सामाजिक उपन्यास
Friday, 20 October 2023
Wednesday, 18 October 2023
576. कौन है मेरा कातिल- राकेश पाठक
तलाश अपने ही कातिल की
कौन है मेरा कातिल- राकेश पाठक
कोई इन्वेस्टीगेटर कत्ल होने के पश्चात् जब कातिल की तलाश करता है तो उसकी चेष्टा होती है कि वो जल्द-से-जल्द कातिल को पकड़े और अपने काम से छुट्टी पाये। वो अगर कानून का मुहाफिज है तो उसकी खोज के पीछे कर्त्तव्यनिष्ठता होती है, या कानून की सेवा करने के जज्बात। जबकि पेशेवर जासूस को अपनी फीस से सरोकार होता है।
परन्तु - किसी को अपने ही कातिल की तलाश हो, वो अपने कातिल को ढूंढकर उससे बदला लेने को तड़प रहा हो तो... तो उसके मनोभाव क्या होंगे? उसके दिल और दिमाग में सोचों के कौन-कौन से आंधी-तूफान चल रहे होंगे?
बस, इसी सवाल के दिमाग में आने पर इस उपन्यास का आइडिया अंगड़ाइयां लेने लगा और फिर एक हैरतअंगेज कथानक का जन्म हो गया, जिसमें रहस्य व रोमांच के साथ इन्वेस्टीगेशन का नया आयाम भी सम्मिलित हो गया।
कमल नामक एक ऐसे पात्र की संरचना हो गयी जो अपने कातिल के बारे में जानने के लिये व्याकुल है-उसे पकड़कर इन्तकाम लेने को बेताब है। क्या वो जान पायेगा कि उसका कातिल कौन है और उसके कातिल ने उसे क्यों कत्ल किया है? क्या वो अपने कातिल को पकड़कर उससे अपने कत्ल का इन्तकाम ले पायेगा?
मुझे पूरा विश्वास है कि जब कातिल का चेहरा सामने आयेगा तो आपको एकबारगी तो यकीन ही नहीं होगा- जब यकीन होगा तो आप मारे हैरत के उछल ही पड़ेंगे। आपने बहुत से उपन्यास पढ़े होंगे, बहुत-सी फिल्में भी देखी होंगी, लेकिन इस उपन्यास के जैसा 'क्लाईमैक्स' या अन्त नहीं पढ़ा होगा, नहीं देखा होगा, नहीं सुना होगा ।
Sunday, 1 October 2023
575. रहस्यमय लड़कियां- सुरेन्द्र इलाहाबादी
मेरा नाम ही मेजर नहीं, मैं काम में भी मेजर हूँ।
रहस्यमय लड़कियां- सुरेन्द्र इलाहाबादी
एक समय था जब उपन्यास साहित्य का केन्द्र इलाहाबाद था। इलाहाबाद का 'पुष्पी कार्यालय' उपन्यास प्रकाशन में अग्रणी था। जहाँ से बहुत अच्छे जासूसी उपन्यास प्रकाशित होते रहे हैं।सुरेन्द्र इलाहाबादी के उपन्यास भी यहीं से प्रकाशित होते थे। यह नाम वास्तविक है या छद्म यह तो कहना संभव नहीं है। इनका एक उपन्यास 'रहस्यमयी लड़कियां' पढने को मिला, जो एक रोचक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है।
मेजर का नया अदभुत कारनामा
रहस्यमय लड़कियां
जो भी लड़की मरी हुई मिलती उसके गले में नायलोन का मोजा होता आँखें बाहर को उछली हुई होतीं मुँह से जिह्वा की नोक दिखाई देती !
