Wednesday, 26 November 2025

685. भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी

विमान अपहरण काण्ड
भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी
जासूसी उपन्यास - अगस्त -1971

एकाएक माइक पर स्वर गूंजने लगा-
'पेसेंजर्स प्लीज..! राखनपुर जाने वाला जहाज अपनी उड़ान के लिए तैयार है। आप लोग कृपया अपनी-अपनी सीटें ले लीजिये । पेलेंजर्स प्लीज राखनपुर जाने वाला प्लेन अपनी उड़ान के लिए तैयार है। कृपया आप लोग अपनी-अपनी सीटें ले लीजिये ।'

सोजी ने काफी का अन्तिम घूंट भरा तथा कप काउंटर पर रखकर केन्टीन के द्वार की ओर बढ़ी। सहसा पीछे से किसी ने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया ।
सोजी भिन्नाकर घूमी उसके कन्धे पर हाथ रखकर सम्बोधित करने वालों से अत्यन्त तीव्र घृणा थी, परन्तु अपने सम्मुख एक बूढ़े को देखकर वह केवल होंठ हिलाकर रह गई। यदि उसके स्थान पर कोई दूसरा होता तो वह कंदाचित कोई घोर अपमान से भरी बात कह बैठती किन्तु उस बूढ़ की अवस्था बड़ी दयनीय थी। 
सोजी ने कोमल स्वर में कहा-'आज्ञा करें!'
बूढ़ा कुछेक क्षणों तक इस मुद्रा में हांफता रहा जैसे उसे दमे का रोग हो । उसके कंधे आगे को ढलके हुए थे और गर्दन इतनी झुकी हुई थी कि पोठ पर कूबड़-सा उभर आया था। गालों का माँस लटका हुआ था तथा घनी पलकें सफेद हो रही थीं।
उसके शरीर पर एक अति बहुमूल्य कपड़े का किन्तु अत्यन्त बेढंगा एवं ढीला-ढाला सिला हुआ सूट था। उसने बड़ी कठिनाई से अपनी गर्दन सोजी की ओर उठाई तथा हांफता हुआा बोला--
'आप' आप राखनपुर... राखनपुर के प्लेन में सवार होने जा रही हैं ?'
'जी हाँ!' सोजी ने ऊबे हुए स्वर में उत्तर दिया ।
'देखिये... देखिये म..म... मुझे भी उसी प्लेन में
यात्रा करनी है, मैं...मैं तेज नहीं चल सकता मुझे....मुझे सहारे की भी आवश्यकता है । मैं... मैं आपका बहुत बहुत आभारी होंगा अगर....अगर आप मेरा हाथ थाम लें ?'
सोजी का मन तो चाहा कि स्पष्ट रूप से नकार कर दे परन्तु बूढ़े के मुख पर बरसती हुई विवशता ने उसे ऐसा करने से रोका तथा अनिच्छापूर्वक हाथ बढ़ाकर बोली-
"आइये... ।"
"धन्यवाद...धन्यवाद।"

