Wednesday, 21 August 2019

220. एन्ट्रैप्ड- कंवल शर्मा

कैजाद पैलोंजी का दूसरा कारनामा।
एन्ट्रैप्ड-कंवल शर्मा
      रवि पॉकेट बुक्स से कंवल शर्मा का 25 जुलाई 2019 को प्रकाशित उपन्यास Entrappedped एक थ्रिलर उपन्यास है। यह कंवल जी द्वारा लिखित पांचवां उपन्यास है।
         कंवल शर्मा का द्वितीय उपन्यास था 'सेकण्ड चांस' जिसका मुख्य पात्र है, कैजाद पैलोंजी। प्रस्तुत उपन्यास कैजांद पैलोंजी का लेकर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास है।
        सेकण्ड चांस में कैजाद पैलोंजी एक पत्रकार था तो वहीं इस उपन्यास में वह एक N.G.O. संचालक है। जिसका काम लोगों को कानूनी सलाह देना है। लेकिन किस्मत यहाँ भी कैजाद की अच्छी नहीं है। एक दिन बैठे-बैठाये, बिन बुलाये एक मुसीबत गले आ लगी। और मुसीबत भी ऐसी की खुद कैजाद की समझ में भी नहीं आया की आखिर यह हो क्या गया।

        कहानी की बात करें तो यह गोवा से लेकर पाॅडिचेरी तक फैली हुयी एक अदभुत कथा है। कहानी का आरम्भ कैजाद पैलोंजी से होता है जिसके गले एक लाश पड़ती है। इंस्पेक्टर कामत कैजाद से सवाल करता है।
"क्या ये लड़की तुम्हारी क्लाइंट थी?"
"नहीं।"-मैंने कहा।
" क्या तुम इसे पहले से जानते थे?"
"नहीं।"
"तो जरूर ये यहाँ केवल मरने आई थी।"
"मुझे नहीं मालूम।"-मैंने मासूम स्वर में जवाब दिया।
(पृष्ठ-47)
       गोवा की एक नामी हस्ती फोरेंस जस्टिन। जो की एक मशहूर बिल्डर फाइनेंसर था और उसका पुत्र, एक दम नकारा पुत्र है विल्बर जस्टिन। अयाश किस्म का, बाप के कहने से बाहर का और धोखेबाज। बाप को छोडकर बेटा पाॅडिचेरी चला जाता है।
बेटा पहले बाप को धोखा देता था, फिर बाप की सेक्रेटरी को धोखा देता था और अब अपनी बीवी को भी धोखा देने में लगा था। (पृष्ठ-93)
       लड़की के रहस्यपूर्ण कत्ल की वारदात कैजाद पैलोंजी को पाॅडिचेरी ले जाती। और वहीं से कहानी में नये-नये मोड़ आने आरम्भ होते हैं। उपर से साधारण सी नजर आने वाली वारदात अपने अंदर बहुत रहस्य समेटे बैठी है।
इन रहस्यों से पर्दा हटाते वक्त कैजाद पलौंजी की जान भी मुसीबत में फंस जाती है।
      कैजाद के साथ घटती घटनाएं और बढते रहस्य कथानक को रोचक बनाने में सहयोग करते हैं। इंस्पेक्टर कामत हो या रेडिय्यार दोनों का किरदार अच्छा और पुलिस विभाग के अनुरूप है। वहीं जुबैर का किरदार नाममात्र ही आता है अगर उसको कुछ और बढाया जाता तो सार्थक लगता। बाकी पात्र उपन्यास में संतुलित हैं।

संवाद और भाषा शैली।
       कंवल शर्मा जी के उपन्यासों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, वह है उनके नीतिगथ कथन।‌ संवाद या कथन किसी भी कहानी को आगे बढाने के साथ-साथ जहाँ पात्र की विशेषताओं के वर्णन में सक्षम है वहीं कहानी का वातावरण भी तैयार होता है।
प्रस्तुत उपन्यास के कुछ रोचक कथन देखें।
- हम नंगे सिर घूमने वाली लड़की को शर्मिंदगी का वायस समझते हैं लेकिन उस लड़की को देखने बल्कि घूरने वाले लड़के को कभी कुछ नहीं कहते। (पृष्ठ-78)
- जिंदगी खूबसूरत रिश्तों से है और रिश्ते तभी कायम रहते हैं जब हम माफ करना और गलतियों को दरगुजर करना सीख जाते हैं। (पृष्ठ-79)
- जिसी को धोखा देना आसान है लेकिन फिर धोखे में बड़ी जान होती है क्यूंकी ये कभी नहीं मरता। ये घूमफिर कर वापिस खुद पर, धोखा देने वाले पर आ जाता है। (पृष्ठ-93)
- औरत अगर खूब भड़की हुई हो तो मर्दों के लिए अक्सर बर्दाश्त के बाहर होती है। (पृष्ठ-135)
- एक मरा हुआ इंसान अपने लिए इंसाफ मांगने खुद नहीं आ सकता....इसलिए जिंदा लोगों का फर्ज है कि मरने वाले को इंसाफ मिले।" (पृष्ठ-192)
- कुत्ता चाहे कैसी भी नस्ल का हो, कैसे भि ट्रेन्ड क्यूं न हो जाए, उसकी गर्दन से जंजीर नहीं निकालनी चाहिए।
(पृष्ठ-244)

