Thursday, 22 April 2021

435. द ट्रेल- अजिंक्य शर्मा

अजिंक्य शर्मा जी का सातवां उपन्यास
द ट्रेल- अजिंक्य शर्मा, मर्डर मिस्ट्री
''अपराधी चाहे कितना ही शातिर क्यों न हो, अपने पीछे सबूतों की एक ट्रेल छोड़ जाता है।’’-हितेश खिड़की से बाहर झांकते हुए ऐसे बोला, जैसे अपने-आप से बात कर रहा हो।
''क्या?’’-शैली चौंक उठी।
''क्या हुआ?’’-हितेश ने खिड़की से अंदर सिर करके सवालिया नजरों से शैली की ओर देखा।
''आपने...अभी क्या कहा?’’
''अपराधी चाहे कितना ही शातिर क्यों न हो, अपने पीछे सबूतों की एक ट्रेल छोड़ जाता है।’’
''ये तो विश्वास सर कहा करते थे। इंस्पैक्टर एक्स सीरिज के उनके उपन्यासों की टैगलाइन यही होती है।’’
''अच्छा?’’ (उपन्यास अंश)
यह दृश्य है अजिंक्य शर्मा जी के सातवें उपन्यास 'द ट्रेल' का, जो की एक मर्डर मिस्ट्री आधारित उपन्यास है। कहते हैं अपराधी अपराध करते वक्त कुछ न कुछ निशान (ट्रेल) छोड़ ही जाता है।  और उन्हें सबूतों को ढूंढता है उपन्यास 'द ट्रेल'।
  रंजीत विश्वास एक प्रसिद्ध जासूसी उपन्यासकार है। प्रसिद्ध उपन्यासकार होने के साथ-साथ वह अरबपति है, एक पब्लिकेशन का स्वामी है और उसकी हवेली (मैंशन) 'व्हाइट कैसल'  में और उसके सानिध्य कुछ परिवार भी पलते हैं।
  लेकिन एक दिन रंजीत विश्वास अपने कमरे में मृत पाये जाते हैं, किसी ने छुरा मार कर उनकी हत्या कर दी।
    लेकिन रंजीत विश्वास मरते वक्त एक वाक्य लिख जाते हैं। -' यूनाइटेड वी राइज'।

434. Breaking News- वहशी कातिल

 2:35 घण्टे की मर्डर मिस्ट्री
ब्रेकिंग न्यूज- वहशी कातिल- अजिंक्य शर्मा
छठा उपन्यास
  
अजिंक्य शर्मा जी का छठा उपन्यास 'ब्रेकिंग न्यूज-वहशी कातिल' किंडल पर पढा। मुझे उपन्यास रोचक लगा।
   अजिंक्य शर्मा जी के उपन्यास पहले किंडल पर ही रीलिज होते होते रहे हैं। हालांकि उनके आरम्भ के तीन उपन्यासों की बाद में  हार्डाकाॅपी भी आयी थी। 
      अब चर्चा करते हैं इनके छठे उपन्यास की। यह एक मर्डर मिस्ट्री आधारित उपन्यास है। कहानी है एक लाइव डिटेब के दौराने हुये कत्ल की।
ऐसा नहीं था कि ACP हर्षवर्धन कोई कमजोर दिल इंसान था। पुलिस में अपने कार्यकाल में उसने न जाने कितनी भयानक, वीभत्स घटनाएं देखीं थीं लेकिन टीवी पर लाइव डिबेट में अचानक इस तरह घटित हुई वो घटना इतनी अप्रत्याशित थी कि वो बुरी तरह चौंक गया। (उपन्यास अंश)
    - यह कत्ल किसने किया और क्यों किया?
शेष कहानी इस आधारित है और इसी रोमांच के लिए पाठक आगे बढता जाता है।

