Tuesday, 30 July 2019

214. वेद मंत्र- वेदप्रकाश शर्मा

क्या था वेद मंत्र।
वेद मत्र- वेदप्रकाश शर्मा, थ्रिलर ।

वेद प्रकाश शर्मा को 'सस्पेंश का बादशाह' क्यों कहा जाता है। अगर किसी के दिमाग में यह प्रश्न उठता है तो उसे वेदप्रकाश शर्मा का उपन्यास 'वेद मंत्र' पढ लेना चाहिए। हालांकि वेदप्रकाश शर्मा जी के और भी बहुत से उपन्यास ऐसे हैं जो सस्पेंश से भरपूर हैं। उपन्यास की भाषा में कहें तो वेद जी के उपन्यास 'दिमाग के परखच्चे' उठाने में सक्षम होते हैं।
उपन्यास के आरम्भिक पृष्ठ पर लिखे कथन भी तो यही कहते हैं- एक ऐसी कहानी जो मुश्किल से दो-चार पृष्ठ बाद ही आपको इस कदर अपने मोहपाश में बांध लेगी कि इस उपन्यास को पूरा पढना आपको दुनिया का सबसे जरूरी काम लगने लगेगा।

प्रस्तुत उपन्यास एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसकी पहचान बदल जाती है। इसी बदली हुयी पहचान के कारण वह मुसीबत में‌ फंस जाती है। उस पर आरोप लगता है 'दस करोड़ डाॅलर' की धोखाधड़ी का।

एक है कविता भटनागर, जिसे स्वयं कविता भटनागर के अलावा और कोई भी उसे कविता भटनागर के नाम से नहीं पहचानता। मजे की बात यह की उस कथित कविता भटनागर पर कविता भटनागर की हत्या का आरोप है।

"कितनी बार कहूं...कितनी बार कहूं कि मैं कविता हूँ। कविता भटनागर।" वह चीखी-"मेरे पेरेंट्स ने मेरा यही नाम रखा था।"
"उसी की तो तुमने हत्या की है।"
"ऐसा गजब मत कीजिए.......आप कविता भटनागर के हत्या के इल्जाम कविता भटनागर को ही फांसी पर लटका देंगे।" (पृष्ठ-08,09)

यह कैसे संभव है। मरने और मारने वाला एक ही व्यक्ति हो। लेकिन यह तो हो गया।
वहीं कथित कविता पर दस करोड़ डाॅलर के गबन का आरोप है। जिसे कथित कविता स्वीकार नहीं करती।

".....जिस बच्ची ने मेरी कम्पनी के एकाउंट से दस करोड़ डाॅलर किसी और के एकाउंट में ट्रास्फोर कर लिए हों,वह इस सवाल का अर्थ ही न समझे।"
वह चीख पड़ी-"मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया।"(पृष्ठ-123)


क्या यह संभव है। खैर कविता भटनागर इस विषय पर क्या कहती है वह भी देख लीजिएगा- बस इतना कह सकती हूं कि किसी ने मुझे इतनी बुरी तरह से फंसाया है कि.... (पृष्ठ-174)

      क्या किसी ने कविता भटनागर के लिए जाल फैलाया है या फिर कविता भटनागर ही एक फ्राॅड है, लेकिन यह भी अनोखा रहस्य है की कथित कविता भटनागर भी स्वयं को कविता भटनागर साबित नहीं कर पाती। तो फिर क्या रहस्य है कविता भटनागर का। अब यह समझने के लिए तो उपन्यास पढना होगा।

         हां, यह सत्य है की उपन्यास की कहानी रहस्य के एक ऐसे जाल की तरह है जिसमें एक बार बंध जाने पर बाहर निकलना मुश्किल है। एक ऐसा जाल है जिसमें पुलिस और कम्पनी तक का दिमाग घूम गया की आखिर हो गया रहा है।
वैसे भी वेदप्रकाश शर्मा जी यह विशेषता है की वे कहानी को बहुत घुमावदार बनाते हैं‌। और हां कहानी का अंत भी उतना ही रोचक है जितना की बाकी कहानी।
             कहानी के विषय में ज्यादा चर्चा करने का अर्थ होगा कहानी का आनंद खत्म करना। बस एक बार आप उपन्यास उठा कर देखें।