      अगर उपन्यास के भाषा शैली की बात करें तो इसमें उर्दू के शब्दों की भरमार है। पता नहीं क्यों ऐसे शब्दों को महत्व दिया गया है जो प्रचलन में भी नहीं है। वहीं गोवा और पाॅडिचेरी के लोग ऐसी भारी भर‌कम उर्दू बोलते हैं। लगता तो नहीं।
एन्ट्रैप्ड एक ऐसा जाल है जिसमें नायक कैजाद पैलोंजी उलझ कर रह जाता है। जिस घटना से उसका कोई वास्ता नहीं, कोई संबंध नहीं उसमें वह ऐसा उलझता है की उसे कोई रास्ता नहीं मिलता। मौत से जूझते कैजाद पैलोंजी का यह कारनामा आदि से अंत तक रोचकता से भरपूर है। उपन्यास पठनीय और रोचक है। भरपूर मनोरंजन करने में पूर्णतः सक्षम।

और अंत में उपन्यास से काव्य पंक्तियाँ
          तू छोड़ दे कोशिशें इंसानों को पहचानने की।
          यहाँ जरूरत के हिसाब से सब नकाब बदलते हैं।


उपन्यास- एन्ट्रैप्ड  लेखक- कंवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स
पृष्ठ- 254
मूल्य- 100₹
प्रकाशन तिथि- 25.07.2019

पोलो ग्राउंड- माउंट आबू

219. पानी के धमाके - अनीस मिर्जा

वह जो पानी में आग लगा देता था।
पानी के धमाके -अनीस मिर्जा

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक समय था जब उपन्यास मासिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे। ऐसे उपन्यास लगभग 100 से 150-70 पृष्ठ के होते थे। इन पत्रिकाओं का मुख्य उद्देश्य मात्र उपन्यास प्रकाशित करना ही होता था लेकिन ये थी तो पत्रिका ही, इसलिए इनमें एक दो पृष्ठों पर समाचार भी प्रकाशित कर दिये जाते थे और अंतिम पृष्ठों पर उपन्यास विज्ञापन।
        ऐसी ही एक मासिक पत्रिका थी- इंस्पेक्टर जासूस। इस पत्रिका में जासूसी उपन्यास प्रकाशित होते थे और इनके स्थायी लेखक थे अनीस मिर्जा। सन् 1965 में अनीस मिर्जा का एक उपन्यास प्रकाशित हुआ 'पानी के धमाके'। यह उपन्यास आकार में चाहे छोटा है लेकिन है मनोरंजक।
       शहर के डी.आई.जी. (पुलिस) का फोन प्रसिद्ध गुप्तचर तनवीर सुलेमानी और आदिल के पास आता है।
डी.आई. जी. उन्हे बताते हैं- कल शाम को प्रोफेसर जगदीश की बेटी बेला तफरीह के लिए पिंग पोंग क्लब गई थी। सुबह तक वापस नहीं लौटी। प्रोफेसर जगदीश बहुत परेशान है। वह उनकी इकलौती बेटी है। (पृष्ठ-17)
       दोनों जासूस एक-एक सूत्र को पकड़ते हुए अपराधी की खोज में निकलते हैं। उन्हें पता चलता है की बेला को अंतिम बार- एक बूढे के साथ नाचते हुए देखा था। (पृष्ठ-17)
लेकिन इस खोज के दौरान जो भी व्यक्ति उनके हाथ लगता है वह जिंदा नहीं बचता। - "...क्या अपराधी इतना भयानक है कि लोग उसका नाम बताते हुए डरते हैं, यहाँ तक कि अपनी जान दे देते हैं।" (पृष्ठ-85)
         मुख्य अपराधी के बारे में तो अपराधी के साथी भी तनवीर को यही कहते हैं।- " वह...जो सबसे बड़ा है। और जो सब कुछ जानता है। जो तुम्हें कुत्ते की तरह भौंकने पर विवश कर सकता है। वह जो महान है। हर एक के मन को जानता है।"(पृष्ठ-82)
          यह कहानी एक खतरनाक अपराधी की है जो एक बहुत बड़ा खेल खेलता है और उसका प्रथम मोहरा है प्रोफेसर की बेटी बेला। और इसी बेला की तलाश में निकले दो जासूस तनवीर सुलेमानी और आदिल। इन दोनों का अपराधी को खोजना और उसे पकड़ना वास्तव में रोचक और पठनीय है।