433. चीनी सुंदरी - वेदप्रकाश काम्बोज

भारतीय वैज्ञानिक की अपहरण कथा
चीनी सुंदरी - वेदप्रकाश काम्बोज

इस पहाड़ी इलाके से फूचिन और पोंग अच्छी तरह परिचित थे। किन्तु इसके साथ ही रात में दिखाई देना भी आवश्यक था। मगर वे लोग जीप की हैडलाइट्स नहीं जला सकते थे। क्योंकि इस प्रकार वे स्वयं ही दुश्मन को अपनी स्थिति का पता दे देते ।
         अनुमानानुसार फूचिन पूरी तेजी के साथ जीप को ड्राईव करता रहा। पीछे से उन पर गोलियां छोड़ी जाने लगी । एक दो हैण्डबम भी फेंके गये । उनसे तो वे बच गये किन्तु उस गड्ढे से न बच सके जो कि जमीन में था और जिसमें जीप का पहिया फस जाने के कारण जीप लुढ़क गई ।
         एक बारगी तो उनकी जान सूख गई। किन्तु जब ढलान पर दो तीन पटखनियां खाने के बाद जीप रुक गई तो उन में जान आई। उन चारों को ही मामूली चोट लगी थीं।  किन्तु उन चोटों की किसी ने भी परवाह नहीं की। बड़ी तेजी के साथ वे उल्टी हुई जीप में से बाहर निकले। माईक अपने कंधे को दबाये हुये था। शायद उसके कंधे में अधिक चोट लगी थी ।
और वे गोलियों की बौछारों में ही पहाड़ियों की ओर भागे।  फूचिन और पोंग उनका पथ-प्रदर्शन कर रहे थे। 
फिर वे भागते रहे ।
मार्ग में कई जगह ठोकर खाकर गिरे भी। किन्तु फिर भी वे भागते ही रहे । फायरों की आवाज अब बहुत दूर से आ रही थी।
चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ था। सबसे पहले पोंग ने ही हथियार डाले । वह भागते-भागते लड़खड़ाया और फिर जमीन पर गिर पड़ा।

  प्रस्तुत उपन्यास अंश वेदप्रकाश काम्बोज जी द्वारा लिखित 'चीनी सुंदरी' का एक अंश है। यह विजय श्रृंखला का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर आधारित एक एक्शन-रोमांच उपन्यास है। जो चीन- भारत के संबंधों और उनके पीछे छिपी चीनी की कुटिलता का चित्रण करता है।

Sunday, 18 April 2021

432. दौलत नहीं दोस्त किसी की- रीमा भारती

रीमा भारती टकरायी दुश्मनों से
दौलत नहीं दोस्त किसी की- रीमा भारती


जासूसी उपन्यास साहित्य में एक नाम खूब चर्चित रहा है और वह नाम है रीमा भारती।
   दिनेश ठाकुर द्वारा स्थापित इस पात्र ने अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है और यह पहचान इस हद तक कामयाब रही कि तात्कालिक प्रकाशकों ने इस नाम से मिलते-जुलते नाम से लेखक और पात्र मैदान में उतार दिये।
    इस नाम‌ की लोकप्रियता को देखते हुये स्वयं दिनेश ठाकुर ने भी रीमा भारती नामक एक लेखिका को बाजार में उतार दिया।
  जहाँ दिनेश ठाकुर द्वारा लिखित उपन्यासों में रीमा भारती मात्र एक नायिका थी वही लेखिका रीमा भारती द्वारा लिखे गये उपन्यासों में वह लेखिका और नायिका दोनों किरदारों में उपस्थित थी। 
     हां, दोनों के लेखन में एक विशेष अंतर भी रहा है। जहाँ दिनेश ठाकुर द्वारा 'रीमा भारती' सीरीज के उपन्यास लिखे जाते थे, उनमें अश्लीलता होती थी। वही लेखिका रीमा भारती द्वारा लिखित उपन्यासों में अश्लीलता नहीं होती थी, या फिर न के बराबर होती थी। 

दौलत नहीं दोस्त किसी की- रीमा भारती
     मुझे लेखिका रीमा भारती द्वारा लिखित उपन्यास 'दौलत नहीं दोस्त किसी की' पढने को मिला। यह एक एक्शन-थ्रिलर उपन्यास है।
     कहानी का आरम्भ दिल्ली से होता है। जहाँ RDX के आरोपित CBI की गिरफ्त में होने के बाद भी अपनी इहलीला समाप्त कर लेते हैं। सब रास्ते बंद होने पर CBI यह केस ISC के माध्यम से रीमा भारती को सौंपती है।
"पिछले दिनों दिल्ली में पचास किलो आर.डी. एक्स. पकड़ी गयी थी। उस सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था।....भारत सरकार ने यह काम सी.बी. आई. को सौंपा था, लेकिन आतंकवादियों ने की एजेंटों को मार डाला‌ उसके बाद यह काम सी.बी. आई. ने मुझे सौंपा है। मैं उन हरामजादों को चुन-चुन कर मारूंगी, जो आतंकवादियों की मदद कर रहे हैं। (पृष्ठ-145)

