Tuesday, 25 April 2023

563. सुप्रीम जस्टिस- परशुराम शर्मा

और जीरोलैण्ड तबाह हो गया
सुप्रीम जस्टिस- परशुराम शर्मा

'जीरोलैण्ड' उपन्यास में आपने पढा की विश्व के श्रेष्ठ जासूस जीरोलैण्ड को तबाह करने निकले थे। वहीं जीरोलैण्ड की आंतरिक कलह भी जीरोलैण्ड को कमजोर कर रही थी।
    जीरोलैण्ड का संचालन करने वाली पांच मुख्य ताकतों के ऊपर 'सुप्रीम जस्टिस' नामक एक रहस्यमयी का अस्तित्व भी है, जिसे कभी किसी ने नहीं देखा। वह ताकत जीरोलैण्ड का संविधान है, वही जीरोलैण्ड का न्यायालय है, वही जीरोलैण्ड का संचालन करती है। 
सुप्रीम जस्टिस- परशुराम शर्मा

    'जीरोलैण्ड' उपन्यास के अंत में जीरोलैण्ड को तबाह करने निकले श्रेष्ठ जासूस तक भी वहाँ जाकर बर्फ के बुत बन जाते हैं और एक रहस्य यह भी खुलता है की 'सुप्रीम जस्टिस' के पीछे विश्व का एक श्रेष्ठ भारतीय जासूस है। यह तथ्य कितना सही है और कितना गलत है उपन्यास 'सुप्रीम जस्टिस' में पता चलता है।
       हिंदी जासूसी कथा साहित्य में 'जीरोलैण्ड' की कल्पना इब्ने सफी साहब ने की थी पर उन्होंने कभी 'जीरोलैण्ड के रहस्य का खुलासा नहीं किया। और भी बहुत से लेखकों ने 'जीरोलैण्ड' की अवधारणा पर उपन्यास लेखन किया पर इब्ने सफी के अतिरिक्त प्रसिद्ध अगर किसी लेखक को मिली तो वह है परशुराम शर्मा।
   परशुराम शर्मा जी ने न केवल जीरोलैण्ड पर उपन्यास लेखन किया बल्कि उन्होंने 'जीरोलैण्ड' के रहस्य को भी पाठकों के समक्ष उजागर किया।

Sunday, 23 April 2023

562. जीरोलैण्ड- परशुराम शर्मा

जानिये रहस्य जीरोलैण्ड का
जीरोलैण्ड- परशुराम शर्मा

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में कुछ ऐसे विषय हैं जिन पर विभिन्न लेखकों ने लिखा है। और यह विषय भी स्वयं इस क्षेत्र के लेखकों द्वारा पैदा किये गये काल्पनिक विषय हैं। या यूं कहें लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक काल्पनिक संसार की रचना की गयी और उस संसार पर विभिन्न लेखकों ने अपने-अपने अनुसार लेखन किया। जैसे- जीरोलैण्ड, मर्डरलैण्ड, मैकाबर

    आज यहाँ हम बात कर रहे है परशुराम शर्मा जी द्वारा लिखे गये उपन्यास 'जीरोलैण्ड' की। जीरोलैण्ड एक काल्पनिक कथा संसार है जिसकी रचना इब्ने सफी साहब ने की थी।
'जीरोलैण्ड' उपन्यास का आरम्भ एक रहस्यमयी इमारत से होता है।
जीरोलैण्ड- परशुराम शर्मा

  इमारत का नाम था ‘पागल महल’।
गेट पर जहां ‘पागल महल’ की प्लेट लगी थी उसी के नीचे इमारत के स्वामी का नाम लिखा था।
‘राजेश बिहारी एम. एस. सी. पी. एच. डी. आक्ससन।’
राजाराम दयाल फटी-फटी आंखों से इस इमारत को देख रहा था।