चारों लड़कियाँ एक-से-एक सुन्दर थीं चारों सुशिक्षिता थीं; आधुनिक थीं उन पर कोई भी प्यार करने को अकुला जाता मगर न जाने हत्यारे को उन पर क्यों तरस नहीं आया ।
हत्याओं की यह अनोखी कहानी है। इसे पढ़ कर रोंगटे खड़े हो जाएँगे यह निराला ही कारनामा है । मेजर का अनोखा कारनामा।
- सुरेन्द्र इलाहाबादी
जासूस मेजर लखनऊ के अपने ऑफिस में बैठा शीरी ओर विजय के साथ मेरठ के हत्याकांड पर विचार विनिमय कर रहा था । तभी मेजर के पास वंदना का फोन आया। मिसेज वन्दना त्रिपाठी को मेजर 'भाभी' कहा करता था । वह उसके अभिन्न मित्र और देश के यशस्वी सर्जन ओमप्रकाश त्रिपाठी की पत्नी थी।
वन्दना बोली - "आप इसी क्षण शिवाजी मार्ग २६ की ऊपरी मंजिल के फ्लैट में चले जाइये । इस इमारत के नीचे 'बंसल एण्ड कम्पनी' का आफिस है। आज इतवार है इसलिए दुकाने बन्द हैं। ऊपरी मंजिल के फ्लैट के बाहर ताला लगा हुआ है। और मैं अन्दर कैद हूँ ।"
Tuesday, 19 September 2023
574. साधु, संत और फकीर- बिमल चटर्जी
अत्याचार और बदले की कहानी
साधु, संत और फकीर - बिमल चटर्जी
हिंदी जासूस कथा साहित्य में बहुत से लेखक हुये हैं जिन्होंने बहुत कुछ लिखा है और अपने समय में प्रसिद्धि भी प्राप्त की है। ऐसे ही एक लेखक हुये है बिमल चटर्जी, बिमल चटर्जी ने टैंजा सीरीज लिखी थी, जो काफी प्रसिद्ध रही है।बिमल चटर्जी का मेरे द्वारा पढा गया यह प्रथम उपन्यास है जो एक बदला प्रधान कथा पर आधारित एक्शन उपन्यास है।
सेन्ट्रल जेल
वह एक लम्बा तड़ंगा जवान था । लम्बोत्तरा चेहरा, भरी दाढ़ी मुछें, लाल लाल सुर्ख आँखें। सिर के बाल काले किन्तु छोटे छोटे, चेहरा विचित्र सी कठोरता लिए हुए, हाथ और पैर मजबूत।
Sunday, 17 September 2023
573. विकास और चीनी दरिंदे- अशोक तरुण
विकास और चीनी दरिंदे - अशोक तरुण
लेखक अशोक तरुण का नाम भी पहली बार सामने आया है और उनका लिखा उपन्यास भी पहली बार ही पढा है। प्रस्तुत उपन्यास 'विकास और चीनी दरिंदे' विजय-विकास सीरीज का अंतरराष्ट्रीय कथानक पर आधारित है। और इसी कथानक पर एक और उपन्यास भी पढा था।
बादल इतनी जोरों से गर्ज मानो आसमान फट पड़ा हो । बिजली की तीव्र चमक ने सम्पूर्ण आसमान को एकबारगी प्रकाशित किया और फिर बादलों में ही लुप्त हो गई । इसके साथ पड़ने बाली वर्षा की बूंदों की मोटाई कुछ और बढ़ गई ।
सड़कों पर चारों तरफ पानी इस प्रकार से बह रहा था मानो किसी बांध को तोड़ दिया गया हो । चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था । यह मूसलाधार बारिश शाम से ही आरम्भ हो गई थी फिर ज्यों-ज्यों समय बीतता गया वर्षा में निरन्तर तेजी आती चली गई । इस समय रात के दो बजने जा रहे थे। शाम छः बजे से हो रही इस मूसलाधार बारिश ने जल-थल एक कर दिया था। चारों तरफ गहरी खामोशी व सन्नाटे का साम्राज्य छाया हुआ जिसमें तेजी से पड़ती बूंदों और बादलों की गर्ज ने अत्यधिक भयंकर बना दिया था । (उपन्यास के प्रथम पृष्ठ से)
उपन्यास का आरम्भ प्रसिद्ध वैज्ञानिक अय्यर के सहयोगी मोहन के कत्ल से होता है। मोहन एस.पी. रघुनाथ और जासूस विजय का सहपाठी रहा है।Wednesday, 23 August 2023
572. करिश्मा आँखों का - टाइगर
आखिर क्या रहस्य था उन नीली आँखों का
करिश्मा आँखों का - टाइगर
"यानि तुम अंधे नहीं हो ?"
"नहीं ।'
"तुम... तुम शुरू से ही अंधे नहीं थे फिर भी तुम मुझे धोखा देते रहे ? सारी दुनिया को धोखा देते रहे? क्यों ? क्यों किया तुमने यह नाटक ?” - सोना तिलमिलाकर बोली - "क्यों किया तुमने ऐसा ?"
