Thursday, 16 February 2023

553. जुर्म का आगाज- जयदेव चावरिया

अण्डरवर्ल्ड और एक लाल सूटकेस
जुर्म का आगाज- जयदेव चावरिया

दावत होटल में एक बिजनेस पार्टी के दौरान हीरा वर्मा और नाजिम खान, राजनगर के दो बड़े बिजनेसमैन, रेड सूटकेस की डील कर रहे थे पर कोई तीसरा मास्टरमाइंड उनकी नाक के नीचे से रेड सूटकेस उड़ा ले गया। लोग सिर्फ यह जानते थे कि रेड सूटकेस के मालिक का नाम डेविल है जिसे किसी ने कभी नहीं देखा और जिसने डेविल को देखा वह किसी को बताने के लिए जिन्दा नहीं बचा। हीरा वर्मा और नाजिम खान को अब जल्द से जल्द रेड सूटकेस ढूँढना था वरना उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता। 
- कौन था वह मास्टरमाइंड जिसने हीरा वर्मा और नाजिम खान की नाक के नीचे से रेड सूटकेस उड़ा लिया ?
-  रेड सूटकेस में ऐसा क्या था जिसे हासिल करने के लिए सारा माफिया पीछे पड़ा था ?
- हीरा वर्मा और नाजिम खान का रेड सूटकेस से क्या संबंध था ?
- क्या वे रेड सूटकेस को हासिल कर सके ?
- रेड सूटकेस का मालिक डेविल आखिर कौन था ? जानने के लिए पढ़िए ये उपन्यास।

Thursday, 12 January 2023

552. वतन के रखवाले- अजिंक्य शर्मा

एक छपरी मर्डर मिस्ट्री

वतन के रखवाले- अजिंक्य शर्मा

अजीबोगरीब हालातों में एक-के-बाद-एक कत्ल के मामलों में फंसते जा रहे युवक की कहानी
एक मर्डर मिस्ट्री...जो पूरी फ़िल्मी है
अजिंक्य शर्मा द्वारा रचित पहली मर्डर मिस्ट्री, जिसे लेखक ने 'कॉमेडी' की केटेगिरी में भी शामिल किया है
कॉमेडी और मर्डर मिस्ट्री का मजेदार संगम, जैसा आपने कम ही उपन्यासों में पढ़ा होगा।



  नमस्कार।
 आज बात करते हैं उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा जी के उपन्यास 'वतन के रखवाले' उपन्यास की। अजिंक्य शर्मा वही जो ब्रजेश शर्मा के नाम से उपन्यास लिखते रहे हैं‌। फिर बंदे को लगा 'यार, खुद का नाम भी तो सामने आना चाहिए, तो बंदे ने 'निमिष' और 'वतन के रखवाले' अपने वास्तविक नाम से लिखे। हाँ, ध्यान दीजियेगा- ब्रजेश शर्मा नाम भी लेखक महोदय का ही है, इस नाम से लिखे गये उपन्यास वास्तविक हैं।
   बहुत हो गया, अब बात करे नये उपन्यास की। चलो बात कर ही लेते हैं। 'वतन के रखवाले' एक हास्य मर्डर मिस्ट्री है। अब आओ सोच रहे होंगे हास्य मर्डर मिस्ट्री क्या है। जब सब कुछ हम ही बता देंगे तो उपन्यास कौन पढेगा। इसलिए उपन्यास पढें, आनंद लीजिए।

Sunday, 8 January 2023

551. ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ murder mystery

ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ murder mystery 

murder mystery ਤੇਜਵੀਰ ਦੀ ਨੌਕਰੀ ਦਾ ਅੱਜ ਪਹਿਲਾ ਦਿਨ ਸੀ। ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਟਾਈਮ ਤੋਂ ਦਸ ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾਂ ਪਹੁੰਚਣ ਦੀ ਨੀਅਤ ਨਾਲ਼, ਤੇਜਵੀਰ ਨੇ ਫਟਾਫਟ ਨਾਸ਼ਤਾ ਕਰ ਚਾਹ ਦੀਆਂ ਦੋ ਘੁੱਟਾਂ ਭਰੀਆਂ ਤੇ ਆਪਣੇ ਫਲੈਟ ਨੂੰ ਜਿੰਦਾ ਮਾਰ, ਚਾਬੀ ਨਾਲ਼ ਦੇ ਫਲੈਟ ਦੇ ਮਾਲਿਕ ਬਜ਼ੁਰਗਵਾਰ ਚੌਹਾਨ ਸਾਹਬ ਦੇ ਹਵਾਲੇ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਦਫ਼ਤਰ ਵੱਲ ਰਵਾਨਾ ਹੋ ਗਿਆ।                   

