Saturday, 31 May 2025

650. अभागी विधवा- वेदप्रकाश वर्मा

दो भाइयों की गृहक्लेश कथा
अभागी विधवा- वेदप्रकाश वर्मा

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में तीन 'वेद' थे। प्रथम वेदप्रकाश काम्बोज, द्वितीय वेदप्रकाश शर्मा और तृतीय नाम जो सामने आता है वह है वेदप्रकाश वर्मा । मेरठ जिले के निवासी वेदप्रकाश वर्मा जी का नाम मैंने 2017 के बाद ही सुना था और वह भी सोशल मीडिया के माध्यम से । एक ऐसा लेखक जिसने सौ से ऊपर उपन्यास लिखे पर संयोग
से कभी उनको पढने का अवसर ही नहीं मिला। वेदप्रकाश वर्मा जी के कुछ उपन्यास मेरे पास काफी समय से उपलब्ध थे पर पढने का अवसर अब मिला।

वेदप्रकाश वर्मा जी का जो उपन्यास मैंने सबसे पहले पढा है उसका नाम है 'अभागी विधवा ।' उपन्यास लेखकीय के अनुसार लेखक महोदय का कहना है की यह कहानी लम्बे समय से उनके दिमाग में थी पर उसे उपन्यास का रूप देने मे समय लगा।
अब हम अभागी विधवा उपन्यास का प्रथम पृष्ठ पढते हैं-
पुलिस का सायरन पूरी आवाज से चीख उठा ।

Friday, 30 May 2025

649. ब्रांच लाइन- दत्त भारती

प्रेम में असफल युवक की कहानी
ब्रांच लाइन- दत्त भारती

ब्रांच लाइन की उपन्यास की कहानी जानने से पहले हम इस उपन्यास के प्राप्त होने की और इस से संबंधित कुछ रोचक कहानियां जान लेते हैं।
जहां एक तरफ लोगों का पुस्तक पठन से रुझान कम हुआ है वहीं कुछ ऐसे पाठक भी हैं तो अंतिम सांस तक पढना ही चाहते हैं।
यहां मैं दो पुस्तक प्रेमियों का वर्णन कर रहा हूं और दोनों ही दत्त भारती जी के प्रशंसक हैं और एक उम्र विशेष में पहुकर सिर्फ दत्त भारती जी को ही पढना चाहते हैं। एक हैं गाजियाबाद से सतीश जी और दूसरे हैं राजस्थान के

648. मुसाफिर कैफे- दिव्यप्रकाश दूबे

Saturday, 10 May 2025

647. मौत के साये में- आरिफ मारहर्वी

कैसर हयात निखट्टू का कारनामा
मौत के साये में- आरिफ मारहर्वी

सर सिन्हा की आँखों में सहसा मौत नाचने लगी ।
आगे टेढ़ी-मेढ़ी और ढलवान सड़क थी। लगभग बारह मील तक तो सड़क की दाईं ओर ऊंची पहाड़ी चट्टानें और बाईं ओर खाईयाँ ही थीं। वैसे भाव नगर की सड़क पर अच्छा-खासा ट्रैफिक रहता था । राजकीय परिवहन की बसें चलती थीं प्राईवेट कारें और टैक्सियाँ भी गुजरती थीं, ट्रक भी आते जाते थे ।
सर सिन्हा ने अपनी समस्त शक्ति ब्रेकों पर लगा दी किंतु बेकार, कार की गति किसी तरह भी साठ और सत्तर मील प्रति घंटे से कम न हो सकी, इसके विपरीत कार की गति में बढ़ोतरी होती गई । सर सिन्हा की पूरी देह पसीने से तर हो गई और दिल की धड़कनें कनपटियों पर धमक पैदा करने लगीं। उनका मानसिक संतुलन अभी बिगड़ा न था अन्यथा पहला मोड़ काटते समय ही गाड़ी सीधी गार में चली जाती ।
(मौत के साये में - आरिफ मारहर्वी, उपन्यास का प्रथम पृष्ठ)
आज हम बात कर रहे हैं आरिफ मारहर्वी साहब के उपन्यास 'मौत के साये' की जो अक्टूबर 1971 में 'जासूसी पंजा' पत्रिका में प्रकाशित हुआ था । यह C.I.D. ऑफिसर कैसर हयात निखट्टू का उपन्यास है, जो एक केस को हल करता है और उसके साथ देते हैं उसके साथी राना और सोजी ।