(भयानक भिखारी- आरिफ मारहर्वी, प्रथम पृष्ठ)
   नमस्ते पाठक मित्रो,
एक बार फिर आरिफ मारहर्वी साहब के एक और उपन्यास 'भयानक भिखारी' के साथ हम यहां उपस्थित हैं। यह उपन्यास मुझे कैसा लगा इस विषय पर मैं अपने विचार यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।
   आरिफ मारहर्वी साहब अपने समय के लोकप्रिय उपन्यासकार रहे हैं हालांकि वर्तमान में उनकी कहानियाँ प्रासंगिक नहीं है । फिर भी उपन्यास एक बार तो पढ सकते हैं। जैसा की मैं पढ रहा हूँ, बाकी पसंद अपनी और अपनी ।
    एक हवाईजहाज राखनपुर के लिए उड़ता है और उसमें सीक्रेट सर्विस की सदस्या सोजी भी यात्री रूप में उपस्थित थी । सोजी को विमान में सवार होने से पूर्व एक सनकी बूढा मिलता है। (जैसा आप ऊपर पढ चुके हैं।) 
यात्रा के दौरान वह सनकी बूढा सोजी को परेशान करता है तो सीमा नामक वह युवती सोजी के साथ सीट बदल लेती है और उस सनकी बूढे से शादी कभी बातचीत करती है।
इसी दौरान दो बदमाश विमान अपहरण की कोशिश करते हैं । भारत में एक ऐसा कई बार हुआ भी है की विमान अपहरण की सफल और असफल कोशिशें की गयी हैं। यहां भी एक ऐसा प्रयास होते है और दोनों बदमाश पिस्तौल के दम पर सभी यात्रियों को बंधक बना लेते हैं। 
           वहीं राखनपुर पहुंचने पर पता चलता है वह सनकी बूढा कहीं गायब हो चुका है। और सोजी का अपहरण हो गया  ।
फिर कहानी में प्रवेश होता है सीक्रेट सर्विस के मिस्टर राना का जो कैसर के निर्देशानुसार कार्य करता है और कैसर का अच्छा सहायक सिद्ध होता है।
   कहानी विभिन्न मोड़ से मुड़ती हुयी मुख्य अपराधी तक पहुँचती है और कैसर, राना और पुलिस के सहयोग से मुख्य अपराधी पकड़ा जाता है। 
अपराधी कौन ?:- पुराने उपन्यासों में ज्यादातर विदेशी ताकतों द्वारा भारत को अस्थिर करने का प्रयास करने वाले लोगों का चित्रण मिलता है। प्रस्तुत उपन्यास भी कुछ ऐसा ही है। ऐसे लोगों के विषय में जासूस कैसर के विचार देखें- कैसर कटु स्वर में बोला- 'तुम लोगों ने वर्षों हमारे ऊपर राज्य किया है। हमें दास बनाकर रखा है किन्तु अभी तक तुम्हारा मन नहीं भरा । अब तुम हमें विधिवत दास नहीं बना सकते तो राजनीतिक हथकण्डों द्वारा दास बनाने का प्रयास करते हो । भाँति-भांति के रूप धारकर हमारे देश में घुसते हो । विभिन्न प्रकार के षडयंत्रों के जाल फैलाकर यहाँ अराजकता, अशान्ति तथा रक्तपात फैलाते हो ।
       उपन्यास में‌ लेखक महोदय ने हास्य का अच्छा प्रयोग किया है। सनकी बूढा, गाइड आदि के द्वारा अच्छा मनोरंजन किया है।
उपन्यास शीर्षक:- उपन्यास का शीर्षक भ्रामक है। उपन्यास में कहीं कोई भिखारी है ही नहीं और न ही यह कोई संकेतात्मक शीर्षक है।‌ दरअसल उपन्यास में कथा नायक एक बूढे की भूमिका निभाता है और उसी आधार पर उपन्यास का नामकरण 'भयानक भिखारी' कर दिया । कथा नायक न तो भयानक है और न ही भिखारी । इस दृष्टि से 'भयानक भिखारी' एक भ्रामक शीर्षक है।  
कथानक- उपन्यास का कथानक सामान्य है पर रोचक भी है । एक विमान के अपहरण की कोशिश और फिर कथा नायक के सहयोगी का अपहरण, नायक द्वारा साथियों को मुक्त करवाना और मुख्य अपराधी को पकड़ना। बस यही कहानी है। 
     आरिफ मारहर्वी साहब द्वारा रचित 'भयानक भिखारी' एक भ्रामक शीर्षक होते हुये भी कथा स्तर पर एक बार पढा जा सकता है‌। विमान अपहरण की कोशिश से लेकर अपराधी की गिरफ्तारी तक अच्छा मनोरंजन है।  

उपन्यास- भयानक भिखारी
लेखक-    आरिफ मारहर्वी
पृष्ठ-        132
प्रकाशक-  जासूसी पंजा सीरीज, स्टार पॉकेट बुक्स दिल्ली

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