निष्कर्ष-
वेद मंत्र 'दस करोड़ डाॅलर' की धोखाधड़ी के साथ-साथ एक कथित लड़की की पहचान खोने की कहानी है। रूसी हथियार सप्लायर्स, अमेरिका की खूफिया विभाग और भारतीय कम्प्युटर एक्सपर्ट तीनों को उलझाने वाले एक अनोखे शख्स की यह कहानी पाठक को जितना आरम्भ में चौंकाती है उतना ही अपने अंत में।
आदि से अंत तक सस्पेंश से भरपूर एक दिलचस्प कहानी। उपन्यास भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम है।

उपन्यास- वेद मंत्र
लेखक-   वेदप्रकाश शर्मा
पृष्ठ-       347
प्रकाशक- राजा पॉकेट बुक्स


Saturday, 27 July 2019

213. सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री- वेदप्रकाश शर्मा

एक सत्य घटना पर आधारित मर्डर मिस्ट्री।
सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री- वेदप्रकाश शर्मा, उपन्यास

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में जो स्थान वेदप्रकाश शर्मा का है वहाँ तक किसी अन्य लेखक को पहुंचाना एक हद तक कठिन है।
         इसका एक कारण यह भी है की वेदप्रकाश शर्मा जी के कुछ उपन्यास मात्र काल्पनिक न होकर यथार्थ और कल्पना का मिश्रण होता था। जासूसी साहित्य मात्र मनोरंजन का माध्यम है तो इसलिए इसमें कल्पना की प्रचुरता तो रहेगी।
वेद जी सामाज में घटित किसी घटना को अपनी कल्पना के रंगों से सुसज्जित कर पाठक के सामने इस तरह से प्रस्तुत करते थे की पाठक उस संसार में खो जाता था।
             वेद जी ने बहुत सी वास्तविक घटनाओं को आधार बना कर उपन्यास लिखे हैं, 'सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री' भी एक ऐसा ही कथानक है।
भारत के अपराध जगत में घटित एक ऐसी घटना जो  आज तक अनसुुुलझी है।
           सन् को 2008 में नोएडा (UP) में एक वीभत्स हत्याकाण्ड हुआ था। आरुषि हेमराज हत्याकाण्ड भारत का सबसे जघन्य व रहस्यमय हत्याकाण्ड था जो 15–16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 में हुआ। डॉ. राजेश तलवार और उनकी पत्नी डॉ. नूपुर तलवार (दोनो पेशे से चिकित्सक) पर आरोप था की उन्होंने अपनी एकमात्र सन्तान आरुषि के साथ अपने घरेलू नौकर हेमराज की नृशंस हत्या कर दी और सबूत मिटा दिये। लेकिन तलवार दम्पति का कहना है की ये उन्होंने नहीं किया।
घर में चार सदस्य और जिनमें से एक रात दो की हत्या हो जाती है। घर अंदर से बंद है और बाहर से आने का कोई रास्ता नहीं। तो यह कैसे संभव है की किसी बाहरी आदमी‌ ने हत्या की हो।
        यह केस तो बहुत लंबा चला और कई परिणाम सामने आये। यह भारत की एक अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री है।
इसी को आधार बना कर वेदप्रकाश शर्मा ने 'सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री' लिखी है। जब वेद जैसे लेखक लिखते हैं तो यह तय की वह मात्र सामान्य मर्डर मिस्ट्री न होगी। जैसे अक्सर लिखा जाता है- एक कत्ल और फिर कातिल की तलाश। इस उपन्यास में वेद जी ने जो पृष्ठ दर पृष्ठ रोमांच का समां बांधा है वह पठनीय और प्रशंसनीय है।
           ‌‌‌राजन सरकार और उनकी पत्नी इंदू सरकार। इनका एक मात्र पुत्र है कान्हा और घर में चौथा सदस्य है नौकरानी मीना। एक रात घर पर कान्हा और मीना का कत्ल कर दिया जाता है। घर अंदर से बंस है और राजन और इंदू का कहना है की ये कत्ल उन्होंने नहीं किया।
लेकिन सब तथ्य उनके विपरीत हैं। बहुत कुछ संदेहजनक है। यहाँ तक की राज‌न सरकार के बयान भी।
सबसे बड़ा बेस तो यही है कि पुलिस कोर्ट में इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने जो भी फैसला सुनाया, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया। (पृष्ठ-49) 

     तब ठाकुर निर्भय सिंह (पुलिस विभाग) के साथ राजन सरकार विजय से मिलता है और अपनी बेगुनाह होने का और कान्हा की आत्मा को इंसाफ दिलाने की प्रार्थना करता है।
यहाँ से उपन्यास का आरम्भ होता है। एक के साथ एक नयी-नयी रोचक और हैरतजनक घटनाएं घटित होती हैं।
स्वयं विजय-विकास हैरान है की यह सब क्या हो रहा है?