Saturday, 3 May 2025

646. एनाकोंडा- काॅमिक्स

अमेजन के खतरनाक जंगलों में...
नमस्ते,
svnlibrary ब्लॉग पर किसी काॅमिक्स की यह पहली समीक्षा है। ब्लॉग पर ज्यादा समीक्षाएं उपन्यासों की हैं और उपन्यासों के अलावा विविध विधाओं की समीक्षाएं लिखी हैं पर किसी काॅमिक्स के विषय में लिखने का यह पहला अवसर है।
          बचपन छूटा तो काॅमिक्स का साथ भी छूट गया। कभी राज कॉमिक मेरी प्रिय हुआ करती थी। इसके अतिरिक्त बालहंस पत्रिका में छपने वाली चित्रकथा 'ठोला राम, कवि आहत' जैसी कथाएं आज भी याद आती हैं तो गुदगुदाती हैं। कभी किसी अज्ञात पत्रिका में प्रकाशित होने वाली 'इंस्पेक्टर आजाद' चित्रकथा की आधी-अधूरी याद, मन में इसलिए कसक पैदा करती है की उसे पूरा नहीं पढ पाये और ऐसी ही कसक 'बालहंस' पत्रिका की 'बिसतुईया' पैदा करती है।
समय के साथ-साथ सब काॅमिक्स/ चित्रकथाएं खत्म होती चली गयी। लेकिन जिनके मन में जुनून होता है, उनका यह जुनून समय के साथ बढता चला जाता है।
ऐसा ही जुनून था 'एनकोंडा' काॅमिक्स वालों का और जन्म लिया 'KORWA COMICS' ने और हमारे सामने आयी एक जबरदस्त काॅमिक्स 'एनकोंडा- अमेजन का दानव' ।

Monday, 28 April 2025

645. बोलते सिक्के - कर्नल रंजीत

वैज्ञानिकों की हत्या का रहस्य
बोलते सिक्के - कर्नल रंजीत

अप्रैल 2025 में मैंने कर्नल रंजीत के उपन्यास पढें हैं और यह सिलसिला जारी है। कभी-कभी यह कोशिश होती है एक ही लेखक के स्वयं के पास उपलब्ध समस्त उपन्यास पढ लिये जायें हालांकि यह प्रयास कभी कभार ही पूरा होता है।
जैसे इस बार कर्नल रंजीत के उपन्यास पढने आरम्भ किये तो कुछ छुपे हुये उपन्यास और सामने आ गये। अब उनको कब तक पढा जायेगा यह कहा नहीं जा सकता। फिर भी कोशिश जारी है।
कर्नल रंजीत का उपन्यास '11 बजकर 12 मिनट' के साथ एक और उपन्यास संलग्न था जिसका नाम है 'बोलते सिक्के'।
यह उपन्यास उन लोगों की कहानी है जो धन-दौलत के लिए अपना मान-सम्मान सब कुछ बेचने को तैयार हो जाते हैं।
अब चलते हैं 'बोलते सिक्के' उपन्यास के प्रथम दृश्य की ओर, अध्याय का नाम है 'भयंकर तूफान'

भयंकर तूफान
रात आधी से अधिक बीत चुकी थी।
चारों ओर घटाटोप अंधियारा छाया हुआ था, जिसे आकाश के सीने को रौंदकर उमड़ती-घुमड़ती दैत्याकार काली-कजरारी घटाओं ने और अधिक भयावह बना दिया था।
हवा इतनी तेज चल रही थी जैसे आंधी चल रही हो। पहले हल्की-हल्की बौछारें पड़ती रही थीं लेकिन अब वे हल्की-हल्की बौछारें मूसलाधार बारिश में बदल गई थीं।

