Tuesday, 31 December 2024

618. कत्ल की कीमत- प्रकाश भारती

अपने बेटे को तलाशते एक डिटेक्टिव की कहानी
कत्ल की कीमत- प्रकाश भारती

"इन हत्याओं और करोड़ों के जवाहरात से कोई मतलब मुझे नहीं है... लेकिन अगर मेरा अपहृत बेटा मर गया तो यह सीधा-सीधा कत्ल होगा और इसके लिए जिम्मेदार शख्स को उस कत्ल की कीमत चुकानी ही पड़ेगी...।"(कत्ल की कीमत- प्रकाश भारती)

लोकप्रिय कथा साहित्य में अच्छी, तेज रफ्तार, कसावट और बंधी हुयी कहानियां प्रकाश भारती जी के उपन्यासों में पढने को मिलती है। इसी कारण से प्रकाश भारती जी मेरे पसंदीदा लेखकों में से एक हैं। और प्रस्तुत उपन्यास लेखक का बारहवां थ्रिलर उपन्यास है। तो बाकी ग्यारह- डबल क्राॅस, नकली चेहरा, जिंदा लाश, मर्डर सस्पैक्ट,फरार मुजरिम, ट्रिपल मर्डर(तीन खून), जान का खतरा, खून खराबा, असली मुजरिम, बिग शाॅट, खून की कसम हैं।

अब बात करते हैं हम प्रस्तुत उपन्यास 'कत्ल की कीमत' की ।

     कत्ल की कीमत- प्रकाश भारती

आठ फरवरी ।
शाम सवा चार बजे ।
मनोज वर्मा को लगा, धीरे-धीरे घूमते कमरे के साथ- साथ यह खुद भी घूम रहा था और कोई उसकी बांह पकड़ उसे रोकने की कोशिश कर रहा था। फिर उसे लगा, किरण पुकार रही थी।

617. कत्ल के बाद कत्ल- संजय नागपाल

और फंस गये प्रोफेसर सुबोध...
कत्ल के बाद कत्ल- संजय नागपाल
 
सुनील ने पैन्सिल टार्च के क्षीण प्रकाश को क्षण-भर के लिये पलंग पर लेटे व्यक्ति पर डाला।
उसी एक क्षण मैं उसे लगा कि पलंग पर लिहाफ ओढकर लेटे व्यक्ति का चेहरा साधारण नहीं था ।
न जाने किस भावना के वशीभूत होकर उसने एक झटके से लिहाफ को उस व्यक्ति के ऊपर से हटा दिया ।
उसने जो देखा - उसे देखकर उसकी रीढ़ की हड्डी में भय की एक सर्द लहर दौड़ती चली गई ।

- (इसी उपन्यास में से)

दिल्ली निवासी जगदीश कंवल जी ने अपना प्रकाशन 'कंवल पॉकेट बुक्स' आरम्भ किया तो उस के अंतर्गत उन्होंने संजय नागपाल जी का उपन्यास 'कत्ल के बाद कत्ल' प्रकाशित किया। हालांकि संजय नागपाल जी का नाम इस उपन्यास के अतिरिक्त और कहीं-कभी देखने,पढने और सुनने में नहीं आया।
प्रोफेसर सुबोध जिस समय बस अड्डे पर पहुंचा सन्ध्या के पौने पांच बज चुके थे।
अपने दाएं हाथ में काले रंग के ब्रीफकेस को थामे प्रोफेसर सुबोध रिक्शा से नीचे उतर गया।
रिक्शा चालक को पैसे देकर वह उस बस की ओर बढ़ गया जिस पर 'पठानकोट-दिल्ली' लिखा हुआ था ।

616. जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ- जूल्स वर्न

पृथ्वी के केन्द्र की रोमांचक यात्रा
Journey to the center of the earth-
'चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो...'- आपने यह गीत तो जरूर सुना होगा, पर आज हम बात कर रहे हैं पृथ्वी के अंदर की। जहां चले हैं चाचा-भतीजा ।
जी हां, यह कहानी है चाचा-भतीजा की जो पृथ्वी के गर्भ की यात्रा पर निकले हैं, और इस यात्रा का नाम हैं - Journey to the center of the earth.
World Trade Park Jaipur-22.07.2021