- कान्हा और मीना की हत्या किसने की?
- बंद घर में हत्या कैसे संभव है?
- सरकार दम्पति को मृतकों‌ की चीखे क्यों न सुनाई?
- आखिर सबूत किसने मिटाये?
- कान्हा और मीना की हत्या क्यों की गयी?

Friday, 26 July 2019

212. दहकते शहर- वेदप्रकाश शर्मा

विजय- विकास का प्रथम उपन्यास
दहकते शहर- वेदप्रकाश शर्मा, उपन्यास

     वेदप्रकाश शर्मा उन लेखकों में से एक हैं जिनको पढकर मेरा उपन्यास प्रेम परवान चढा। वेद जी के उपन्यास बहुत रोचक और दिलचस्प होते हैं। हिन्दी जासूसी साहित्य में सर्वाधिक बिक्री वाले लेखक रहे हैं वेदप्रकाश शर्मा जी।
       'दहकते शहर' वेदप्रकाश शर्मा जी का प्रथम उपन्यास माना जाता है। यह मानना किस दृष्टि से है यह देखना है। देखना क्या है पढना है। और पढना यह है कि 'दहकते शहर' वेदप्रकाश शर्मा के स्वयं के नाम से प्रकाशित होने वाला प्रथम उपन्यास है। अर्थात् वेद जी छद्म नाम से पहले लिखते रहे हैं।
जैसा की उपन्यास साहित्य का एक काला अध्याय रहा है वह है भूत लेखन(Ghost writing) और यह भूत/ छद्म लेखन वेद जी ने भी किया है।

        अब रिकाॅर्ड के अनुसार 'दहकते शहर' ही वेद जी का प्रथम उपन्यास माना जाता है। लेकिन इस से पूर्व वेद जी काफी उपन्यास लिख चुके थे। 'दहकते शहर' पढते वक्त यह अहसास बना रहता है की ये पात्र पूर्व में परिचित हैं।
       जैसे विजय कहता है- मर्डरलैण्ड को तो हमारे लूमड़ प्यारे समाप्त कर आये थे।(पृष्ठ-20) ( शायद यह प्रसंग वेद जी द्वारा लिखे गये Ghost लेखन के उपन्यास में होगा)

Sunday, 30 June 2019

211. हादसा- संजय काले

एक हादसा जिंदगी बदल सकता है।
हादसा- संजय काले, मराठी से अनुवादित

हादसा संजय काले जी द्वारा रचित मराठी उपन्यास 'कधीतरी अचानक' का हिन्दी अनुवाद है। संजय काले जी का नाम मेरे किए तो नया है, इसी नयेपन की वजह से यह उपन्यास पढा।

        हादसा एक ऐसे कुछ ऐसे लोगों की कहानी है जो एक कम्पनी में सहकर्मी, दोस्त और पड़ोसी भी हैं। इनकी जिंदगी में कुछ ऐसे हादसे होते हैं जो इनकी जिंदगी को बदल कर रख देते हैं। क्या यह मात्र हादसे हैं या किसी के गहरे षड्यंत्र, खैर यह प्रश्न तो उपन्यास पढने पर ही हल होगा।
www.svnlibrary.blogspot.in
सुबोध एक कम्पनी का प्रमुख है। अमेय, मकरंद और श्री धर उसी कम्पनी के कर्मचारी हैं।
सुबोध, अमेय का बॉस था। उनके बगलवाले बंगले में रहता था। दो घरों की कंपौड वॉल कॉमन थी।

