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Saturday, 4 July 2026

731. मौत की पहली रात- शौकत जैदी

विक्रांत- अमिताभ और विश्व विजेता
मौत की पहली रात- शौकत जैदी
विक्रांत सीरीज

नमस्ते पाठक मित्रो,
आज प्रस्तुत है एक ऐसे लेखक का उपन्यास जिसका नाम मेरे लिए सर्वथा अपरिचित था। यह लेखक है शौकत जैदी और इनका प्रस्तुत उपन्यास विक्रांत सीरीज का एक जासूसी और रहस्य से भरपूर उपन्यास है।

मौत की पहली रात- शौकत जैदी 

मौसम भयानक होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 'मौत की पहली रात' पन्द्रह जनवरी को प्रारम्भ होने वाली है। मेरा जीवन खतरे में है खराब मौसम में बाहर निकलना भी असम्भव प्रतीत होता है अब तो कोई फरिशता आकर ही मदद कर सकता है ।'
                मौसम विभाग

भारतीय खुफिया विभाग को उक्त संदेश वाला एक पत्र मिलता है और यह खुफिया विभाग के लिए एक पहेली के समान है‌।  
  उपन्यास की समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास का प्रथम दृश्य देखते हैं और फिर समीक्षा को आगे बढाते हैं।
विक्रांत कई दिनों से एक अमरीकन लड़की के चक्कर में पड़ा हुआ था । लड़की जिसका नाम लिलि और भारत आने का उद्देश्य पर्यटन मात्र था । होटल फिलोरा में ठहरी हुई थी लिलि को विक्रांत ने तीन दिन पूर्व होटल फिलोरा के हाल में जुआ खेलते देखा था । और पहली ही नजर में वो अपना दिल बैठा था ।
उस समय ।
विक्रांत के साथ अमिताभ भी था। अमिताभ अठारह वर्ष का लम्बा-चौड़ा नौजवान था जिसने की हाल में ही केन्द्रीय खुफिया विभाग में भरती हुयी थी परन्तु अपनी योग्यता द्वारा शीघ्र ही उसने विभाग में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था ।
- 'उस्ताद ! माल का जवाब नहीं !'- अमिताभ उसकी ओर देखता हुआ बोला-
'मिस्टर चेला राम ! गुरू के माल पर निगाह डालना पाप है।'- विक्रांत भी लड़की की ओर देखते हुये बोला ।
- 'छोरी अमरिकन लगती है गुरू ।' अमिताभ बोला ।
- 'अपने दिल पर काबू रक्खो, फ्यूज उड़ गया तो गुरू को लगाना पड़ेगा ।'
- 'गुरू दिल का फ्यूज तो उड़ाने वाली स्वयं लगाती है।' विक्रांत कुछ उत्तर देता इससे पूर्व वेटर आ धमका ।
- 'जी साहब ! क्या लांऊ !' वेटर ने मुस्कुरा कर पूछा ।
- 'गधे का सिर !' विक्रांत झल्लाया ।
- वेटर बोखला कर अमिताभ की ओर मुड़ा
- 'शुतुर्मुर्ग का अण्डा ।' (मौत की पहली रात- शौकत जैदी, प्रथम पृष्ठ)
  प्रथम पृष्ठ के प्रथम दृश्य से आगे बढकर हम चलते हैं जहां शंशांक चक्रवर्ती और विक्रांत की बातचीत हो रही है।
  विक्रांत के 'स्टाफ ऑफ चीफ' शंशाक चक्रवर्ती का संदेश पहुंचता है- 'विक्रांत तुरंत मेरे पास पहुंचो।' और विक्रांत को अपने विभाग का निर्देश मानना पड़ता है ।
   शंशाक चक्रवर्ती और विक्रांत की चर्चा अनुसार 'डॉक्टर नो' एक वैज्ञानिक अपराधी है जो विश्व विजेता बनने के सपने देख रहा है। हालांकि उसके पूर्व प्रयास विभिन्न जासूसों ने असफल कर दिये थे।
'मानवता का दुश्मन डाक्टर नो जिन्दा है और आजकल रैडलैण्ड में एक गुप्त प्रयोग शाला में नये अनुसन्धान कर रहा है।'
- 'क्या सच !'- विक्रांत चौंका ।
- 'यह बात साबित हो चुकी है।'- चक्रवर्ती बोले- 'हमें यहाँ तक पता चला है कि उसके प्रयोग सफलता के अन्तिम चरण तक पहुंच चुके है।'