और सांसों को थमा देने वाली पृथ्वी के केंद्र तक की साहसिक यात्रा प्रोफेसर वॉन हार्डविग और उनके भतीजे हैरी को एक रहस्यमयी पांडुलिपी का पता चलता है, जो हमेशा के लिये उनके जीवन को बदल देता है।
      उस पांडुलिपी के अध्ययन के पश्चात जब वे उसमे छिपी पहेली को सुलझा लेते है तब उन्हें पता चलता है यह पांडुलिपी सोलहवीं शताब्दी के एक आइसलैंडिक दार्शनिक द्वारा लिखा गया है। दार्शनिक, जिसने पृथ्वी के केंद्र तक जाने का एक गुप्त मार्ग खोजने का दावा किया था।
क्या वाकई में ऐसा कोई मार्ग था?

615. मोम का जहर- कुमार कश्यप

कहानी खत्म होते एंजिल द्वीप की
मोम का जहर- कुमार कश्यप
- विक्रांत, बटलर, अमरजीत, शंकर अली, फादर विलियम कृष्ण

Crime fiction क्षेत्र में जासूसी उपन्यास लेखन में कुमार कश्यप नाम भी अग्रणी पंक्ति में रहा है। इनके अधिकांश उपन्यास जासूसी वर्ग की करामात पर आधारित होते थे, जिनमें कथानक कम और एक्शन अधिक होता था ।
प्रस्तुत उपन्यास 'मोम का जहर' भी जासूस मण्डली की हास्य, एक्शन, रोमांस पर ही आधारित है‌ ।
इस उपन्यास के विषय में बात कहां से आरम्भ करें कुछ समझ में नहीं आ रहा। जहां से उपन्यास आरम्भ होता हैं वहां से, यां फिर जहाँ से कथानक आरम्भ होता है वहाँ से या फिर इस कहानी के प्रथम परिच्छेद से ।
चलो, हम पहले इस उपन्यास का कथानक ही बता देते हैं बाकी बातें बाद में।
एक युवा विद्रोही वैज्ञानिक है शंकर अली जो 'एंजिल टापू' पर रहता है। वही उसकी दुनिया है। इस टापू की आबादी बहुत कम है और अधिकांश यहाँ के लोग वैज्ञानिक ही हैं। कभी इस विरान टापू को शंकर अली ने ही आबाद किया था। लेकिन शंकर अली के दुश्मन उसकी प्रगति से अप्रसन्न हैं।

614. घर का दुश्मन- प्रेम प्रकाश

कहानी ब्लैकमेलिंग की
घर का दुश्मन- प्रेम प्रकाश- 
दिसंबर-1966
हिंदी अपराध साहित्य में बहुसंख्यक कहानियाँ बिखरी पड़ी हैं, इनमें से कभी-कभार कुछ नया और अच्छा पढने को मिल जाता है। ऐसा ही एक एक छोटा सा उपन्यास पढने को मिला, जिसकी छोटी और सामान्य सी कहानी अच्छी लगी। इस उपन्यास का नाम है- घर का दुश्मन ।
नकहत पब्लिकेशन -इलाहाबाद का नाम विशेष रूप से इब्ने सफी साहब से संबंधित है। और उनके उपन्यासों का हिंदी अनुवाद करने के लिए जाने जाते हैं प्रेम प्रकाश जी।  स्वयं प्रेम प्रकाश जी ने भी उपन्यास लिखे हैं। प्रस्तुत उपन्यास 'घर का दुश्मन' इन्हीं का ही है।
उपन्यास का कथानक- उपन्यास की कहानी ब्लैकमेलिंग पर आधारित है। एक संगठित गिरोह का बाॅस अपने आदमियों से सुनियोजित तरीके से अलग- अलग शहरों में लोगों को फंसा कर ब्लैकमेल कर रूपया लेता है।

Sunday, 29 December 2024

613. लाश गिरेगी वाईपर की- गोपाल शर्मा

कहानी 'राॅ' के सर्वश्रेष्ठ जासूस की
लाश गिरेगी वाईपर की- गोपाल शर्मा

नमस्ते मित्रो,
आज हम यहां चर्चा करने जा रहे हैं पवन पॉकेट बुक्स के अंतर्गत प्रकाशित छद्म लेखक गोपाल शर्मा जी के उपन्यास 'लाश गिरेगी वाईपर की। '
वाईपर सीरीज का प्रथम उपन्यास का नाम 'वाईपर' था। मैंने पढा तो था पर यहां उसकी समीक्षा न लिख पाया। अब इसी शृंखला का उपन्यास 'लाश गिरेगी वाईपर की' पढा तो समीक्षा लिखने का विचार भी मन में आया तो एक छोटी सी , अव्यवस्थित सी समीक्षा इसलिए लिख दी की अन्य पाठक इस लेखक और पात्र के विषय में जान सकें।