Tuesday, 25 June 2019

210. मैडम नताशा का प्रेमी- अमित खान

एक लड़की की रोमांचक जिंदगी।
मैडम नताशा का प्रेमी- अमित खान, उपन्यास

मेरी किस्मत शुरु से ही खराब रही।
हालांकि इस दुनियां में लड़की होना ही अपने आप में बहुत बड़ा अभिशाप है।
जबकि मैं लडकी थी और बदकिस्मत भी थी।
यानि दोनों अवगुण मेरे अंदर थे।
जरा सोचिए...ऐसी हालत में मेरे ऊपर क्या गुजरी होगी।
सबसे पहले मैं आपको अपना नाम बताती हूँ।
नताशा शर्मा।
यही मेरा नाम है।
अपने नाम की तरह ही मैं खुबसूरत हूँ।
(पृष्ठ-09,10)
                 उक्त कथानक है अमित खान ही के उपन्यास 'मैडम‌ नताशा का प्रेमी' का। यह एक 'हाॅट थ्रिलर उपन्यास है। पहले मुझे लगा की उपन्यास में कुछ 'हाॅट' दृश्य होंगे और थ्रिलर के नाम पर एक्शन होगा। लेकिन जब उपन्यास पठना आरम्भ किया तो उक्त धारणाएं खत्म हो गयी। यह वास्तव में एक जबरदस्त थ्रिलर उपन्यास है जिसका आधार मात्र 'हाॅट' कहा जा सकता है। उपन्यास में कहीं जबरन अश्लील का पुट नहीं दिया गया और हां, रोमांच गजब है।
अब बात करें उपन्यास की तो यह उपन्यास मैडम नताशा के जीवन पर आधारित है।‌ नताशा खूबसूरत तो है लेकिन उसके जीवन में प्रेम नहीं है। एक साधु बाबा ने यह भविष्यवाणी की थी। -"इसकी किस्मत में प्रेम नहीं है। यह सदा पुरुष के प्रेम को तरसेगी। पुरूष का प्रेम...वह चाहे पिता के रूप में हो या प्रेमी के रूप में..इसे कभी पुरूष का प्रेम नहीं मिलेगा। (पृष्ठ-12)

           बस इसी को चैलेंज के रूप में लिया नताशा ने। उसे एक नहीं अनेक प्रेमी मिले लेकिन हर प्रेमी के साथ धोखा भी। प्रेम और धोखे ने नताशा का जीवन ही बदल दिया। वह न चाहते हुए भी एक ऐसे भंवर में फंस गयी जहाँ उसे बदहाल जिंदगी के अतिरिक्त भी बहुत कुछ मिला लेकिन स्थायी कुछ भी न था।
           बड़ी अजीब थी नताशा की किस्मत उसने जिस किसी पुरुष से प्रेम किया उसी ने उसे धोखा दिया। उस‌ने अपने कई प्रेमियों को मौत के घाट उतार डाला। हत्या की एक हैरत अंगेज स्कीम। ( उपन्यास के आवरण पृष्ठ से)
उपन्यास के विषय में ज्यादा कुछ लिखने का अर्थ होगा उपन्यास का आनंद खत्म करना। उपन्यास का असली आनंद इसे पढनें में ही है।
         फिर भी उपन्यास पर कुछ चर्चा करें तो यह रोमांच से आरम्भ होती है एक्शन से गुजरती हुयी एक सस्पेंश के साथ अपने समापन को प्राप्त होती है।
उपन्यास कट हर पात्र एक नया रोमांच लेकर ही आता है। लेकिन जाता वह एक सस्पेंश के साथ है।

अमित खान जी ने उपन्यास में कुछ ऐसे कथनों का उपयोग किया है जो एक तरह से 'सुक्ति' का काम‌ करते हैं। ये मात्र लेखक के विचार न होकर सत्य कथन है।
- प्रेमी...जो अगर अन्तर्मन से प्यार करे, तो उसकी बाहों जैसा स्वर्ग दुनियां में और कहीं नहीं।
- मर्द की फितरत बड़ी रंगीन होती है। वह जैसे-जैसे उम्र की ढलान की तरफ बढता है...वैसे-वैसे उसके पर फड़फड़ाने लगते हैं।


        उपन्यास एक 'हाॅट थ्रिलर' के अलावा भी महत्वपूर्ण बातों‌ पर ध्यान आकृष्ट करता है। जैसे- कुछ लम्पट किस्म के उम्रदराज भी बच्चियों पर कुदृष्टि रखते हैं। उनसे सावधान रहना जरूरी है।

प्रस्तुत उपन्यास मात्र 'हाॅट' कथानक न होकर एक जबरदस्त थ्रिलर गाथा है। कहानी इतनी दिलचस्प है की एक ही बैठक में पठनीय है।
अगर आप थ्रिलर उपन्यास पसंद करते हैं तो यह उपन्यास आपको अवश्य अच्छा लगेगा।
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उपन्यास- मैडम नताशा का प्रेमी
लेखक- अमित खान
प्रकाशक- शिवा पॉकेट बुक्स
पृष्ठ- 236


अमित खान का पचासवां उपन्यास।
हाॅट थ्रिलर शृृंखला।

209. स्वेटर- अशोक जमनानी

मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह- स्वेटर
स्वेटर- अशोक जमनानी, कहानी संग्रह

साहित्यकार अशोक जमनानी जी का कहानी संग्रह 'स्वेटर' पढने को मिला यह एक रोचक और मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह है।