        ਆਪਣੀ ਮੋਟਰ ਸਾਈਕਲ 'ਤੇ ਸਵਾਰ ਹੋ ਤੇਜਵੀਰ ਨੇ ਰਾਜਗੁਰੂ ਨਗਰ ਸਥਿਤ ਆਪਣੇ ਫਲੈਟ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿੱਕਲ ਕੇ, ਸ਼ਹਿਰ ਵੱਲ ਨੂੰ ਮੋੜ ਕੱਟਿਆ ਹੀ ਸੀ ਕਿ ਅੱਗੇ ‘ਵੈਸਟਐੱਨਡ ਮਾਲ' ਦੋ ਸਾਹਮਣੇ ਸੜਕ 'ਤੇ ਉਸਨੂੰ ਕਾਫ਼ੀ ਇਕੱਠ ਜਿਹਾ ਨਜ਼ਰ ਆਇਆ। ਕਰੀਬ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਤੇਜਵੀਰ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਕਿ ਇੱਕ ਅੱਧਖੜ੍ਹ ਉਮਰ ਦਾ ਪਰਵਾਸੀ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੜਕ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਡਿੱਗਿਆ ਪਿਆ ਸੀ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਸੱਜੀ ਲੱਤ ਬੁਰੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ਼ ਜ਼ਖ਼ਮੀ ਸੀ। ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਵਿਚਾਰਾ ਕਿਸੇ ਐਕਸੀਡੈਂਟ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਸੀ। 

ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ murder mystery
ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ, murder mystery
 

             murder mystery  जासूसी कथा साहित्य में पंजाबी साहित्य का एक उपन्यास प्राप्त हुआ, जो मर्डर मिस्ट्री आधारित एक रोचक उपन्यास है। वैसे मेरी दृष्टि में पंजाबी साहित्य में रहस्य-रोमांच रचनाएँ बहुत कम है और उस पर murder mystery रचना तो पहली बार देखी है। लेखक महोदय का यह प्रयास प्रशंसनीय है।

Friday, 30 December 2022

550. मौत की वार्निंग- एच. इकबाल

एक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास
मौत की वार्निंग- एच. इकबाल

उस तूफानी रात का वातावरण बड़ा ही भयानक था । बारिश ने सुबह से रुकने का नाम ही नहीं लिया था ।
आसमान पर बादलों के स्याह तोदों ने पूरे दिन सूर्य के प्रकाश को भी जमीन तक पहुंचने नहीं दिया था ।
हर तरफ अँधेरा ही अँधेरा सा था । फिर स्पष्ट है कि रात की तारीकी ने उन अन्धेरों में मिलकर उसे कितना खौफनाक श्री भयानक बना दिया होगा ।
बादलों की गरज और बिजली की कड़क सोने पर सुहागे का काम कर रही थी ।
उस समय शाम के आठ बजे थे लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे रात श्राधी से अधिक भीग चुकी हो, सड़कों पर चूंकि पानी खड़ा हुआ था इसलिए ट्रैफिक का प्रश्न ही नहीं था असंख्य कारें इधर-उधर खड़ी थी। (उपन्यास के प्रथम पृष्ठ से)

अस्लम शीराजी जंगलात विभाग के डायरेक्टर जनरल हैं।
बड़े ही संख्त और क्रुद्ध स्वभाव के अधिकारियों में अस्लम शीराजी की गणना होती थी मगर इतना होते हुए भी सरकार उन्हें भुगत ही रही थी । इसलिए कि अस्लम शीराजी क्रोधी स्वभाव का होने के साथ ही साथ अपने काम के मामलों में बहुत होशियार और समझदार थे।