उपन्यास में अपराधी को अजीब और बहुत खतरनाक दिखाया गया है। वहीं जासूस तनवीर को तीव्र बुद्धि का और आदिल को हास्य प्रवृत्ति का दिखाया गया है। आदिल का एक उदाहरण देखें।-
"आ...अच्छा... चलो प्यारे...खूब पियो...तहखाने में पियो या आसमान में उड़न खटोले पर पियो, लेकिन पियो जरूर, क्योंकि यही मेरी जिंदगी है यही मेरी बंदगी है।"-आदिल ने झूमते हुए कहा।

          अपराध कथा पर लिखा गया अनीस मिर्जा का यह लघु आकार का उपन्यास पठनीय है। हालांकि कहानी में लघु रखने के चक्कर में कुछ बातें और घटनाएं छूट गयी सी प्रतीत होती हैं। वहीं एक अन्य अपहरण की घटनाएं का आरम्भ में वर्णन है लेकिन अंत में कोई हल या वर्णन नहीं मिलता।
उपन्यास एक बार मनोरंजन के लिए पढा जा सकता और इसे चाहे तो विस्तार देकर और मनोरंजक बनाया जा सकता है। कम पृष्ठ और रोचक कहानी। अच्छा उपन्यास।

उपन्यास- पानी के धमाके
लेखक-   अनीस मिर्जा
पत्रिका- इंस्पेक्टर जासूस
प्रकाशक- जी.के. पब्लिकेशन, लाजपत नगर, नई दिल्ली
पृष्ठ- ‌‌‌ 103

218. पृथ्वी के छोर पर- शरदिंदु मुकर्जी

एक वैज्ञानिक की अंटार्कटिका यात्रा
पृथ्वी के छोर पर- डाॅ. शरदिन्दु मुकर्जी

कभी-कभी अलग प्रकार ही नहीं बहुत अलग प्रकार की किताबें पढने को मिल जाती हैं। ऐसी किताबें जो स्मृति पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं। जब कुछ ऐसा पढने को मिल जाये जो अपनी उम्मीदों से परे हो, अपनी कल्पना शक्ति से आगे हो और रुचिकर हो तो उसकी चर्चा आवश्यक हो जाती है। ऐसी ही एक रचना 'पृथ्वी के छोर पर' पढने को मिली।
पृथ्वी के छोर पर' भूवैज्ञानिक शरदिंदु मुकर्जी जी के अंटार्कटिका यात्रा का रोमांचक वर्णन है। भारत का वैज्ञानिक दल अंटार्कटिका में शोध हेतु जाता रहता है। वहाँ पर भारत के दो शोध केन्द्र भी हैं दक्षिण गंगोत्री और मैत्री।
अंटार्कटिका के अपने तीन दशकों से भी अधिक समय के सम्पर्क से और वहाँ के विभिन्न अभियानों में भाग लेने के कारण उनके पास इस अद्भुत हिमप्रदेश के अनेक रहस्यमय संस्मरणों का एक विशाल भण्डार मौजूद है. एक सशक्त लेखक, प्रकृति प्रेमी कवि तथा कुशल वैज्ञानिक होने के कारण जिस सहजता से बखूबी उन्होंने अपनी आँखों देखी बातों का विवरण ‘पृथ्वी के छोर पर' में लिखा है, उसने इस पुस्तक को रोमांचकारी रूप प्रदान कर दिया है.

217. कहानी तेरी मेरी- खुशी शैफी

खुशी की रंग बिरंगी दुनिया
कहानी तेरी मेरी- खुशी सैफी

खुशी सैफी द्वारा लिखित एक छोटा सा कहानी संग्रह पढा। इस संग्रह में कुल पांच कहानियाँ और पांचों कहानियाँ विविध रंग की है। कहानियों में कहीं कोई गम्भीर नहीं ये हल्की सी कहानियाँ सामान्य उस पाठक के लिए है जो मनोरंजन के साथ-साथ कुछ अच्छा भी पढना चाहता है। ये कहानियाँ हास्य के साथ-साथ वर्तमान समाज की कुछ विसंगतियों का भी चित्रण करती है।
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     इस संग्रह की पहली कहानी है- '498A के शिकारी'। यह सलोनी नामक एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसके लिए शादी एक व्यापार है। लेकिन कभी-कभी सलोनी जैसे चालाक व्यापारी भी मात खा जाते हैं। ऐसा ही इस कहानी में दर्शाया गया है।
'498A के शिकारी' में जो चित्रित है ऐसी घटनाएं कई बार समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल जाती है।
कहानी की एक पंक्ति मुझे अच्छी लगी।
बेटी का बाप कन्या दान करता है, ऊपर से दहेज़ का एक और बोझ डाल देना कहाँ का इंसाफ है” मिस्टर जोशी ने कहा।