      इस संग्रह में वे कहानियाँ हैं, जिन्हें आकाशवाणी भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में प्रसारित किया है। मेरे विचार से इसी कारण इस संग्रह की कहानियों में एक सरलता है।

        अशोक जमनामी का कहानी संग्रह स्वेटर कुछ रोचक और मर्म स्पर्शी कहानियों का संग्रह है। कहानियों की जो खुशबू है वह हल्की सी है जो आपके हृदय को एक शांति प्रदान करती है। कहानियों में कहीं भी जबरदस्त पैदा किया गया यथार्थवाद नहीं है, ओढी गयी गंभीरता नहीं है। जो कुछ भी इन कहानियों में व्यक्त है वह बहुत सहज और सरल है। वहीं लिखा गया है जो सामान्य समाज का एक अंग है।
      इस संग्रह में कुल पन्द्रह कहानियाँ है।
       इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'स्वेटर' जो यह दर्शाने में कामयाब रही है की हम किसी घटना की वास्तविक जाने बिना अपने-अपने दृष्टिकोण से उसकी व्याख्या आरम्भ कर देते हैं।
जैसे अमोल ने स्वेटर पहना तो सभी ने अपने -अपने अनुमान लगाने आरम्भ कर दिये। यह कहानी हमारे दृष्टिकोण को एक नया आयाम देती है, हमारी पूर्वधारणाओं को त्यागने का संदेश भी देती है।

Saturday, 15 June 2019

208. असाधारण नायक ओमपुरी- नंदिता सी. पुरी

 असाधारण नायक की जीवन कथा।
ओमपुरी की जीवनी

फिल्म अभिनेता ओम पुरी की जीवनी 'असाधारण नायक ओमपुरी' उनकी द्वितीय पत्नी नंदिता सी. पुरी द्वारा लिखित है। जिसमें ओमपुरी के जीवन के एक-एक भाग को बहुत रोचक और दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
ओम पुरी के बचपन के कठिन संघर्षों से लेकर उनके सफल जीवन का स्पष्ट और बेबाक चित्रण इस जीवन में उपलब्ध है।
हरियाणा के अंबाला शहर से संबंध रखने वाले ओमपुरी जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। जहां गरीबी का साम्राज्य स्थापित था। ओमपुरी का जीवन चाय ढाबे पर, कोयला बीनने और मजदूरी करते बीता है।
ओमपुरी के जीवनी में एक बात स्पष्ट होती है वह है उनका संघर्ष और हार न मानना। वे किसी भी परिस्थिति में घबराये नहीं।
ओम की एक ट्रेजडी यह भी रही की न तो वे नायक की तरह लगते थे और न ही खलनायक की तरह और उस पर भी उनका चेहरा भी दागदार था। जो छोटी उम्र में ही चेचक के कारण हो गया।

Tuesday, 11 June 2019

207. बंदर की करामात- सुरेन्द्र मोहन पाठक

बंदर का खतरनाक मनोरंजक कारनामा
बंदर की करामात- सुरेन्द्र मोहन पाठक, उपन्यास
सुनील और जुगल किशोर सीरिज

सुनील सीरिज का 17 वां उपन्यास
समाचार पत्र ब्लास्ट के रिपोर्टर सुनील के मित्र जुगल किशोर उर्फ बन्दर ने रोमांच अनुभव प्राप्त करने के लिये एक ऐसे बखेड़े में टांग फंसा डाली थी जो कि ऊपर से देखने में तो साधारण सा लगता था। लेकिन बन्दर की इस करामात के चक्कर में पड़ कर ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि सुनील को लगा जैसे उसके और बंदर के गले में फांसी का फंदा पड़ने वाला है। ( उपन्यास के आवरण पृष्ठ से)
बंदर की करामात- सुरेन्द्र मोहन पाठकनी
सुनील चक्रवर्ती 'ब्लास्ट' नामक समाचार पत्र का रिपोर्टर है। और बंदर उसका दोस्त। भला बंदर भी कोई नाम हुआ? बंदर का वास्तविक नाम जुगल किशोर था...लेकिन हर कोई उसे बंदर ही कहता था। 

206. हाँगकाँग के लूटेरे- सुरेन्द्र मोहन पाठक

हाँगकाँग की धरती पर ड्रग्स माफिया से टक्कर।
हाँगकाँग के लूटेरे- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरिज-15