Saturday, 17 April 2021

431. खतरनाक साजिश- कर्नल विक्रम

तीन दोस्त और देशद्रोही लोग
खतरनाक साजिश- कर्नल विक्रम
  यात्रा के दौरान  किताबें मेरी साथी होती हैं। इस बार भी विद्यालय से घर आते वक्त एक किताब साथी बनी और वापसी में भी एक और किताब का साथ रहेगा।
जासूसी साहित्य में कुछ नाम ऐसे भी हुये हैं जो वक्त की गर्द में खो गये। ऐसा ही एक नाम है कर्नल विक्रम। जिनका एक उपन्यास 'खतरनाक साजिश' पढने को मिला।
    यहाँ यह देखना भी प्रासंगिक होगा की ये नाम कहां और कैसे खो गये। उपन्यास साहित्य में जब कर्नल रंजीत का नाम काफी चर्चित रहा था तब उनसे मिलते-जुलते नाम वाले कुछ लेखक सामने आये, हालांकि कर्नल रंजीत से लेकर मिलते-जुलते नाम वाले सब Ghost Writer ही थे। और कथा के स्तर पर उपन्यास बहुत कमजोर होते थे।
  कर्नल विक्रम भी ऐसा ही एक Ghost Writing का कारनामा है। 
  "आखिर हम कब तक ऐसा ही जीवन बितायेंगे जोजफ।"-राम ने एक ठण्डी साँस ली और अपने घनिष्ठ मित्र को सम्बोधित किया-" तुम एम. एस. सी. हो, सिंह ग्रेजूएट और मैं....मैं इस डिग्री को लेकर क्या करूं, खाऊं, चाटूं, ओढूं या नीचे बिछाऊं?"( उपन्यास का प्रथम वाक्य)
  यह कहानी है दिल्ली के तीन बेरोजगार दोस्तों की। जो अपनी बेरोजगारी तो दूर करना चाहते हैं लेकिन कोई गलत काम नहीं करना चाहते।
   दूसरी तरफ एक और घटना घटित होती है।
श्री नगर में भयंकर विमान दुर्घटना।
देश के पाँच सैनिकाधिकारियों‌ की मृत्यु। (पृष्ठ-06)
   तीनों मित्रों में से सिंह को यह लगता है की इस दुर्घटना के पीछे कुछ देशद्रोही लोग शामिल हैं। और तीनों मित्र इन देशद्रोहियों को खत्म करने की जिम्मेदारी उठाते हैं।
  और एक संगठन बनाते हैं -एंजेल्स थ्री

Sunday, 4 April 2021

430. अभिज्ञान- नरेन्द्र कोहली

सुदामा और श्री कृष्ण मिलन कथा
अभिज्ञान- नरेन्द्र कोहली

भारतीय समाज में श्री सुदामा और श्री कृष्ण की मित्रता का उदाहरण खूब दिया जाता है। दोनों के मिलन को लेकर कुछ कहानियाँ भी प्रचलित हैं। और इन कहानियों में चमत्कार ज्यादा है। 
       नरेन्द्र कोहली द्वारा लिखित उपन्यास 'अभिज्ञान' पढा जो की सुदामा और श्री कृष्ण की मित्रता पर आधारित है, लेकिन इस में  चमत्कारिक घटनाएं नहीं है बल्कि समाज में व्याप्त उन घटनाओं को नया रूप देकर, सत्य के निकल दर्शाया गया है।
  ‌नरेन्द्र कोहली जी की यही विशेषता है कि उनकी रचनाओं में पौराणिक कहानियों को वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत किया है और यह सत्य के निकट प्रतीत भी होता है। 
- श्री कृष्ण के सोलह हजार रानियाँ की कहानी?
- सुदामा को श्री कृष्ण से मिलने पर  क्या मिला?
- युधिष्ठिर द्यूत (जुआ) में क्यों शामिल हुये?
- कृष्ण का गोपियों की मटकी फोड़ना?
- गोपियों और राधा का प्रसंग।

  आदि बहुत सी घटनाओं को नया रूप दिया गया है।
इसके अतिरिक्त कर्म, परिश्रम, फल आदि सिद्धांतों पर गहन चिंतन भी है। 

429.अरे, ओमप्रकाश- मनहर चौहान.

