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Monday, 25 August 2025

665. रेत की दीवार - कर्नल रंजीत

समुद्रगुप्त की प्रेयसी मालिनी की रक्तरंजित गाथा
रेत की दीवार- कर्नल रंजीत

जासूसी उपन्यासकार कर्नल रंजीत की कलम से निकली एक रहस्य-रोमांच से परिपूर्ण कहानी जिसका संबंध सदियों  पूर्व की एक ऐसी औरत से है जो वर्तमान में रक्त से कहानी लिख रही है। जिसका प्रेम और प्रतिशोध वासना और हत्याओं में बदल जाता है।
इस रोचक उपन्यास 'रेत की दीवार' का हम आरम्भ करते हैं उपन्यास के प्रथम अध्याय 'चार लाख' से । यह अध्याय एक ऐसे युवक का जिसके पास जैसे ही धन आता है उसी के साथ बिन बुलाये, घर बैठे मुसीबतें आनी आरम्भ हो जाती हैं। जैसे ऊंट चढे को कुत्ता खा गया, जैसे होम करते वक्त हाथ जल गये।

   चार लाख रुपये
रांची के निकट पहुंचकर ट्रेन की गति धीमी हो गई थी। रेल-पटरी की मरम्मत हो रही थी।
पहले दर्जे के कम्पार्टमेण्ट में छब्बीस वर्ष का एक नवयुवक बाई सीट पर बैठा हुआ था। एक पुस्तक उसके घुटनों पर रखी हुई थी। वह पढ़ते-पढ़ते उकता गया था। अब वह सामने की सीट पर बैठे अधेड़ आयु के युगल को देख रहा था। वे सेव काटकर खा रहे थे।

Saturday, 23 August 2025

664. जानी दुश्मन- कर्नल रंजीत

एक फिल्म अभिनेत्री की हत्या
जानी दुश्मन- कर्नल रंजीत

नमस्ते पाठक मित्रो,
कर्नल रंजीत के उपन्यास पठन क्रम में एक रोचक उपन्यास मुझे मिला जिसका नाम है 'जानी दुश्मन' । यह एक रोचक उपन्यास है जो सिलसिलेवार हत्याओं पर आधारित है।

जानी दुश्मन
अभिनेत्री की हत्या
प्रियम्बदा ने अपने बाल संवारते हुए एक नजर आदम-कद नाइने पर पड़ते अपने अक्स पर डाली तो उसे लगा, वह आइने में जिस अक्स को देख रहीं है, वह अक्स उसका अपना नहीं किसी और का है। हर समय उदास और गम में डूबी-डूबी-सी आंखों में एक नई चमक थी, एक नया उल्लास था और चेहरे पर ऐसी ताजगी जैसी सुबह-सुबह खिले गुलाब के फूल की पंखुड़ियों पर दिखाई देती है। तराचे हुए सन्तरे की फांक जैसे भरे-भरे होंठों पर एक अन-चाही मुस्कान थिरक रही थी ।
और फिर अनचाहे, अनजाने वह हेमन्त के नए गीत के मुखड़े को गुनगुनाने लगी-
छलका दो मदिरा के प्याले, तन-मन की सुध-बुध खो जाए।
होंठों से यदि तुम छू दो तो । यह विष भी अमृत बन जाए।
गीत के बोल गुनगुनाते-गुनगुनाते अनायास ही उसके पांव बेडरूम के फर्श पर थिरक उठे। पैरों में पड़ी पायल के घुंघरू तालबद्ध लय में बज उठे ।
और फर्श पर थिरकते-गुनगुनाते उसने मेज पर रखा श्री-इन-वन ऑन कर दिया।

