चीनी षड्यंत्र और भारतीय जासूस
खून की कसम - वेदप्रकाश काम्बोज
वेदप्रकाश काम्बोज उपन्यास साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं और उनका एक प्रसिद्ध पात्र है विजय । जासूस सम्राट विजय । विजय को आधार बनाकर काम्बोज जी ने विभिन्न प्रकार के उपन्यास लिखे हैं जिनमें मुख्य हैं अंतर्राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर आधारित उपन्यास । ऐसा ही कहानी है प्रस्तुत उपन्यास की जहां एक पात्र ने विजय को खून की कसम दी थी, क्या थी वह खून की कसम।अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र पर आधारित एक रोचक उपन्यास है -खून की कसम।
भारतीय सीक्रेट सर्विस में एक बहुत बड़ा हेर फेर हो गया ।
चीनी खतरे को देखते हुए प्रतिरक्षा मंत्रालय से विजय के पास आदेश आए कि सीक्रेट सर्विस का कुछ विस्तार किया जाए ताकि चीनी कार्यवाहियों को और देश के दुश्मनों की कार्यवाहियों को समय पर रोक कर देश की रक्षा की जाए ।
सीक्रेट सर्विस में मिलिट्री पुलिस और सी. आई. बी. से कुछ व्यक्ति भरती किए गए ।
सीक्रेट सर्विस का चीफ आफ स्टाफ होने के कारण सीक्रेट-सर्विस के विस्तार के साथ विजय का डैस्क वर्क भी बहुत बढ़ गया। इतना बढ़ गया कि अब किसी भी रूप में उस ढंग से काम नहीं कर सकता था जिस ढंग से कि वह अब तक करता आया था ।
अब उसके लिए काम यही था कि वह डैस्क पर बैठ कर एजेन्टों की रिपोर्टों की जांच करे और उसके अनुसार उन्हें आगे काम करने के लिए आदेश दे ।
लेकिन विजय को यह कार्य पसन्द नहीं था ।
वह दूसरों को खतरे में जूझने का आदेश देने की अपेक्षा स्वयं खतरे से जूझना अधिक पसन्द करता था ।
फलस्वरूप सीक्रेट सर्विस का विस्तार होने के साथ ही विजय ने अपना त्याग पत्र पेश कर दिया ।( खून की कसम- वेदप्रकाश काम्बोज, प्रथम पृष्ठ से)
भारत के सह अस्तित्व और 'हिंदी -चीनी भाई-भाई' की भावना को ठोकर मारते हुये चीन ने सन् 1962 में भारत पर आक्रमण कर पूरे विश्व को चकित तो किया ही साथ में हमारी विचारधारा को भी तोड़ दिया। भारतवासियों के लिए यह युद्ध अकल्पनीय था। और जिसका परिणाम भारत को भुगतना भी पड़ा ।
भारतीय सीक्रेट सर्विस के चीफ ब्लैक बाॅय ने विजय को याद किया ।
- ब्लैक ब्वाय ने गला साफ किया और कहा, 'तुम जानते हो कि चीनी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए कई आवश्यक कदम उठाये हैं। उन्हीं आवश्यक कदमों में से एक कदम यह उठाया गया कि आसाम में शिलाँग के निकट खासी हिल्स में एक सैनिक प्रतिष्ठान स्थापित किया गया । इस सनिक प्रतिष्ठान का उद्देश्य जहाँ देश की उत्तरी पूर्वी सीमा की रक्षा में सहयोग देना है, वहाँ इसमें कुछ आधुनिक हथियारों का निर्माण भी किया जा रहा है ।...'