 तथाकथित तांत्रिक की रोचक कथा

अरे, ओमप्रकाश- मनहर चौहान
साहित्य के क्षेत्र में मनहर चौहान का नाम प्रयोगशील कथाकार के रूप में लिया जा सकता है। जहां एक तरफ इन्होंने गंभीर साहित्य के क्षेत्र में लेखन किया वहीं लोकप्रिय साहित्य में भी अपनी सार्थक उपस्थित दर्शायी है। लोकप्रिय साहित्य में स्वयं के नाम मनहर चौहान के अतिरिक्त छद्म नाम 'मीना सरकार' के नाम से भी लेखन किया है। वहीं अगर प्रयोग के रूप में देखें तो मनहर चौहान जी ने 'दस घण्टे' और 'अरे, ओमप्रकाश' जैसी रचनाओं का निर्माण किया है जो साहित्यिक और लोकप्रिय साहित्य का मिश्रण हैं।  
   'अरे, ओमप्रकाश' एक ऐसे चालाक आदमी की कथा है जो मनुष्य के स्वभाव का फायदा उठाता है। वह चालाकी के साथ लोगों को मूर्ख बनाकर अपनी जेबें भरता है। 
  कहानी का संबंध सिर्फ यूरोप से है, भारत से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। समस्त पात्र भी यूरोपियन हैं। हालांकि प्रथम दृष्टि यह प्रतीत होता है यह कहानी भारत की है। कथानक का नाम 'ओमप्रकाश'  अवश्य भारतीय है, क्योंकि वह अमरीकी लोगों को भारत के ज्ञान के आधार पर ही मूर्ख बनाता है। लेकिन ओमप्रकाश ने तो कभी भारत देखा ही नहीं। 
"कौन ओमप्रकाश?"- यह प्रश्न सहज ही आपके मस्तिष्क में उभरा होगा।  तो हमे पहले ओमप्रकाश को ही जान लेते हैं।

Tuesday, 30 March 2021

428. दस घण्टे की मौत- मनहर चौहान

विमान अपहरण की कथा...
दस घण्टे की मौत- मनहर चौहान

हिंदी साहित्य में मनहर चौहान का नाम साहित्यिक श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन उन्होंने प्रयोग के तौर पर कुछ जासूसी उपन्यास भी लिखे हैं।
   यह अच्छा प्रयास है जब कोई साहित्यिक लेखक इस तरह के उपन्यास लिखता है तो। यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र जी ने एक साक्षात्कार में कहा था,- लोकप्रिय साहित्य की भाषा जहाँ खत्म होती है, गंभीर साहित्य की भाषा वहा से आरम्भ होती है।
   इस खत्म और आरम्भ के बीच की खाई को भरने का काम कुछ साहित्यिक लेखकों ने किया जैसे श्रीलाल शुक्ल जी ने 'आदमी का जहर' लिख कर, मनु भण्डारी ने 'महाभोज' लिख कर और मनहर चौहान ने 'दस घण्टे की मौत' लिख कर।
  इन उपन्यासों की कथा चाहे लोकप्रिय साहित्य श्रेणी की मर्डर मिस्ट्री हो या थ्रिलर पर इनकी भाषा उच्च कोटी की है।
     मनहर चौहान जी ने अपने लेखकीय में लिखा है- 'दस घण्टे की मौत' का मूल स्वर रोमांच है। रोमांचक साहित्यिक उपन्यास हिंदी में प्राय नहीं लिखे जाते। मेरी लेखन नीति शुरू से ही स्पष्ट रही है कि जो हिंदी में प्रायः नहीं लिखा जाता, वही मैं‌ लिखूं।(लेखकीय अंश)
  इस दृष्टि से देखें तो यह उपन्यास एक प्रयोग की तरह है। मेरी दृष्टि में विमान अपहरण को लेकर बहुत कम उपन्यास लिखे गये हैं। और जो लिखे गये हैं उनका कथानक इस उपन्यास से अलग ही रहा है। इस उपन्यास का कथानक विमान अपहरणकर्ताओं पर आधारित है।
उनके पास दो रिवाल्वर थे। वे भी खुद दो थे-पिता और पुत्र। (पृष्ठ-07) 