"यह नाटक मुझे करने पर मजबूर होना पड़ा।"- अशोक इस बार दांत भींचकर गुर्रा उठा- "अगर यह नाटक नहीं किया होता तो मैंने इस दुनिया का असली रूप शायद आज भी न पहचाना होता। यह सच है सोना, आज मैं अंधा नहीं हूं । लेकिन मैं अंधा था, आंखें होते हुए भी मैं अंधा था। तभी तो इस दुनिया की हकीकत को नहीं देख रुका था मैं तभी तो मैं सांप को भी रस्सी समझता रहा— तभी तो मैं नागों को अपनी आस्तीन में पालकर दूध पिलाता रहा।" (उपन्यास अंश)
प्रस्तुत उपन्यास का कथानक डाक्टर कामत के द्वारा अशोक प्रधान के किये गये ऑप्रेशन से होता है। डॉक्टर कामत का यह ऑप्रेशन तो सफल हो जाता है लेकिन वह अशोक प्रधान के शांत जीवन में तूफान खड़ा कर देता है, अशोक का विश्वास और दुनिया दोनों ही खत्म हो जाते हैं।Saturday, 19 August 2023
571. लाश की जिंदा आँखें- टाइगर
कैसा अनसुलझा रहस्य था वो, आंखें तो जिन्दा थी, मगर इन्सान लाश में तबदील हो चुका था। (उपन्यास के अंतिम आवरण पृष्ठ से)
राजा पॉकेट बुक्स के लेखक 'टाइगर' के उपन्यास रहस्य-रोमांच के साथ-साथ हास्य से परिपूर्ण होते हैं। इनका रहस्य जितना कथा में होता है उतना ही उपन्यास शीर्षक में भी। उपन्यास शीर्षक देखें- लाश की जिंदा आँखें, मुँह बोला पति जैसे शीर्षक पाठक को सहज ही आकृष्ट कर लेते हैं। उस पर अगर आप टाइगर के नियमित पाठक हैं तो आपको पता ही है टाइगर के उपन्यासों में जो कथा कहने का तरीका, हास्य रस और आमजन पात्रों का वर्णन होता है वह बहुत प्रभावित करता है।
प्रस्तुत उपन्यास 'लाश की जिंदा आँखें' अपने समय का अत्यंत चर्चित उपन्यास रहा है। इसका कथानक एक बैंक डकैती से आरम्भ होता है।
कथा का मुख्य पात्र है बाबू राव पेंडरकर जो एक सजाप्राप्त, उम्रदराज व्यक्ति है और उसके साथ है उस जैसे ही तीन और सदाबहार दोस्त।
Monday, 14 August 2023
570. मौत सस्ती है - राज भारती
क्या विनोद खन्ना ने की थी एक हेरोइन की हत्या?
मौत सस्ती है- राज भारती
'सब झूठ है ।' आवेश में उसकी आवाज कांपने लगी 'पाल पहले ही कहता था कि ऐसा होगा वह जानता था कि उसको जीवित नहीं छोड़ा जायेगा। मैं जानती हूं कि तुम्हारे ही किसी आदमी उसकी जिन्दगी का सौदा कर डाला होगा।' - उसकी आंखों में अब आंसू झलक आये - 'वह पहले ही कहता था... तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिये।'
विजय बोला - 'वह महज दुर्घटना ही है। मैं खुद बाथरूम के बाहर मौजूद था । बाथरूम में दरवाजे के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं है।'-
कमल उसे घूरती रही, उसके होंठ अब भी कांप रहे थे । (मौत सस्ती है- राज भारती)
अनिता एक प्रसिद्ध अभिनेत्री थी। उसका एक फिल्म अभिनेता से और एक खतरनाक अपराधी से अच्छा संपर्क था। लेकिन एक दिन अनिता अपने घर के स्वीमिंग पूल में मृत अवस्था में पायी गयी। आखिर उसकी हत्या किसने और क्यों की?
पुलिस सुपरिडेटेंड रघुनाथ और जासूस विजय जब अभिनेत्री सुनीता के घर पहुँचे तो वहाँ का दृश्य अत्यंत वीभत्स था। अनीता के साथ-साथ घर के नौकरों का लाशें यहाँ-वहाँ पड़ी थी।
एक साथ इतने कत्ल।
इतना भयंकर हत्याकांड।
कितनी सस्ती नजर आ रही थी उसे मौत । कार में बैठा विजय वापस जाते समय वह यही सोच था।
Tuesday, 11 July 2023
569. वह कौन था- कर्नल रंजीत
किस्सा चार सौ साल पुराने अभिशाप का
वह कौन था- कर्नल रंजीत
हिंदी जासूसी साहित्य में कर्नल रंजीत का एक अलग ही अंदाज रहा है। इब्ने सफी के बाद कर्नल रंजीत ने ही वह लोकप्रियता प्राप्त की और अपना एक विशेष अंदाज बनाया था।
कर्नल रंजीत उपन्यास समीक्षा- चांदी की मछली
कर्नल रंजीत के उपन्यासों का नायक मेजर बलवंत है और उसके साथ उसके साथी और प्रिय कुत्ता क्रोकोडायल होता है।प्रस्तुत उपन्यास 'वह कौन था' एक रहस्य कथा है, जिसमेम एक जमींदार परिवार की कथा,कहां लगभग चार सौ साल से एक रहस्य बराबर चल रहा है और वह रहस्य है 'ठाकुर' की उपाधि प्राप्त व्यक्ति की हत्या का होना और यह पिछ्ले चार सौ साल से हो रहा है। क्या यह संभव था? अगर संभव था तो कैसे?