Friday, 21 April 2023

561. चाल पर चाल- जेम्स हेडली चेइज़ , विकास नैनवाल

कहानी एक झूठी औरत की
चाल पर चाल- जेम्स हेडली चेइज़ 
अनुवाद- विकास नैनवाल

छः माह से खाली बैठे प्राइवेट डिटेक्टिव डेविड फेनर को जब उस खूबसूरत युवती के आने की खबर मिली तो उसे लगा था कि शायद अब उसे कोई केस मिलेगा। वह कहाँ जानता था कि वह औरत अपने साथ मुसीबतों और रहस्यों का ऐसा झंझावात लेकर आएगी कि उसका अपनी जान बचाना दूभर हो जाएगा। अब हर चाल पे उसे ऐसी चाल चलनी पड़ेगी जो उसे मौत से दूर और सच्चाई के करीब लेकर आएगा। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा था… वह हर चाल पर मौत के नजदीक और सच्चाई से दूर जाता जा रहा था… सुप्रसिद्ध क्राइम लेखक जेम्स हेडली चेइज़ के उपन्यास डॉल्स बैड न्यूज़ का विकास नैनवाल द्वारा किया उत्कृष्ट हिन्दी अनुवाद।

   विकास नैनीताल जितने अच्छे एक पाठक हैं, उतने ही अच्छे एक अनुवादक भी हैं। विकास नैनवाल जी के ब्लॉग पर लिखे इनके आर्टिकल/ समीक्षा आदि पढने को मिल जाती हैं और अक्सर में पढता भी रहता हूँ। अनुवादक के रूप में मैंने इनकी यह प्रथम रचना पढी है जो काफी रोचक है।
  प्राइवेट डिटेक्टिव डेविड फेनर अपनी असिस्टेंट पाॅला के साथ अपने ऑफिस में थे अभी एक घबरायी हुयी ने वहाँ प्रवेश किया।

   वह औसत  से थोड़ी लंबी थी और छरहरे बदन की मालकिन थी। उसकी टाँगे बहुत लंबी, हाथ और पैर पतले और उसका शरीर किसी डाली-सा तना हुआ था। उसके बादल से काले बाल उसकी हैट के नीचे से दिख रहे थे। उसने एक बेहद खूबसूरत टू-पीस ड्रेस पहनी हुई थी और इसमें वह परी चेहरा बेहद जवान और डरी हुई लग रही थी।

Monday, 17 April 2023

560. सालाजार सेक्टर- अज्ञात

मंगल ग्रह का खतरनाक अपराधी
सालाजार सेक्टर-
खान-बाले सीरीज का उपन्यास

उन सबके दिल धड़क रहे थे जुबानें खामोश थीं। हरेक के दिल में एक हलचल सी मची हुई थी और उनको अपने सामने मौत खड़ी हुई नजर आ रही थी । बाले सोच रहा था कि यदि वह खान के साथ आने से इन्कार कर देता तो अच्छा था । वह उस घड़ी को कोस रहा था कि जब उसने खान के साथ उस अंतरिक्ष यान पर मंगल के लिए रवाना हुआ था । (सालाजार सैक्टर- उपन्यास अंश)   

 हिंदी जासूसी कथा साहित्य में अनुवाद का भी अच्छा समय रहा है और आज भी अनुवाद हो रहे हैं। एक समय था जब उर्दु से हिंदी में अनुवाद होते थे, उर्दू से हिंदी मात्र लिपी परिवर्तन होता था क्योंकि दोनों भाषाओं में नाममात्र ही अंतर है। बाद में अंग्रेजी से भी अच्छे अनुवाद होते रहे और आज भी जारी हैं।

Tuesday, 11 April 2023

559. रहस्य की एक रात- ओमप्रकाश शर्मा

ठग जगत पहुंचा पाकिस्तान
रहस्य की एक रात- ओमप्रकाश शर्मा

  'क्लब में हत्या' के बाद क्रमशः यह द्वितीय उपन्यास है जो मैंने जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का इन दिनों पढा है। जहाँ 'क्लब में हत्या' 'राजेश- जयंत' श्रृंखला का मर्डर मिस्ट्री उपन्यास था वहीं 'रहस्य की एक रात' 'जगत- राजेश' श्रृंखला का एक रोमांचक उपन्यास है।
   अब प्रथम प्रश्न तो यही हो सकता है की आखिर जगत पाकिस्तान क्यों गया? और जब प्रसिद्ध ठग जगत पाकिस्तान पहुंच गया तो उसने वहाँ 'रहस्य की एक रात' में क्या कारनामे किये?
   खैर, इन प्रश्नों के उत्तर तो प्रस्तुत उपन्यास पढकर ही जाने जा सकते हैं। और अब हम बात करते हैं उपन्यास के विभिन्न पक्षों पर।
  जनप्रिय ओमप्रकाश शर्मा जी का लेखन का एक अलग तरीका है। कथा चाहे धीमी चलती हो पर वह वास्तविकता के अत्यंत करीब प्रतीत होती है।
    जगत प्रसिद्ध ठग जगत जब राजेश से मिलने पहुंचा।
जगत अम्बाद्वीप से नई दिल्ली पहुंचा, परन्तु नई दिल्ली से सारी यार- पार्टी गायब थी।