216. महाभारत के बाद- भुवनेश्वर उपाध्याय

महाभारत के पात्रों का चिंतन
महाभारत के बाद- भुवनेश्वर उपाध्याय
  
महाभारत के बाद भुवनेश्वर उपाध्याय की एक वैचारिक रचना है। यह मंथन है महाभारत के बाद जीवित बचे पात्रों का। उनका दृष्टिकोण है जो हुआ (महाभारत युद्ध) क्या वह उचित है, क्या वह आवश्यक था, क्या उसे टाला नहीं जा सकता था?
भारतवर्ष के इतिहास में सबसे बड़ा नरसंहार 'कौरव- पाण्डव युद्ध' रहा है।
        क्या यह युद्ध उचित था, क्या यह मात्र अपनी विजयार्थ लड़ा गया एक संग्राम मात्र था या इसके कोई और कारण भी रहे हैं। यह कोई सामान्य युद्ध न था यह तो महायुद्ध था यह तो धर्मयुद्ध था। जैसा की लेखक महोदय लिखते हैं- धर्मयुद्ध, धन-सम्पत्ति और सत्तात्मक अधिकारों‌ के‌ लिए नहीं होते, बल्कि दो मानसिकताओं के मध्य होते हैं; मानवीय मूल्यों और महत्वाकाक्षाओं के मध्य होते हैं।
वास्तव में यह दो मानिकताओं दो मूल्यों का द्वंद्व था। 


215. खेल खिलाड़ी का- विनय प्रभाकर

मेजर नाना पाटेकर का एक और कारनामा
खेल खिलाड़ी का- विनय प्रभाकर
नाना पाटेकर सीरीज

विनय प्रभाकर कृत नाना पाटेकर सीरिज का एक उपन्यास 'मौत आयेगी सात तालों में' पढा था वहीं से मैं नाना पाटेकर का प्रशंंसक हो गया था। नाना पाटेकर उपन्यास साहित्य का एक दबंग पात्र है। जो देशप्रेमी है और अपराधी भी।
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         लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में डकैती करने वाले कुछ प्रसिद्ध पात्र रहे हैं। सुरेन्द्र मोहन पाठक कृत विमल, अनिल मोहन जी का 'देवराज', अनिल सलूजा का 'बलराज गोगिया' और विनय प्रभाकर का 'नाना पाटेकर'। मुझे इनमें से नाना पाटेकर सबसे अलग लगता है। क्योंकि वह दबंग है,देशप्रेमी है, आर्मी का जवान रह चुका है, किसी से दबता नहीं और धुन का पक्का है।
अब बात करते है उपन्यास 'खेल खिलाड़ी का' के कथानक की।
पिछले घटनाक्रम में नब्बे करोड़ के सोने से नाम मात्र सोना लेकर मेजर फरार हो गया था।
नब्बे करोड़ के सोने में से सिर्फ दस-दस ग्राम के पांच बिस्कुट लेकर और जार्ज लुइस के सहयोग का आभार मानते हुए मेजर ने नदी में छलांग लगा दी। (पृष्ठ-10)
'खेल खिलाड़ी का' उपन्यास का कथानक इस घटना के बाद आरम्भ होता है। इस उपन्यास का पूर्व उपन्यास या कहानी अए किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है उक्त घटना का नाम मात्र चित्रण है।

      वहाँ से मेजर सोनीपत पहुंचा। सोनीपत स्टेशन पर ट्रेन रूकते ही मेजर यह सोचकर वहाँ उतर गया कि दिल्ली जाने की जगह यह छोटा शहर उसके ठहरने के लिए ज्यादा ठीक रहेगा।
(पृष्ठ-13)
          मेजर ने सोनीपत को एक सुरक्षा स्थान मान कर यहीं ठहरने का विचार किया लेकिन क्या पता था यहाँ भी मुसीबत उसका पीछा नहीं छोड़ने वाली। और अंततः मेजर एक चक्रव्यूह में फंस ही गया।

Tuesday, 30 July 2019

214. वेद मंत्र- वेदप्रकाश शर्मा

क्या था वेद मंत्र।
वेद मत्र- वेदप्रकाश शर्मा, थ्रिलर ।

वेद प्रकाश शर्मा को 'सस्पेंश का बादशाह' क्यों कहा जाता है। अगर किसी के दिमाग में यह प्रश्न उठता है तो उसे वेदप्रकाश शर्मा का उपन्यास 'वेद मंत्र' पढ लेना चाहिए। हालांकि वेदप्रकाश शर्मा जी के और भी बहुत से उपन्यास ऐसे हैं जो सस्पेंश से भरपूर हैं। उपन्यास की भाषा में कहें तो वेद जी के उपन्यास 'दिमाग के परखच्चे' उठाने में सक्षम होते हैं।
उपन्यास के आरम्भिक पृष्ठ पर लिखे कथन भी तो यही कहते हैं- एक ऐसी कहानी जो मुश्किल से दो-चार पृष्ठ बाद ही आपको इस कदर अपने मोहपाश में बांध लेगी कि इस उपन्यास को पूरा पढना आपको दुनिया का सबसे जरूरी काम लगने लगेगा।