Monday, 29 March 2021

427. दूसरा चेहरा- अजिंक्य शर्मा

दूसरे व्यक्तित्व की कहानी, मर्डर से थ्रिलर तक।
दूसरा चेहरा- अजिंक्य शर्मा
  
लोकप्रिय जासूसी साहित्य में वर्तमान समय नयी ऊर्जा का समय है। क्योंकि इस समय जो कहानियाँ आ रही हैं वे व्यस्थित और कसावट लिये तो हैं ही, साथ-साथ में अजिंक्य शर्मा जैसे प्रतिशाली लेखक हैं जो मर्डर मिस्ट्री जैसे परम्परा कथानक में जो प्रयोग प्रस्तुत कर रहे हैं वे साहित्य में अमिट हैं।
   'दूसरा चेहरा' अजिंक्य शर्मा जी का चतुर्थ उपन्यास है। जिसमें में तीन मर्डर मिस्ट्री है और एक हाॅरर उपन्यास है। प्रस्तुत उपन्यास भी मर्डर मिस्ट्री कम थ्रिलर है। 
    उपन्यास का कथानक राजस्थान की राजधानी जयपुर के डाॅन राज प्रताप शाडिण्य के भाई पवन शालिण्य के मर्डर पर आधारित है।
      पवन शांडिल्य एक होटल के कमरे में मृत पाया गया और उसके कत्ल का आरोप उसकी मित्र रिमझिम गरेवाल पर आया। जो वहीं एक कमरे में बेहोश पायी गयी।
     रिमझिम‌के हितैशी वकील अंकल का मानना है कि वह निर्दोष है। उसे निर्दोष साबित करने के लिए प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश भारद्वाज को बुलाया। - उसका नाम अविनाश भारद्वाज था, वो दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध प्राइवेट डिटेक्टिव्स में से एक था, मयूर विहार में 'क्राइम इन्वैस्टिगेशंस’ के नाम से उसका ऑफिस था और कम समय में ही अपने पेशे में उसने अपनी खूब धाक जमा ली थी।(उपन्यास अंश)
      जयपुर पहुंचने पर अविनाश को जो कहानी सुनने को मिली वह यूं थी- पुलिस का मानना है कि शांडिल्य रिमझिम के साथ जोर-जबर्दस्ती करने की कोशिश कर रहा था। उसी दौरान रिमझिम के हाथ में चाकू आ गया, जिससे उसने शांडिल्य पर वार कर दिया, घायल शांडिल्य मदद की उम्मीद में किसी तरह बाहर के कमरे तक पहुंचा लेकिन वहां से आगे नहीं जा पाया और वहीं उसकी मौत हो गयी। 

Tuesday, 23 March 2021

426. उपसंहार - काशीनाथ सिंह

उत्तर महाभारत की कृष्णकथा
उपसंहार - काशीनाथ सिंह

कुरुक्षेत्र के मैदान में 'सत्य की असत्य पर विजय' के उदघोष के साथ महाभारत का युद्ध खत्म हो गया। और खत्म हो गये असख्य लोग। उस युद्ध के पश्चात क्या हुआ? यही उपसंहार है।
      हिंदी साहित्य में काशीनाथ सिंह का नाम एक सशक्त साहित्यकार के रूप में उपस्थित है। 'काशी का अस्सी' जैसी चर्चित रचना उनके नाम दर्ज है। लेकिन प्रस्तुत रचना एक अलग ही विषय पर आधारित है। 