Sunday, 9 April 2023

558. क्लब में हत्या- ओमप्रकाश शर्मा

किस्सा तीन हत्याओं का
क्लब में हत्या- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा

           उपन्यास साहित्य में जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। जितना सम्मान पाठक ओमप्रकाश शर्मा का करते हैं उतने ही सम्मानजनक इनके पात्र होते हैं। शर्मा जी का एक विशेष पात्र है राजेश।  प्रस्तुत उपन्यास 'क्लब में हत्या' राजेश -जयंत शृंखला का है। जो की एक मर्डर मिस्ट्री कथा है।
राजेश और जयन्त संयोगवश इस मामले में सम्बन्धित हुये । वह दोनों झाँसी से लौट रहे थे और घटना रात के ग्यारह बजे की है जब उनकी कार दिल्ली की सीमा में प्रविष्ट होकर मथुरा रोड पर दौड़ रही थी। जयन्त कार चला रहा था और राजेश पिछली सीट पर बैठे एक उपन्यास पढ़ने में तल्लीन थे ।
   रास्ते में एक एक्सीडेंट देखकर दोनों को रुकना पड़ा था। जयंत ने राजेश को भी वहाँ बुला लिया।
" राजेश, जरा आओ तो ।”
- "क्या बात है ?"
-"एक्सीडेंट है एक, बिल्कुल अजीब-सा एक्सीडेंट ।” राजेश उठे। उनकी कार के आगे लगभग दस कारें खड़ी थीं । उसके बाद...... उसके बाद था एक ट्रक और ट्रक के पिछले पहियों में दबा हुआ था एक नवयुवक।
   वहाँ उपस्थित सब इंस्पेक्टर चतरसेन का मानना था की यह एक दुर्घटना है। लेकिन परिस्थितियों का विश्लेषण करने के पश्चात राजेश ने घोषणा की कि यह महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि सोच- समझकर किया गया कत्ल है।
   चतुर चतुरसेन ने राजेश से अनुरोध न किया की वह इस मामले में उसकी मदद करे। वहीं बाद में केन्द्रीय खूफिया विभाग ने भी राजेश को इस केस पर नियुक्त कर दिया था।
    मृतक का नाम प्रमोद कुमार था और वह 'विश्राम लोक क्लब, नई दिल्ली' में असिस्टेंट मैनेजर था। राजेश- जयंत और सब इंस्पेक्टर की जाँच का केन्द्र अब विश्राम क्लब था। क्लब प्रमोद कुमार की शोक सभा में ही जब राजेश ने यह घोषणा की कि कातिल इस क्लब में ही उपस्थित है तो एक बार वहां सन्नाटा छा गया।
    क्लब के अवैतनिक मैनेजर रंगबिहारी लाल और मालकिन मोहिनी देवी नहीं चाहते थे की क्लब की बदनामी हो। लेकिन उनके चाहने न चाहने से कुछ नहीं होने वाला था।
   राजेश की जाँच अभी चल ही रही थी कि क्लब में हत्या हो गयी। इस बार हत्यारे ने क्लब के सदस्य को क्लब में ही मार दिया, हंगामा तो होना ही था।
और राजेश ने यह प्रण किया की वह शीघ्र असली अपराधी तक पहुंच जायेगा।
राजेश तनिक मुस्कराए— “ आप बिल्कुल बजा फरमाते हैं. मिर्जा साहब, सवाल सिर्फ हत्यारे की खोज का नहीं है। सवाल यह है कि शमा ने खुद जलकर कितने परवाने जला दिए ? मुझे इसका हिसाब जानना है और यकीन कीजिए मिर्जा साहब ! हिसाब जानकर ही रहूंगा।
     और एक हंगामें के चलते राजेश भी अपराधियों की गिरफ्त में आ गया। और यही अपराधियों के लिए खतरनाक साबित हुआ।
    उपन्यास मर्डर मिस्ट्री कथा पर आधारित है। उपन्यास में‌ कुल तीन हत्याएं होती हैं।
उपन्यास का जो सशक्त पक्ष है वह है जासूस राजेश। शर्मा जी द्वारा रचित पात्रों में राजेश सबसे अलग है। अन्य जासूस साथी भी राजेश का अत्यंत सम्मान करते हैं।
राजेश का नैतिक पक्ष अत्यंत मजबूत है। वह अपराधी के साथ भी क्रूरता नहीं करता।
   राजेश का प्रमोद की पत्नी को बहन कहकर संबोधित करना, उस के साथ यह वायदा करना की प्रमोद से संबंधित कोई भी अनुचित बात जनता नहीं पहुंचेगी।
   राजेश एक जासूस है और जासूस अपने बुद्धिबल से कार्य करता है। राजेश की जो कार्यशैली वह इसलिए भी प्रभावित करती है की वह एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़कर शेष अपराधियों तक अपने चातुर्य और बुद्धि से पहुंचता है।
   उपन्यास के अंत में राजेश और प्रमोद की पत्नी रत्ना का संवाद अत्यंत प्रभावशाली है।‌ (पृष्ठ संख्या 105)
विशेष कथन-
धरती का आकर्षण, जो भी आवारा घुमक्कड़ तारा धरती की आकर्षण परीक्षा में आ जाता है, बिना जले रहता नहीं । जलता है और फिर राख होकर धरती के अंक में समा जाता है ।
- कौन जान सकता है, पुरुष के भाग्य को और स्त्री के चरित्र को ?
    जनप्रिय ओमप्रकाश शर्मा जी द्वारा लिखित 'क्लब में हत्या' एक मर्डर मिस्ट्री रचना होने के साथ-साथ एक सामाजिक संदेश भी है। हत्या क्यों होती है? इसका कारण जो प्रत्यक्ष होता है, आवश्यक नहीं की वही हो, अप्रत्यक्ष कारण भी बहुत होते हैं।
एक पठनीय मार्मिक मर्डर मिस्ट्री है।