हालांकि मेरा प्रयास यही रहता है जो भी पुस्तक पढी जाये,उस पर एक विस्तृत टिप्पणी/ समीक्षा लिखी जाये पर ऐसा संभव नहीं हो पाता और इस साल (2024)में तो पढा भी बहुत कम है और लिखने के मामले में उस से भी बहुत पीछे रहा हूँ।
  कभी-कभी किसी महत्वपूर्ण पुस्तक पर न लिखने का अफसोस भी रहता है। जैसे- कैच फोर (कंवल शर्मा), चक्क पीरा दा जस्सा (बलवंत सिंह), राक्षस (नीतिश सिन्हा) जैसे और भी रचनाएँ पढी पर उन पर कुछ भी न लिख सका।
चलो, भविष्य में यथासंभव कोशिश रहेगी जो पढा जाये, उस पर लिखा जाये।
अब हम बात करते हैं प्रस्तुत उपन्यास की । इस उपन्यास का घटनाक्रम शिवालिक द्वीप से संबंधित है।
"क्या तुमने शिवालिक द्वीप का नाम सुना है?" भरत ने गला साफ करने के बाद पूछा।

Saturday, 28 December 2024

612. चक्रव्यूह- वेदप्रकाश शर्मा

 मौत का चक्कर

611. नौकरी डाॅट काॅम - वेदप्रकाश शर्मा

एक लड़की रहस्यमयी
नौकरी डाॅट काॅम- वेदप्रकाश शर्मा

केवल दस हजार रुपए महीना की पगार पाने के लिए वह
नौकरी डॉट कॉम में काम करती थी मगर उसका महीने का खर्च लाखों रुपए था।
मुंबई अंडरवर्ल्ड का सबसे बड़ा डॉन भी उससे डरता था। क्या था इस रहस्यमय लड़की का राज ?
 इस उपन्यास में बताने जा रहे हैं- वेद प्रकाश शर्मा
उपन्यास आरम्भ करने से पहले हम एक नजर उपन्यास के प्रथम पृष्ठ की कुछ पंक्तियों पर डाल लेते हैं।
कॉलबेल बजी ।
इंस्पेक्टर अबोध ने दरवाजा खोला।
वह अड़तालीस-पचास साल के लपेटे का शख्स था।
जब वह सामने वाले से बातें करता था तो आदतन उसका हाथ अपने सिर पर पहुंच जाता था और वेख्याली में अधगंजी चांद को सहलाने लगता था, मगर जैसे ही ख्याल आता था, फौरन सिर से हाथ झटक लेता था और अपनी आंखों पर लगे नजर के चश्मे को उतारकर बेवजह रूमाल से साफ करने लगता था।
सामने उमेश हांडा खड़ा था।
इंस्पेक्टर उछल पड़ा।
पलभर के लिए तो उसे यकीन ही न आया कि वह जो देख रहा है, वह सच हो सकता है। सामने खड़े इंसान को पहचानने में उससे कोई गलती नहीं हुई थी।
बेध्यानी में तत्काल हाथ अधगंजी चांद की शोभा बढ़ाने लगा ।
उमेश हांडा उसे देखकर बेहद चित्ताकर्षक अंदाज में
मुस्कराया।

 और अब बात करते हैं उपन्यास के कथानक की।
यह कहानी है नीलिमा/ नीलम नामक एक युवती की, जो पन्द्रह हजार की नौकरी करती है, पर उसका रहन सहन उच्च श्रेणी का है। करोड़ों का बंगला, लाखों की कार और लंदन से शिक्षा प्राप्त खूबसूरत युवती है।
नीलिमा का तीन बार कार एक्सीडेंट हो चुका है और संयोग से वह तीनों बार बच गयी। और स्वयं नीलिमा का मानना है उसकी मौत जब भी होगी गोली से होगी ।
“मैं सच कह रही हूं हसबैंड जॉनी । मेरी मौत रोड एक्सीडेंट में नहीं लिखी।"
"तो फिर कैसे लिखी है?"
"गोली से ।"(पृष्ठ-22)

