कैसर निखट्टू फंसा अपराधियों के जाल में
भेड़िये की तस्वीर- आरिफ मारहर्वी
Hindipulpfiction
जब तक इस देश की भूमि पर कैसर जीवित है, तुम लोगों का कोई भी मानवघाती षड्यन्त्र सफल नहीं हो सकता ।आरिफ मारहर्वी साहब का प्रसिद्ध पात्र कैसर देश के दुश्मनों का ललकारता और उनके खतरनाक इरादों को ध्वस्त करता है। जासूस कैसर निखट्टू का एक एक्शन उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर'।
नमस्कार पाठक मित्रो,
आप #Svnlibrary पर पढ रहे हैं जासूसी उपन्यासकार आरिफ मारहर्वी साहब के एक्शन उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर' की समीक्षा ।जैसे ही जीप होटल के सामने आकर रुकी, दरबान ने अटेनशन होकर कैसर को सलाम मारा और कैसर बौखलाहट में जीप से उतरते-उतरते ठोकर खाकर गिरते-गिरते बचा। और फिर इस प्रकार फुर्ती से आगे बढ़कर उसने दरबान से हाथ मिलाया जैसे उसकी दरबान से वर्षों पुरानी जान-पहचान रही हो । तथा अब सहसा बहुत दिनों पश्चात भेंट हुई हो दरबान के बत्तीसों दाँत निकल पड़े ।
कैंसर दरबान से उसके बच्चों के कुशल समाचार पूछकर वेग पूर्वक होटल की ओर बढ़ा ही था कि उसे पीछे से झल्लाया हुआ स्वर सुनाई दिया ।
'अरे अरे!'
कैंसर बौखलाकर मुड़ा और झपटकर सोजी के समीप आता हुआ बोला ।
'अरे बाप रे, मैं तो भूल ही गया था कि तुम भी मेरे साथ हो!'
सोजी जीप से उतरकर, जीप के निकट ही खड़ी हुई फाड़-खाने वाली दृष्टि से कैसर को घूर रही थी। कैसर ने बड़ी फुर्ती से जीप के पिछले भाग की ओर अपना मुख फेरा और जीप में से होल्डाल, अटैचियाँ, बास्केट और यात्रा-बैग आदि अपने शरीर के चारों ओर लादकर सोजी के समीप आया और जल्दी से बोला -
'आओ, अन्दर चलें ।'
दरबान उसे आश्चर्यचकित होकर देख रहा था।
सोजी ने क्रोध भरे स्वर में कहा-
'यू ईडियट; यह सामान लादकर तुम अन्दर ले जाओगे ?'
'हाँय, फि... फिर ?' कैंसर ने मूर्खों के समान आँखें फाड़कर पूछा ।
इतने में दरबान लपककर उनके निकट आ गया। और बोला-
'अरे श्रीमान, आप क्यों कष्ट करते हैं ?'
'अरे वाह ! कष्ट कैसा? सामान तो हमारा ही है।'
'श्रीमान, आप अन्दर जाकर वेटर से कह दीजिये। वह
आकर स्वयं ले जायेगा।'
'ओहो यह तो मैं भूल ही गया था।' (भेड़िये की तस्वीर- आरिफ मारहर्वी, उपन्यास का प्रथम पृष्ठ)
जासूस कैसर उर्फ निखट्टू अपनी सहयोगी सोजी के साथ राजगढ पहुंचता है जहां इनकी मुलाकात विदेशी फिल्म हिरोईन मारिया से होती है। मारिया अपनी टीम के साथ राजगढ में एक फिल्म की शुटिंग करने आयी थी और यहीं उसकी मुलाकात कैसर से होती है और वह कैसर की 'फैन' हो जाती है।
यहीं सोजी का अपहरण हो जाता है और फिर कैसर और सोजी दोनों उनकी तलाश में निकलते हैं और अपहरणकर्ता सोजीऔर कैसर का भी अपहरण कर लेते हैं । पर अपहरणकर्ता बहुत ही शरीफ आदमी होते हैं वह सोजी और मारिया को मुक्त कर देते हैं और अब उनके कब्जे में कैसर होता है। वैसे भी अपहरण कर्ता कैसर को पकड़ना चाहते थे और अब कैसर उनके कब्जे में था ।
इधर सीक्रेट सर्विस का एक और जासूस राणा अब सोजी के मदद के लिए राजगढ पहुंच चुका था । अब कैसर को अपराधियों के कब्जे से मुक्त करवाने के लिए सोजी और राणा तैयार थे पर उन्हें यह नहीं पता था कि कैसर किसके कब्जे में है और कहां है ।