प्रस्तुत उपन्यास एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसकी पहचान बदल जाती है। इसी बदली हुयी पहचान के कारण वह मुसीबत में‌ फंस जाती है। उस पर आरोप लगता है 'दस करोड़ डाॅलर' की धोखाधड़ी का।

एक है कविता भटनागर, जिसे स्वयं कविता भटनागर के अलावा और कोई भी उसे कविता भटनागर के नाम से नहीं पहचानता। मजे की बात यह की उस कथित कविता भटनागर पर कविता भटनागर की हत्या का आरोप है।

"कितनी बार कहूं...कितनी बार कहूं कि मैं कविता हूँ। कविता भटनागर।" वह चीखी-"मेरे पेरेंट्स ने मेरा यही नाम रखा था।"
"उसी की तो तुमने हत्या की है।"
"ऐसा गजब मत कीजिए.......आप कविता भटनागर के हत्या के इल्जाम कविता भटनागर को ही फांसी पर लटका देंगे।" (पृष्ठ-08,09)

यह कैसे संभव है। मरने और मारने वाला एक ही व्यक्ति हो। लेकिन यह तो हो गया।
वहीं कथित कविता पर दस करोड़ डाॅलर के गबन का आरोप है। जिसे कथित कविता स्वीकार नहीं करती।

".....जिस बच्ची ने मेरी कम्पनी के एकाउंट से दस करोड़ डाॅलर किसी और के एकाउंट में ट्रास्फोर कर लिए हों,वह इस सवाल का अर्थ ही न समझे।"
वह चीख पड़ी-"मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया।"(पृष्ठ-123)


क्या यह संभव है। खैर कविता भटनागर इस विषय पर क्या कहती है वह भी देख लीजिएगा- बस इतना कह सकती हूं कि किसी ने मुझे इतनी बुरी तरह से फंसाया है कि.... (पृष्ठ-174)

      क्या किसी ने कविता भटनागर के लिए जाल फैलाया है या फिर कविता भटनागर ही एक फ्राॅड है, लेकिन यह भी अनोखा रहस्य है की कथित कविता भटनागर भी स्वयं को कविता भटनागर साबित नहीं कर पाती। तो फिर क्या रहस्य है कविता भटनागर का। अब यह समझने के लिए तो उपन्यास पढना होगा।

         हां, यह सत्य है की उपन्यास की कहानी रहस्य के एक ऐसे जाल की तरह है जिसमें एक बार बंध जाने पर बाहर निकलना मुश्किल है। एक ऐसा जाल है जिसमें पुलिस और कम्पनी तक का दिमाग घूम गया की आखिर हो गया रहा है।
वैसे भी वेदप्रकाश शर्मा जी यह विशेषता है की वे कहानी को बहुत घुमावदार बनाते हैं‌। और हां कहानी का अंत भी उतना ही रोचक है जितना की बाकी कहानी।
             कहानी के विषय में ज्यादा चर्चा करने का अर्थ होगा कहानी का आनंद खत्म करना। बस एक बार आप उपन्यास उठा कर देखें।

निष्कर्ष-
वेद मंत्र 'दस करोड़ डाॅलर' की धोखाधड़ी के साथ-साथ एक कथित लड़की की पहचान खोने की कहानी है। रूसी हथियार सप्लायर्स, अमेरिका की खूफिया विभाग और भारतीय कम्प्युटर एक्सपर्ट तीनों को उलझाने वाले एक अनोखे शख्स की यह कहानी पाठक को जितना आरम्भ में चौंकाती है उतना ही अपने अंत में।
आदि से अंत तक सस्पेंश से भरपूर एक दिलचस्प कहानी। उपन्यास भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम है।

उपन्यास- वेद मंत्र
लेखक-   वेदप्रकाश शर्मा
पृष्ठ-       347
प्रकाशक- राजा पॉकेट बुक्स


Saturday, 27 July 2019

213. सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री- वेदप्रकाश शर्मा

एक सत्य घटना पर आधारित मर्डर मिस्ट्री।
सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री- वेदप्रकाश शर्मा, उपन्यास

