मैंने कभी धीरज का उपन्यास नहीं पढा था। इसलिए कुछ अलग पढने के लिए इस उपन्यास को खरीदा।
20.03.2017 को दिल्ली में एक सम्मेलन से लौटते वक्त राजा पाॅकेट बुक्स के दरीबा कलां वितरक केन्द्र से आठ उपन्यास खरीदे जिनमें एक धीरज का यह उपन्यास लेडी नटवरलाल था।
जैसा की नाम से पता चलता है की ये कुख्यात ठग नटवर लाल की तरह ठगी/धोखाधङी की कहानी होगी, पर लेडी नटवर लाल कोई ठगी/ धोखाधड़ी की कहानी न होकर एक प्रतिशोध कहानी है।
ज्वाला सिंह, जो की एक ईमानदार बैंक मनैजर का पुत्र है, लेकिन परिस्थितिवश इस परिवार पर एक भयंकर मुसीबत आती है, जिसमें यह सब बिछङ जाते हैं। ज्वाला सिंह अपनी बहन मृणालिणी के साथ अपना शहर छोङ कर दूर चला जाता है और अपनी बहन को अच्छी, शिक्षित जिंदगी देने के लिए स्वयं नटवर लाल बन जाता है।
लेकिन परिस्थितियाँ एक बार फिर बदल जाती हैं और ज्वाला सिंह धोखाधड़ी के इल्जाम में गिरफ्तार हो जाता है दूसरी तरफ मणालिणी एक सेठ से शादी कर लेती है। सेठ ज्वाला सिंह के बारे में कुछ नहीं जानता।
जब ज्वाला सिंह जेल से छूट कर आता है तो सेठ किशन लाल के हाथ से मृणालिणी का कत्ल हो जाता है।
जिसका इल्जाम ज्वाला सिंह पर आता है।
दूसरी तरफ ज्वाला सिंह को पता चलता है की इस सेठ ने पहले भी एक शादी रचा रखी है तो वह पहले वाली पत्नी की बेटी का अपहरण कर उसे लेडी नटवर लाल बना देता है।
कहानी किसी बदला प्रधान घटिया फिल्म की तरह आगे बढती है। हद तो तब हो जाती है जब अकस्मात टकराते सभी पात्र किसी न किसी रूप में परस्पर रिश्तेदार निकलते हैं, तब तो ऐसा लगता है जैसे उपन्यास का नाम 'रिश्तेदार' होना चाहिए।
उन रिश्तेदारों के परस्पर संबंध स्थापित करते वक्त पाठक को मानसिक तर्कशक्ति की भी आवश्यकता महसूस होगी।
चलो अब थोङा कहानी के पात्रों की तरफ चलते हैं।
कहानी का आरम्भ होता है एक सेठ से जो प्रकाश नामक युवक को मुजरिम दर्शाने के लिए पहले उसे जेल करवा देता और फिर ज्वाला सिंह की मदद से फरार करवा देता है।
इसी दौरान ज्वाला सिंह को पता चलता है की उसकी बहन मृणालिनी सेठ किशन लाल से शादी कर इसी शहर में बसती है, जब ज्वाला सिंह अपनी बहन से मिलने जाता है तो सेठ किशन लाल मृणालिणी की हत्या कर हत्यारे के रूप में ज्वाला सिंह को गिरफ्तार करवा देता है। किसी तरह ज्वाला सिंह जेल से फरार होकर किशन लाल की हत्या करने के लिए उसके घर जाता है, तब उसे एक रहस्य पता चलता है की किशनलाल ने पहले भी एक शादी की थी और उसके एक लङकी भी है, जब ज्वाला किशन लाल के घर पहुंचता है तब वहां पुलिस भी
_समीक्षा जारी....
Friday, 31 March 2017
27. लेडी नटवरलाल- धीरज
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