संवेदना और रोमांच की प्यारी सी कहानी
डाक बाबू का पार्सल- द्रोणवीर कोहली
नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा 'नेहरू बाल पुस्तकालय' के अंतर्गत बच्चों के लिए बाल साहित्य का प्रकाशन किया जाता है और इसी में सन् 1994 में एक किताब प्रकाशित हुई 'डाक बाबू पार्सल' जिसकी आठवी आवृत्ति 2012 में हुयी । मेरे पास उपलब्ध संस्करण 2012 का है।
यह एक डाक बाबू के माध्यम से रची गयी हास्य, रोमांच और संवेदना से परिपूर्ण लघु रचना है।
पहले हम 'डाक बाबू का पार्सल' का प्रथम पृष्ठ देखते हैं जो कहानी को स्पष्ट करने में सहायक होगा।
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी में एक पहाड़ी कसबा है। नाम है उसका पनारसा ।