अफ्रीका का खतरनाक अपराधी
जंगल का कानून- वेदप्रकाश काम्बोज
विजय- अलफांसे सीरीज
वह एक ताकतवर और खतरनाक इंसान था। वह समानांतर सरकार चलाता था और वह सिर्फ जंगल के कानून को ही मानता था ।
'अगर इनमें से कोई गलत हरकत करने की कोशिश करे तो उसे जंगल का कानून समझा देना ।
'जंगल का कानून !'
'हां, जंगल का कानून ।' फ्रेंको उसी मुद्रा में बोला- 'जिसमें सिर्फ ताकतवर को ही जीने का हक हैं।
लेकिन एक बार उसकी टक्कर विजय अलफांसे और अलबर्ट से हुयी और आरम्भ हुयी एक खतरनाक जंग।
नमस्ते पाठक मित्रो,
आज हम पढने जा रहे वेदप्रकाश काम्बोज जी के उपन्यास 'जंगल का कानून' की समीक्षा । यह एक अंतरराष्ट्रीय जासूस समूह का एक्शन उपन्यास है।
मूड ही तो था ।
अलफांसे पेरिस के एक सस्ते से रेस्तरां में घुस गया। छोटी-छोटी मेजें छोटी-छोटी कुर्सियां। उस पर भीड़ का यह आलम कि सब स्नेज वैसे अपनी-अपनी कुर्सी पर बैठे थे मगर ऐसा लगता था कि अगर कोई व्यक्ति किसी को अपनी गोद में बैठाने को तैयार होता तो नया आने वाला बैठ जाता ।
मगर इसके बावजूद भी एक कायदा था। बैठने वाला जितनी देर चाहे बैठ सकता था ।
उस रेस्तरां में अधिकांश मजदूर पेशे के लोग आते थे। जिन्हें हर मामले में जल्दी रहती है। खाने और पीने के ही नहीं बल्कि पत्नी के पास सोने और उठने में भी ।
थीं। इसलिए सीटें भरती रहती थीं और खाली भी होती रहती मगर अलफांसे को कोई जल्दी नहीं थी ।
रेस्तरां में सस्ते किस्म की शराबें थीं। अलफांसे ने अपने लिए सबसे सस्ती शराब मंगाई ।
वह आराम से पी रहा था और लोगों की बातें सुन रहा था ।
उसके पास की सीटें खाली हुईं और तभी तीन हिप्पी कट छोकरे उस मेज पर आ बैठे । (जंगल का कानून- वेदप्रकाश काम्बोज, प्रथम पृष्ठ)
तो यह था उपन्यास का प्रथम दृश्य जिसमें अंतरराष्ट्रीय अपराधी अलफांसे पेरिस में था और यहाँ वह अफ्रीकन लड़की पर मोहित होकर उसके चक्कर में अफ्रीकी देश कलकोम्पा पहुंच जाता है।था।
कलकोम्पा में चाहे राष्ट्रपति का शासन था पर वहीं एक खतरनाक अपराधी फ्रेंको का समानांतर शासन चलता था।
फ्रेंको:- एक साढ़े छः फीट लम्बा जवान जिसका रंग आबनूस के लद की तरह काला था। सिर पर छोटे-छोटे लहरदार बाल ।
चुस्त और कीमती कपड़े । चाल ऐसी मानो बोल कर कह रही हो कि वह इस पूरे इलाके का मालिक है।
और वह सच में इलाके का मालिक था लेकिन कभी वह एक सामान्य गुण्डा था।
