Thursday, 30 October 2025

670. अनिल सलूजा

 अनिल सलूजा का एक जबरदस्त उपन्यास

बलराज गोगिया सीरीज

Tuesday, 28 October 2025

679. धर्मराज- अनिल सलूजा

यहां इंसाफ होता है। 
धर्मराज - अनिल सलूजा
#बलराज गोगिया- राघव सीरीज

मरने के बाद इंसान धर्मराज के दरबार में पहुंचता है, जहां उसके कर्मों के अनुसार उसे दण्डित किया जाता है । मगर क्या धरती पर भी कोई धर्मराज है जो पापी को उसके पापों का फल यहीं दे सके ।

धर्मराज - अनिल सलूजा

   अनिल सलूजा जी की इन दिनों पढी जा रही उपन्यासों की समीक्षा में 'धर्मराज' एक रोचक उपन्यास है। यह पात्र बलराज गोगिया की शांतिपूर्ण जिंदगी में उठे तूफान का वर्णन है।

उपन्यास समीक्षा से पूर्व हम पढते हैं 'धर्मराज' उपन्यास का प्रथम पृष्ठ ।

"बचाओ...बचा...ओ... हैल्प...।"
"अबे मुंह बन्द कर इसका। साली की चीखें छह मील दूर तक जा रही हैं। बन्द कर इसका मुंह।"
तुरंत एक हाथ जमीन पर पड़ी लड़की के मुंह पर कुकर के ढक्कन की तरह फिट हो गया।

Monday, 27 October 2025

678. मास्टर माइण्ड- अनिल सलूजा

बलराज गोगिया के शांतिमय जीवन में तूफान
मास्टर माइण्ड- अनिल सलूजा

करते है बात आज अनिल सलूजा जी के उपन्यास 'मास्टर माइण्ड' की ।‌ वह मास्टर माइण्ड था और यही गुण उसके जीवन के लिए अब संकट बन चुका था ।
अच्छा भला दुकान चला रहा था बलराज गोगिया । लेकिन वहां के थानेदार की नजर उस पर पड़ गई। थानेदार मजबूर था। उसने उससे मदद मांगी और जब बलराज गोगिया ने हां की तो ऐसा तूफान उठा कि....

सर्वप्रथम हम मास्टर माइण्ड उपन्यास के प्रथम पृष्ठ/ दृश्य को देखते हैं। बाकी चर्चा बाद में...

वह एक साधारण सा पुलिस थाने का ऑफिस था। जिसमें पड़ी साधारण सी टेबल पर रखी फाईलों के करीब रखा लाल रंग का फोन घनघनाया।

Sunday, 26 October 2025

677. नृशंसक - अनिल सलूजा

मुम्बई की किन्नर से बलराज गोगिया की टक्कर
 नृशंसक - अनिल सलूजा
बलराज गोगिया सीरीज

अपने यार की टांग लगवाने के लिए बलराज गोगिया साठ लाख रुपये और सुनीता- राघव के साथ जा पहुंचा मुम्बई । मगर यहाँ हंगामा पहले से ही उसका इंतजार कर रहा था ।

"डिंग...यं...ग.....।" कालबैल बजी।
एक ईजी चेयर पर बैठे हुकूमत शाह ने किचन की तरफ देखते हुए आवाज लगाई-
"ओ वेखीं ओये (ओ देखना ओये) गुड्डू-कौन आया वे।"
कहते हुए उसने अपने बगल में रखी बैसाखी उठाकर अपनी कटी हुई और साबुत टांग के मध्य रख ली।
तभी किचन में से गुड्डू निकला।

Friday, 24 October 2025

676. राघव की वापसी - अनिल सलूजा

जम्मू के डाॅन से बलराज गोगिया की टक्कर
राघव की वापसी - अनिल सलूजा
बलराज गोगिया सीरीज-
#साठ लाख सीरीज + 

नमस्ते पाठक मित्रो,
   आज प्रस्तुत है एक्शन लेखक अनिल सलूजा जी के पात्र 'बलराज गोगिया' शृंखला के उपन्यास 'राघव की वापसी' की समीक्षा । यह एक एक्शन प्रधान और 'लंगड़ा यार / साठ लाख' शृंखला का उपन्यास है। जिसमें बलराज गोगिया, राघव और सुनीता जम्मू के एक गैंगस्टर से टकराते नजर आये हैं।
सर्वप्रथम हम  राघव की वापसी उपन्यास का प्रथम पृष्ठ पढते हैं।
                     खुली अलमारी के सामने खड़ी सुनीता ने बांये हाथ मे पकड़ी पांच-पांच सौ के नोटों की गड्डी में से बारह नोट गिन कर बाकी नोट अलमारी के लॉकर में रखे और अलमारी बन्द कर वापिस मुड़ी तो नजर सामने कुर्सी पर बैठे राघव पर पड़ी जो हाथ में पकड़े रिमोट के सामने टी.वी. का चैनल बदल रहा था।
उसकी इकलौती लटक रही टांग आगे-पीछे झूल रही थी और घुटने के पास कटी हुई दूसरी टांग कुर्सी से थोड़ी आगे निकली हुई थी।
कमरे में जहां राघव बैठा था-वहां तीन कुर्सियां और पड़ी थीं और दो कुर्सियां सामने थीं और एक उसके बाईं तरफ थी।
बीच में साधारण-सी सेंटर टेबल रखी थी।
कोने में रखा टी.वी. भी साधारण था और वो एक ऊंची टेबल पर रखा हुआ था।