Friday, 25 April 2025

644. 11 बजकर 12 मिनट - कर्नल रंजीत

प्रोफेसर की हत्या शृंखला
11 बजकर 12 मिनट

- मिस मालिनी के खुले मुंह में जहर किसने डाल दिया?
- प्रो० पालीवाल को तलवार से किसने चीर दिया?
-वाॅलीबाॅल खेलती लड़कियों के साथ किसने बलात्कार किया ?
-क्या इस सबके लिए छात्र उत्तरदायी थे?
देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और शिक्षकों की योजनाबद्ध हत्याओंकी अनोखी कहानी। छात्र जब देश की गरीबी के विरोध में आन्दोलन कर रहे थे तो उनके आन्दोलन को एक घिनौनी राजनीति ने जकड़ लिया।
इसी षड्यंत्र का पर्दाफाश किया आपके चहेते जासूस मेजर बलवन्त ने। कर्नल रंजीत की जादूभरी कलम का एक नया कमाल !

छात्र आंदोलन के पीछे काम करने वाले षड्‌यंत्रकारियों का पर्दाफाश करने वाली रोमांचक कहानी

11 बजकर 12 मिनट

गुजरात में लगी हुई आग सवा दो महीने के बाद बुझी। इस बीच क्या कुछ नहीं हुआ! गोदाम, मंडियां और दूकानें लूटी गई। रेलवे स्टेशनों और पुलिस चौकियों पर हमले हुए। अधिकारियों का घेराव किया गया। गाड़ियां रोकी गई। बसें जला दी गई। सरकारी इमारतों को जलाकर खाक कर दिया गया। गोलियां चलीं। आंसू गैस छोड़ी गई। कई शहरों में कर्फ्यू लगा। जीवन-क्रम अस्त-व्यस्त हो गया। पुलिस-फायरिंग से बीसियों व्यक्ति मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। चारों ओर भय, आतंक और निराशा का अंधकार छा गया। और फिर महंगाई और बेरोजगारी के विरुद्ध छात्रों द्वारा छेड़े गए आन्दोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया। प्रदेश की विधानसभा भंग करनी पड़ी। तब कहीं जाकर गुजरात में लगी हुई आग ठण्डी हुई।

Thursday, 24 April 2025

643. हांगकांग के हत्यारे- कर्नल रंजीत

एक रहस्यमयी विमान दुर्घटना
हांगकांग के हत्यारे- कर्नल रंजीत
  • देश के बहुत सारे भागों में अचानक अराजकता और आतंक की काली छाया मंडराने लगी।
  • बेरोजगार नौजवान भटककर उस भयानक गिरोह की जकड़ में आने लगे।
  • तटस्थ लोकतांत्रिक देशों के सर्वनाश के लिए अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का फैलता हुआ जाल ।
  • चंगुल में फंसकर छटपटाती हुई जुड़वां बहनों के संघर्ष की दुःख भरी कहानी ।
  • मादक गंध वाले सुंदर केसरिया फूलों की जहरीली कहानी, जिनके सेवन से मनुष्य का शरीर जिंदा लाश बन जाता है।
  • एक ऐसा पिता जो धन-दौलत और विलासिता को संतान से बड़ा समझता है।
  • एक ऐसा डॉक्टर जिसे वासना इंसान से शैतान बना देती है।
  • कदम-कदम पर धड़कनें बढ़ाने और रोंगटे खड़े कर देने की शक्ति से भरा हुआ सनसनीखेज, दिल दहला देने वाला कर्नल रंजीत का एक अनमोल उपन्यास