      रमेश कपूर हाँगकाँग के ड्रग्स धंधे में शामिल था। उसने वहाँ 'तिन-हा' से शादी कर ली। एक कार एक्सीडेंट में रमेश कपूर की मृत्यु हो जाती है। रमेश की अंतिम‌ इच्छा के अनुसार 'तिन-हा' उसके शव को भारत लाना चाहती है। इसके लिए सी. आई. बी. (सेन्ट्रल इंटलीजेंस ब्यूरो) की एक विशेष शाखा 'स्पेशल इन्टलीजेंस' के डायरेक्टर कर्नल मुखर्जी उसकी मदद करते हैं।
तिन-हा एक अमेरिकन मददगार मैक्सन के साथ मुखर्जी की कोठी पहुंचती है और वहाँ उसकी हत्या कर दी जाती है।
स्पेशल इन्टलीजेंस के डायरेक्टर की कोठी पर हत्या।
- क्या रहस्य था रमेश कपूर का?
- कर्नल मुखर्जी जी उसकी मदद क्यों कर रहे थे?
- कर्नल मुखर्जी की कोठी पर आखिर हत्या कैसे हो गयी?
- कौन थे हत्यारे?
- आखिर रहस्य  क्या था? 

Monday, 10 June 2019

205. मरी हुई औरत- सजल कुशवाहा

एक सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री
एक मरी हुई औरत- सजल कुशवाहा
 कुशवाहा कांत के भ्राता जयंत कुशवाहा के ज्येष्ठ पुत्र का उपन्यास।

बहत्तर घण्टों में तीन हत्याएं, एक आत्महत्या, यह रहस्योद्घाटन कि पांच बरस पहले कपिल कुमार की मौत का वास्तविक कारण आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी। वह घटनाएँ सामने आ चुकी थी और समस्त हत्याओं के लिए जिम्मेदारी व्यक्ति.... अभी तक पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका। (पृष्ठ-123)
      तो ये बात है उपन्यास 'मरी हुई औरत' की। जिसके मरने की खबर ने ऐसा हंगामा बरपाया की शहर हादसों का शहर हो गया। शहर में हत्याओं का दौर शुरु हो गया।
    तो आखिर ऐसा क्या था एक मरी हुई औरत में? इस प्रश्न का उत्तर तो खैर उपन्यास पढने पर ही मिलेगा।

Thursday, 6 June 2019

204. रेड अलर्ट- प्रभात रंजन

विज्ञान के विकास की विनाश की कहानी
रेड अलर्ट- प्रभात रंजन, उपन्यास

प्रभात रंजन का उपन्यास 'रेड अलर्ट' मानव विकास कि उस स्थित का वर्णन करता है जिस पर मनुष्य को गर्व है, लेकिन वह विकास उसके लिए घातक है। प्रकृति को क्षति पहुंचा कर किया गया विकास तो विनाश है।


विश्व इतिहास में 06, 09 अगस्त 1945 का दिन अविस्मरणीय दिन है, यह एक काला दिन है जिसने मानवता को नष्ट करने का प्रयास किया है।
06.8.1945 को हिरोशिमा पर व 09 अगस्त को नागासाकी पर अमेरिका ने एटम बम गिरा कर अपनी हैवानियत का परिचय दिया था। इस विध्वंस से उपजी त्रासदी आज भी अमिट है।

इस कहानी के पात्र चाहे भारतीय हैं लेकिन इस कहानी का मूल वैश्विक है। मनुष्य जो घातक हथियार निर्माण कर रहा है उसके परिणाम संपूर्ण सृष्टि को भुगतना होगा।

          कहानी भारत से आरम्भ होकर जापान-अमेरिका से गुजरते हुए द्वितीय विश्व युद्ध की वीभित्सा का चित्रण करती है। मानव ने आज जो विज्ञान के दम पर विकास किया है, जिस विकास पर उसे गर्व है वह वास्तव में मनुष्य को विनाश की तरफ ले जा रहा है।
            विश्व के राष्ट्रों में हथियार, विकास और भौतिकता की जो अंधी दौड़ है वह सृष्टि को विनाश की तरफ ले जा रही है।
मनुष्य में प्रेम, सहयोग और संवेदनाएं खत्म हो रही है। नफरत, प्रतिस्पर्धा और अति महत्वाकांक्षा बढ रही है। इस दौड़ का कहीं कोई अंत नहीं है।
उपन्यास पात्र देवर्षि भी यही कहते हैं।- ‘‘.. सच्चाई ये है कि परमाणु बम से भी खतरनाक है-मनुष्य की आत्मघाती सोच।"
लेकिन इसके बीच में कहीं न कहीं मानवता के दर्शन हो जाते हैं। उसी मानवता की कहानी है 'रेड अलर्ट'।
रेड अलर्ट- प्रभात रंजन