'पहले चाहे एक मामूली गुण्डा था ।' विजय बोला - 'मगर अब इस इलाके की वह एक बहुत बड़ी हस्ती है। यहां के कई छोटे-छोटे देशों का भाग्य निर्णय उसकी मर्जी से होता है। उसकी अपनी एक सेना है। कितनी बड़ी कुछ कह नहीं सकते । लेकिन अपनी स्थिति को बनाये रखने के लिए उसने उसे काफी शक्तिशाली बनाया होगा । क्योंकि वह कोई कानूनी सेना नहीं है, इसलिए जाहिर है कि उसमें किराये के आदमी और गुण्डे बदमाश ही होंगे । हमारा तुरूप का पत्ता यह है कि शायद फ्रेंको हमारी अचूक निशानेबाजी और गोलियों से बचने की कला से प्रभावित होकर अपनी सेना के लिए प्रशिक्षक नियुक्त कर दे । यह एक तरीका है उसके संगठन के भीतर पहुंचने का । देखना यह है कि कारगर साबित होता है या नहीं ।'
ऐसे खतरनाक आदमी सिर्फ कलकोम्पा देश के लिए ही खतरा नहीं था बल्कि वह अन्य देशों के लिए भी खतरा था । और ऐसे खतरे से निपटने के लिए इंटरपोल ने काफी प्रयास पूर्व में भी किये थे।
फ्रेंको वास्तव में कई देशों के लिए सिर दर्द बना हुआ है। कई जासूस उसकी तलाश में भेजे गए। मगर कोई भी लौट कर नहीं आया। इन्टरपोल ने सलाह मशवरे के लिये उसे और माईक को बुलाया।(उपन्यास अंश)
ऐसे खतरनाक आदमी को पकड़ने के लिए, उसकी सत्ता को खत्म करने के लिए जासूस विजय और माइक के अतिरिक्त गिलबर्ट और संयोग से साथी बने अली वासीलेव के अतिरिक्त अलफांसे भी शामिल हो जाता है ।
यह टीम पहुंच जाती है फ्रेंको की उस अज्ञात स्थल पर जो घने जंगलों में है और फिर आरम्भ होता है एक गुप्त संघर्ष । एक तरफ उन्हें फ्रेंकों का विश्वास जीतना है और दूसरी तरफ उन्हें वहां उपस्थित हजारों सैनिक से बचकर अपने कार्य को सफल भी करना है।
इस कार्य को कैसे सफल करते है यही उपन्यास का मुख्य पठनीय अंश है।
यह एक एक्शन उपन्यास है और इसका अंत पाठक को पहले से ही पता होता है। अब देखना यह है कि विजय अलफांसे अपनी टीम के साथ अपने कार्य को कैसे सफल करते हैं ।
उपन्यास में क्योंकि जासूस मुख्य होते हैं और लेखक महोदय उन्हें ही ज्यादा स्थान देता है लेकिन फ्रेंको भी अपनी मजबूत पहचान रखता है। वह जहां जंगल के कानून की बात करता है और इस बात का प्रबल समर्थन करता है।
जासूसवर्ग का फ्रेंको के प्रति एक कथन देखें-
'और अगर इसे रोका नहीं गया तो हिटलर बने ना बने लेकिन संसार की शान्ति व्यवस्था के लिए एक जबर्दस्त सिर दर्द बन जाएगा ।'
उसका एक संवाद उसकी विषय में सब कुछ कह देता है।
'क्योंकि जब फ्रेंको चाहता है कि कोई बोले तो पत्थरों के जुबान निकल आती है और कुत्ते भाषा शास्त्री भी बन जाते हैं ।'
तथ्यात्मक:-
- अलफांसे मूल रूप से आस्ट्रेलिया का निवासी है पर बाद में वह भारत का नागरिक बन जाता है।
'अब मैं अपराधी नहीं हूं बल्कि भारत का एक सम्मानित नागरिक हूँ ।'(पृष्ठ-)
- इस उपन्यास में अलफांसे को एक लड़की पर आशक्त होकर भटकते हुये दिखाया गया है।
संवाद-
'अगर इनमें से कोई गलत हरकत करने की कोशिश करे तो उसे जंगल का कानून समझा देना ।
'जंगल का कानून !'