हांगकांग के हत्यारे

Monday, 7 April 2025

642. लहू और मिट्टी- कर्नल रंजीत

खत्म हो रहे जंगलों की रहस्य गाथा
लहू और मिट्टी- कर्नल रंजीत

"यह कौन हैं ?" डोरा ने लाश की तरफ इशारा करके पूछा ।
"मेरे पिता," मिस नार्मा ने कहा। फिर अपनी भूल को सुधारकर बोली, "यह मेरी मां के पहले पति मिस्टर हार्पर हैं। शादी के कुछ दिनों बाद मेरी मां ने इन्हें छोड़कर मिस्टर जैक्सन से शादी कर ली थी। मेरे जन्म के तीन साल बाद मेरे पिता ने आत्महत्या कर ली थी और फिर कुछ ही वर्ष बाद मेरी मां की मृत्यु हो गई। बाद में मेरी मां के पहले पति मिस्टर हार्पर ने ही मुझे पुत्रीवत् पाला।"
विचित्र आचार-विचार वाले मुट्ठी-भर व्यक्तियों द्वारा शेष सारी मानव-जाति को नष्ट कर डालने वाले भयंकर षड्यंत्र का रोमांचकारी रहस्योद्घाटन ।
मेजर बलवन्त की विलक्षण जासूस-वृद्धि का अद्भुत कौशल ।
सर्वप्रिय लेखक कर्नल रंजीत का लोकहितकारी जासूसी उपन्यास जो न केवल रोंगटे खड़े कर देता है, बल्कि मस्तिष्क की एक-एक नस को झनझना देता है।

 नमस्ते पाठक मित्रो,

Wednesday, 2 April 2025

641. मृत्यु भक्त- कर्नल रंजीत

महानंद समाधि में मौत का रहस्य
मृत्य भक्त- कर्नल रंजीत

इन दिनों सतत् कर्नल रंजीत के उपन्यास पढे जा रहे हैं और  'मृत्यु भक्त' इस क्रम में प्रथम उपन्यास है और इसके पश्चात जो उपन्यास पढा जा रहा है उसका नाम है- लहू और मिट्टी । दोनों एक ही जिल्द में हैं, जो हिंद पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुये थे ।
लोकप्रिय कथा साहित्य में कर्नल रंजीत का नाम रहस्यपूर्ण उपन्यास लेखन में अग्रणी है । इनके उपन्यास की एक विशेष शैली है। इस विषय पर हम इन उपन्यासों के आलेख में लगातार चर्चा करते रहेंगे ।
सर्वप्रथम उपन्यास का प्रथम दृश्य देखें जिसका शीर्षक है- कुल्हाड़ी ।
  कुल्हाड़ी
मेजर बलवन्त को पिछले एक महीने से भारी चिन्ता लगी हुई थी। बम्बई में स्त्रियों की दौड़-प्रतियोगिता हुई थी। मालती ने दो सौ मीटर की दौड़ में भाग लिया था। वह फाइनल में पहुंच-कर जीत भी गई थी। वह इतने ज़ोर में थी कि जब उसका सीना टेप से छुआ तो वह प्रथम आने के बाद अपने ही जोर में गिर पड़ी थी और उसके दायें पांब में मोच आ गई थी। वह तीन महीने तक अस्पताल में रही थी। पांव पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया था । प्लास्टर उतर जाने के बाद भी उसका पांव सीधा नहीं हुआ था। दायें पांव का मामला था। मालती उसकी बहुत अच्छी असिस्टेण्ट थी । अगर उसका पांव खराब हो गया तो वह अपनी एक उच्चकोटि की सहायिका से वंचित हो जाएगा। मेजर किसी भी दशा में यह सहन नहीं कर सकता था कि मालती उसकी टीम से अलग हो जाए ।

Sunday, 30 March 2025

639. धरती का शैतान- इब्ने शफी

आओ पढें एक नकली उपन्यास
कर्नल विनोद, कैप्टन हमीद और मूर्ख कासिम का  उपन्यास
धरती का शैतान- इब्ने सफी

