Saturday, 29 November 2025

690. खेल खत्म- अर्जुन राठौर

स्मैकिये लोगों की एक्शन कहानी
खेल खत्म- अर्जुन राठौर

वह एक फरार अपराधी था। शक्ल सूरत से सांवला, मासूम, निर्दोष लगने वाला अनिल गोस्वामी बेहद रहस्यमय, शातिर और श्याना था। बम्बई आकर स्मैकचियों की संगत में पड़कर डोप पैडलर बन गया और आखिरी बार वो ड्रग्स की बड़ी खेप लाया और माल का पता भी वह तरीके से नहीं बता पाया था कि कोई उसका बैंड बजा गया। और उस माल के पीछे कई जने पड़े हुए थे।

कभी-कभी इंसान के जीवन के ऐसा भी वक्त आता है जब वह अपने विचार, अपनी भावनाओं से परे होकर ऐसा खेल खेल जाता है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी । प्रस्तुत उपन्यास 'खेल खत्म' भी एक Ghost writer नाम जैसे असली लेखक की कलम से निकला एक्शन उपन्यास है।
  यह कहानी है जिस इंसान की है उसके विषय में आप उपन्यास के प्रथम पृष्ठ से पढ सकते हैं।

वह लोकल ट्रेन से अंधेरी स्टेशन पर उतरा। वह थके, निढाल कदमों से चलता हुआ स्टेशन से बाहर निकला।
वह एक लम्बा, कसरती बदन का मालिक, गोरा-चिट्टा खूबसूरत शख्स था। उसकी शक्ल देखकर विनोद खन्ना की याद ताजा हो आती थी।
वह अपने हालात से निराश, तकदीर से खफा, दुनिया की भीड़ में अपने आपको तन्हा महसूस करता हुआ शख्स था। अपनी हर्राफा बीवी के कलह-क्लेश, उसकी नफरत और जफा से हैरान, बेहद आन्दोलित, सकून तलाशता हुआ वह बम्बई भाग आया था।

Thursday, 27 November 2025

689. अंधेरे का आदमी - विक्की आनंद

कथा अनोखे प्रतिशोध की
अंधेरे का आदमी - विक्की आनंद

वह शहर के कथित इज्जतदार व्यक्ति थे। जो समाज के महत्वपूर्ण पदों पर विराजित थे। लेकिन वासना के उन दरिंदों ने मासूम लोगों पर जो कहर बरसाया उसका परिणाम एक न एक दिन सामने आना ही था। और एक दिन 'अंधेरे के आदमी' ने उनके पापों की सजा फलस्वरूप उनकी उनकी जिंदगी से रोशनी छीन ली।
   डायमण्ड पॉकेट बुक्स ने बाजार में कई Ghost writer उतारे थे जिनमें से एक थे विक्की आनंद। विक्की आनंद जो डैडमैन सीरीज के कारण कुछ चर्चा में रहे थे। इन्हीं विक्की आनंद का उपन्यास 'अंधेरे का आदमी' पढने को मिला जो एक रोमांच से परिपूर्ण उपन्यास है।
    कहानी के मुख्य पात्र हैं फिल्म अभिनेता विनोद पाण्डे, कुंवर जमशेद राणा जिसके पिता कभी एक बड़ी रियासते के राजा थे, कई मिलों का मालिक सेठ शहनवाज खान, भूतपूर्व राजा शमशेर सिंह, राजनेता रंजीत वर्मा जो समाज के सामने तो सफेदपोश लोग हैं लेकिन ये सफेदपोश लोग वास्‍तव में वासना के मरीज हैं। समाज में अपने प्रभुत्व और धन के बल पर असंख्य औरतों की इज्जत से खिलवाड़ किया है।

