जासूस कैसर और इंस्पेक्टर इरफान का कारनामा
खूनी प्रेमिकाएं - आरिफ मारहर्वी- 1972
कुसुम ने कार एडवर्ड पार्क के फाटक से कुछ आगे बढ़ाकर से फुटपाथ के समीप रोक दी और फरीदा ने इधर-उधर देखकर अचरज से पूछा -
'हायें यहाँ क्यों रोक दी गाड़ी ?'
कुसुम ने इंजन बन्द करके पिछली सीट से किताबें उठाई और गेट खोलकर उतरती हुई बोली-
'उठा किताबें...नीचे उतर आ और वह थर्मस भी उठाती ला ।'
'क्या मतलब ?' फरीदा ने चौंककर पूछा ।
'मतलब अन्दर आकर पूछना ।'
कुसुम किताबें लेकर पार्क में प्रविष्ट हो गई। फरीदा विस्मय से उसे देखती रही। फिर उसने भी अपनी किताबें उठाई और कार से उतरकर कुसुम के पीछे अन्दर आ गई। वह थर्मस भी उठाती लाई थी ।(खूनी प्रेमिकाएं- आरिफ मारहर्वी, उपन्यास के प्रथम पृष्ठ से)
आप पढ रहे हैं आरिफ मारहर्वी साहब के जासूसी उपन्यास 'खूनी प्रेमिकाएं' की समीक्षा । यह एक थ्रिलर उपन्यास है। कहानी का मुख्य नायक कैसर नामक एक जासूस है और शेष उसके इर्दगिर्द घटती होती घटनाएं हैं।
जैसा की आप ऊपर पढ चुके हैं कुसुम और फरीदा एक पार्क में जाती हैंऔर इसी पार्क में एक घटना के चलते दोनों लड़कियां सुरेन्द्र नामक एक युवक के संपर्क में आती हैं।
वहीं शहर में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर अवांछित गतिविधियों में शामिल करता है। शहर में पूर्व में हुयी ऐसी ही एक घटना के चलते कैसर और उसके सहयोगी सक्रिय थे।
कैसर और उसकी टीम के निशाने पर 'कुसुम- फरीदा और सुरेन्द्र' थे । पर संगठित गिरोह भी कम नहीं था और उस गिरोह ने कैसर के अतिरिक्त इंस्पेक्टर इरफान को भी एक ऐसे जाल में फंसा दिया जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
'खुदा की कसम यह तो उसी लड़की की लाश है, जिसकी लाश मेरे फ्लेट के सामने पड़ी है ।'
'क्या तात्पर्य है आपका ?'
'उस लाश की शक्ल में और इस लाश की शक्ल में एक लकीर का भी फर्क नहीं मिलेगा ।'(उपन्यास अंश)
कैसर और इरफान दोनों एक ही शक्ल की लड़कियों की लाशों के चक्कर में उलझ गये थे।
और यह कैसे संभव था जो कैसर के घर के आगे उपस्थिति थी वही इरफान के घर के आगे थे ।
लेकिन यह कैसर था जो अपने बुद्धिबल से हर कठिन कार्य को हल कर लेता है। और फिर अपनी टीम और पुलिस के सहयोग से कैसर असली अपराधी तक जा पहुंचता है।
उपन्यास छोटा है पर रोचक है। कहानी प्रभावित करती है। एक के बाद एक घटनाएं उपन्यास से पाठक को जोड़कर रखती हैं।
वहीं कैसर के लम्बे वार्तालाप कहानी को बाधित करते हैं । अगर लम्बी और व्यर्थ बातचीत की जगह जासूसी के कौशल दिखाये जाये तो ज्यादा अच्छा लगता।
उपन्यास शीर्षक:-
बात करें उपन्यास शीर्षक की तो यह भ्रामक शीर्षक है। क्योंकि उपन्यास में कोई प्रेमिका खूनी है बल्कि प्रेमिकाओं का खून अवश्य होता नजर आता है।
संवाद-
उपन्यास में कोई महत्वपूर्ण संवाद (Dialog) तो नहीं है पर एक जगह कैसर ने वर्तमान समय की अच्छी बात कही है।
"पिछले बरस उन्होंने मुझसे पचास रुपए उधार लिए थे लेकिन अब वह रुपयों की वापसी की बात तक नहीं छेड़ते । इसलिए उन्हें देखते ही मेरे सिर में दर्द होने लगता है ।'
'आप उनसे तकाजा क्यों नहीं करते ?'
'स्वभाव से शरीफ हूँ इसलिए माँगते हुए शर्म आती है।'
'साहब अपना पैसा माँगने में शर्म किस बात की ?'
'आजकल अपना ही दिया हुआ माँगने में शरम आती है, क्योंकि लेने वाला उसी दम माँगने वाले को नीच समझने लगता है।'(उपन्यास अंश)
उपन्यास में कैसर के अतिरिक्त मुख्य पात्र इंस्पेक्टर इरफान, और कैसर के साथी हैं सोजी, राना, लेफ्टिनेंट दीपक और कैप्टन रहमान आदि हैं।
अन्य पात्रों में कुसुम, फरीदा, सुरेन्द्र और खलपात्र हैं।।
प्रत्येक देश दूसरे देश की उन गतिविधियों और गुप्त रहस्यों को जानने के लिए व्यग्र रहता है। वह किसी न किसी ढंग से एक देश के उन रहस्यों तक पहुंचना चाहता जिससे उस देश की कमजोर बातों को जान सके या ऐसे रहस्य जान सके जो अन्य देशों को प्रभावित करते हों। यहां भी एक देश भारत के दूसरों देशों के साथ हुये गुप्त समझौतों को जानने के लिए निकृष्ट ढंग अपनाता है।
आदरणीय आरिफ मारहर्वी साहब द्वारा लिखित 'खूनी प्रेमिकाएं' एक रोचक थ्रिलर उपन्यास है। जिसकी कहानी ऐसे लोगों की है जो लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनसे अवांछित काम लेते हैं। ऐसे लोगों को कैसर बेनकाब करता है।
उपन्यास- खूनी प्रेमिकाएं
लेखक- आरिफ मारहर्वी
सन्- फरवरी 1972
पृष्ठ- 132
प्रकाशक- जासूसी पंजा सीरीज
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खूनी प्रेमिकाएं ।। विषैला कत्ल ।। आग का खेल ।। भयानक भिखारी ।। भेड़िये की तस्वीर ।। मौत के साये में ।। किताब के खूनी ।। बंद कमरे में खून ।। आग का खेल ।।

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