नमस्ते, मैं गुरप्रीत सिंह, श्रीगंगानगर, राजस्थान से पाठक मित्रों के लिए लेकर उपस्थित हूँ कर्नल रंजीत के उपन्यास 'वह कौन था' की समीक्षा।
Friday, 30 June 2023
568. जाल - विकास सी एस झा
क्राइम ब्राच का इंस्पेक्टर उलझा एक जाल में
जाल- विकास सी एस झा
ट्रिपल मर्डर की एक ऐसी गुत्थी, जिसके तारों में क्राइम ब्रांच का एक ऑफिसर चंद्रशेखर त्यागी, खुद उलझ बैठा, और ऐसा उलझा की पनाह मांग गया। लोभ, महत्वाकांक्षा और हवस की एक ऐसी कहानी जिसमें क़ातिल तक पहुंचना तमाम पुलिस और क्राइम ब्रांच के लिए निहायत दुश्वारियों भरा था। ये कहानी क्राइम ब्रांच के उस ऑफिसर, चंद्रशेखर त्यागी के खुद को पाक-साफ साबित करने और उस जद्दोजहद की कहानी है, जिसमें वो गले तक फंसा पड़ा था। ये कहानी एक ऐसी बेइंतहा हुस्न की मल्लिका उर्वशी कालरा की भी कहानी है जिसने पति के होते हुए भी पराये मर्दों से संबंध रखे, बाद में जिसका अंजाम खुद उसके कत्ल के तौर पर सामने आया, और फिर शुरू हुआ कत्ल का एक सिलसिला। क्या क़ातिल पकड़ा गया ? कौन था क़ातिल ? जानने के लिए पढ़ें ये रहस्यमयी कथानक-जाल।
विकास सी एस झा जी का नाम 'लाॅकडाउन' के समय उनकी रचना 'लाॅकडाउन एक उडान' के माध्यम से चर्चा में आया था। प्रथम रचना की सफलता के साथ ही विकास झा साहब लेखन को समर्पित हो गये।मेरे द्वारा विकास सी एस झा जी का पढा गया प्रथम उपन्यास 'जाल' है। जो कथानक के तौर पर जाल है जिसमें क्राइम ब्रांच का एक ऑफिसर उलझकर अपनी नौकरी तक गवा देता है।
जाल उपन्यास का आरम्भ मुंबई के एक स्थान कर्जत से होता है जहाँ मुंबई क्राइम ब्रांच का ऑफिसर चन्द्रशेखर त्यागी अपने दोस्तों के साथ एंजोय कर रहा था।
चंद्रशेखर त्यागी- मुंबई क्राइम ब्रांच का एक दिलेर और जांबाज ऑफिसर, जिसने महज 27 साल की उम्र में ही अपनी सूझबूझ और कार्यकुशलता के बल पर अपने ढाई साल के छोटे से कार्यकाल में ही डिपार्टमेंट के अंदर अपने नाम का सिक्का जमा लिया है । आज की तारीख में चंद्रशेखर त्यागी, मुंबई क्राइम ब्रांच का एक ऐसा नाम है जिसे सुनकर अपराधी पनाह माँग जाते हैं ।
Sunday, 18 June 2023
567. नवाब मर्डर केस - राज भारती
और इस तरह मारे गये छोटे नवाब जी
नवाब मर्डर केस- राज भारती
नवाब स्टील रौलिंग कम्पनी के मालिक के बड़े नवाब साहब के शाहबजादे छोटे नवाब फारुख शेख साहब जरा रंगीन मिजाज आदमी थॆ। अपनी कम्पनी की लड़कियों को बहला-फुसला कर अपने फार्म हाउस ले जाना, उनके साथ मनमर्जी या जबरदस्ती के साथ अपनी विषय पूर्ति करना उनका शौक था। काम मनमर्जि से हो गया तो ठीक नहीं तो छोटे नवाब साहब जबर्दस्ती कर ही लेते थे।
इसी के कामों के चलते एक दिन अपने फार्म हाउस पर छोटे नवाब साहब मरे हुये पाये गये। उनकी पीठ पर किसी ने खंजर ठक दिया था।
अब विषय यह था कि छोटे नवाब साहब का कत्ल किसने किया और क्यों किया?