688. खूनी प्रेमिकाएं - आरिफ मारहर्वी

जासूस कैसर और इंस्पेक्टर इरफान का कारनामा
खूनी प्रेमिकाएं - आरिफ मारहर्वी- 1972


कुसुम ने कार एडवर्ड पार्क के फाटक से कुछ आगे बढ़ाकर से फुटपाथ के समीप रोक दी और फरीदा ने इधर-उधर देखकर अचरज से पूछा -
'हायें यहाँ क्यों रोक दी गाड़ी ?'
कुसुम ने इंजन बन्द करके पिछली सीट से किताबें उठाई और गेट खोलकर उतरती हुई बोली-
'उठा किताबें...नीचे उतर आ और वह थर्मस भी उठाती ला ।'
'क्या मतलब ?' फरीदा ने चौंककर पूछा । 
'मतलब अन्दर आकर पूछना ।'
कुसुम किताबें लेकर पार्क में प्रविष्ट हो गई। फरीदा विस्मय से उसे देखती रही। फिर उसने भी अपनी किताबें उठाई और कार से उतरकर कुसुम के पीछे अन्दर आ गई। वह थर्मस भी उठाती लाई थी ।(खूनी प्रेमिकाएं- आरिफ मारहर्वी, उपन्यास के प्रथम पृष्ठ से)

   आप पढ रहे हैं आरिफ मारहर्वी साहब के जासूसी उपन्यास 'खूनी प्रेमिकाएं' की समीक्षा । यह एक थ्रिलर उपन्यास है। कहानी का मुख्य नायक कैसर नामक एक जासूस है और शेष उसके इर्दगिर्द घटती होती घटनाएं हैं।

687. विषैला कत्ल- आरिफ मारहर्वी -

वह कब्र में जिंदा हो उठा
विषैला कत्ल- आरिफ मारहर्वी - दिसम्बर- 1972

इन दिनों आरिफ मारहर्वी साहब के जो जासूसी उपन्यास पढे हैं उनमें से मुझे यह सबसे ज्यादा रोचक लगा है।  आरिफ साहब के उपन्यास लगभग 120-30 पृष्ठ के होते थे, और कहानी जासूसी थी। 
   विषैला कत्ल भी एक जासूसी उपन्यास है जो जासूस कैसर पर आधारित है। कहानी तब रोचक हो उठती है जब एक शख्स एक महीने बाद कब्र में जीवित हो उठता है, और उसके बाद जो हंगामा होता....

  
अंधेरी रात की निस्तब्धता में कुत्ते के रुदन की आवाज दूर-दूर तक लहराती चली गई थी और वे दोनों इस प्रकार उछल पड़े जैसे कोई प्रेतात्मा उनके आस-पास ही मंडरा रही हो। उन दोनों के शरीर थर-थर काँपने लगे थे तथा कड़ाके की सर्दी होन्हें पर भी दोनों के माथों पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।
कब्रिस्तान में गहन नीरवता फिर व्याप्त हो गई थी। दूर तक बनी हुई छोटी-बड़ी सफेद-सफेद एवं मटियाली कब्र उन्हें ऐसी दिखाई दे रही थीं जैसे कब्रों में सोने वाले मुर्दे स्वयं निकलकर कब्रों के ऊपर लेट गए हों। किसी ओर पत्ता भी खड़कता तो वे दोनों भयभीत होकर उछल पड़ते ।
उनमें से एक लम्बे कद का दुबला-पतला आदमी था । उसने सस्ते से खाकी कपड़े की पेंट और मोटे गर्म कपड़े की जैकट पहिन रखी थी और दूसरा छोटे कद का तनिक मोटा था। उसके शरीर पर काले रंग की पेंट और कसा हुआा गर्म कोट था। दोनों वे अपने चेहरों पर स्कार्फ इस प्रकार बाँध रखे थे जैसे ढाटे बाँधे हों, और वे दोनों कब्रिस्तान की भीतरी दीवार से लगे एक ऐसे कोने में बैठे थे जहाँ गहन अन्धकार का राज्य था ।( विषैला कत्ल- आरिफ मारहर्वी, प्रथम पृष्ठ)
         अगसर और सफदर दो बदमाश थे। छोटी-मोटी चोरी से अपना जीवन यापन करते थे लेकिन एक बार उन्हें एक अनोखा काम मिला और वह काम था-
'एक विशेष कब्र में से एक विशेष समय पर एक विशेष मुर्दे की खोपड़ी निकालकर बेगम सरफराज के पास पहुंचा देना ।'