'तब तो यह भी आपको पता होगा कि प्रयोग हैं किस
प्रकार के ।'
- 'वैसे तो इस विषय में अधिक पता नहीं चल सका है परन्तु अनुमान के आधार पर कहा जा सकता है कि पहले को तरह यह प्रयोग भी विनाशकारी होगें ।'
   इस बार 'डाॅक्टर नो' अकेला नहीं है उसके साथ एक और खतरनाक अपराधी भी शामिल है। और जब दो खतरनाक अपराधी एक स्वप्न देखें और वह भी विश्व विजेता का तो उसका विनाशकारी होना तो तय है ।
डाक्टर नो के प्रयोगों में जिप्सी पूर्ण रूप से सहयोग दे रही है।
-'जिप्सी !'-विक्रांत ऐसे उछला जैसे भूल से बिजली के तार पर बैठ गया हो ।
- 'हाँ जिप्सी ।'- चक्रवर्ती गम्भीर स्वर में बोला
- 'आपका मतलब ससार की प्रथम नम्बर की जापानी अपराधन जिप्सी से तो नहीं ।'
- 'मेरा मतलब उसी जिप्सी से है जिसको टोकियो की बिजली कहा जाता है...।'(उपन्यास अंश) 
  शंशाक चक्रवर्ती महोदय रेडलैण्ड से भेजे गये एजेंट विक्रम का एक 'गुप्त संदेश' विक्रांत को दिखाते हैं । (पाठक ऊपर संदेश पढ चुके हैं)
'डाॅक्टर नो' और जिप्सी अपने विनाशकारी उद्देश्य के साथ 'रेडलैण्ड' पर उपस्थित है लेकिन 'रेडलैण्ड' का खुफिया विभाग इस विषय पर ज्यादा सक्रिय नहीं है। वहीं भारत के एक गुप्तचर विक्रम ने भारतीय खुफिया विभाग को 'मौत की पहली रात' की खबर भेजी है। अब भारतीय खुफिया अपने होनहार एजेंट विक्रांत को रेडलैण्ड भेजता है ताकि वह विक्रम की मदद कर सके और डाॅक्टर नो के विनाशकारी मिशन नो खत्म कर सके। इस विषय पर रेडलैण्ड के खुफिया विभाग ने सहयोग का आश्वासन दिया है। 
इस मिशन पर एजेंट विक्रांत निकल पड़ता है।
जैसे ही विक्रांत रेडलैण्ड की धरती पर कदम रखता है वैसे ही दुश्मन भी सक्रिय हो जाता है और विक्रांत को खत्म करने की कोशिश करता है । 
रेडलैण्ड का खुफिया विभाग का कर्नल माइक और उसकी सेक्रेटरी जावी विक्रांत का स्वागत करते हैं।
विक्रांत की दृष्टी अब भी जावी की पागल बना देने वाली गदराई जवानी पर लगी हुई थी उसका शरीर किसी मूर्ति की तरह तराशा हुवा, बाल घुटनों तक लम्बे, आँखें गहरी नीली और होंठ गुलाब की तरह गुलाबी थे ।(पृष्ठ- 28)
और यह भी आश्वासन देते है की वह विक्रांत की हर संभव सहयोग करेंगे। 
विक्रांत को रेडलैण्ड की धरती पर विक्रम को खोजना था और इस काम के लिए वह उन लोगों से संपर्क करता है जिनसे कभी विक्रम मिल चुका था लेकिन चालाक दुश्मन हर जगह विक्रांत पर भारी पड़ता है कभी वह हर उस व्यक्ति को खत्म कर देता है जो विक्रांत को आगे बढा सकता है या फिर वह सीधा विक्रांत पर चोट करता है।
        स्वयं विक्रांत भी हैरान है की उसकी हर गतिविधि का दुश्मन को पहले कैसे आभास हो जाता है। कैसे दुश्मन हर आगे बढते कदम को रोक देता है। विक्रांत भरपूर कोशिश के बाद भी सफल नहीं हो पाता और दूसरी तरफ 'मौत की पहली रात' पन्द्रह जनवरी नजदीक आ चुकी है।
समय कम था।
 आज चौदह जनवरी थी और पन्द्रह जनवरी की रात कितनी विनाशकारी होगी इसकी कल्पना मात्र से उसका रोम-रोम सिहर उठा ।
पन्द्रह जनवरी की रात ।
या मौत की पहली रात ।
इससे पूर्व की 'मौत की पहली रात' विनाश के बादल लेकर रैड लैण्ड पर छायें प्रयोगशाला को ढूंढ कर समाप्त कर देना आवश्यक था ।