Sunday, 17 August 2025

663. चीखती चट्टानें- कर्नल रंजीत

क्या था तूफानी रात में हत्याओं का रहस्य ?
चीखती चट्टानें- कर्नल रंजीत

तूफानी रात
अमावस की काली बरसाती रात । चारों और घटाटोप अंधकार छाया हुआ था।
      बम्बई के मुख्य सागर-तट से लगभग आठ मील दूर, जहां समुद्र के किनारे किनारे दूर तक किसी मराठा दुर्ग के ध्वंसावशेष फैले हुए थे, अमावस की काली बरसाती रात का अंधेरा और सन्नाटा और भी गहरा तथा भयानक लग रहा था। कभी-कभी बारिश की तेज बौछारें, बिजली की बादलों की गरज और सागर की लहरों की गर्जन बरसाती अंधियारी रात के उस सन्नाटे को भंग कर देते थे।
         अचानक सन्नाटे को चीरती हुई किसी राइफल की गोली की आवाज समुद्र तट पर दूर तक बिखरी चट्टानों और प्राचीन मराठा दुर्ग के ध्वंसावशेषों से टकराकर गूंजती चली गई। गोली की आवाज के साथ ही किसी व्यक्ति की हृदयबेधी चीख उभरी; लेकिन वह चीख बिजली की कड़क और घटाओं की गरज में दबकर रह गई।

      राइफल की गोली की आवाज और उसके साथ ही उभरने वाली मानवीय चीख को सुनकर चैकपोस्ट पर तैनात सब-इंस्पेक्टर यशवंत खांडेकर और उसके साथी गुमटी में से निकलकर दौड़ते हुए बाहर आ गए। उन्होंने आंखें फाड़-फाड़कर इधर-उधर नजरें दौड़ाई; लेकिन उन्हें कहीं कुछ न दिखाई दिया। और न किसी प्रकार की आहट ही सुनाई दी। कोई यह तक अनुमान न लगा सका कि गोली और चीख की आवाज किस ओर से आई थीं। घटाटोप अंधियारे और मूसलाधार वर्षा की बूंदों की तनी हुई चादर को चीरकर यह देख पाना असंभव था कि गोली किसने चलाई और किस पर चलाई?

Sunday, 10 August 2025

662. गहरी चाल- कर्नल रंजीत

कौन था पारसी समुदाय का दुश्मन
गहरी चाल- कर्नल रंजीत

उपहार
सोनिया ने एक बहुत ही सुंदर फूलदार मोमी कागज और चार रंगों के रिबन में लिपटे हुए उस चौड़े बक्स को खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो मेजर बलवंत ने उसका हाथ पकड़ लिया "इस सुंदर बक्स को देखकर पागल क्यों हुई जाती हो ? यह बक्स खतरनाक भी हो सकता है। हो सकता है कि हमारे किसी शत्रु ने भेजा हो। इसमें कोई बम, कोई सांप या कोई खतरनाक यंत्र हो यह बक्स मैं खोलूंगा।"
सोनिया ने भयभीत होकर तुरंत अपना हाथ पीछे हटा लिया।
मेजर ने उस सुंदर बक्स को ध्यान से देखा। उसे उस बक्स में. कोई असाधारण बात नजर न आई। उसने कागज काटने वाली छुरी उठाकर उस बक्स के रिबन काट दिए । उसने फूलदार मोमी कागज उतारकर बक्स खोला। बक्स के भीतर टिशू पेपर की तह थी। उसके ऊपर एक खूबसूरत कार्ड था, जिस पर लिखा था- 'मेजर साहब की सोनिया के लिए।'
सोनिया भी वह कार्ड पढ़ चुकी थी और मुस्करा रही थी। मेजर ने टिशू पेपर हटा दिया। उसने सबसे पहली चीज उठाई। वह एक नये डिजाइन की अंगिया थी, जो बढ़िया किस्म के दोहरे कपड़े से बनी थी। मेजर ने वह अंगिया सोनिया की ओर फेंकते हुए कहा, "तुम्हारे जोबन का गिलाफ।"
सोनिया खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसे वह अंगिया बहुत अच्छी लगी। बक्स में अंगिया के नीचे से क्रोशिए की कढ़ी हुई जालीदार शिफ्ट अर्थात बनियान के स्थान पर पहनने वाली छोटी कमीज निकली। मेजर ने उसे भी सोनिया की ओर फेंकते हुए कहा, "तुम्हारी केंचुली।" सोनिया को मेजर की यह बात पसंद न आई तो मेजर हंसा। उसने कहा, "सोनिया। सुंदरता को उजागर करने की बजाय उसे ढांपने वाली हर चीज से मुझे नफरत है। इसीलिए मैंने शिफ्ट को केंचुली कहा है।" यह कहकर मेजर ने एक जांघिया सोनिया की ओर उछाल दिया और बोला, "यह है..." लेकिन सोनिया ने मेजर के मुंह पर हाथ रख दिया । अब मेजर ने बक्स में से दूसरा कार्ड निकाला और पढ़ना शुरू कर दिया 'मेजर बलवंत! ब्यूटीफुल गारमेंट्स की ओर से सोनिया के लिए यह उपहार स्वीकार कीजिए और आज रात को साढ़े सात बजे सोनिया और अपने अन्य मित्रों के साथ 18, लैम्पशेड बिल्डिंग हार्नबी रोड पर पधारिए। हम अपनी एक नई शाखा खोल रहे हैं। हम आपकी प्रतीक्षा करेंगे।'
"क्या आप चलेंगे?" सोनिया ने पूछा।
"तुम जाना चाहती हो तो जरूर चलेंगे।"
"मेरा ख्याल है कि हमें चलना चाहिए।" सोनिया ने परामर्श दिया ।