Saturday, 24 December 2022

549. सिगरेट का आखिरी कश- राकेश मोहन

तोता परी और 'विजय-हीना' का एक्शन उपन्यास

सिगरेट का आखिरी कश- राकेश मोहन

प्यार की दीवानी एक ऐसी युवती की कहानी जो जबरदस्ती एक युवक से प्यार पाना चाहती थी। बदले में जब उसे उस युवक की नफरत मिली तो उसने एक ऐसी सिगरेट की ईजाद की जिसे पी लेने वाले को एक ऐसी चीज की जरूरत होती थी, जिसके बिना वह तड़प-तड़प कर मर जाता था। और ऐसा ही हाल युवतियों का था...
लोकप्रिय सामाजिक उपन्यास साहित्य में लेखक द्वय 'धरम राकेश' काफी चर्चित रहे हैं। धरम राकेश जी द्वारा लिखित उपन्यास के एक समय अच्छे पाठक थे। समय के साथ उपन्यास साहित्य का बाजार खत्म हो गया और यह जोड़ी भी अलग हो गयी।
सिगरेट का आखिरी कश- मोहन राकेश
सिगरेट का आखिरी कश- राकेश मोहन
  इस समय दोनों लेखक अलग-अलग लेखक में सक्रिय भी रहे। जहाँ धरम बारिया जी ने जनरल लेखक जो महत्व दिया तो वहीं 'राकेश मोहन जी' ने कुछ जासूसी उपन्यास भी लिखे। इनका लिखा एक उपन्यास 'सिगरेट का आखिरी कश' पढा, जो एक रोमांच से परिपूर्ण 'विजय-हीना' सीरीज का उपन्यास है।

Thursday, 8 December 2022

548. साढे सात करोड़- रीमा भारती

रीमा भारती, डकैती और आतंकवाद

साढे सात करोड़- रीमा भारती

रीमा भारती हिंदी उपन्यास साहित्य में  एक चर्चित नाम रहा है। दिनेश ठाकुर की‌ कलम निकली रीमा भारती को आधार बना कर बहुत से लेखकों ने लिखा। रीमा भारती नाम से एक लेखिका भी मैदान में आयी। जानकारी अनुसार लेखिका रीमा भारती के उपन्यासों पर जो लेखिका की तस्वीर थी वह दिनेश ठाकुर की पत्नी है।
  लेखिका रीमा भारती द्वारा रचित रीमा भारती सीरीज का उपन्यास 'साढे सात करोड़' पढा। यह एक रोचक उपन्यास है।
   उपन्यास प्रथम पुरुष में लिखा गया है सूत्रधार है रीमा भारती।

साढे सात करोड़- रीमा भारती

मै...!
आपकी चिर-परिचित दोस्त रीमा ... रीमा भारती । आपकी चहेती जासुसी संस्था आई.एस. सी. की नम्बर वन एजेन्ट । दुश्मनों और गद्दारों के लिये साक्षात मौत और आपके सपनों की रानी । मां भारती की शरारती, अल्हड़, किन्तु लाड़ली बेटी।

रीमा के पास सेठ त्रिभुवन दास आता है अपनी एक फरियाद लेकर।

"नमस्ते!"-  एकाएक वह भारी भरकम स्वर में बोल उठा। "कहिये!” - मैंने उसके अभिवादन का जवाब देने के बाद उससे पूछा।

"मेरा नाम त्रिभुवनदास पारिख है। मैं इसी महानगर का रहने वाला हूँ। चेम्बूर में मेरा अपना निवास है।" वह अपना परिचय देने के बाद बोला-“कुछ अपराधी किस्म के लोगों ने मेरे बेटे को हत्या के जुर्म में फँसा दिया है। जबकि उस बेचारे का उस शख्स की हत्या से कोई वास्ता नहीं था।” वह बोला- “उस पर हत्या का मुकदमा चला और तमाम सबूत उसके खिलाफ थे। कानून ने उसे फांसी की सजा सुना दी। इस महीने की तीस तारीख को मेरे बेटे को फांसी होने वाली है। भगवान के लिये मेरे बेटे को फांसी की से बचा लीजिये, वरना मैं तबाह हो जाऊंगा। जीते जी मर जाऊंगा। प्लीज भगवाने के लिये मेरे मदद कीजिये।”

Wednesday, 7 December 2022

547. काला नाग- रीमा भारती

रीमा भारती और नीना जोजफ का कारनामा

काला नाग- रीमा भारती

हिंदी जासूसी कथा साहित्य में लेखिका रीमा भारती का नाम एक्शन- थ्रिलर लेखिका के रूप में लिया जाता है। इनके लिखे एक्शन- थ्रिलर उपन्यास एक समय बहुत चर्चित थे। मूल रूप से दिनेश ठाकुर द्वारा सृजित किरदार रीमा भारती को आधार बनाकर उपन्यास लिखे गये हैं। 