'हां, जंगल का कानून ।' फ्रेंको उसी मुद्रा में बोला- 'जिसमें सिर्फ ताकतवर को ही जीने का हक हैं।
लेकिन एक बार उसकी टक्कर विजय अलफांसे और अलबर्ट से हुयी और आरम्भ हुयी एक खतरनाक जंग।
नमस्ते पाठक मित्रो,
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जंगल का कानून- वेदप्रकाश काम्बोज |
मूड ही तो था ।
अलफांसे पेरिस के एक सस्ते से रेस्तरां में घुस गया। छोटी-छोटी मेजें छोटी-छोटी कुर्सियां। उस पर भीड़ का यह आलम कि सब स्नेज वैसे अपनी-अपनी कुर्सी पर बैठे थे मगर ऐसा लगता था कि अगर कोई व्यक्ति किसी को अपनी गोद में बैठाने को तैयार होता तो नया आने वाला बैठ जाता ।
मगर इसके बावजूद भी एक कायदा था। बैठने वाला जितनी देर चाहे बैठ सकता था ।
उस रेस्तरां में अधिकांश मजदूर पेशे के लोग आते थे। जिन्हें हर मामले में जल्दी रहती है। खाने और पीने के ही नहीं बल्कि पत्नी के पास सोने और उठने में भी ।
थीं। इसलिए सीटें भरती रहती थीं और खाली भी होती रहती मगर अलफांसे को कोई जल्दी नहीं थी ।
रेस्तरां में सस्ते किस्म की शराबें थीं। अलफांसे ने अपने लिए सबसे सस्ती शराब मंगाई ।
वह आराम से पी रहा था और लोगों की बातें सुन रहा था ।
उसके पास की सीटें खाली हुईं और तभी तीन हिप्पी कट छोकरे उस मेज पर आ बैठे । (जंगल का कानून- वेदप्रकाश काम्बोज, प्रथम पृष्ठ)
तो यह था उपन्यास का प्रथम दृश्य जिसमें अंतरराष्ट्रीय अपराधी अलफांसे पेरिस में था और यहाँ वह अफ्रीकन लड़की पर मोहित होकर उसके चक्कर में अफ्रीकी देश कलकोम्पा पहुंच जाता है।था।
कलकोम्पा में चाहे राष्ट्रपति का शासन था पर वहीं एक खतरनाक अपराधी फ्रेंको का समानांतर शासन चलता था।
फ्रेंको:- एक साढ़े छः फीट लम्बा जवान जिसका रंग आबनूस के लद की तरह काला था। सिर पर छोटे-छोटे लहरदार बाल ।
चुस्त और कीमती कपड़े । चाल ऐसी मानो बोल कर कह रही हो कि वह इस पूरे इलाके का मालिक है।
और वह सच में इलाके का मालिक था लेकिन कभी वह एक सामान्य गुण्डा था।
'पहले चाहे एक मामूली गुण्डा था ।' विजय बोला - 'मगर अब इस इलाके की वह एक बहुत बड़ी हस्ती है। यहां के कई छोटे-छोटे देशों का भाग्य निर्णय उसकी मर्जी से होता है। उसकी अपनी एक सेना है। कितनी बड़ी कुछ कह नहीं सकते । लेकिन अपनी स्थिति को बनाये रखने के लिए उसने उसे काफी शक्तिशाली बनाया होगा । क्योंकि वह कोई कानूनी सेना नहीं है, इसलिए जाहिर है कि उसमें किराये के आदमी और गुण्डे बदमाश ही होंगे । हमारा तुरूप का पत्ता यह है कि शायद फ्रेंको हमारी अचूक निशानेबाजी और गोलियों से बचने की कला से प्रभावित होकर अपनी सेना के लिए प्रशिक्षक नियुक्त कर दे । यह एक तरीका है उसके संगठन के भीतर पहुंचने का । देखना यह है कि कारगर साबित होता है या नहीं ।'
ऐसे खतरनाक आदमी सिर्फ कलकोम्पा देश के लिए ही खतरा नहीं था बल्कि वह अन्य देशों के लिए भी खतरा था । और ऐसे खतरे से निपटने के लिए इंटरपोल ने काफी प्रयास पूर्व में भी किये थे।