Wednesday, 26 November 2025

686. आग का खेल- आरिफ मारहर्वी

 एक हत्या - दो संदिग्ध
आग का खेल- आरिफ मारहर्वी

हिंदी जासूसी कथा साहित्य में आरिफ मारहर्वी का नाम काफी चर्चित रहा है। राजवंश नाम से भी इन्होंने उपन्यास और फिल्म लेखन भी किया है। 
    आरिफ मारहर्वी साहब का एक छोटा सा उपन्यास 'आग का खेल' इन दिनों पढा । प्रस्तुत उपन्यास एक मर्डर मिस्ट्री है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इस उपन्यास में पात्रों की संख्या का कम होना, एक मृतक और दो संदिग्ध । 
   हम उपन्यास के विषय में चर्चा करने से पहले उपन्यास का प्रथम पृष्ठ पढ लेते हैं ताकि कहानी को अच्छे से समझ सकें।

    सहसा 'सेवा कुंज' की पूरी बिल्डिग गहरे अन्धेरे में डूब गयी ।
बिल्डिग के पूर्वी भाग में नौकरों के क्वार्टर थे। उन क्वार्टरों में भी गहरा अन्धेरा छा गया था। ऐसा प्रतीत होता था जैसे इस पूरी बिल्डिंग में मानव नाम की कोई वस्तु रहती ही न हो।
    श्यामू कुछ देर तक आँखें फाड़-फाड़कर अन्धेरे में देखने का यत्न करता रहा। उसके कान भी किसी तरह की आहट पर लगे हुए थे। किन्तु जब काफी देर तक श्यामू को न कोई आहट सुनाई दी और न बिजली ही लौट आई तब श्यामू के दिल की धड़कनें तेज हो गईं।

685. भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी

विमान अपहरण काण्ड
भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी
जासूसी उपन्यास - अगस्त -1971

एकाएक माइक पर स्वर गूंजने लगा-
'पेसेंजर्स प्लीज..! राखनपुर जाने वाला जहाज अपनी उड़ान के लिए तैयार है। आप लोग कृपया अपनी-अपनी सीटें ले लीजिये । पेलेंजर्स प्लीज राखनपुर जाने वाला प्लेन अपनी उड़ान के लिए तैयार है। कृपया आप लोग अपनी-अपनी सीटें ले लीजिये ।'