उपन्यास-  क्लब में हत्या
लेखक-    ओमप्रकाश शर्मा- जनप्रिय लेखक
प्रकाशक-   मारुति प्रकाशन, मेरठ
पृष्ठ-         110
क्लब में हत्या - ओमप्रकाश शर्मा novel

Friday, 10 March 2023

557. काला जादू- इश्तियाक खान

प्रेम, प्रतिशोध और जादू
काला जादू- इश्तियाक खान (अनुवादक)

....शौकत स्कूल से आया और खाना खा कर उठा ही था कि गिर पड़ा। उसकी हालत वैसी हो गई जैसी दो दिन पहले हुई थी। यह देखने में वैसा ही मिर्गी का दौरा लगता था। उसके हाथ और पांव मुड़ गए। शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और उसके मुंह से हल्के हल्के खर्राटे निकलने लगे। इसके साथ ही आंगन में एक पत्थर गिरा जो टेनिस की गेंद जितना बड़ा था। नसीमा इतनी डरी कि उसने बाहर जाकर ना देखा और कमरे का दरवाजा बंद कर लिया।
Kala jadu
           दूसरा पत्थर धमाके से दरवाजे को लगा। इतनी तेज़ आवाज आई कि नसीमा सर से पांव तक हिल गई और उस पर बेहोशी जैसीछाने लगी। उसमें इतनी-सी हिम्मत भी नहीं थी कि शौकत को उठाकर पलंग पर लिटा देती। आंगन में तीन चार और पत्थर एक दूसरे के बाद गिरे। नसीमा ने 'जल तू जलाल तू' -पढ़ना शुरू कर दिया।