    लेखिका रीमा भारती द्वारा रीमा भारती सीरीज का उपन्यास 'काला नाग' पढा। यह एक रोमांच से परिपूर्ण एक्शन उपन्यास है। जिसके कहानी आतंकवाद से संबंधित है।

      रीमा भारती 
    माँ भारती की उददंड, शरारती और लाडली बेटी थी वो। कोई उसके देश की ओर बुरी दृष्टि से देखे - अथवा उसके वतन को तबाह करने की योजना बनाये- इसे वो कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।

    माँ भारती की उददंड, शरारती और लाडली बेटी थी वो। कोई उसके देश की ओर बुरी दृष्टि से देखे - अथवा उसके वतन को तबाह करने की योजना बनाये- इसे वो कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।
       रीमा भारती भारतीय गुप्तचर विभाग की जासूस है। जिसे एक दिन भारतीय गुप्तचर विभाग का चीफ खुराना बताता है-
    "खूफिया सूत्रों से पता चला है कि कुछ आतंकवादी संगठन अब एकजुट होकर रासायनिक हथियारों के निर्माण की योजना बना रहे हैं।"

    Thursday, 1 December 2022

    546. फंदा- अनिल सलूजा

    बलराज गोगिया शृंखला का प्रथम उपन्यास
    फंदा- अनिल सलूजा

    "अभी नहीं बल्लू.... कुछ देर और, तब जाओ।”
    मुस्करा पड़ा बलराज गोगिया- “लगता है अभी दिल नहीं भरा तेरा।"
    “इतने अर्से बाद मिले हो, एक....एक दिन का हिसाब लूंगी।" बड़ी शोख अदा से बोली रजनी।
    उसकी शोख अदा ने ही बलराज गोगिया के दिल में खलबली मचा दी, खुद उसका दिल एक बार फिर वही खेल खेलने को मचलने लगा ।
    “ठीक है....।” -मुस्कराया बलराज गोगिया और रजनी के उभारों पर अपने हाथ फेरने लगा-“हम यह खेल दोबारा खेलेंगे, मगर, तुझे मेरे यहां आने का पता कैसे चला....?” और फिर
    “रूक जा रजनी.... ।”-  दहाड़ उठा बलराज गोगिया ! लेकिन, रजनी ने रूकने का कोई उपक्रम नहीं किया-पूरी रफ्तार से वह गन्ने के खेत की तरफ भाग रही थी, जिसमें से कि पुलिस वाले बाहर निकल रहे थे-पहले तो बलराज का दिल किमा, शूट कर दे उस नागिन को, लेकिन फिर कुछ सोच कर उसने जीप के एक्सीलेटर पर पैर का दबाव बढ़ा दिया।
    तोप से निकले गोले की तरह छूटी जीप । पीछे से पुलिस ने फायरिंग कर दी !
                          फन्दा - अनिल सलूजा
    खून के सैलाब में लिपटी बलराज गोगिया की ऐसी गाथा जिसमें प्रतिशोध में डूबा गोगिया एक बार फांसी के फंदे से भी नीचे उतर आया। ग्रिल, एक्शन, सस्पेंस और एडवेंचर युक्त यह कहानी एक जलजला है, तूफान है।

    Wednesday, 30 November 2022

    545. निमिष - ब्रजेश कुमार शर्मा

    क्या समय यात्रा संभव है?
    निमिष - ब्रजेश कुमार शर्मा
        
    समय किसी के लिए नहीं रुकता
    टाइम मशीन के लिए भी नहीं
    कौन थी वो रहस्यमयी लेकिन बेहद खतरनाक युवती जो निर्धारित डैडलाइन में दो लोगों को मार न पाने की स्थिति में महाविनाश की चेतावनी दे रही थी और महाविनाश से उसका क्या मतलब था?
    ...
    एक चार घंटे का साधारण-सा लगने वाला मिशन मौत का जाल बन गया था जिसमें निमिष और अवनी बुरी तरह फंसकर रह गए थे। मौत कदम-कदम पर उनके पीछे थी
    और उन्हें हर कदम पर मौत को मात देनी थी
    ...
    ये उपन्यास समय यात्रा यानि टाइम ट्रेवल पर सबसे हटकर लिखे गये उपन्यासों में से है। इसमें लेखक ने टाइम ट्रेवल से जुड़े बूटस्ट्रेप पैराडॉक्स जैसे पैराडोक्सेज पर चर्चा करते हुए उनके एक सम्भावित समाधान की थ्योरी प्रस्तुत की है।