Sunday, 17 November 2024

610. ਰਾਣੀ ਖਾਂ ਦੇ ਜੀਜੇ- ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਹਿਜੀ

'ਪਿਸਤੌਲਾਂ ਆਲ਼ੇ ਵੀ ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਡਾਂਗ ਨਾਲ਼ ਘੇਰ ਲਈਦੇ ਨੇ'
ਰਾਣੀ ਖਾਂ ਦੇ ਜੀਜੇ- ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਹਿਜੀ
अक्टूबर 2024 के अंतिम सप्ताह में अमृतसर की धार्मिक यात्रा पर था। अमृतसर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है।
लेकिन एक और बात ने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया वह है यहां पुस्तक बाजार का होना । यहां प्रसिद्ध सड़क 'हाॅल रोड़' पर काफी सारी किताबों की दुकान मिल जायेंगी। बड़ी दुकान Book lovers retreat से लेकर सबसे पुरानी 'आजाद बुक डिपो'(लाहौर-1942) के अतिरिक्त और बहुत सी छोटी-बड़ी, On Road, Off Road दुकानें हैं।
  जहां आज बड़े-बड़े शहरों में किताबों की दुकाने सिमट रही हैं वहीं एक छोटी सी सड़क पर बहुत सारी दुकानों का होना राहत की बात है। यहीं नहीं इसके अलावा भी अमृतसर में बहुत सी किता‌बों दुकाने हैं। वहीं आजाद बुक के मालिक ने बाताया कि कभी अमृतसर में किराये पर काॅमिक्स देने वाली सौ से ऊपर दुकाने होती थी। लेकिन आज ऐसी एक भी दुकान नहीं । समय -समय की बात है। फिर भी अमृतसर शहर में पाठकों के लिए समृद्ध साहित्य की उपलब्धता है।
   यहीं से एक Off Road दुकान से (बस दुकान मुख्य से थोड़ी सी हटकर थी) पंजाबी की एक चर्चित पुस्तक 'रानी खां दे जीजे'(ਰਾਣੀ ਖਾਂ ਦੇ ਜੀਜੇ- ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਹਿਜੀ) खरीदी थी।
वहीं आजाद बुक्स से छह: लोकप्रिय साहित्य की‌ किताबें भी खरीदी थी ।
अमृतसर- हरमंदिर गुरुद्वारा परिसर


  यहाँ हमारा विषय है गुरप्रीत सहिजी द्वारा लिखित उपन्यास 'रानी खां दे जीजे' ।

यह कहानी है एक छोटे से गांव की जहां एक चौधरी है और चौधरी है तो स्वाभाविक सी बात है वह चाहेगा गांव में बस उसी की 'चौधर' हो । और कभी -कभी ऐसे चौधरी छोटी-छॊटी बातों को इतना महत्वपूर्ण बना लेते है और उसे अपने जीने मरने का प्रश्न मान लेते हैं।।

Friday, 15 November 2024

608. शिकारी का शिकार- वेदप्रकाश काम्बोज

गिलबर्ट सीरीज का प्रथम उपन्यास
शिकारी का शिकार- वेदप्रकाश काम्बोज

ब्लैक ब्वॉय विजय की आवाज पहचान कर बोला-"ओह सर आप, कहिए शिकार का क्या हाल हैं ?"
"शिकार का तो शिकार हो गया चीफ ।" विजय बोलाः- वह भी मैंने नहीं किया बल्कि कोई और कर गया है ।"
"क्या मतलब ?"
और प्रत्युत्तर में विजय ने संक्षेप में उसे रेस्तराँ में हुई पूरी घटना सुना दी ।

    लोकप्रिय उपन्यास साहित्य के स्तम्भ श्री वेदप्रकाश काम्बोज जी अब इस दुनिया में नहीं रहे, उनका निधन 06.11.2024 को हो गया पर उनके द्वारा रचित साहित्य हमेशा अमर रहेगा। उन्होंने उपन्यास साहित्य को 'विजय-रघुनाथ' जैसे सदाबाहर पात्र दिये हैं, जिनके लिये पाठकवर्ग उनका हमेशा आभार व्यक्त करता रहेगा । वेदप्रकाश काम्बोज द्वारा रचित साहित्य में आनंद और थ्रिलर का अनोखा मिश्रण है।
वेदप्रकाश काम्बोज जी
   इन दिनों मैंने काम्बोज जी का उपन्यास 'शिकारी का शिकार' पढा जो की 'विजय-रघुनाथ और गिलबर्ट सीरीज' का उपन्यास है, या कहे की यह गिलबर्ट का प्रथम उपन्यास है, गिलबर्ट के कारनामों की भूमिका मात्र है।

