एक हत्या - दो संदिग्ध
आग का खेल- आरिफ मारहर्वी
हिंदी जासूसी कथा साहित्य में आरिफ मारहर्वी का नाम काफी चर्चित रहा है। राजवंश नाम से भी इन्होंने उपन्यास और फिल्म लेखन भी किया है। आरिफ मारहर्वी साहब का एक छोटा सा उपन्यास 'आग का खेल' इन दिनों पढा । प्रस्तुत उपन्यास एक मर्डर मिस्ट्री है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इस उपन्यास में पात्रों की संख्या का कम होना, एक मृतक और दो संदिग्ध ।
हम उपन्यास के विषय में चर्चा करने से पहले उपन्यास का प्रथम पृष्ठ पढ लेते हैं ताकि कहानी को अच्छे से समझ सकें।
सहसा 'सेवा कुंज' की पूरी बिल्डिग गहरे अन्धेरे में डूब गयी ।
बिल्डिग के पूर्वी भाग में नौकरों के क्वार्टर थे। उन क्वार्टरों में भी गहरा अन्धेरा छा गया था। ऐसा प्रतीत होता था जैसे इस पूरी बिल्डिंग में मानव नाम की कोई वस्तु रहती ही न हो।
श्यामू कुछ देर तक आँखें फाड़-फाड़कर अन्धेरे में देखने का यत्न करता रहा। उसके कान भी किसी तरह की आहट पर लगे हुए थे। किन्तु जब काफी देर तक श्यामू को न कोई आहट सुनाई दी और न बिजली ही लौट आई तब श्यामू के दिल की धड़कनें तेज हो गईं।
उसने पट्टी टटोली और धीरे से उठकर बैठ गया। उसने कुछ देर तक आँखें फाड़कर क्वार्टर के दरवाजे की ओर देखा, मगर अन्धेरा इतना गहरा था कि उसे दरवाजे की झलक न नजर आई। तब श्यामू बिस्तर पर से उठ गया और अन्धेरे में दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर टटोलता हुआ दरवाजे की ओर बढ़ने लगा। बिस्तर से पैर उतारकर वह दरवाजे की बिल्कुल सीध में खड़ा हुआ था, इसलिए उसे दरवाजे तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं हुई ।
दरवाजे के निकट पहुंचकर उसने किवाड़ टटोले । शीघ्र ही उसके हाथ जंजीर तक पहुंच गए। उसने हौले से जंजीर खोली और किवाड़ों को धीरे से खोलकर दहलीज पर आ गया।
बाहर भी गहरा अन्धेरा छाया हुआ था और नीरवता का राज था। वह कुछ देर तक अपनी जगह खड़ा रहा। फिर उसने दाई ओर मुँह करके तनिक ऊँचे स्वर में पुकारा-
'बुद्ध सिह..!!'
किन्तु उसकी आवाज बस मात्र गूजकर लौट आई। उसे कोई उत्तर न मिला। दूसरी बार श्यामू ने जरा जोर से पुकारा-
'बुद्ध सिंह.... ऐ...बुद्ध सिंह !'
उत्तर उसे फिर भी कोई न मिला। श्यामू चकित स्वर में
बुड़बुड़ाया -'आश्चर्य है बुद्ध सिंह तो इतनी गहरी नींद कभी नहीं सोता था ।'
फिर श्यामू ने कुछ सोचकर बाई ओर मुँह करके ऊंची आवाज में पुकारा -
'सुखिया....ओ सुखिया...।'
मगर सुखिया की ओर से भी उसे कोई उत्तर न मिला। श्यामू के दिल की धड़कनें पल प्रति पल तेज होती जा रही थीं। वह फिर बुड़बुड़ाया-
'आज सुखिया भी इतनी ही गहरी नींद सो रही है..!!' (आग का खेल- आरिफ मारहर्वी)
श्यामू सेठ सोमनाथ जी का नौकर है। और एक रात सेठ जी के घर में आग लग जाती है। उस दौरान घर की लाइट भी बंद थी । इस आग में सेठ सोमनाथ जी की मृत्यु हो जाती है। सोमनाथ जी की लाश का समाचार जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गया था। उनकी लाश हाल में रखी हुई थी और लोग इस तरह आ-आकर देख रहे थे जैसे किसी बड़े महात्मा या नेता के अन्तिम संस्कार से पूर्व उसके दर्शनों के लिए जा रहे हों।(उपन्यास अंश)
सेठ सोमनाथ जी इन दिनों इन्कम टैक्स विभाग का सामना कर रहे थे । और वह परेशान भी रहते थे । सेठ सोमनाथ जी के परिवार में उनकी जवान पत्नी रूपा और इकलौता भतीजा सोहन है। सोहन एक अलग फ्लैट में रहता है। घर में सेठ जी, उनकी पत्नी और कुछ नौकर हैं।
पुलिस विभाग से इंस्पेक्टर इरफान और कैसर हयात निखट्टू इस केस को हल करते हैं। वह घर के नौकरों से केस को आगे बढाते हैं।
हाल में कैंसर, इर्फान और सब इंस्पेक्टर के सामने कोठी के सभी नौकर खड़े हुए थे, जिनके नाम श्याम्, सुखिया, बुद्ध सिह और रधिया थे। कैसर ने उन सबके चेहरों को निहारा। वह सभी बौखलाये हुए थे और उनकी आँखों से भय झाँक रहा था ।
कैसर ने उनसे पूछा-
'तुम लोगों के सिवा कोई और नौकर भी यहाँ काम करता है ?'
'जी नहीं ।' श्यामू ने उत्तर दिया- 'हमारे सिवा कोठी में और कोई नौकर नहीं है।'
'रात के अग्निकाण्ड के समय तुम सब लोग कहाँ थे ?'