सोजी ने काफी का अन्तिम घूंट भरा तथा कप काउंटर पर रखकर केन्टीन के द्वार की ओर बढ़ी। सहसा पीछे से किसी ने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया ।
सोजी भिन्नाकर घूमी उसके कन्धे पर हाथ रखकर सम्बोधित करने वालों से अत्यन्त तीव्र घृणा थी, परन्तु अपने सम्मुख एक बूढ़े को देखकर वह केवल होंठ हिलाकर रह गई। यदि उसके स्थान पर कोई दूसरा होता तो वह कंदाचित कोई घोर अपमान से भरी बात कह बैठती किन्तु उस बूढ़ की अवस्था बड़ी दयनीय थी। 
सोजी ने कोमल स्वर में कहा-'आज्ञा करें!'
बूढ़ा कुछेक क्षणों तक इस मुद्रा में हांफता रहा जैसे उसे दमे का रोग हो । उसके कंधे आगे को ढलके हुए थे और गर्दन इतनी झुकी हुई थी कि पोठ पर कूबड़-सा उभर आया था। गालों का माँस लटका हुआ था तथा घनी पलकें सफेद हो रही थीं।
उसके शरीर पर एक अति बहुमूल्य कपड़े का किन्तु अत्यन्त बेढंगा एवं ढीला-ढाला सिला हुआ सूट था। उसने बड़ी कठिनाई से अपनी गर्दन सोजी की ओर उठाई तथा हांफता हुआा बोला--
'आप' आप राखनपुर... राखनपुर के प्लेन में सवार होने जा रही हैं ?'
'जी हाँ!' सोजी ने ऊबे हुए स्वर में उत्तर दिया ।
'देखिये... देखिये म..म... मुझे भी उसी प्लेन में
यात्रा करनी है, मैं...मैं तेज नहीं चल सकता मुझे....मुझे सहारे की भी आवश्यकता है । मैं... मैं आपका बहुत बहुत आभारी होंगा अगर....अगर आप मेरा हाथ थाम लें ?'
सोजी का मन तो चाहा कि स्पष्ट रूप से नकार कर दे परन्तु बूढ़े के मुख पर बरसती हुई विवशता ने उसे ऐसा करने से रोका तथा अनिच्छापूर्वक हाथ बढ़ाकर बोली-
"आइये... ।"
"धन्यवाद...धन्यवाद।"

(भयानक भिखारी- आरिफ मारहर्वी, प्रथम पृष्ठ)
   नमस्ते पाठक मित्रो,

Tuesday, 25 November 2025

684. भेड़िये की तस्वीर- आरिफ मारहर्वी

कैसर निखट्टू फंसा अपराधियों के जाल में
भेड़िये की तस्वीर- आरिफ मारहर्वी 

Hindipulpfiction

जब तक इस देश की भूमि पर कैसर जीवित है, तुम लोगों का कोई भी मानवघाती षड्यन्त्र सफल नहीं हो सकता ।
    आरिफ मारहर्वी साहब का प्रसिद्ध पात्र कैसर देश के दुश्मनों का ललकारता और उनके खतरनाक इरादों को ध्वस्त करता है। जासूस कैसर निखट्टू का एक एक्शन उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर'।
नमस्कार पाठक मित्रो,
आप #Svnlibrary पर पढ रहे हैं जासूसी उपन्यासकार आरिफ मारहर्वी साहब के एक्शन उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर' की समीक्षा ।
जैसे ही जीप होटल के सामने आकर रुकी, दरबान ने अटेनशन होकर कैसर को सलाम मारा और कैसर बौखलाहट में जीप से उतरते-उतरते ठोकर खाकर गिरते-गिरते बचा। और फिर इस प्रकार फुर्ती से आगे बढ़कर उसने दरबान से हाथ मिलाया जैसे उसकी दरबान से वर्षों पुरानी जान-पहचान रही हो । तथा अब सहसा बहुत दिनों पश्चात भेंट हुई हो दरबान के बत्तीसों दाँत निकल पड़े ।
कैंसर दरबान से उसके बच्चों के कुशल समाचार पूछकर वेग पूर्वक होटल की ओर बढ़ा ही था कि उसे पीछे से झल्लाया हुआ स्वर सुनाई दिया ।
'अरे अरे!'

Tuesday, 18 November 2025

683. आग का समंदर- कर्नल रंजीत

इस शहर में लोग आत्मदाह कर रहे थे 
आग का समंदर - कर्नल रंजीत

उस शहर में हर कोई जल रहा था । सरे आम लोग स्वयं पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा रहे थे और प्रशासन चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। मौत का यह खेल तब तक जारी था तब मेजर बलवंत ने इसकी तह में जाकर रहस्य को उजागर नहीं कर दिया।

कर्नल रंजीत की कलम से निकला मेजर बलवंत सीरीज का एक ज्वलंत उपन्यास 'आग का समंदर' ।