इसी प्रतिष्ठान ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और भी देना था लेकिन उस से पहले ही एक ऐसी घटना घटित हो गयी की सीक्रेट सर्विस को देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये तुरंत कार्यवाही करनी पड़ी थी। सीक्रेट सर्विस के चीफ ब्लैक बाॅय (पवन) ने देश के प्रसिद्ध जासूस विजय को इस प्रतिष्ठान, देश की सुरक्षा और चीन की नीतियों के विषय में बताते हुये कहा- 'उस प्रतिष्ठान के निर्माण में दो मुख्य व्यक्तियों का हाथ है, दोनों आपस में भाई हैं, एक अमरनाथ मुखर्जी और दूसरा कमलनाथ मुखर्जी। पिछले चीनी हमले के समय कमलनाथ मुखर्जी पर चीन समर्थित व्यक्ति होने का आरोप लगाया गया था लेकिन जब उसके विरुद्ध जाँच की गई तो उसे बिल्कुल निर्दोष पाया गया। वही कमलनाथ मुखर्जी दो दिन हुए अचानक ही गायब हो गया और अपने साथ उस प्रतिष्ठान से सम्बन्धित कुछ आवश्यक कागजात भी ले गया है।'(पृष्ठ- 12)
विजय और अशरफ जा पहुंचते हैं आसाम के शिलांग शहर में जहां था वह प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान और जहां दो भाई कमलनाथ मुकर्जी और अमरनाथ मुकर्जी कार्यरत थे। दोनों के पास कोई विशेष सबूत नहीं थे। उनके पास कमलनाथ की प्रेमिका भारती के विषय में संक्षिप्त जानकारी मात्र थी। और यह भी पता था कमलनाथ अपनी प्रेमिका से शिलांग के प्रसिद्ध होटल लिटल क्रो में मिलता था। विजय और अशरफ उसी होटल में ठहरते हैं । होटल का मालिक एक अंग्रेज था और उसका सहयोगी नानकुंग पो एक चीनी व्यक्ति था। दोनों व्यक्ति विजय और अशरफ की नजर में संदिग्ध थे। पर कमलनाथ का कहीं कुछ अता-पता न था ।
एक ऐसे आदमी को खोजना था जो बिल्कुल महत्वपूर्ण कागज लेकर गायब हो गया था और जिसके सम्बन्ध में यह भी धारणा थी कि वह दुश्मनों से मिला हुआ है ।(उपन्यास अंश)
विजय और अशरफ दिन रात कमलनाथ की खोज मे रहते हैं। उन्हें कुछ संदिग्ध लोग मिले, कुछ अधूरे तथ्य हाथ लगे, कुछ लड़ाई- झगड़े हुये पर सब कुछ होते हुये भी कमलनाथ हाथ न लगा।
सिर्फ विजय और अशरफ ही नहीं एक और पार्टी भी कमलनाथ को खोज रही थी और उसी पार्टी ने अशरफ और विजय को भी मात दे रही थी-
'ठीक है ।' नानकुंग पो ने गरदन हिलाते हुए कहा - 'विजय और अशरफ को मुंजाल के हवाले करो । वह उन्हें ठिकाने लगा देगा और तुम कमलनाथ की खोज करो । अपने काम में जरा सी ढील मत आने देना । कमलनाथ जल्दी से जल्दी उन कागजातों समेत हमारे कब्जे में होना चाहिए ।'
अब विजय - अशरफ को जहां एक तरफ कमलनाथ की खोज करनी और महत्वपूर्ण कागजों को सुरक्षित रखना है वहीं विरोधी पार्टी का भी सामना करना है, उनकी सच्चाई भी जाननी है।
उपन्यास का समापन काफी रोचक है । जो प्रभावित भी करता है। विदेशी पात्रों का अच्छा इस्तेमाल किया गया है।
कहानी के केंद्र में कमलनाथ मुखर्जी का रहस्यमय ढंग से गायब होना और महत्वपूर्ण सैन्य दस्तावेजों का लुप्त होना है। जासूस सम्राट विजय तथा उसका सहयोगी अशरफ अनेक कठिनाइयों, संघर्षों और षड्यंत्रों का सामना करते हुए सत्य तक पहुँचने का प्रयास करते हैं। अंततः यह स्पष्ट होता है कि देश के विरुद्ध सक्रिय विदेशी शक्तियाँ उन दस्तावेजों को प्राप्त कर भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाना चाहती थीं। विजय अपनी सूझबूझ, साहस और देशभक्ति के बल पर शत्रुओं की योजनाओं को विफल कर देता है तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि सिद्ध करता है।
हास्यास्पद:-
उपन्यास का एक घटनाक्रम मुझे बहुत अजीब और हास्यास्पद लगा -
उसने कमरे के दरवाजे बन्द किए और अन्दर के दरवाजे को मजबूती के साथ बन्द करने के बाद उसने बाहर के दरवाजे को भी बन्द किया । इधर उधर सावधानी के साथ देखा और फिर सिर से एक बाल तोड़ कर उसने दरवाजों के जोड़ पर थूक के साथ चिपका दिया ताकि अगर कोई दरवाजा खोल कर अन्दर प्रविष्ट हुआ हो