'सरकार, हम सब कोठी में ही थे।' श्यामू ने उत्तर दिया ।
'आग पैट्रोल से लगी है। क्या तुममें से किसी ने भी पैट्रोल की गन्ध नहीं महसूस की थी ?'
'जी हाँ..।' श्यासू ने उत्तर दिया- 'मैंने महसूस की थी, किन्तु गन्ध का आभास पाने से पूर्व पूरी कोठी गहरे अन्धेरे में डूब गई थी।'(उपन्यास अंश)
पुलिस तफ्तीश, नौकरों के बयान से यह तो तय था कि घर की लाइट बंद कर किसी ने सेठ के बेडरूम में पेट्रोल छिड़क कर आग लगाई है, पर यह आग लगाई किसने है। यह ज्ञात करने का काम पुलिस का था, कैसर हयात निखट्टू का था ।
पुलिस की नजर में सिर्फ दो ही संदिग्ध व्यक्ति थे एक सेठ जी की पत्नी रूपा और द्वितीय उनका भतीजा सोहन । अब उपन्यास में यही दो मुख्य संदिग्ध नजर आते हैं हालांकि कैसर निखट्टू एक और संदिग्ध बताता है और उसके तर्क भी मजबूत नजर आते हैं। अब देखता यह है कि सेठ जी का वास्तविक हत्यारा कौन है । क्या जो नजर आ रहा है वही खेल है या फिर आग का खेल कोई और खेल गया जिसमें सेठ जी की पत्नी और भतीजा फंस गये ।
दादर साहब उपन्यास के एक पात्र है । दादर साहब सेठजी के पड़ोसी और उपन्यासकार हैं। दादर साहब की भूमिका उपन्यास में कम है लेकिन जितनी है वह रोचक है। उनका किरदार, स्वभाव आदि हास्यजनक हैं। इस पात्र को विस्तार दिया जा सकता था ताकि उपन्यास में रोचकता बनी रहे।
उपन्यास के नकारात्मक पक्ष की बात करें तो एक दो बातें थोड़ी खटकती हैं।
एक तो उपन्यास के आरम्भ में घर में इतना ज्यादा अंधेरा दर्शाया गया है जो उचित नहीं लगता । वैसे भी अंधेरा कितना भी हो आँखें कुछ समद बाद देखने की अभ्यस्त हो जाती हैं। यहां तो एक घर है, घर में इतना अंधेरा ?
उपन्यास के आरम्भ का एक दृश्य देखें-
एक बाड़ के पास पहुंचकर वह बाड़ से उलझकर लड़खड़ाया और पत्तों और टहनियों में प्रति ध्वनि उत्पन्न हुई। श्यामू ने बड़ी मुश्किल से अपने आपको गिरने से बचाया, किन्तु सम्भलते- सम्भलते उसके कानों में ऐसी आवाज टकराई जैसे कोई दवे पांव भागा हो और श्यामू संभलकर जल्दी से ऊंची आवाज में बोला-
'कौन है ? खबरदार...।'
मगर अब वह आवाज डूब चुकी थी। श्यामू कुछ क्षणों तक अपनी जगह खड़ा हुआ अपनी श्रवण-शक्ति पर जोर देता रहा, मगर उसे फिर कोई आहट न सुनाई दी। मगर उसका मन कह रहा था कि यह आहट किसी के कदमों की ही थी और यह उसका भ्रम नहीं हो सकता ।(उपन्यास अंश)
यह दृश्य काफी भ्रम पैदा करता है।
आरिफ मारहर्वी द्वारा लिखा गया यह एक छोटा सा उपन्यास है। और कहानी उसी अनुरूप है, न कोई ज्यादा उलझाव, न कोई ज्यादा घटनाक्रम और न कोई ज्यादा संवाद । लेखक महोदय ने कम घटनाओं और पात्रों के द्वारा एक अच्छी कहानी का निर्माण किया है।
मर्डर मिस्ट्री कथा में ऐसा मैंने 'न' के बराबर पढा है जहां संदिग्ध व्यक्तियों की संख्या कम हो। यहां तो लेखक का कौशल प्रशंसनीय है की पूरी कहानी में मुख्य पात्र भी नाम मात्र के हैं। कुल तीनों के इर्दगिर्द यह कहानी घूमती है। जिसमें से एक मृतक है और दो संदिग्ध है। लेखक महोदय चाहते तो और संदिग्ध पात्र पैदा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने दो संदिग्ध व्यक्तियों के आसपास घटनाक्रम को रखा है। (हत्यारा कौन है, यह अलग बात हो सकती है) और दो व्यक्तियों के होते हुये भी कहानी कहीं नीरस प्रतीत नहीं होती ।
उपन्यास में सन् 1971 में आयी फिल्म 'कटी पतंग' का वर्णन भी मिलता है। ऐसा बहुत कम उपन्यासों में देखने को मिलता है जहां किसी और उपन्यास या फिल्म का वर्णन हो।
इंस्पेक्टर इरफान और सेक्रेटरी मैरी का संवाद देखें-
बड़ी सुन्दर फिल्म है 'कटी पतंग ।' गुलशन नन्दा के एक भावनाओं से ओत-प्रोत उपन्यास पर बनाई गई है। मैं तो जाने कब से इस फिल्म की प्रतीक्षा कर रही थी ।'(उपन्यास अंश)
आरिफ मारहर्वी द्वारा लिखित उपन्यास 'आग का खेल' एक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है। एक मृतक और दो संदिग्ध, कुल तीन पात्रों के इर्दगिर्द घूमती एक सामान्य कहानी है। उपन्यास में कुछ नयापन नहीं है ।
उपन्यास एक बार पढा जा सकता है।

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