अनिल सलूजा का एक जबरदस्त उपन्यास
बलराज गोगिया सीरीज
धर्मराज - अनिल सलूजा
करते है बात आज अनिल सलूजा जी के उपन्यास 'मास्टर माइण्ड' की । वह मास्टर माइण्ड था और यही गुण उसके जीवन के लिए अब संकट बन चुका था ।
अच्छा भला दुकान चला रहा था बलराज गोगिया । लेकिन वहां के थानेदार की नजर उस पर पड़ गई। थानेदार मजबूर था। उसने उससे मदद मांगी और जब बलराज गोगिया ने हां की तो ऐसा तूफान उठा कि....
सर्वप्रथम हम मास्टर माइण्ड उपन्यास के प्रथम पृष्ठ/ दृश्य को देखते हैं। बाकी चर्चा बाद में...
वह एक साधारण सा पुलिस थाने का ऑफिस था। जिसमें पड़ी साधारण सी टेबल पर रखी फाईलों के करीब रखा लाल रंग का फोन घनघनाया।