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में जो स्थान वेदप्रकाश शर्मा का है वहाँ तक किसी अन्य लेखक को पहुंचाना एक हद तक कठिन है।
         इसका एक कारण यह भी है की वेदप्रकाश शर्मा जी के कुछ उपन्यास मात्र काल्पनिक न होकर यथार्थ और कल्पना का मिश्रण होता था। जासूसी साहित्य मात्र मनोरंजन का माध्यम है तो इसलिए इसमें कल्पना की प्रचुरता तो रहेगी।
वेद जी सामाज में घटित किसी घटना को अपनी कल्पना के रंगों से सुसज्जित कर पाठक के सामने इस तरह से प्रस्तुत करते थे की पाठक उस संसार में खो जाता था।
             वेद जी ने बहुत सी वास्तविक घटनाओं को आधार बना कर उपन्यास लिखे हैं, 'सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री' भी एक ऐसा ही कथानक है।
भारत के अपराध जगत में घटित एक ऐसी घटना जो  आज तक अनसुुुलझी है।
           सन् को 2008 में नोएडा (UP) में एक वीभत्स हत्याकाण्ड हुआ था। आरुषि हेमराज हत्याकाण्ड भारत का सबसे जघन्य व रहस्यमय हत्याकाण्ड था जो 15–16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 में हुआ। डॉ. राजेश तलवार और उनकी पत्नी डॉ. नूपुर तलवार (दोनो पेशे से चिकित्सक) पर आरोप था की उन्होंने अपनी एकमात्र सन्तान आरुषि के साथ अपने घरेलू नौकर हेमराज की नृशंस हत्या कर दी और सबूत मिटा दिये। लेकिन तलवार दम्पति का कहना है की ये उन्होंने नहीं किया।
घर में चार सदस्य और जिनमें से एक रात दो की हत्या हो जाती है। घर अंदर से बंद है और बाहर से आने का कोई रास्ता नहीं। तो यह कैसे संभव है की किसी बाहरी आदमी‌ ने हत्या की हो।
        यह केस तो बहुत लंबा चला और कई परिणाम सामने आये। यह भारत की एक अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री है।
इसी को आधार बना कर वेदप्रकाश शर्मा ने 'सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री' लिखी है। जब वेद जैसे लेखक लिखते हैं तो यह तय की वह मात्र सामान्य मर्डर मिस्ट्री न होगी। जैसे अक्सर लिखा जाता है- एक कत्ल और फिर कातिल की तलाश। इस उपन्यास में वेद जी ने जो पृष्ठ दर पृष्ठ रोमांच का समां बांधा है वह पठनीय और प्रशंसनीय है।
           ‌‌‌राजन सरकार और उनकी पत्नी इंदू सरकार। इनका एक मात्र पुत्र है कान्हा और घर में चौथा सदस्य है नौकरानी मीना। एक रात घर पर कान्हा और मीना का कत्ल कर दिया जाता है। घर अंदर से बंस है और राजन और इंदू का कहना है की ये कत्ल उन्होंने नहीं किया।
लेकिन सब तथ्य उनके विपरीत हैं। बहुत कुछ संदेहजनक है। यहाँ तक की राज‌न सरकार के बयान भी।
सबसे बड़ा बेस तो यही है कि पुलिस कोर्ट में इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने जो भी फैसला सुनाया, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया। (पृष्ठ-49) 

     तब ठाकुर निर्भय सिंह (पुलिस विभाग) के साथ राजन सरकार विजय से मिलता है और अपनी बेगुनाह होने का और कान्हा की आत्मा को इंसाफ दिलाने की प्रार्थना करता है।
यहाँ से उपन्यास का आरम्भ होता है। एक के साथ एक नयी-नयी रोचक और हैरतजनक घटनाएं घटित होती हैं।
स्वयं विजय-विकास हैरान है की यह सब क्या हो रहा है?

- कान्हा और मीना की हत्या किसने की?
- बंद घर में हत्या कैसे संभव है?
- सरकार दम्पति को मृतकों‌ की चीखे क्यों न सुनाई?
- आखिर सबूत किसने मिटाये?
- कान्हा और मीना की हत्या क्यों की गयी?

Friday, 26 July 2019

212. दहकते शहर- वेदप्रकाश शर्मा

विजय- विकास का प्रथम उपन्यास
दहकते शहर- वेदप्रकाश शर्मा, उपन्यास

     वेदप्रकाश शर्मा उन लेखकों में से एक हैं जिनको पढकर मेरा उपन्यास प्रेम परवान चढा। वेद जी के उपन्यास बहुत रोचक और दिलचस्प होते हैं। हिन्दी जासूसी साहित्य में सर्वाधिक बिक्री वाले लेखक रहे हैं वेदप्रकाश शर्मा जी।
       'दहकते शहर' वेदप्रकाश शर्मा जी का प्रथम उपन्यास माना जाता है। यह मानना किस दृष्टि से है यह देखना है। देखना क्या है पढना है। और पढना यह है कि 'दहकते शहर' वेदप्रकाश शर्मा के स्वयं के नाम से प्रकाशित होने वाला प्रथम उपन्यास है। अर्थात् वेद जी छद्म नाम से पहले लिखते रहे हैं।
जैसा की उपन्यास साहित्य का एक काला अध्याय रहा है वह है भूत लेखन(Ghost writing) और यह भूत/ छद्म लेखन वेद जी ने भी किया है।