Friday, 8 November 2024

607. कत्ल की सौगात- राहुल

एक वृद्ध गैंगस्टर की कहानी
कत्ल की सौगात- राहुल

उसने बड़े शांतिपूर्वक वह छोटी-सी चीज उठाई और नौजवान धीरज की छाती पर दाग दी।
'यह है मेरा जवाब-कत्ल की सौगात ।'
धीरज चीख मारकर गिरा। दो-चार बार हाथ-पांव हिलाए और दम तोड़ दिया ।
नीरज ने आतंकित स्वर में कहा- 'यह तुमने क्या किया, बड़े भाई ।'
'सौगात उठाओ और यहां से चलते बनो।' एम. के. ने जवाब दिया-'फर्श मैं खुद साफ कर लूंगा। लाश को तुम ठिकाने लगा देना। जाओ, मेरा मुंह क्या देख रहे हो ? आज भी मैं तुम्हारा बॉस हूं-सीमा को तुमसे पाने के लिए मैंने तुम्हारी दुश्मन सिंडीकेट के कत्ल का तोहफा तुम्हें दिया था। वह तुम्हें बहुत पसंद आया था। यह तोहफा पसंद नहीं आया ?'
 -(कत्ल की सौगात (राहुल) उपन्यास में से)

  इन दिनों राहुल का यह मेरे द्वारा पढे जाने वाला द्वितीय उपन्यास है। इस से पूर्व मैंने राहुल का एक थ्रिलर उपन्यास 'टाॅप सीक्रेट' पढा हो कथानक के स्तर पर मुझे बहुत रोचक लगा था।
   प्रस्तुत उपन्यास का लेखन भी 'टाॅप सीक्रेट' उपन्यास जैसा ही है पर कहानी बिलकुल अलग है।
कहानी आरम्भ होती है एक युवती से।
चांदनी रात भी इतनी भयानक हो सकती है, सीमा ने सपने में भी नहीं सोचा था। भागते-भागते उसकी सांस फूल गई थी और शरीर का अंग-अंग बकावट से इस तरह टूटने लगा था कि उसे लगा वह अगले ही पल धमाके से बम की तरह फट जाएगी और उसका अंग-अंग पत्थरों की तरह नीचे घाटी में लुढ़कता हुआ अपना अस्तित्व खो देगा।

Monday, 4 November 2024

606. टाॅप सिक्रेट - राहुल

आखिर क्या था- टाॅप सिक्रेट
टाॅप सिक्रेट- राहुल

प्राइवेट डिटेक्टिव भास्कर शेट्टी चोर की तरह अपने ऑफिस में पिछले दरवाजे से दाखिल हुआ ताकि उसकी चुलबुली सैक्रेटरी सोनाली उसे देखकर टोक न दे।
अपने कैमरे में आकर उसने राहत की सांस ली ही थी कि दरवाजे की आहट सुनकर चौंक पड़ा।
(टाॅप सिक्रेट- उपन्यास की प्रथम पंक्ति)
मुझे जासूसी उपन्यास बहुत पसंद हैं लेकिन आजकल पढने का समय कम‌ मिलता है और उस पर भी पढना और फिर समीक्षा लिखना तो न के बराबर ही हो गया। हालांकि मैंने इस साल कुछ अच्छे उपन्यास पढे हैं पर संयोग से उन पर लिख नहीं सका, समय मिला तो फिर कोशिश करेंगे, अभी तो हम प्रस्तुत उपन्यास 'टाॅप सिक्रेट' की चर्चा करते हैं।

राहुल द्वारा लिखित 'टाॅप सिक्रेट' उपन्यास डायमण्ड पॉकेट बुक्स दिल्ली से प्रकाशित हुआ था। 'राहुल' नाम डायमण्ड का Ghost लेखन है। पता नहीं कितने लेखकों की प्रतिभा और परिश्रम को Ghost लेखन ने खत्म कर दिया ।