Sunday, 31 December 2023
Saturday, 30 December 2023
Tuesday, 26 December 2023
593. मनोहर कहानियां- नवम्बर 1998
रहस्य-रोमांच विशेषांक
मनोहर कहानियां- नवम्बर 1998
हिंदी रोमांच साहित्य में मनोहर कहानियाँ पत्रिका का कभी अतिविशिष्ट नाम रहा है। इलाहाबाद के मित्र प्रकाशन से सन् 1944 में प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका में काल्पनिक रोमांचक कहानियों के साथ-साथ सत्य पर आधारित कहानियाँ भी प्रकाशित होती थी। इन कहानियाँ में अपराध पर आधारित कहानियाँ ही होती थी। इसके अतिरिक्त छोटी-छोटी रोचक जानकारियाँ भी समाहित थी।
लम्बे समय पश्चात मनोहर कहानियाँ पत्रिका का एक पुराना अंक 'नवम्बर 1998' पढने को मिला। यह अंक 'रहस्य- रोमांच' विशेषांक है।
इस अंक की प्रथम रचना है 'सलमान खान-मुल्जिम बने शिकार के'
Monday, 4 December 2023
Saturday, 2 December 2023
591. महाबली टुम्बकटू- वेदप्रकाश शर्मा
चीन में टुम्बकटू और विकास का हंगामा
महाबली टुम्बकटू- वेदप्रकाश शर्मा
लम्बे, तगड़े और शक्तिशाली इन्सान ने सिगरेट में अंतिम कश लगाया और फिर ध्यान से उस सात-मंजिली इमारत को देखा। इस समय वह उस इमारत से लगभग पचास गज दूर झाड़ियों में खड़ा हुआ था। उसके जिस्म पर एक स्याह पतलून और गर्म लम्बा ओवरकोट था। सिर पर एक अजीब-सी गोल कैप थी। हाथों पर सफेद दस्ताने चढ़े हुए थे। समय रात्रि के दो बजे का था और सरदी नलों में जल को जमा देने वाली थी। आसपास गहरी निस्तब्धता का साम्राज्य था। यह सात-मंजिली इमारत राजनगर से थोड़ा अलग एकान्त में थी। अतः यहां यह केवल एक ही इमारत थी। (महाबली टुम्बकटू के प्रथम पृष्ठ से)
वेदप्रकाश शर्मा उपन्यास साहित्य में एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके द्वारा रचित पात्र आज भी अमर हैं, उनके पात्रों को आधार बना कर बहुत से उपन्यासकारों ने उपन्यास लिखे हैं और आज भी लिखे जा रहे हैं। हालांकि यह पात्र स्वयं वेदप्रकाश शर्मा जी ने आदरणीय वेदप्रकाश काम्बोज जी के उपन्यासों से लिये हैं और उनमें कुछ अपने पात्र भी शामिल किये हैं।
वेदप्रकाश शर्मा जी के आरम्भिक उपन्यास स्थापित पात्रों कर क्रियाकलाप ही वर्णित होते रहे हैं, ज्यादातर कथानक अंतरराष्ट्रीय अपराधी वर्ग, विदेशी जासूसों से टकराव आदि।
प्रस्तुत उपन्यास की कहानी भारत और चीन के जासूसों के बीच संघर्ष की कहानी है।
Thursday, 30 November 2023
587. बोलने वाली खोपड़ी- चंदर (आनंदप्रकाश जैन)
अदृश्य मानव का द्वितीय भाग
बोलने वाली खोपड़ी- चंदर (आनंदप्रकाश जैन)
चंदर द्वारा लिखित उपन्यास 'बोलने वाली खोपड़ी' एक शृंखला का भाग है जो 'अदृश्य मानव' सीरीज से जानी जाती है। 'अदृश्य मानव' सीरीज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित एक रोचक और क्रांतिकारी सीरीज है।पाठक मित्रो, हमने 'अदृश्य मानव' उपन्यास के विषय में बात की थी, जहाँ कोटद्वार रियासत ध्वस्त कर दी जाती है। वहाँ के राजा और रानी सुरक्षित बच सके या नहीं कुछ पता नहीं चलता, अदृश्य मानव के साथी प्रमोद का क्या हुआ, गोपालशंकर को एक ब्रिटिश सहयोगी जूली मिलती है, जैसे कुछ तथ्य अदृश्य मानव में अधूरे रह गये थे। प्रस्तुत उपन्यास 'बोलने वाली खोपड़ी' में हमें उन अधूरे प्रश्नों के उत्तर भी मिलेंगे और प्रस्तुत उपन्यास में रोचक कहानी भी।अदृश्य मानव उपन्यास में कोटद्वार रियासत ध्वस्त होने का बाद अंग्रेज सरकार और पण्डित गोपालशंकर को यह लगता है कि उन्होंने ने अदृश्य मानव को खत्म कर दिया परंतु उस घटना के चार वर्ष पश्चात अदृश्य मानव फिर जबरदस्त वापसी करता है।