    Tuesday, 22 November 2022

    544. सुलग उठे अंगारे- परशुराम शर्मा

    कहानी वारसिला की राजकुमारी की

    सुलग उठे अंगारे- परशुराम शर्मा

    'जी.. मैं...मगर आप यहां कब तशरीफ ले आए सर?"
    "मैं तुम लोगों को कभी भी अनजाने खतरे में नहीं छोड़ता और यदि मैं लापरवाह होता तो आज तुम अवश्य दूसरे लोक में पहुंच जाते। तुम्हारे डिनर पर मौत का पूरा सामान मौजूद था।"

    यह सीक्रेट सर्विस के बास पवन का भर्राया स्वर था। पवन...!

    वह इन्सान, जिससे सीक्रेट सर्विस के सभी एजेण्ट कांपते थे। पवन उस फरिश्ते के समान था, जो हर समय साए के समान अपने एजेण्टों को अनजान खतरों से बचाया करता था । मदन अक्सर राजेश पर पवन होने का सन्देह करता था, लेकिन अनेक अवसर ऐसे भी आए जबकि राजेश की मौजूदगी में पवन उसके सामने आ चुका था ।

    वास्तव में खुद राजेश ही सीक्रेट सर्विस का चीफ पवन था, किन्तु अवसर आने पर 'फाइव टू' भी पवन का रोल अदा करना था। इस रहस्य को 'फाइव टू' के अलावा और कोई भी नहीं जानता था ।

    मदन सोचने लगा-क्या राजेश की मृत्यु की सूचना बाॅस को मिल चुकी होगी ? यदि नहीं मिली तो वह किन शब्दों में सूचना दे। पवन के सामने ऐसी सूचना सुनाना अपने मुँह पर तमाचा मारना था, लेकिन तुरन्त ही उसे अपने विचारों पर हँसी आ गयी। (उपन्यास अंश)

    Thursday, 17 November 2022

    543. उड़न छू- अनिल मोहन

    आपका दिमाग भी हो जायेगा....
    उड़न छू- अनिल मोहन

      पाठक मित्रों से सूचना मिली थी की अहमदाबाद में एक दो जगह लोकप्रिय उपन्यास मिलते हैं। काम से आबू रोड (राजस्थान) गया हुआ था। रविवार (13.11.2022) को समय निकाल कर अहमदाबाद भी जा पहुंचा। वहाँ गुजरी बाजार (साबरमती नदी के पास) और बैंक आॅफ बड़ौदा के सामने कुछ उपन्यास मिलते हैं। वहाँ से कुछ उपन्यास खरीदे, जिनमें से अनिल मोहन जी का उपन्यास 'उड़न छू' भी शामिल है।
       लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक समय तीन लेखक ही सक्रिय थे, या बाजार में जिनके उपन्यास बिकते थे। वेदप्रकाश शर्मा, सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक और अनिल मोहन । तीनों का लेखन पूर्णतः अलग-अलग तरह का था, तीनों के पाठक भी अलग-अलग नजर आने लगे।
    आबू रोड़ से रायसिंहनगर,  यात्रा का साथी उपन्यास
      अनिल मोहन जी ने अपने कई पात्र खड़े किये हैं जिनमें से एक है अर्जुन भारद्वाज, जो एक प्राइवेट डिटेक्टिव है। (हालांकि इस उपन्यास में‌ अर्जुन का कोई परिचय नहीं दिया गया)
    प्रस्तुत उपन्यास 'उड़न छू' अर्जुन भारद्वाज सीरीज का उपन्यास है। जिसमें उसके साथ इंग्लैंड का प्रसिद्ध जासूस बॉण्ड भी है- जेम्स बॉण्ड।- वो लम्बा, ऊँचा कद, नीली आँखें, लाल सुर्ख चेहरा, होंठ सिगरेट पीने की वजह से हल्के बैंगनी। (पृष्ठ-07)
      अब चर्चा कथानक पर-