'खून की कसम' मात्र एक उपन्यास नहीं है यह भारत भूमि के प्रति समर्पित व्यक्तियों की कहानी है । यह कहानी है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले उस जाल की जो अपने पड़ोसी देशों की उन्नति सहन नहीं पाता।
एक तरफ भारत 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के नारे लगा रहा था और दूसरी तरफ चीन भारत की प्रगति में बाधा बन रहा था, भारत को खत्म करना चाह रहा था, भारत भूमि पर अपना अधिकार जता रहा था।
भारत और चीन के संबंधों के पीछे छिपे काले रहस्य का नाम है खून की कसम।
तथ्यात्मक:-
और विजय सीक्रेट सर्विस के चीफ आफ स्टाफ के पद को छोड़कर एक एजेन्ट बन गया ।
अब उसका गुप्त नाम था फिलिप । गुप्त नम्बर था एक जीरो नौ, बाकी सब सुविधायें उसे पहले ही जैसी थीं। अन्तर केवल इतना था कि वह सीक्रेट सर्विस का चीफ नहीं था ।
सीक्रेट सर्विस का चीफ आफ स्टाॅफ बना ब्लैक ब्वाय ।
उपन्यास यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तियों के त्याग, साहस और निष्ठा ही किसी देश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। साथ ही, यह भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि में छिपे राजनीतिक और सामरिक खतरों की ओर भी संकेत करता है। रोचक घटनाक्रम, रहस्य, रोमांच और देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण यह उपन्यास पाठकों को अंत तक बाँधे रखता है तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में सफल सिद्ध होता है।
निष्कर्ष:-
वेदप्रकाश काम्बोज का उपन्यास खून की कसम केवल एक जासूसी और रोमांचक कथा नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समर्पण की प्रेरक कहानी भी है। उपन्यास में चीन समर्थित अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों, देशद्रोही शक्तियों तथा भारत की सामरिक सुरक्षा के विरुद्ध रची गई योजनाओं का प्रभावशाली चित्रण किया गया है।
उपन्यास- खून की कसम
'खून की कसम' मात्र एक उपन्यास नहीं है यह भारत भूमि के प्रति समर्पित व्यक्तियों की कहानी है । यह कहानी है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले उस जाल की जो अपने पड़ोसी देशों की उन्नति सहन नहीं पाता।
एक तरफ भारत 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के नारे लगा रहा था और दूसरी तरफ चीन भारत की प्रगति में बाधा बन रहा था, भारत को खत्म करना चाह रहा था, भारत भूमि पर अपना अधिकार जता रहा था।
भारत और चीन के संबंधों के पीछे छिपे काले रहस्य का नाम है खून की कसम।
तथ्यात्मक:-
और विजय सीक्रेट सर्विस के चीफ आफ स्टाफ के पद को छोड़कर एक एजेन्ट बन गया ।
अब उसका गुप्त नाम था फिलिप । गुप्त नम्बर था एक जीरो नौ, बाकी सब सुविधायें उसे पहले ही जैसी थीं। अन्तर केवल इतना था कि वह सीक्रेट सर्विस का चीफ नहीं था ।
सीक्रेट सर्विस का चीफ आफ स्टाॅफ बना ब्लैक ब्वाय ।
उपन्यास यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तियों के त्याग, साहस और निष्ठा ही किसी देश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। साथ ही, यह भारत-चीन संबंधों की पृष्ठभूमि में छिपे राजनीतिक और सामरिक खतरों की ओर भी संकेत करता है। रोचक घटनाक्रम, रहस्य, रोमांच और देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण यह उपन्यास पाठकों को अंत तक बाँधे रखता है तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में सफल सिद्ध होता है।
निष्कर्ष:-
वेदप्रकाश काम्बोज का उपन्यास खून की कसम केवल एक जासूसी और रोमांचक कथा नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समर्पण की प्रेरक कहानी भी है। उपन्यास में चीन समर्थित अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों, देशद्रोही शक्तियों तथा भारत की सामरिक सुरक्षा के विरुद्ध रची गई योजनाओं का प्रभावशाली चित्रण किया गया है।
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