उपन्यास का आरम्भ एक ज्वैलर्स के यहां डकैती से होता है और फिर पता चलता है की शहर में चार बड़ी डकैतियां हुयी है, जिनके पीछे अदृश्य मानव का हाथ। और अदृश्य मानव क्रांति के लिए अंग्रेजों के सहायक, धनपति लोगों को लूटना है।
'बड़ा बुरा समाचार है। आज से चार साल पहले मरा हुआ दानव आज फिर जी उठा है।' जॉन निकल्सन ने कहा।
586. अदृश्य मानव- चंदर
स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा और पण्डित गोपालशंकर
अदृश्य मानव- चंदर (प्रथम भाग)
प्रिय भारत वासियों
गुलाम भारत के लिये समय का कुछ मूल्य नहीं होना चाहिये। उन दिनों की प्रतीक्षा कीजिए जिस दिन हम पूर्ण आजाद होकर समय को पहचाना सीखेंगे। अंगरेजों की प्रभुता की वह पुरानी यादगार हमारी गुलामी की घड़ियों को डंके की चोट बजाकर घोषित कर रही थी। इसको मिटाने के साथ-साथ अंग्रेजों के विरुद्ध 'अदृश्य मानव' की ओर से अनवरत युद्ध की पूर्ण घोषणा है। सावधान उपयुक्त समय के लिये तुम्हारी आवश्यकता पड़ेगी । (अदृश्य मानव- उपन्यास अंश) अदृश्य मानव उपन्यासकार चंदर द्वारा लिखित उपन्यास का घटनाक्रम सन् 1947 से पूर्व का है। जब भारत पर ब्रिटेन का शासन था। ब्रिटेन के अत्याचारों से तंग आकर भारतीय जनमानस ने उनके विरुद्ध संघर्ष का ऐलान किया था।
यह कहानी ऐसे ही कुछ शूरवीरों की है जिन्होंने अपने प्राणों का मोह त्याग कर भारत की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व त्याग दिया था।Wednesday, 29 November 2023
585. भटके हुये- चंदर
नीले फीते के शिकारी
भटके हुये- चंदर
अपराधी दुनिया में 'ब्लू फ़िल्मों' का एक देशव्यापी व्यापार चल रहा है । चन्दर का पहला उपन्यास 'नीले फ़ीते का जहर' जो पाठक पढ़ चुके हैं, वे अपराधी संसार की इस महामारी से अच्छी तरह परिचित हैं। अब इस उपन्यास में दिल थाम कर, थ्रिल-पर-थ्रिल का आनन्द लेते हुए, इसके नायक आनन्द और आशा के साथ डूबते-उतराते चले चलिए अपराधों के उस बड़े अड्डे पर, जहां हत्या, बलात्कार और वासना के नग्न नृत्यों के बीच निर्दोषों की आत्माओं को सताया जाता है, और जहां कभी-कभी यह भी प्रतीत होता है कि अनवर जैसे सच्चे दोस्त की जांफ़िशानी से पाप का घड़ा अचानक फूट जाता है । (उपन्यास के आवरण पृष्ठ से)
प्रसिद्ध बाल पत्रिका 'पराग' के संपादक श्री आनंद प्रकाश जैन जी ने 'चंदर' के नाम से उपन्यास लेखक किया है।Friday, 24 November 2023
584. मौत घर- चंदर (आनंद प्रकाश जैन)
भोलाशंकर का 16वां उपन्यास
मौत घर- चंदर (आनंद प्रकाश जैन)
भोलाशंकर चार दिन से परेशान था।
परेशानी की वजह थी नारीत्व की वह पूर्ण प्रतिमा, जिसे वह दिलोजान से चाहता था। वह उसके नाज-नखरे बर्दाश्त करता था । यह भी सही है कि जब उसे कोई एसाइनमेंट मिलता था, तो कभी- कभी वह उसे गचका देकर भी गोल हो जाता था। मगर अक्सर वह उसे कहकर जाता था कि वह कम-से-कम चार दिन, पांच दिन, हफ्ता-दो हफ्ता उसका इंतज़ार न करे, क्योंकि उसकी कम्पनी का मैनेजर बहुत 'हरामी' है, और उसे सूंघ लग गई है कि वह किसी से प्रेम करने लगा है। इसलिए वह कम्पनी का माल बेचने के लिए अपने सबसे बड़े सेल्समैन को लम्बे-लम्बे मोर दूर-दूर के एसाइनमेंट देता है।