फ्रेंको वास्तव में कई देशों के लिए सिर दर्द बना हुआ है। कई जासूस उसकी तलाश में भेजे गए। मगर कोई भी लौट कर नहीं आया। इन्टरपोल ने सलाह मशवरे के लिये उसे और माईक को बुलाया।(उपन्यास अंश)
ऐसे खतरनाक आदमी को पकड़ने के लिए, उसकी सत्ता को खत्म करने के लिए जासूस विजय और माइक के अतिरिक्त गिलबर्ट और संयोग से साथी बने अली वासीलेव के अतिरिक्त अलफांसे भी शामिल हो जाता है ।
यह टीम पहुंच जाती है फ्रेंको की उस अज्ञात स्थल पर जो घने जंगलों में है और फिर आरम्भ होता है एक गुप्त संघर्ष । एक तरफ उन्हें फ्रेंकों का विश्वास जीतना है और दूसरी तरफ उन्हें वहां उपस्थित हजारों सैनिक से बचकर अपने कार्य को सफल भी करना है।
इस कार्य को कैसे सफल करते है यही उपन्यास का मुख्य पठनीय अंश है।
यह एक एक्शन उपन्यास है और इसका अंत पाठक को पहले से ही पता होता है। अब देखना यह है कि विजय अलफांसे अपनी टीम के साथ अपने कार्य को कैसे सफल करते हैं ।
उपन्यास में क्योंकि जासूस मुख्य होते हैं और लेखक महोदय उन्हें ही ज्यादा स्थान देता है लेकिन फ्रेंको भी अपनी मजबूत पहचान रखता है। वह जहां जंगल के कानून की बात करता है और इस बात का प्रबल समर्थन करता है।
जासूसवर्ग का फ्रेंको के प्रति एक कथन देखें-
'और अगर इसे रोका नहीं गया तो हिटलर बने ना बने लेकिन संसार की शान्ति व्यवस्था के लिए एक जबर्दस्त सिर दर्द बन जाएगा ।'
उसका एक संवाद उसकी विषय में सब कुछ कह देता है।
'क्योंकि जब फ्रेंको चाहता है कि कोई बोले तो पत्थरों के जुबान निकल आती है और कुत्ते भाषा शास्त्री भी बन जाते हैं ।'
तथ्यात्मक:-
- अलफांसे मूल रूप से आस्ट्रेलिया का निवासी है पर बाद में वह भारत का नागरिक बन जाता है।
'अब मैं अपराधी नहीं हूं बल्कि भारत का एक सम्मानित नागरिक हूँ ।'(पृष्ठ-)
- इस उपन्यास में अलफांसे को एक लड़की पर आशक्त होकर भटकते हुये दिखाया गया है।
संवाद-
किसी भी रचना में संवाद महत्वपूर्ण होते है लेकिन एक्शन उपन्यासों में संवाद कम और घटनाओं को मुख्य बनाया जाता है फिर भी कुछ स्मरणीय संवाद मिल ही जाते हैं।
- 'दोस्त वक्त पर काम आएं अच्छी बात है ।' मगर दोस्तों पर ही जिन्दगी भर निर्भर नहीं रहा जा सकता। आदमी की अपनी क्षमताएं भी होनी चाहिए ।'
- 'दोस्त वक्त पर काम आएं अच्छी बात है ।' मगर दोस्तों पर ही जिन्दगी भर निर्भर नहीं रहा जा सकता। आदमी की अपनी क्षमताएं भी होनी चाहिए ।'
एक शब्द-
'सशस्त्र व्यक्तियों का एक गोल आ रहा था ।'
क्या आपको 'गोल' शब्द का अर्थ पता है।
वेदप्रकाश काम्बोज जी द्वारा लिखा गया उपन्यास 'जंगल का कानून' एक एक्शन उपन्यास है। एक खतरनाक अपराधी को खत्म करने का मिशन है। उपन्यास एक बार पढा जा सकता है।

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