      हालांकि मेरे द्वारा काशीनाथ सिंह जी को पढने का यह प्रथम अवसर है, और वह भी एक उत्कृष्ट रचना के साथ‌। मैं इस रचना को पढने के पश्चात स्तब्ध सा रह गया था, मन शून्य सा हो गया था।
  प्रस्तुत रचना 'उपसंहार' महाभारत के छत्तीस वर्ष बीत जाने के पश्चात की कथा है। जहां पाण्डवों की अपनी समस्याएं हैं, यादवों- द्वारका की अपनी समस्याएं हैं और श्री कृष्ण एक सामान्य मनुष्य की तरह पूर्णतः विवश नजर आते हैं। 

Sunday, 21 March 2021

425. चीते की आँख- वेदप्रकाश कांबोज

अलफांसे की जीवनी
चीते की आँख- वेदप्रकाश काम्बोज

लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य में कुछ पात्रों ने अपनी विशेष पहचान स्थापित की है। और उन पर बहुसंख्यक लेखकों ने कलम चलाई है और उन्हें अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत कर नया रूप भी प्रदान किया है।
जैसे भूतनाथ, जेम्स बाॅण्ड, विनोद-हमीद, विजय-रघुनाथ, रीमा भारती इत्यादि।
   आज हम एक ऐसे पात्र की चर्चा करने जा रहे हैं जिसका नाम है- अलफांसे। 
चीते की आँख- वेदप्रकाश कांबोज

चीते की आँख- वेदप्रकाश कांबोज

वैसे तो अलफांसे को लेकर बहुत से लेखकों ने बहुत कुछ लिखा है लेकिन यहाँ हम बात कर रहे हैं आदरणीय वेदप्रकाश काम्बोज द्वारा लिखित उपन्यास 'चीते की आँख' की, जो वेदप्रकाश काम्बोज जी द्वारा अलफांसे सीरीज का प्रथम उपन्यास है।
   अलफांसे मूलतः इब्ने सफी जी द्वारा निर्मित पात्र है। इब्ने सफी जी ने अलफांसे को लेकर चार उपन्यास लिखे थे। बाद में कांबोज जी ने अपने हिसाब से इस पात्र को एक अलग रूप प्रदान किया।
     मेरी जिज्ञासा थी अलफांसे का इतिहास जानने की जो की मुझे 'चीते की आँख' नामक उपन्यास से मिला। 

Thursday, 18 March 2021

424. किंबो- अनिल मोहन

एक खतरनाक जीव की कहानी
किंबो- अनिल मोहन

दृश्य- 01
कंगूरा आइलैण्ड
'फच्चाक...।' अगले ही पल आदिवासी शिकारी की नाभी में बड़ा सा सुराख हुआ और चीख गूंजती चली गई-"आह..."
'कड़ाक...'- तभी नाभी के रास्ते गुजरता किंबो नामक जीव पीछे पीठ की हड्डी तोड़ता बाहर जा उछला।


 दृश्य-02
'कड़ाक।' पहले आदिवासी के पृष्ठ भाग की खोपड़ी टूटी। उसमें चार इंच चौड़ी हड्डी टूटकर नीचे गिरी और उसके बाद किंबो बाहर की तरफ हवा में लहराता चला गया।
दृश्य-03
"किंबो मानव शरीर में कहीं से भी घुस सकता है। फिर भी जिस शरीर को इसने  अपना घर बनाना होता है यह उस शरीर में मुँह से प्रवेश करता है या नीचे गुप्तांग से। (पृष्ठ-17)



उक्त दहशत भरे दृश्य हैं रवि पॉकेट बुक्स से प्रकाशित लोकप्रिय साहित्य के सितारे अनिल मोहन जी द्वारा लिखित उपन्यास 'किंबो-एक अजूबा' नामक के। 

किंबो- अनिल मोहन
   लोकप्रिय साहित्य में यूं तो एक से बढकर एक उपन्यास लिखे गये हैं। पर किसी जानवर को आधार बना लिखा गया यह प्रथम उपन्यास है,मेरी दृष्टि में तो। हिंदी हाॅरर उपन्यास साहित्य में ऐसे प्रयोग अन्यत्र नहीं है। 