Wednesday, 22 February 2023

556. खून की बौछार- इब्ने सफी

क्या था कुएं का राज
खून की बौछार- इब्ने सफी
विनोद- हमीद शृंखला

   हिंदी रोमांच कथा साहित्य में इब्ने सफी साहब अपने समय के श्रेष्ठ कथाकार रहे हैं। एक युग उनके नाम रहा है।  रोमांच और रहस्य का मिश्रण उनके उपन्यासों को पढने के लिए पाठकवर्ग को विवश कर देता था।
   इब्ने सफी द्वारा लिखा गया 'खून की बौछार' भी एक रहस्य और रोमांच से परिपूर्ण कथानक है।
ठाकुर धरमपाल सिंह अपने एक अतिथि रमेश के साथ बाग में बैठे थे। अधेड़ावस्था के रमेश के साथ ठाकुर साहब की मुलाकात भी एक रहस्यमयी कहानी की तरह है। देश -विदेश भ्रमण के शौकीन रमेश कुमार ठाकुर साहब और उनकी पुत्री रंजना को विभिन्न किस्से सुना रहे थे।

अभी ये लोग बातें कर ही रहे थे कि सहसा सारे बाग में प्रकाश हो गया। रंजना ने पलट कर देखा और चीख मार कर उछल पड़ी ।
   पुराने अन्धे कुएं से अंगारों का फव्वारा सा छूट रहा था । चिंगारियाँ अधिकाधिक ऊंचाई तक जा रही थी । एक विचित्र प्रकार की झन्नाटेदार आवाज से सारा बाग गूंज रहा था । (उपन्यास अंश- खून की बौछार- इब्ने सफी)

Sunday, 19 February 2023

555. बदमाशों की बस्ती- वेदप्रकाश काम्बोज

कोटाम्बू के खतरनाक बदमाशों की कथा
बदमाशों की बस्ती- वेदप्रकाश काम्बोज

विजय दबे पांव रघुनाथ के पलंग के पास आया इस समय उसके हाथ में एक बड़ा सा गुब्बारा था जो कि हवा भरी होने के कारण और भी बड़ा हो गया था। वह रघुनाथ के पलंग के सिराहने आया, खड़ा हो गया और कुछ करना ही चाहता था कि तभी रैना ने रसोई घर की ओर वाले द्वार से प्रवेश किया। (उपन्यास प्रथम पृष्ठ से)

    यह दृश्य है वेदप्रकाश काम्बोज द्वारा रचित उपन्यास 'बदमाशों की बस्ती' का। प्रस्तुत उपन्यास एक्शन-रोमांच से परिपूर्ण एक रोचक रचना है।        

बदमाशों की बस्ती- वेदप्रकाश काम्बोज
     बदमाशों की बस्ती ये विजय-रघुनाथ सीरीज का एक मशहूर उपन्यास है। इस उपन्यास को पढ़ते हुए आपको 'वेस्टर्न-क्लासिक्स' की याद बरबस ही आ जाएगी। एक्शन के साथ मजेदार घटनाओं से भरपूर नॉवल। साथ में है आशा, अशरफ और पवन। 'नीलम जासूस कार्यालय' की स्थापना लाला श्री सत्यपाल वार्ष्णेय ने आज से 60 साल पहले की थी। ये 1960 के दशक की एक बहुत मशहूर प्रकाशन संस्था रही है। इस संस्था ने कई दिग्गज उपन्यासकारों और लेखकों के शुरुआती दौर के उपन्यास प्रकाशित किए। इस संस्था से एक ‘नीलम जासूस’और ‘राजेश’ नाम की मासिक पत्रिकाएँ निकलती थीं। नीलम जासूस मुख्यत: श्री वेद प्रकाश काम्बोज के और राजेश में जनप्रिय ओम प्रकाश शर्मा जी के उपन्यास निकलते थे। इसके अलावा श्री सत्यपाल वार्ष्णेय ने एक फिल्मी मैगजीन —‘फिल्म अप्सरा’ भी निकली थी, जोकि बेहद मशहूर हुई। सुनहरे दौर के क्लासिक उपन्यासों को पुनः प्रकशन के उद्देश्य से नीलम जासूस ने दो शृंखलाएँ 'सत्य-वेद'और 'सत्य-ओम’ शुरू की हैं।
(अंतिम आवरण पृष्ठ से)