        अब रिकाॅर्ड के अनुसार 'दहकते शहर' ही वेद जी का प्रथम उपन्यास माना जाता है। लेकिन इस से पूर्व वेद जी काफी उपन्यास लिख चुके थे। 'दहकते शहर' पढते वक्त यह अहसास बना रहता है की ये पात्र पूर्व में परिचित हैं।
       जैसे विजय कहता है- मर्डरलैण्ड को तो हमारे लूमड़ प्यारे समाप्त कर आये थे।(पृष्ठ-20) ( शायद यह प्रसंग वेद जी द्वारा लिखे गये Ghost लेखन के उपन्यास में होगा)

Sunday, 30 June 2019

211. हादसा- संजय काले

एक हादसा जिंदगी बदल सकता है।
हादसा- संजय काले, मराठी से अनुवादित

हादसा संजय काले जी द्वारा रचित मराठी उपन्यास 'कधीतरी अचानक' का हिन्दी अनुवाद है। संजय काले जी का नाम मेरे किए तो नया है, इसी नयेपन की वजह से यह उपन्यास पढा।

        हादसा एक ऐसे कुछ ऐसे लोगों की कहानी है जो एक कम्पनी में सहकर्मी, दोस्त और पड़ोसी भी हैं। इनकी जिंदगी में कुछ ऐसे हादसे होते हैं जो इनकी जिंदगी को बदल कर रख देते हैं। क्या यह मात्र हादसे हैं या किसी के गहरे षड्यंत्र, खैर यह प्रश्न तो उपन्यास पढने पर ही हल होगा।
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सुबोध एक कम्पनी का प्रमुख है। अमेय, मकरंद और श्री धर उसी कम्पनी के कर्मचारी हैं।
सुबोध, अमेय का बॉस था। उनके बगलवाले बंगले में रहता था। दो घरों की कंपौड वॉल कॉमन थी।

Tuesday, 25 June 2019

210. मैडम नताशा का प्रेमी- अमित खान

एक लड़की की रोमांचक जिंदगी।
मैडम नताशा का प्रेमी- अमित खान, उपन्यास

मेरी किस्मत शुरु से ही खराब रही।
हालांकि इस दुनियां में लड़की होना ही अपने आप में बहुत बड़ा अभिशाप है।
जबकि मैं लडकी थी और बदकिस्मत भी थी।
यानि दोनों अवगुण मेरे अंदर थे।
जरा सोचिए...ऐसी हालत में मेरे ऊपर क्या गुजरी होगी।
सबसे पहले मैं आपको अपना नाम बताती हूँ।
नताशा शर्मा।
यही मेरा नाम है।
अपने नाम की तरह ही मैं खुबसूरत हूँ।
(पृष्ठ-09,10)
                 उक्त कथानक है अमित खान ही के उपन्यास 'मैडम‌ नताशा का प्रेमी' का। यह एक 'हाॅट थ्रिलर उपन्यास है। पहले मुझे लगा की उपन्यास में कुछ 'हाॅट' दृश्य होंगे और थ्रिलर के नाम पर एक्शन होगा। लेकिन जब उपन्यास पठना आरम्भ किया तो उक्त धारणाएं खत्म हो गयी। यह वास्तव में एक जबरदस्त थ्रिलर उपन्यास है जिसका आधार मात्र 'हाॅट' कहा जा सकता है। उपन्यास में कहीं जबरन अश्लील का पुट नहीं दिया गया और हां, रोमांच गजब है।
अब बात करें उपन्यास की तो यह उपन्यास मैडम नताशा के जीवन पर आधारित है।‌ नताशा खूबसूरत तो है लेकिन उसके जीवन में प्रेम नहीं है। एक साधु बाबा ने यह भविष्यवाणी की थी। -"इसकी किस्मत में प्रेम नहीं है। यह सदा पुरुष के प्रेम को तरसेगी। पुरूष का प्रेम...वह चाहे पिता के रूप में हो या प्रेमी के रूप में..इसे कभी पुरूष का प्रेम नहीं मिलेगा। (पृष्ठ-12)

           बस इसी को चैलेंज के रूप में लिया नताशा ने। उसे एक नहीं अनेक प्रेमी मिले लेकिन हर प्रेमी के साथ धोखा भी। प्रेम और धोखे ने नताशा का जीवन ही बदल दिया। वह न चाहते हुए भी एक ऐसे भंवर में फंस गयी जहाँ उसे बदहाल जिंदगी के अतिरिक्त भी बहुत कुछ मिला लेकिन स्थायी कुछ भी न था।
           बड़ी अजीब थी नताशा की किस्मत उसने जिस किसी पुरुष से प्रेम किया उसी ने उसे धोखा दिया। उस‌ने अपने कई प्रेमियों को मौत के घाट उतार डाला। हत्या की एक हैरत अंगेज स्कीम। ( उपन्यास के आवरण पृष्ठ से)
उपन्यास के विषय में ज्यादा कुछ लिखने का अर्थ होगा उपन्यास का आनंद खत्म करना। उपन्यास का असली आनंद इसे पढनें में ही है।
         फिर भी उपन्यास पर कुछ चर्चा करें तो यह रोमांच से आरम्भ होती है एक्शन से गुजरती हुयी एक सस्पेंश के साथ अपने समापन को प्राप्त होती है।
उपन्यास कट हर पात्र एक नया रोमांच लेकर ही आता है। लेकिन जाता वह एक सस्पेंश के साथ है।