'गहरी चाल' कर्नल रंजीत का नई पृष्ठभूमि पर लिखा गया अत्यंत रोचक जासूसी उपन्यास है। इसमें अपने हित के लिए देश-हित को भेंट चढ़ाने वाले एक खूंखार गिरोह की दिल दहला देने वाली काली करतूतों की बड़ी ही रोमांचक कहानी है। इस षड्यंत्र का भंडाफोड़ करने में मेजर बलवंत जैसे कुशल जासूस को भी अपनी जान की बाजी लगा देनी पड़ी; और अंत में जब रहस्योद्घाटन हुआ तो सभी आश्चर्यचकित रह गये।

नमस्ते पाठक मित्रो,
एक बार फिर आपके लिए प्रस्तुत है कर्नल रंजीत के उपन्यास 'गहरी चाल' की समीक्षा । और कर्नल रंजीत के उपन्यास पर लिख गयी मेरी सोोलहवीं समीक्षा है। इस से पूर्व में पन्द्रह समीक्षाएं लिख चुका हूँ।

Friday, 1 August 2025

661. खून के छींटे- कर्नल रंजीत

खत्म होते रिश्तों की हत्या
खून के छींटे- कर्नल रंजीत

नमस्ते पाठक मित्रो,
उपन्यास समीक्षा लेखन के इस सफर में आप इन दिनों पढ रहे हैं कर्नल रंजीत द्वारा लिखित मेजर बलवंत सीरीज के अदभुत उपन्यास ।
 यह उपन्यास अदभुत कैसे हैं, यह आप समीक्षाएं पढकर जान चुके होंगे, अगर नहीं जान पाये तो आप इंतजार करें हमारे कर्नल रंजीत के उपन्यासों पर आधारित आलेख 'कर्नल रंजीत के उपन्यासों की रहस्यमयी दुनिया' का । इस आलेख में आपको कर्नल रंजीत के उपन्यासों के विषय मे अदभुत और रोचक जानकारी मिलेगी।
कर्नल रंजीत के अब तक पढे गये उपन्यास 'हत्या का रहस्य, सफेद खून, चांद की मछली, वह कौन था, सांप की बेटी, काला चश्मा, बोलते सिक्के, लहू और मिट्टी, खामोश ! मौत आती है , मृत्यु भक्तअधूरी औरत, हांगकांग के हत्यारे, 11 बजकर 12 मिनट, और अब प्रस्तुत है आपके लिए कर्नल रंजीत के उपन्यास 'खून के छींटे' की समीक्षा ।