जो भी हो, सविता ने कभी उसके सैल्समैन होने पर विश्वास नहीं किया- खास तौर से इतने बड़े सेल्समैन होने पर कि उसे बार- बार विदेशों का दौरा करना पड़े। मगर वह समझदारी में साधारण लड़कियों को कहीं पीछे छोड़ देती थी, इसलिए उसने कभी भोला- शंकर को ज़िद करके झुठलाया नहीं था, और कभी यह कोशिश भी नहीं की थी कि उसकी असलियत नकलियत का पता लगाए। उसने अपना नियम बना रखा था कि वह रोज सुबह छह बजे और रात को नौ बजे उसे फोन करती थी, और उसका नौकर रामू खुशामदी स्वर में फोन पर उत्तर देता था- 'हाय, बीबी जी, अगर भगवान ने कभी मेरा शादी बनाया, तो हम कभी अपनी बीबी को छोड़कर परदेस नहीं जाएगा।" (मौत घर उपन्यास के प्रथम पृष्ठ से)
जासूसी कथा साहित्य में चंदर के उपन्यास काफी रोचक रहे हैं। चंदर का मूल नाम आनंदप्रकाश जैन था जो टाइम्स ऑफ इण्डिया समाचार पत्र में कार्यरत थे और प्रसिद्ध बाल पत्रिका 'पराग' के संपादक रहे हैं। बाल साहित्य के साथ-साथ चंदर ने जासूसी उपन्यास लेखक में नाम कमाया है।Wednesday, 22 November 2023
583. मौत की घाटी में- चंदर ( आनंदप्रकाश जैन)
भोलाशंकर की चीन यात्रा
मौत की घाटी में- चंदर ( आनंदप्रकाश जैन)
उस खूबसूरत घाटी में एक पुराना किला था और किले में एक बौद्ध मठ । दूर-दूर से धार्मिक लोग आते और मठाधीश को माथा नवाते । लेकिन वे बेचारे नहीं जानते थे कि पर्दे के पीछे कौन-सा नाटक चल रहा है; दुनिया भर में फैली चीन की भयानक जासूसी का उस किले से क्या सम्बन्ध है ! इन प्रश्नों के सही उत्तर पाने और चीन के जासूसी षड्यन्त्र को समाप्त करने के लिए भोलाशंकर उस मौत की घाटी में पहुंचा
लोकप्रिय जासूसी उपन्यासकार चन्दर ने अपने इस नवीनतम उपन्यास में राजनैतिक जासूसी के कुछ ऐसे हथकंडों पर प्रकाश डाला है, जो अब तक रहस्य बने हुए थे।जासूसी उपन्यास साहित्य में चंदर का नाम काफी चर्चित रहा है। उनके द्वारा सृजित पात्र पण्डित गोपालशंकर और भोलाशंकर को पाठक याद करते हैं। चंदर महोदय ने भोलाशंकर को भारतीय जेम्स बॉण्ड बनाने की हल्की सी कोशिश की है, लेकिन विशेष कोशिश नहीं की गयी। इन दिनों में चंदर द्वारा लिखित कुछ उपन्यास पढे हैं, जैसे- चांद की मल्का, मकड़ा सम्राट, कोहरे में भोलाशंकर, रूस की रसभरी इत्यादि। उपन्यास मुझे रोचक लगे।
अब बात करते हैं भोलाशंकर सीरीज के उपन्यास 'मौत की घाटी में'।
"चीन के प्रधानमंत्नी चाऊ एन-लाई भारत आ रहे हैं।"
"क्यों आ रहे हैं ?"
"किसलिए आ रहे हैं ?"
"क्या अब भी हमसे 'हिन्दी चीनी भाई-भाई' का नारा लगाने को कहा जाएगा ?"
"हूं, दोस्ती का ढोंग रचकर पीठ में छुरा भौंकने वाले क्या अब भाड़ झोंकने आ रहे हैं ?"
"नेहरूजी को भी क्या कहा जाए, शांति के दुश्मन से शांति-वार्ता की सोच रहे हैं !"
"मैं कहता हूं, हम लोगों में पुरुषत्व ही नहीं रह गया है। इस देश में महात्मा गांधी जैसी महान् आत्माओं को गोली मार देने वाले लोग तो पैदा हो गए, मगर ऐसे विश्वासघाती मज़े से आकर सही- सलामत लौट जाते हैं।"