Saturday, 13 March 2021

423. शरीफ हत्यारा- श्री नारद जी

शरीफ हत्यारा- श्री नारद जी
लोकप्रिय उपन्यास आरम्भ इलाहाबाद से होता है। और इस के आरम्भिक दौर में उपन्यास पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे। ऐसे ही अपने समय की एक पत्रिका थी-जासूसी डायरी। जिसमें तात्कालिक लोकप्रिय साहित्य के लेखकों के रोचक और जासूसी उपन्यास प्रकाशित होते थे। 
NH911
 जासूसी डायरी के एक अंक में श्री नारद जी का उपन्यास 'शरीफ हत्यारा' प्रकाशित हुआ था।
   पहले प्रकाशक का कथन देख लें।
एक रक्षक ही जब भक्षक बन जाये तो फिर जनता का क्या होगा?
  मोमियों के नीच एव देशद्रोही एक उच्च अधिकारी की दास्तां जिसने रहस्यमय ढंग से गद्दारी की।
आज 'श्रीनारद जी' सर्वप्रिय उपन्यास लेखक हैं। क्योंकि संसार में अपराधियों का एक जाल सा बिछ गया है। जो एक देश से दूसरे देश में जाकर वहाँ षड्यंत्र द्वारा विज्ञान के नये-नये अनुसंधानों का सहारा लेकर ऐसी वारदातें करते हैं कि दांतों तले उंगली दबाना पड़ता है।
ऐसे ही एक रहस्यमय षड्यंत्र जिसका संचालन विदेशी कर रहे हैं, की रोचक, कहकहे से पूर्ण कहानी इस पुस्तक में लिखी ग ई है। पढकर आप आनंद विभोर हो उठेंगे।
                                         प्रकाशक
                              जासूसी डायरी, इलाहाबाद


    उपन्यास की कहानी बर्मा (वर्तमान म्यानमार) देश पर आधारित है। सन् 1935 से पूर्व बर्मा भारत का ही एक अंग था जो कि अंग्रेजी सत्ता के चलते एक अलग देश के रुप में स्थापित हुआ।
   बर्मा में तस्करी का काम बहुत ज्यादा होता था। और वहाँ की सरकार इसे रोकने में असमर्थ थी।
उन दिनों जापान धीरे-धीरे रंगून में उपद्रव की आग भड़का रहा था। कुछ ऐसे एजेंट थे जो भारतवर्ष से सोना खरीद कर जापान भेजते रहते थे। ऐसे एजेंट अधिकतर बर्मा के मोमियो निवासी थे। बर्मा का गुप्तचर विभाग जब उन एजेंटों को पकड़ने में सफल न हो सका तो विवश होकर सरकार ने मिस्टर हरीश को आदेश दिया।(उपन्यास अंश)
    मिस्टर हरीश सी. आई. डी. में कार्यरत हैं और वे अपने अधीनस्थ डेविड और विनोद के साथ बर्मा जाते हैं। लेकिन तस्करों का नेटवर्क भी बहुत मजबूत है।- यहाँ से जो भी जासूस उन बदमाशों का पता लगाने के लिए भेजा जाता था वह या तो रास्ते में ही खत्म कर दिया जाता था या दो-चार दिन बाद रंगून या मोमियो की किसी सड़क पर उसकी लाश मिलती थी। (उपन्यास अंश)
    लेकिन मिस्टर हरीश इन सब परिस्थितियों को जानते और समझते हुये भी उन तस्करों का पता लगाने के लिए बर्मा जाते हैं।
     शेष कहानी बर्मा में उन तस्करों को खोजने और पकड़ने का विवरण है।
    कैसे भारतीय सी. आई. डी. के अधिकारी अपने कार्य को अंजाम देते हैं और कौन लोग हैं जो उन तस्करों का साथ देते हैं‌? यह उपन्यास पढकर जाना जा सकता है।
   उपन्यास का कथानक रोचक है लेकिन प्रस्तुतिकरण कोई विशेष नहीं है। उपन्यास का अंत एकदम से हो जाता है और वह भी पूर्णतः नाटकीय तरीके से जो पाठक में खीझ सी पैदा कर जाता है।
     उपन्यास को इसलिए पढा जा सकता है कि यह लोकप्रिय साहित्य में पत्रिकाओं के समय की रचना है। 
उपन्यास- शरीफ हत्यारा
लेखक-   श्री नारद जी
प्रकाशक- जासूसी डायरी, इलाहाबाद