  

Thursday, 16 February 2023

554. लखिमा की आँखें- रांगेय राघव

मैथिल कोकिल विद्यापति का जीवन वृतांत
लखिमा की आँखें - रांगेय राघव

हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार रांगेय राघव ने विशिष्ट कवियों, कलाकरों और चिंतकों के जीवन पर आधारित उपन्यासों की एक शृंखला लिखकर साहित्य की एक बड़ी आवश्यकता को पूर्ण किया है। प्रस्तुत उपन्यास महाकवि विद्यापति के जीवन पर आधारित अत्यंत रोचक मौलिक रचना है।
लखिमा की आँखें- रांगेय राघव


       विद्यापति का काव्य अपनी मधुरता, लालित्य तथा गेयता के कारण पूर्वोत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय हुआ और आज भी लोकप्रिय है। लेखक ने स्वयं मिथिला जाकर कवि के गांव की यात्रा करके गहरे शोध के बाद यह उपन्यास लिखा है। मिथिला के राजकवि, विद्यापति ठाकुर कुछ समय मुसलमानों के बंदी भी रहे। उन्होंने संस्कृत में भी बहुत कुछ लिखा परन्तु अपनी मैथिल भाषा में जो लिखा वह अमर हो गया।
आदि से तक अत्यंत रोचक यह उपन्यास उस युग के समाज, राजनीति और धार्मिक जीवन का भी सजीव चित्रण करता है।  (किंडल से- लखिमा की आँखें- रांगेय राघव)

553. जुर्म का आगाज- जयदेव चावरिया

अण्डरवर्ल्ड और एक लाल सूटकेस
जुर्म का आगाज- जयदेव चावरिया

दावत होटल में एक बिजनेस पार्टी के दौरान हीरा वर्मा और नाजिम खान, राजनगर के दो बड़े बिजनेसमैन, रेड सूटकेस की डील कर रहे थे पर कोई तीसरा मास्टरमाइंड उनकी नाक के नीचे से रेड सूटकेस उड़ा ले गया। लोग सिर्फ यह जानते थे कि रेड सूटकेस के मालिक का नाम डेविल है जिसे किसी ने कभी नहीं देखा और जिसने डेविल को देखा वह किसी को बताने के लिए जिन्दा नहीं बचा। हीरा वर्मा और नाजिम खान को अब जल्द से जल्द रेड सूटकेस ढूँढना था वरना उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता। 
- कौन था वह मास्टरमाइंड जिसने हीरा वर्मा और नाजिम खान की नाक के नीचे से रेड सूटकेस उड़ा लिया ?
-  रेड सूटकेस में ऐसा क्या था जिसे हासिल करने के लिए सारा माफिया पीछे पड़ा था ?
- हीरा वर्मा और नाजिम खान का रेड सूटकेस से क्या संबंध था ?
- क्या वे रेड सूटकेस को हासिल कर सके ?
- रेड सूटकेस का मालिक डेविल आखिर कौन था ? जानने के लिए पढ़िए ये उपन्यास।

Thursday, 12 January 2023

552. वतन के रखवाले- अजिंक्य शर्मा

एक छपरी मर्डर मिस्ट्री

वतन के रखवाले- अजिंक्य शर्मा

अजीबोगरीब हालातों में एक-के-बाद-एक कत्ल के मामलों में फंसते जा रहे युवक की कहानी
एक मर्डर मिस्ट्री...जो पूरी फ़िल्मी है
अजिंक्य शर्मा द्वारा रचित पहली मर्डर मिस्ट्री, जिसे लेखक ने 'कॉमेडी' की केटेगिरी में भी शामिल किया है
कॉमेडी और मर्डर मिस्ट्री का मजेदार संगम, जैसा आपने कम ही उपन्यासों में पढ़ा होगा।