203. विधवा का पति- वेदप्रकाश शर्मा

क्या कोई विधवा का पति हो सकता है?
विधवा का पति- वेदप्रकाश शर्मा, उपन्यास

'विधवा का पति' उपन्यास का शीर्षक जितना आश्चर्यचकित करने वाला है उतना ही आश्चर्यजनक उपन्यास की कहानी है। एक ऐसी कहानी जहाँ पाठक बार-बार चौंकता हैं, जहाँ पाठक का मस्तिष्क रुक सा जाता है की आखिर यह क्या हो रहा है। और जो हो रहा उसे पढकर तो पाठक वेद जी की लेखनी का मुरीद बन जाता है।

  यह कहानी एक सिकंदर की,...अरे...अरे...नहीं... नहीं ...यह कहानी तो जाॅनी की है....अरे यार फिर गलती हो गयी....यह कहानी तो सर्वेश की है...क्या....क्या कहा...यह कहानी उसकी भी नहीं, तो फिर यह कहानी किसकी है....कुछ भी पता नहीं। हां, यह बात ठीक है... जैसे उपन्यास नायक को भी कुछ पता नहीं की वह 'कौन' है। ठीक वैसे ही यह कहानी है।

एक युवक है, जो की 'विधवा का पति' उपन्यास का नायक। उससे खुद की पहचान गायब हो जाती है और कुछ लोग उस पर अपना हक जताते हैं।
एक पिता उसे अपना बेटा कहता है।
एक लड़की उसे अपना पति कहती है।
एक बच्चा उसे अपना पिता कहता है।
पुलिस उसे 'विधवा का पति' कहती है।
और स्वयं वह असमंजस में है की आखिर वह कौन है?
युवक स्वयं के बारे में यही सोचता है।


यह सच्चाई है कि मैं खुद को नहीं जानता—मेरा नाम क्या है, मैं कौन हूं…क्या हूं—ऐसे किसी भी सवाल का जवाब खुद मुझे नहीं मालूम है—दुनिया का कोई भी दूसरा आदमी शायद मेरी उलझन, कसमसाहट और विवशता को नहीं समझ सकेगा—स्वयं आपने किसी ऐसे आदमी की मानसिकता की कल्पना की है, जो खुद ही अपने लिए एक पहेली हो—जो खुद ही इनवेस्टिगेशन करके यह पता लगाने की कोशिश कर रहा हो कि वह कौन है? शायद मेरी कसमसाहट को कोई नहीं समझ सकेगा जी, क्योंकि मैं खुद ही वह आदमी हूं।"


           उस युवक की परिस्थितियाँ कुछ और ही रंग लेती हैं। जैसे किसी खूबसूरत युवती को देखकर उसके मन में बस एक ही ख्याल आता है।
       बड़े ही विस्फोटक ढंग से युवक के दिमाग में विचार टकराया कि—'अगर वह .... की गर्दन दबा दे तो क्या होगा।'
वह मर जाएगी।
युवक पर जुनून सवार होने लगा।
एकाएक ही वह सोचने लगा कि यदि .... के जिस्म से सारे कपड़े उतार दिए जाएं तो यह बहुत खूबसूरत लगेगी।
उसके दिलो-दिमाग में बैठा कोई चीखा—उतार दे—'इसके जिस्म से कपड़े का एक-एक रेशा नोंचकर फेंक दे—गर्दन दबा दे इसकी—मार डाल—फर्श पर पड़ी इसकी निर्वस्त्र लाश बहुत सुन्दर लगेगी।'

- कौन था वह युवक?
- क्या था उसका रहस्य?
- क्या था उसका असली नाम?
- कैसे उसने अपनी पहचान खो दी?
- क्यों उसे हर कोई अपना कहता था?
- क्यों उस युवक के मन में युवतियों को मारने के विचार आते थे?
- आखिर वह 'एक विधवा का पति' कैसे था?