आकाश पर छाई घटाओं ने उस अंधेरी रात के अधकार को और अधिक बढ़ा दिया था। हल्की-हल्की बूंदाबांदी शुरू हो चुकी बी। मौसम हर पल और अधिक खराब होता चला जा रहा था।
       इण्टरनेशनल एयरपोर्ट पर मौसम खराब होने के कारण कई उडाने स्थगित कर दी गई थी। और जो विमान एयरपोर्ट पर लेड कर रहे थे वे भी बहुत ही सावधानी से उतर रहे थे।
एयरपोर्ट के लांज में एक टेबल के गिर्द बैटे पांचों नौजवानों की नजरें थोड़ी-थोड़ी देर के बाद अपनी कलाई पर बंधी घड़ियों की ओर उठ जाती थीं, और फिर वे एक लम्बी सांस छोड़कर नई सिगरेट सुलगाने लगते थे।

Sunday, 16 November 2025

682. रात के अंधेरे में - कर्नल रंजीत

कहानी एक गर्वीली हत्यारिन की 
रात के अंधेरे में - कर्नल रंजीत

" बताओ अप्सरा की बेटी कौन है ?" मेजर ने पूछा।
"मैं यह कभी नहीं बताऊंगी।" मिसेज निगाम्बो ने कहा।
मेजर कुछ और कहना ही चाहता था कि कानों के पर्दे फाड़ डालने वाली चीख सुनाई दी।
और अभिनेता वेद प्रकाश की बांहों में आ गिरी।
"बे सिर पैर की औरत ?"
"हां, बेसिर-पैर की। वह खुली आस्तीनों वाला सुर्ख गाउन पहने थी। दोनों हाथों पर दस्ताने। दस्तानों पर खून। गाउन के कॉलर खड़े हुए, लेकिन खड़े कॉलरों -के बीच न गर्दन, न चेहरा, न सिर।"

एक से एक बढ़कर अविश्वसनीय किन्तु सत्य घटनाओं से भरपूर जासूसी उपन्यास ।

कर्नल रंजीत की अद्भुत रहस्यमयी लेखनी का नवीनतम चमत्कार - रात के अंधेरे में ।

लोकप्रिय कथा साहित्य में कर्नल रंजीत का नाम अदभुत कथा‌नक के लिए याद किया जाता है। इनके उपन्यासों के कथानक और पात्र दोनों ही विचित्र होते हैं। ऐसा ही विचित्रता से भरा हुआ एक उपन्यास है 'रात के अंधेरे में' । यह श्री लंका की पृष्ठभूमि पर आधारित रहस्य और रोमांचक से भरपूर उपन्यास पठनीय है।

Saturday, 15 November 2025

681. रानियां रोती नहीं- लक्ष्मी शर्मा

मार्मिक कथा संग्रह 
 रानियां रोती नहीं- लक्ष्मी शर्मा 

बोधि प्रकाशन जयपुर द्वारा समय-समय पर पाठकों के लिए अल्प मूल्य में किताबों का संग्रह जारी किया जाता है । यह पुस्तक संस्कृति को बढावा देने में सराहनीय प्रयास है और ऐसे प्रयास होने भी चाहिए।
बोधि प्रकाशन द्वारा सन् 2010 में पहला सैट जारी किया गया था । प्रस्तुत पांचवां सैट सन् 2020 में आया था जिसमें कुल दस किताबें थी जिनका मूल्य मात्र सौ रुपये था। यह क्रम आगे भी जारी है।

पांचवें सैट की एक पुस्तक है 'रानियां नहीं रोती' और रचनाकार है लक्ष्मी शर्मा। इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ हैं।
इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'रानियां नहीं रोती' । यह शीर्षक प्रभावित करने में सक्षम है। पाठक के मन में सहज ही यह प्रश्न उठता है रानियां क्यों नहीं रोती ? 
रानियों की कहानियों को वर्तमान के साथ जोड़कर लेखिका महोदया ने स्त्री के दर्द को बहुत अच्छे से अभिव्यक्त किया है।