  नमस्कार।
 आज बात करते हैं उपन्यासकार अजिंक्य शर्मा जी के उपन्यास 'वतन के रखवाले' उपन्यास की। अजिंक्य शर्मा वही जो ब्रजेश शर्मा के नाम से उपन्यास लिखते रहे हैं‌। फिर बंदे को लगा 'यार, खुद का नाम भी तो सामने आना चाहिए, तो बंदे ने 'निमिष' और 'वतन के रखवाले' अपने वास्तविक नाम से लिखे। हाँ, ध्यान दीजियेगा- ब्रजेश शर्मा नाम भी लेखक महोदय का ही है, इस नाम से लिखे गये उपन्यास वास्तविक हैं।
   बहुत हो गया, अब बात करे नये उपन्यास की। चलो बात कर ही लेते हैं। 'वतन के रखवाले' एक हास्य मर्डर मिस्ट्री है। अब आओ सोच रहे होंगे हास्य मर्डर मिस्ट्री क्या है। जब सब कुछ हम ही बता देंगे तो उपन्यास कौन पढेगा। इसलिए उपन्यास पढें, आनंद लीजिए।

Sunday, 8 January 2023

551. ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ murder mystery

ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ murder mystery 

murder mystery ਤੇਜਵੀਰ ਦੀ ਨੌਕਰੀ ਦਾ ਅੱਜ ਪਹਿਲਾ ਦਿਨ ਸੀ। ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਟਾਈਮ ਤੋਂ ਦਸ ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾਂ ਪਹੁੰਚਣ ਦੀ ਨੀਅਤ ਨਾਲ਼, ਤੇਜਵੀਰ ਨੇ ਫਟਾਫਟ ਨਾਸ਼ਤਾ ਕਰ ਚਾਹ ਦੀਆਂ ਦੋ ਘੁੱਟਾਂ ਭਰੀਆਂ ਤੇ ਆਪਣੇ ਫਲੈਟ ਨੂੰ ਜਿੰਦਾ ਮਾਰ, ਚਾਬੀ ਨਾਲ਼ ਦੇ ਫਲੈਟ ਦੇ ਮਾਲਿਕ ਬਜ਼ੁਰਗਵਾਰ ਚੌਹਾਨ ਸਾਹਬ ਦੇ ਹਵਾਲੇ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਦਫ਼ਤਰ ਵੱਲ ਰਵਾਨਾ ਹੋ ਗਿਆ।                   

        ਆਪਣੀ ਮੋਟਰ ਸਾਈਕਲ 'ਤੇ ਸਵਾਰ ਹੋ ਤੇਜਵੀਰ ਨੇ ਰਾਜਗੁਰੂ ਨਗਰ ਸਥਿਤ ਆਪਣੇ ਫਲੈਟ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿੱਕਲ ਕੇ, ਸ਼ਹਿਰ ਵੱਲ ਨੂੰ ਮੋੜ ਕੱਟਿਆ ਹੀ ਸੀ ਕਿ ਅੱਗੇ ‘ਵੈਸਟਐੱਨਡ ਮਾਲ' ਦੋ ਸਾਹਮਣੇ ਸੜਕ 'ਤੇ ਉਸਨੂੰ ਕਾਫ਼ੀ ਇਕੱਠ ਜਿਹਾ ਨਜ਼ਰ ਆਇਆ। ਕਰੀਬ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਤੇਜਵੀਰ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਕਿ ਇੱਕ ਅੱਧਖੜ੍ਹ ਉਮਰ ਦਾ ਪਰਵਾਸੀ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੜਕ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਡਿੱਗਿਆ ਪਿਆ ਸੀ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਸੱਜੀ ਲੱਤ ਬੁਰੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ਼ ਜ਼ਖ਼ਮੀ ਸੀ। ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਵਿਚਾਰਾ ਕਿਸੇ ਐਕਸੀਡੈਂਟ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਸੀ। 

ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ murder mystery
ਇਹ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਜਨਾਬ! ਕਤਲ ਹੈ - ਹਰਦੇਵ ਗਰੇਵਾਲ, murder mystery
 

             murder mystery  जासूसी कथा साहित्य में पंजाबी साहित्य का एक उपन्यास प्राप्त हुआ, जो मर्डर मिस्ट्री आधारित एक रोचक उपन्यास है। वैसे मेरी दृष्टि में पंजाबी साहित्य में रहस्य-रोमांच रचनाएँ बहुत कम है और उस पर murder mystery रचना तो पहली बार देखी है। लेखक महोदय का यह प्रयास प्रशंसनीय है।