कर्नल विनोद ।
एशिया का माना हुआ जासूस-  फादर ऑफ हार्ड स्टोन के नाम से विख्यात कर्नल विनोद इस समय होटल चाचा पाॅल के काउंटर पर खड़ा था । उसने अपनी कुहनी काउन्टर पर टेक रखी थी ओर टेलीफोन रिसीवर कान से लगा रखा था। दूसरे हाथ से उसने अपना दूसरा कान दबा रखा था क्योंकि हॉल में एक क्रिश्चियन डांसर मिस रूबी पूरे जोशो-खरोश से नाच रही थी और वहां बैठे लोग किस्म-किस्म की आवाजें निकालकर अपने दिल की लगी बुझाने की कोशिश कर रहे थे। हॉल का वातावरण पूरी तरह गुण्डागर्दी और अश्लीलता से भरा हुआ था। लोग शराब पी रहे थे। खा रहे थे और सुल्फे को सिगरेटों के कश चल रहे थे।
       फोन के दूसरी ओर से बोलने वाला यकायक रुक गया था । विनोद ऊंची आवाज में हैलो हैलो कहे जा रहा था, लेकिन उसने इसके बाद किसी  जवाब नहीं दिया। आखिर यह हुआ क्या ? साथ ही दूसरी ओर से बोलने वाले ने क्रैडिल पर फोन अभी रखा भी नहीं था ।
   आखिरकार कर्नल विनोद ने डायल पर नम्बर घुमाया और टेलीफोन आपरेटर से पूछा-
'हैलो...आपरेटर !!
'यस सर।' एक जनाना आवाज गूंजी।
'अभी किस नम्बर से बात हो रही थी ?'
'जो किसकी ?' (धरती का शैतान- इब्ने शफी  उपन्यास का प्रथम पृष्ठ)



  यह उपन्यास मित्र रतन चौधरी ने भेजा था और वह भी Xerox करके । लेकिन पढने का समय मिला भी लम्बे समय पश्चात यानि लगभग तीन-चार वर्षों बाद । और जब इब्ने शफी साहब का उपन्यास 'धरती का शैतान' पढना आरम्भ किया तो पहले तो यह भी समझ में नहीं आया की आखिर चल क्या रहा है ?

638. लहू से लिख दो जय हिंद- रीमा भारती

बच्चे के दुश्मन कौन थे ?
लहू से लिख दो जयहिंद- रीमा भारती

उस युवती का रंग गोरा था।
खूब गोरा-किन्तु हल्की-सी सुर्खी लिए हुए।
ऐसा लगता था जैसे ताजे मक्खन भरे थाल के निकट से कोई होली खेलने के मूड में आया शैतान बच्चा गुलाल उड़ाता हुआ गुजर गया हो।
युवती की उम्र अधिक से अधिक चौबीस साल की थी। किन्तु उसके चेहरे की मासूमियत व बदन की कामनीयता उसे बीस वर्ष की दर्शा रही थी।
युवती की आंखें वीरान थीं इनमें सोचों के साये थे। उसकी आंखें उस चार वर्षीय गोल मटोल बच्चे को घूर रही थीं जो कि एक बड़ी-सी रंगीन बॉल के पीछे यूं दौड़ रहा था जैसे अब गिरा तब गिरा।
वह बॉल के निकट पहुंचता और झुककर बॉल पकड़ना चाहता। किन्तु बॉल उसके पांव की ठोकर पहले ही खा जाती और दूर चली जाती।
मनोहारी डूबी हुई थी। दृश्य था। केवल वही उस मनोहारी दृश्य में नहीं बल्कि रीमा भी एक बेंच पर बैठी दिलचस्पी से उस दृश्य को देख रही थी।

रीमा !
भारत की सर्वश्रेष्ठ किन्तु गुप्त जासूसी संस्था आई०एस०सी० की नम्बर वन एजेंट जो कि इन दिनों फ्री होने के कारण तफरीह के मूड में थी तथा अपने एक मित्र की प्रतीक्षा कर रही थी।


आज हम बात कर रहे हैं एक्शन उपन्यास लेखिका रीमा भारती जी के उपन्यास 'लहू से लिख दो जय हिंद' । प्रसिद्ध उपन्यासकार दिनेश ठाकुर (प्रदीप कुमार शर्मा) ने एक एक्शन गर्ल पात्र की रचना की थी, जिसना नाम था रीमा भारती। और बाद में इन्हीं दिनेश ठाकुर जी के ग्रुप से रीमा भारती नाम से एक लेखिका का पदार्पण होता है और उसके उपन्यासों की नायिका भी रीमा भारती होती है।
यहां आज हम लेखिका रीमा भारती जी के रवि पॉकेट बुक्स से प्रकाशित उपन्यास 'लहू से लिख दो जय हिंद' की बात कर रहे हैं।