Tuesday, 21 October 2025

675. मुझे मौत चाहिए - अनिल सलूजा

दिल्ली के डाॅन से बलराज गोगिया की टक्कर
मुझे मौत चाहिए - अनिल सलूजा
# साठ लाख शृंखला +
- बलराज गोगिया सीरीज- 14

  एक कातिल को ढूंढकर उस मौत के घाट उतारने का काम मिला था बलराज गोगिया को। तफ्तीश करते हुये वह आगे बढा तो उल्टा अपनी ही जान के लाले पड़ गये उसे और....
और किसने कहा था- मुझे मौत चाहिए

"नहीं... नहीं... भगवान के लिये मेरे बेटे को कुछ मत कहना... मुझ गरीब का बस एक ही बेटा है...। अगर उसे कुछ हो गया तो मेरी पत्नी रो-रो कर अपनी जान दे देगी...। त... तुम मेरी पत्नी की हालत जा कर देखो... बेटे की जुदाई में वह मरने को हो रही है।" अपने कमरे की तरफ बढ़ते बलराज गोगिया के कदम वहीं ठिठक गये।
मोहन गेस्ट हाउस के बारह नम्बर कमरे में ठहरा हुआ था वह... ।

Friday, 10 October 2025

674. शूटर- अनिल सलूजा

एक मंत्री की हत्या का मामला
शूटर- अनिल सलूजा
- बलराज गोगिया- राघव सीरीज - 05

   आज हम चर्चा कर रहे हैं अनिल सलूजा जी और बलराज गोगिया सीरीज के पांचवें उपन्यास शूटर की। यह एक एक्शन-थ्रिलर उपन्यास है। बलराज गोगिया एक महिला की सहायता के लिए मंत्री की हत्या करने मैदान में उतरता है और एक गहरी साजिश में फंस जाता है।
     आपने पिछले दो भागों में विभक्त उपन्यास 'बारूद की आंधी' और 'खूंखार' में पढा होगा की बलराज गोगिया और राघव का पासपोर्ट और वीजा तैयार है और दोनों शांति का जीवन जीने के लिए देश छोड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचते हैं लेकिन वहां की विक्टर बनर्जी के धोखे के चलते पुलिस पहुँच जाती है और दोनों जान बचाकर दिल्ली छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
एक लम्बे समय पश्चात दोनों आगरा से दिल्ली पहुंचते हैं और वह भी सीधे विक्टर बनर्जी के दरवाजे पर दस्तक देते हैं।

"खट... खट... खट।"
दरवाजे पर दस्तक पड़ी।
विक्टर बनर्जी फोल्डिंग पलंग से नीचे उतरा... चप्पल पहनी और चश्मा उतारकर उसे अपनी मैली शर्ट के पल्लू से साफ करते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ा।
"कौन...?"

Sunday, 5 October 2025

672. बारूद की आंधी- अनिल सलूजा

बलराज गोगिया का तीसरा कारनामा
बारूद की आंधी- अनिल सलूजा

बलराज गोगिया सीरीज- 03

"अब क्या ख्याल है ?*
"कैसा ख्याल?"
"भई विदेश जाने का।
"वो तो जाना ही है, यहां रहा तो कभी न कभी पुलिस के हत्थे चढ़ जाऊंगा और अगर में एक बार पकड़ा गया तो इस बार कोई अवतार सिंह या इकबाल बचाने के लिए नहीं आने वाला और अदालत भी जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ाने का हुक्मनामा जारी कर देगी।"
"एक जरिया था। एक वही दोस्त था लेकिन यह भी हरामजदगी दिखा गया।" एक लंबी सांस छोड़ते हुए राघव बोला।
"इसमें तेरा क्या कसूर था और फिर तूने उसे उसकी गद्दारी की सजा खुद अपने हाथों से दे दी थी।" बलराज गोगिया रुमाल निकालकर मुंह पौंछते हुए बोला।
     गंगानगर पुलिस के हाथों आते-आते बचे थे बलराज गोगिया और राघव अगर ऐन वक्त पर वे इन्दिरा गांधी नहर में छलांग न मार गए होते तो दोनों की लाशें, वहीं पुल पर हो बिछी नजर आती।

Friday, 3 October 2025