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Tuesday, 8 June 2021

438. बैंक वैन राॅबरी- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

विमल के विस्फोट संसार की छटी झलक
बैंक वैन राॅबरी- सुरेन्द्र मोहन पाठक

यात्रा के दौरान मेरे पास एक-दो उपन्यास होते हैं जो मेरी यात्रा को सुखद बनाते हैं।
      ग्रीष्मकालीन अवकाश के पश्चात पुनः विद्यालय आरम्भ हो गये। Lockdown की वजह से विद्यालय जल्दी बंद हो गये थे और इस बार विद्यालय जल्दी खुल भी गये। इस बार घर से विद्यालय जाते वक्त प्रस्तुत उपन्यास मेरा साथी था। 
बैंक वैन राॅबरी- सुरेन्द्र मोहन पाठक

आपके प्रिय पात्र सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल उर्फ विमल कुमार खन्ना उर्फ गिरीश माथुर उर्फ बनवारी लाल तांगेवाला उर्फ रमेश कुमार उर्फ कैलाश मल्होत्रा उर्फ बसंत कुमार मोटर मैकेनिक उर्फ नितिन मेहता उर्फ कालीचरण उर्फ आत्मा राम उर्फ पेस्टन जी नौशेरवानजी घड़ीवाला उर्फ अरविंद कौल उर्फ राजा गजेन्द्र सिंह का हौलनाक कारनामा। 

Saturday, 29 September 2018

141. दौलत और खून- सुरेन्द्र मोहन पाठक

दौलत और खून- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
विमल सीरिज -02

अगर आदमी की किस्मत बुरी हो तो उसका हर अच्छा काम भी बुरा हो जाता है, अगर किस्मत बुरी हो तो घर बैठे भी मुसीबत आ जाती है। ऐसी ही बुरी किस्मत है सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल उर्फ विमल खन्ना उर्फ गिरीश की।
विमल एक मुसीबत से बचता है तो आगे एक और नयी मुसीबत तैयार होती है। उसकी बेबस जिंदगी का हर कोई फायदा उठाना चाहता है।

'दौलत और खून' उपन्यास विमल सीरिज का दूसरा उपन्यास है लेकिन दोनों की कहानी पूर्णतः अलग-अलग है, पर दोनों कहानियों को दो बातें आपसे में जोड़ती हैं। एक तो स्वयं विमल और दूसरा वह हार जो विमल 'लेडी शांता गोकुलदास' से चुरा कर लाया था।(उपन्यास 'मौत का खेल')
        यही हार इस बार विमल के लिए मौत का हार बनता है। मुंबई से फरार विमल जा पहुंचता है‌ मद्रास। तंगहाली की जिंदगी जीने वाला विमल उस हार को बेच कर कुछ रुपयों की व्यवस्था करना चाहता है और यहीं से वह कुछ गलत लोगों की‌ नजर में चढ जाता है। "अपना नाम गिरीश बताने वाला यह युवक शर्तिया वही विमल कुमार खन्ना है जिसकी लेडी शांता गोकुलदास की हत्या के इल्जाम में पुलिस को तलाश है।" (पृष्ठ-120)