'विधवा का पति' एक ऐसे युवक की कहानी है जो स्वयं की पहचान खो चुका है और लोग जो उसे पहचान दे रहे हैं वह स्वयं उससे संतुष्ट नहीं। क्योंकि अलग-अलग लोग उसे अलग-अलग पहचान दे रहे हैं। और एक दिन वह स्वयं अपनी पहचान की तलाआ में निकल पड़ता। इस तलाश में उसके साथ ऐसे ऐसे हादसे पेश आते हैं की वह स्वयं अचंभित हो उठता है। हर कोई उस पर अपना हक जताता है।
         कहानी मकड़ी के जाले सी उलझी हुयी है। हर किरदार एक नयी कहानी के साथ पेआ होता है और उस युवक पर अपना हक जताता। दूसरी तरफ युवक स्वयं नयी-नयी पहचान से परेशान है।
            तीन इंस्पेक्टर हैं जो युवक की तीन अलग-अलग पहचान के कारण एकत्र होते हैं, उन्हें कहानी कुछ और ही नजर आती है। इनमें एक इंस्पेक्टर है चटर्जी जी।‌ जिसे उलझे हुए मामले सुलझाने में बहुत आनंद आता है। वह स्वयं के बारे में कहता है।- ये पुलिस की आंखें हैं—एक बार जिसे देख लेती हैं, वह दोबारा इंसान के स्थान पर अगर जानवर बनकर भी सामने आए तो तुरन्त पहचान लेती हैं।"
            उपन्यास की कहानी बहुत रोचक है। पाठक को पृष्ठ दर पृष्ठ एक नया रोमांच मिलता है।‌ सोचा भी नहीं जा सकता ऐसे स्तर पर जाकर कहानी कुछ नया रंग ले लेती है।

उपन्यास के कुछ कथन जो मुझे रोचक लगे। एक उदाहरण देखें-
सच ही कहा है किसी ने—अपने प्राण हर व्यक्ति को हर कीमत से कहीं ज्यादा प्यारे होते हैं…अगर किसी को यह पता लग जाए कि सारी दुनिया में आग लगाने से उसके अपने प्राण बच सकते हैं तो वह सारी दुनिया को जलाकर राख करने में एक पल के लिए भी नहीं हिचकेगा।


         उपन्यास में एक युवक का की हत्या होती है लेकिन पता नहीं क्यों पुलिस उसका पोस्टमार्टम नहीं करती।
"....जहर देकर मारा गया था, क्या पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से यह बात छुपी रह सकी होगी?"
“उनका पोस्टमार्टम ही नहीं हुआ था।"

कुछ दृश्य उपन्यास में बहुत रोचक हैं। वैसे वेद जी जहां सस्पेंश क्रियेट करते हैं वहाँ का दृश्य वास्तव में प्रशंसनीय बन जाता है। इस उपन्यास में भी एक ऐसा दृश्य है जहाँ पाठक स्तम्भित सा रह जाता है।
वह दृश्य एक बिल्ली के माध्यम से दर्शाया गया है। वैसे वेद जी सस्पेंश के मामले में बादशाह हैं। यह दृश्य तो पाठक के रोंगटे खड़े करने वाला वै।
वेद जी की लेखनी से निकला एक जबरदस्त उपन्यास ।

निष्कर्ष-
‌‌‌‌ रहस्य की पर्तों में लिपटा यह उपन्यास हर पृष्ठ पर एक नया सस्पेंश लिये है। अपनी पहचान ढूंढने निकले युवक की रहस्य से भरी जीवनगाथा।
रहस्य और रोमांच से भरा यह उपन्यास पाठक का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम है। उपन्यास पठनीय है। अवश्य पढें।

उपन्यास- विधवा का पति
लेखक -  वेदप्रकाश शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स

Wednesday, 5 June 2019

202. आदमखोर- अनिल सलूजा

अंडरवर्ल्ड गैंगवार की कहानी
आदमखोर- अनिल सलूजा, उपन्यास
भेड़िया सीरिज

अनिल सलूजा जी का एक खतरनाक पात्र है 'भेड़िया'। धर्मराज से शाप प्राप्त, हवस का भूखा, दौलत का दीवाना और खून का प्यासा।
आदमखोर उपन्यास इसी भेड़िया सीरिज की है। उस उपन्यास को पढने का कारण यही था की 'भेड़िया सीरिज' का कोई उपन्यास पढना था।

      यह उपन्यास अंडरवर्ल्ड की गैंगवार पर आधारित है। कालिया पठान अंडरवर्ल्ड का बादशाह है। काली दुनियां पर उसका राज है। पिछले बीस वर्ष से वह दिल्ली अंडरवर्ल्ड
का बेताज बादशाह बना हुआ था। (पृष्ठ -17)
        मकबूल हुसैन और काली सिंह भी अंडरवर्ल्ड के उभरते हुए बदमाश हैं। अब एक शहर में तीन बदमाश तो रह नहीं सकते। काली सिंह और मकबूल हुसैन दोनों एक समझौते के तहत एक साथ हो जाते हैं और कालिया पठान के काले सम्राज्य पर कब्जा करना चाहते हैं। दोनों में गैंगवार चालू है।