सोजी और राणा कुछ मददगारों के सहयोग से कैसर की खोज में निकलते हैं और सब अपराधियों के कब्जे में पहुंच जाते हैं। और यहां सब फिल्मी कहानी और दृश्य बन जाते हैं। ठीक हिंदी फिल्मों के क्लाइमैक्स की तरह जहां नायक के पक्षधर बंधे हुये हैं और खलनायक और उसके कर्मचारी हथियार लिए खड़े हैं और अंत में बाजी पलटती है और हथियार नायक के हाथ में आ जाता है और वह खलनायक को खत्म कर देता है।
यहां एक वनमानुष है और प्रशिक्षित है और महिलाओं की कामवासना का शौकीन है। वह खलपात्र की एक महिला के साथ अभिसाररत होता है और जब सोजी भी वहां पहुंचती है तो वह सोजी की ओर आकृष्ट होता है और फिर अपने उपन्यास के हीरो को एक्शन लेना पड़ता है।
कहानी खत्म....क्योंकि यहां खलनायक खत्म हो जाता है।
उपन्यास में कैसर के विषय में ज्यादा कुछ नहीं बताया गया है वैसे आरिफ मारहर्वी साहब के नियमित पाठक जानते हैं कैसर निखट्टू एक सरकारी जासूस है । वह मार्शल क्यू के अधीन सीक्रेट सर्विस में कार्य करता है । उनके सहयोगी सोजी और राणा हैं।
कैसर सचमुच एक जासूस है और वह प्राइवेट भी नहीं बल्कि एक सरकारी जासूस है ।
उपन्यास शीर्षक:- उपन्यास का शीर्षक 'भेड़िये की तस्वीर' क्यों है। यह कहीं से भी उचित शीर्षक नहीं है न तो कहीं भेड़िया है और नहीं कहीं तस्वीर और न ही यह को प्रतीकात्मक शीर्षक है। इस शीर्षक का इस उपन्यास से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।
उपन्यास में एक डाकू का काफी वर्णन है हालांकि वह स्वयं उपस्थित नहीं है तो उसके रोचक विवरण से काम चला लेते हैं यह विवरण 80 के दशक की फिल्मों की याद दिलाता है।
लगभग दस वर्ष पूर्व की बात है। सोहराब अत्यन्त दरिद्र परिवार का सदस्य था। उसे एक करोड़पति की पुत्री से प्रेम हो गया । लड़की भी उसके लिये अपने प्राण तक देने के लिए तत्पर थी लेकिन रीति तो बहुत प्राचीन है कि धनवान एवं निर्धन के मध्य सदैव दीवार खड़ी रहती है। उस लड़की का पिता अपनी पुत्री का हाथ एक भिखारी के हाथ में देने पर इसलिये तैयार न हुआ कि उसका अपमान होता। यद्यपि वह उसकी इकलौती लड़की थी और भिखारी से भी उसका विवाह सम्पन्न हो जाता तो वह भिखारी भी करोड़पति बन जाता ।
जो भी था उस करोड़पति ने अपनी पुत्री का विवाह एक सेठ के बेटे के साथ कर दिया। तथा सुहागरात को ही उस लड़की ने विष खाकर आत्महत्या कर ली ।
इस घटना का सोहराब के हृदय पर जो धक्का लगा, उसके फलस्वरूप वह डाकू बन गया। एक ऐसा डाकू जो धनवानों का परम शत्रु था। सबसे पहिले उसने उस सेठ को समाप्त कर दिया और फिर वह पूर्ण रूप से एक भयंकर डाकू बन गया और अब तक उसका नियम केवल यह रहा कि वह धनवानों को भिखारी बनाकर छोड़ता है। (उपन्यास)
आरिफ मारहर्वी साहब का उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर' एक सामान्य से कथानक पर रचा गया एक सामान्य सा उपन्यास है । जहां संयोग से कुछ घटनाएं घटती प्रतीत होती हैं और नायक बातों के अतिरिक्त एक्शन करता नजर आता है। कहीं भी जासूस जासूसी करता नजर नहीं आता । अनावश्यक वार्तालाप से उपन्यास को विस्तार दिया गया है। 132 पृष्ठों के उपन्यास में 118 पृष्ठों तक कोई विशेष घटनाक्रम है नहीं और उसके बाद फिल्मी क्लाइमैक्स की तरह उपन्यास खत्म हो जाता है।
पूरे उपन्यास में मुझे कैसर का एक संवाद अच्छा लगा जो उसकी कर्तव्यिष्ठा को दर्शाया है।
जब तक इस देश की भूमि पर कैसर जीवित है, तुम लोगों का कोई भी मानवघाती षड्यन्त्र सफल नहीं हो सकता ।

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