खैर, क्यों किया यह तो बहुत जल्दी पता चल गया था पत किसने किया यह पता उपन्यास के अंत में चलता है।
नवाब स्टील कम्पनी की एक कर्मचारी आरती तलवार प्रसिद्ध वकील अभय वर्मा से मिलती है। और वकील अभय वर्मा को बताती है की रात नवाब स्टील कम्पनी के मालिक बड़े नवाब का पुत्र फारूख शेख उसे धोखे से फार्म हाउस ले गया और उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की, वासना का अंधा खेल खेलना चाहा पर वह किसी तरह वहाँ से बच कर निकल आयी।
Friday, 16 June 2023
566. वतन के आंसू- धीरज
1984 के आतंकवाद पर आधारित उपन्यास
वतन के आंसू- धीरज
राजा पॉकेट बुक्स, दिल्ली द्वारा प्रकाशित छद्म लेखक 'धीरज' का एक 'वतन के आंसू' पढने को मिला। उपन्यास की कथावस्तु स्वयं में अद्वितीय है क्योंकि इस विषय में लोकप्रिय साहित्य में, मेरी जानकारी अनुसार तो नहीं लिखा गया। हाँ, यह एक सज्जन ने बताया था कि इसी विषय पर प्रेम बाजपेयी जी ने एक उपन्यास लिखा था। यह भी अच्छी बात है।
अब बात करते हैं धीरज द्वारा लिखित 'वतन के आंसू' की। यह एक सत्य घटना पर आधारित एक थ्रिलर उपन्यास है।
नब्बे का दशक भारत और विशेष कर पंजाब के लिए एक काला दौर था। पंजाब में आतंकवाद चरम पर था। सन् 1984 में भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या इन चरमपंथियों द्वारा की गयी और उसके बाद दिल्ली में जो सिक्खों के साथ नरसंहार हुआ वह अमानवीय कृत्य था। आतंकवादियों का शीर्ष नेतृत्व खत्म हो चुका था लेकिन बाद में छोटे-छोटे समूहों में विभक्त आतंकवादियों ने आतंकी घटनाओं का कृत्य जारी रखा था।
'वतन के आंसू' की पृष्ठभूमि में आतंकवाद है और कहानी है दिल्ली की। जहाँ एक आतंकी संगठन बम विस्फोट द्वारा निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं।
आतंकी सिखों के विरोध में एक अज्ञात 'कनपटी मार' पैदा होता है जो सिख लोगों को निशान बनाता है और कनपटी पर प्रहार कर जान ले लेता है।
Thursday, 1 June 2023
565. मृगनयनी- जेठा लाल सोमैया
एक वकील जब फंसा कत्ल केस में
मृगनयनी- जेठा लाल सोमैया
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में हिंदी भाषी क्षेत्र के अतिरिक्त अन्य किसी राज्य का नाम लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में आता है तो वह है गुजरात। एक समय था जब गुजरात से 'गाइड' जैसी प्रसिद्ध पत्रिका का प्रकाशन होता था। वहीं सूरत से 'साहित्य संगम' नामक प्रकाशन से भी जासूसी उपन्यास प्रकाशित होते रहे हैं।
साहित्य संगम से जेठालाल सोमैया नामक लेखक की जानकारी मिलती है, जिन्होंने 'लाट साहब' नाम से भी उपन्यास लिखे हैं। इनका प्रसिद्ध नायक एडवोकेट संदीप सेन है।
जेठालाल सोमैया द्वारा रचित 'मृगनयनी' उपन्यास इन दिनों पढा, यह एक रोचक और तीव्रगति का मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है।
धंधे में तेजी की तरह मंदी के दिन भी आते हैं। पुरजोश में चलते व्यवसायों में भी कभी-कभी मंदी की बयार बहने लगती है। तेजी-मंदी का यह नियम कमोबेश लगभग सभी व्यवसाय को लागू होता है।
जब हर धंधे में मंदी आती है तो मुम्बई जैसा शहर भी इस मंदी से नहीं बच सकता और इस मुंबई शहर का प्रसिद्ध वकील संदीप सेन भी मंदी से नहीं बच सका।
एडवोकेट सन्दीप सेन की भी इन दिनों यही हालत थी । थोड़े से मामूली केसों के अलावा कोई खास काम उनके पास नहीं था। रीटा कदम उनकी नौजवान और चंचल सेक्रेटरी भी आफिस में ज्यादा काम न होने के सबब से महीने भर की छुट्टी गई थी। और सेन साहब खुद भी शाम का समय गुजारने के लिए रेडियो क्लब में पहुँचने लगे थे।