अमित खान जी ने उपन्यास में कुछ ऐसे कथनों का उपयोग किया है जो एक तरह से 'सुक्ति' का काम‌ करते हैं। ये मात्र लेखक के विचार न होकर सत्य कथन है।
- प्रेमी...जो अगर अन्तर्मन से प्यार करे, तो उसकी बाहों जैसा स्वर्ग दुनियां में और कहीं नहीं।
- मर्द की फितरत बड़ी रंगीन होती है। वह जैसे-जैसे उम्र की ढलान की तरफ बढता है...वैसे-वैसे उसके पर फड़फड़ाने लगते हैं।


        उपन्यास एक 'हाॅट थ्रिलर' के अलावा भी महत्वपूर्ण बातों‌ पर ध्यान आकृष्ट करता है। जैसे- कुछ लम्पट किस्म के उम्रदराज भी बच्चियों पर कुदृष्टि रखते हैं। उनसे सावधान रहना जरूरी है।

प्रस्तुत उपन्यास मात्र 'हाॅट' कथानक न होकर एक जबरदस्त थ्रिलर गाथा है। कहानी इतनी दिलचस्प है की एक ही बैठक में पठनीय है।
अगर आप थ्रिलर उपन्यास पसंद करते हैं तो यह उपन्यास आपको अवश्य अच्छा लगेगा।
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उपन्यास- मैडम नताशा का प्रेमी
लेखक- अमित खान
प्रकाशक- शिवा पॉकेट बुक्स
पृष्ठ- 236


अमित खान का पचासवां उपन्यास।
हाॅट थ्रिलर शृृंखला।

209. स्वेटर- अशोक जमनानी

मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह- स्वेटर
स्वेटर- अशोक जमनानी, कहानी संग्रह

साहित्यकार अशोक जमनानी जी का कहानी संग्रह 'स्वेटर' पढने को मिला यह एक रोचक और मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह है।

      इस संग्रह में वे कहानियाँ हैं, जिन्हें आकाशवाणी भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में प्रसारित किया है। मेरे विचार से इसी कारण इस संग्रह की कहानियों में एक सरलता है।

        अशोक जमनामी का कहानी संग्रह स्वेटर कुछ रोचक और मर्म स्पर्शी कहानियों का संग्रह है। कहानियों की जो खुशबू है वह हल्की सी है जो आपके हृदय को एक शांति प्रदान करती है। कहानियों में कहीं भी जबरदस्त पैदा किया गया यथार्थवाद नहीं है, ओढी गयी गंभीरता नहीं है। जो कुछ भी इन कहानियों में व्यक्त है वह बहुत सहज और सरल है। वहीं लिखा गया है जो सामान्य समाज का एक अंग है।
      इस संग्रह में कुल पन्द्रह कहानियाँ है।
       इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'स्वेटर' जो यह दर्शाने में कामयाब रही है की हम किसी घटना की वास्तविक जाने बिना अपने-अपने दृष्टिकोण से उसकी व्याख्या आरम्भ कर देते हैं।
जैसे अमोल ने स्वेटर पहना तो सभी ने अपने -अपने अनुमान लगाने आरम्भ कर दिये। यह कहानी हमारे दृष्टिकोण को एक नया आयाम देती है, हमारी पूर्वधारणाओं को त्यागने का संदेश भी देती है।

Saturday, 15 June 2019

208. असाधारण नायक ओमपुरी- नंदिता सी. पुरी

 असाधारण नायक की जीवन कथा।
ओमपुरी की जीवनी

फिल्म अभिनेता ओम पुरी की जीवनी 'असाधारण नायक ओमपुरी' उनकी द्वितीय पत्नी नंदिता सी. पुरी द्वारा लिखित है। जिसमें ओमपुरी के जीवन के एक-एक भाग को बहुत रोचक और दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
ओम पुरी के बचपन के कठिन संघर्षों से लेकर उनके सफल जीवन का स्पष्ट और बेबाक चित्रण इस जीवन में उपलब्ध है।
हरियाणा के अंबाला शहर से संबंध रखने वाले ओमपुरी जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। जहां गरीबी का साम्राज्य स्थापित था। ओमपुरी का जीवन चाय ढाबे पर, कोयला बीनने और मजदूरी करते बीता है।
ओमपुरी के जीवनी में एक बात स्पष्ट होती है वह है उनका संघर्ष और हार न मानना। वे किसी भी परिस्थिति में घबराये नहीं।
ओम की एक ट्रेजडी यह भी रही की न तो वे नायक की तरह लगते थे और न ही खलनायक की तरह और उस पर भी उनका चेहरा भी दागदार था। जो छोटी उम्र में ही चेचक के कारण हो गया।