ਰਾਣੀ ਖਾਂ ਦੇ ਜੀਜੇ- ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਹਿਜੀ
अक्टूबर 2024 के अंतिम सप्ताह में अमृतसर की धार्मिक यात्रा पर था। अमृतसर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है।
लेकिन एक और बात ने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया वह है यहां पुस्तक बाजार का होना । यहां प्रसिद्ध सड़क 'हाॅल रोड़' पर काफी सारी किताबों की दुकान मिल जायेंगी। बड़ी दुकान Book lovers retreat से लेकर सबसे पुरानी 'आजाद बुक डिपो'(लाहौर-1942) के अतिरिक्त और बहुत सी छोटी-बड़ी, On Road, Off Road दुकानें हैं।
जहां आज बड़े-बड़े शहरों में किताबों की दुकाने सिमट रही हैं वहीं एक छोटी सी सड़क पर बहुत सारी दुकानों का होना राहत की बात है। यहीं नहीं इसके अलावा भी अमृतसर में बहुत सी किताबों दुकाने हैं। वहीं आजाद बुक के मालिक ने बाताया कि कभी अमृतसर में किराये पर काॅमिक्स देने वाली सौ से ऊपर दुकाने होती थी। लेकिन आज ऐसी एक भी दुकान नहीं । समय -समय की बात है। फिर भी अमृतसर शहर में पाठकों के लिए समृद्ध साहित्य की उपलब्धता है।
यहीं से एक Off Road दुकान से (बस दुकान मुख्य से थोड़ी सी हटकर थी) पंजाबी की एक चर्चित पुस्तक 'रानी खां दे जीजे'(ਰਾਣੀ ਖਾਂ ਦੇ ਜੀਜੇ- ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਹਿਜੀ) खरीदी थी।
वहीं आजाद बुक्स से छह: लोकप्रिय साहित्य की किताबें भी खरीदी थी ।
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अमृतसर- हरमंदिर गुरुद्वारा परिसर |
यहाँ हमारा विषय है गुरप्रीत सहिजी द्वारा लिखित उपन्यास 'रानी खां दे जीजे' ।
यह कहानी है एक छोटे से गांव की जहां एक चौधरी है और चौधरी है तो स्वाभाविक सी बात है वह चाहेगा गांव में बस उसी की 'चौधर' हो । और कभी -कभी ऐसे चौधरी छोटी-छॊटी बातों को इतना महत्वपूर्ण बना लेते है और उसे अपने जीने मरने का प्रश्न मान लेते हैं।।