    Thursday, 3 November 2022

    542. ब्लैकमेल- संतोष पाठक

    तलाश ब्लैकमेलर और हत्यारे की
    ब्लैकमेल- संतोष पाठक

    'सुकन्या श्रीवास्तव!’ - मैंने सिगरेट का एक गहरा कश खींचा - पालीवाल प्रोडक्शन हाउस की मार्केटिंग हैड। एक ऐसी लड़की जो सात साल पहले मर्डर चार्ज में चार महीने की सजा भुगत चुकी थी। जो अपने बॉस के बेटे के साथ शादी करने जा रही थी। ऐसी लड़की को कोई ब्लैकमेल कर रहा था। और ऐसे ग्राउंड पर कर रहा था, जो शादी वाला मामला न आ फंसा होता तो सुकन्या एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल चुकी होती। पुलिस में कंप्लेन भी दर्ज करा देती तो कोई बड़ी बात नहीं होती। मगर अभी ब्लैकमेलर के हाथों की कठपुतली बनना उसकी मजबूरी थी। (किंडल से)
         उपन्यासकार संतोष पाठक वर्तमान में उपन्यास साहित्य का वह ज्वलंत सितारा है जिसका प्रकाश निरंतर फैल रहा है। जिस तरह से संतोष पाठक जी लेखन कर रहे हैं, उपन्यास प्रकाशित कर रहे हैं वह स्वयं में एक कीर्तिमान है।
       वर्तमान उपन्यास साहित्य में मर्डर मिस्ट्री लेखन छाया हुआ है। प्रस्तुत उपन्यास भी मर्डर मिस्ट्री रचना है,जिसका आधार चाहे 'ब्लैकमेल' दिखायी देता है, पर ऐसा है नहीं।
      कहानी है प्राइवेट डिटेक्टिव विक्रांत गोखले की। जिसके पास एक कन्या आती है अपना केस लेकर।
    “मैं डॉक्टर हूं मैडम और आप पेशेंट हैं। मर्ज छिपायेंगी तो निदान कैसे कर पाऊंगा? उन हालात में क्या बीमारी बढ़ती नही चली जायेगी?”
    “नहीं छिपाने की कोई मंशा नहीं है, वरना मैं यहां आती ही क्यों?”
    “दैट्स गुड, बताइये प्रॉब्लम क्या है?”
    “मुझे कोई ब्लैकमेल कर रहा है।”

    Wednesday, 2 November 2022

    541. यामी- आलोक सिंह खालौरी

    प्यारा हमारा अमर रहेगा...
    यामी- आलोक सिंह खालौरी
    महत्वाकांक्षा जब एक सीमा से आगे बढ़ जाती है, तो वो एक जिद, एक जुनून का रूप ले लेती है। ऐसी ही एक महत्वाकांक्षा की कहानी है-ईसा से 500 वर्ष पूर्व एक तांत्रिक तुफैल और उसकी शिष्या कूटनी माया की, जिन्होंने ईश्वरीय सृष्टि के समांतर एक सृष्टि निर्मित करने की महत्वाकांक्षा पाल ली थी। उनकी इस महत्वाकांक्षा में जाने अंजाने ही सहायक बन गई भोली भाली गंधर्व कन्या यामी। यामी-जो अपने प्रेम की तलाश में गंधर्व लोक से पृथ्वी पर आई थी। विधि के विधान ने माया, तुफैल और यामी को समय से 2500 साल आगे सन 2022 में ला फेंका। सन 2022 – जहाँ चाहे अनचाहे दो अन्य व्यक्ति भी माया, तुफैल और यामी के इस द्वंद का मोहरा बन गए -एक युवा आई०पी०एस० और दूसरे इस किताब के लेखक आलोक सिंह खुद। फिर क्या हुआ 2022 में ? कौन जीता ये जंग ? माया या यामी ? क्या यामी अपनी मोहब्बत की तलाश कर पाई ? तुफैल और माया समांतर सृष्टि की स्थापना के अपने उद्देश्य में कहाँ तक सफल हुए ? ऐसे ही अनेक प्रश्नों का उत्तर है यामी। (किंडल से)
       आलोक सिंह खालौरी उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी हैं। अपनी पाँच रचनाओं के दम पर पाठक वर्ग में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं।
       प्रस्तुत कहानी 'यामी' समय यात्रा पर आधारित है। एक युग से दूसरे युग में प्रवेश की कथा है। प्रेम और प्रकृति के समांतर सत्ता स्थापना की कथा है यामी।