह खून जो किसी के अंदर है। यह मृत आदमी के जिंदा खून की कहानी है।
पर खून अभी भी जिंदा था और किसी के दिमाग में अभी भी गोलियों की आवाज बन कर दौड़ रहा था।
पर किसके दिमाग में? 

Thursday, 2 July 2020

342. वह फिर नहीं आई- भगवती चरण वर्मा

वह जो फिर लौट कर नहीं आयी..
वह फिर नहीं आयी- भगवतीचरण वर्मा

341. काली करतूत- इब्ने सफी

दस कत्ल और बागोटा का रहस्य
काली करतूत- इब्ने सफी, जनवरी-1975

जासूस एक्स टू अली इमरान को जब होश आया तो वह एक अनजान औरत के साथ एक कार में था। और उस औरत का दावा था की वह अली इमरान की पत्नी है। और वह अली इमरान को उसके घर भी ले गयी।
    होटल का मालिक ठाकुर एक बदमाश व्यक्ति है। अली इमरान के घर से निकली वह औरत ठाकुर के होटल में आती है। और अली इमरान का एक शागिर्द सफदर जब उस औरत तक आशा नामक लड़की के माध्यम से पहुंच  बनाता है तो वह औरत अपने कमरे में मृत पायी जाती है।  और न तो होटल मालिक ठाकुर बचता है और न ही आशा।

Kali kartoot ibne safi

अली इमरान सोचता है-
एक व्यक्ति उससे लिफ्ट मांगता है। फिर वह व्यक्ति उसे धोखा देकर बेहोश कर देता है। होश आने पर एक लड़की उसके साथ होती है जो उसे अपना पति बताती है। जब वह अपने होटल में पहुंचती तो उसे मार डाला जाता है। फिर ठाकुर जैसे आदमी की हत्या ? ठाकुर के बारे में तो यह कहा जाता था कि उसका दूसरा नाम-मौत है ?
वह लड़की क्या चाहती थी ? 
 (उपन्यास अंश)
एक-एक कर सब मारे जाते हैं।
आखिर क्यों?

340. मौत के फरिश्ते- राज भारती

 भारतीय मिलट्री सीक्रेट सर्विस के जासूस सागर का अभियान

मौत के फरिश्ते- राज भारती
#सागर_सीरीज

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में राज भारती जी ने बहुत सारे पात्रों पर लिखा है। बहुत सी शृंखला आरम्भ की थी। जैसे- अग्निपुत्र, विजय, कमलकांत, सागर आदि। इनमें से सागर सीरीज का एक उपन्यास 'मौत के फरिश्ते' पढने को मिला। यह एक साहसिक कारनामा है। सागर का दुश्मन देश में जाना, अभियान को सफल करना और फिर वहाँ से विकट परिस्थितियों में निकलना। यह सब घटनाएं काफी रोचक प्रतीत होती हैं।

    एक दिन जब सागर राजनगर के किसी होटल में बैठा रम का आस्वाद ले रहा था तो उसी समय जनरल त्रिमूर्ति ने सागर को याद किया।
बिना किसी भू‌मिका के सागर को सामने पा, जनरल त्रिमूर्ति ने कहा- "तुम्हें तिब्बत जाना होगा।"
सागर जानता था कुछ पूछने या बहस करने का मौका नहीं है। संक्षिप्त सा जवाब था- "यस सर। आई एम रैडी सर।"