मगर यह तभी सम्भव था जब विक्रम या माइक्रोफिल्म दोनों में से एक विक्रांत के हाथ आ जायें । (पृष्ठ-76)
    विक्रम की तलाश सिर्फ विक्रांत को ही नहीं थी बल्कि डाॅक्टर नो और जिप्सी भी विक्रम की तलाश में थे। 
    विक्रांत की मदद के लिए अमिताभ भी रेडलैण्ड पहुँच जाता है और फिर दोनों मिलकर अपने मिशन को आगे बढाते हैं लेकिन विश्व विजेता बनने के सपने देखने वाला व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति न था और उसकी प्रयोगशाला को खत्म करना कोई सरल कार्य भी न था। वहां तो विश्व को खत्म कर देने वाले हथियार थे, मानवता को खत्म कर देने वाले आविष्कार थे। लेकिन अंततः विक्रांत और अमिताभ अपने मजबूत संकल्प बल और इरादों के चलते अपनी जान की परवाह न करते हुये दुश्मन से जा टकराते हैं। और विश्व विजेता का स्वप्न देखने वाले अपराधीवर्ग को मौत की नींद सुला देते हैं।
   उपन्यास एक्शन - रहस्य से भरपूर है। विक्रांत के सीधे एक्शन उपन्यासों की जगह इस उपन्यास में रहस्य तत्व भी शामिल हैं और विक्रांत को भी काफी जगह चोट खाते दर्शाया गया है । दुश्मन उपन्यास में विक्रांत पर हावी रहता है । 
उपन्यास में विक्रांत की अनर्गल बातचीत को छोड़ दिया जाये तो उपन्यास की कहानी अच्छी है। 
उस समय पता नहीं लेखक महोदय विक्रांत और ऐसे और पात्रों से अनावश्यक और बचकाना बातचीत क्यों करवाते थे।
प्रस्तुत उपन्यास का एक पात्र विक्रांत के विषय में कहता भी है।
कर्नल चौंका फिर स्वयं मुस्कुराया-'मिस्टर विक्रात मैंने सुना है आप काफी उटपटांग बाते करते रहते है।'(पृष्ठ-27)
   उपन्यासकार शौकत जैदी साहब का नाम पहली बार सुना है और उनका यह उपन्यास पढने को मिला है। लेखक महोदय ने अच्छा प्रयास किया है, अच्छी कहानी लिखी है। अगर इसका अच्छा संपादन किया जाता तो कहानी और भी अच्छी हो सकती थी फिर भी प्रस्तुत प्रयास सराहनीय है।
अगर आपको शौकत जैदी जी के विषय में कोई जानकारी है तो कमेंट कर अवश्य सूचित करें।
    तात्कालिक समय में विश्व विजेता बनने के स्वप्न देखने वाले और भी कुछ अपराधी थे, जैसे सिंगही, जैक्शन आदि।
प्रस्तुत उपन्यास का मुख्य अपराधी डाॅक्टर नो है जो पूर्व में विश्व विजेता बनने के प्रयास कर चुका है लेकिन हर बार किसी जासूस द्वारा मात खा गया।
डाॅक्टर नो के पूर्व के कारनामे भी जान लीजिए-
कोई पांच वर्ष पूर्व उसने एक मक्खी में इस प्रकार कृत्रिम रूप से परिवर्तन किया कि जिसे वो काटे तुरन्त मर जाये परन्तु चचा विनोद ने इससे पूर्व ही वह अपने प्रयोग से मानवता को चैलेंज करता टांय-टांय फिस्स कर दिया और वो संसार से ऐसा गायब हुआ जैसे गधे के सिर से सींग ।

डाक्टर नो दोबारा तीन वर्ष पूर्व लन्दन में दिखाई दिया जहां वो रूबट (Robot) यानि लोहे के सैनिक बनाने पर अनुसन्धान कर रहा था उसका साथ सिंगही दे रहा था परन्तु इससे पूर्व की रूबट पूर्ण रूप से बनकर तैयार होते और विश्व में सनसनी फैलाते चचा इमरान वहां जा कूदे और डाक्टर नो और सिगही का सब कुछ किया-धरा गुड़ गोबर कर दिया । 
उसके बाद सुना था वो एक विमान दुर्घटना में मर गया। 
वहीं डाॅक्टर नो 'रेडलैण्ड' की धरती पर जिप्सी के साथ सक्रिय होता है।
   यह था 'डाॅक्टर नो' का कारनामा । उपन्यास मुझे अच्छा लगा और समीक्षा अगर आपको अच्छी लगी तो कमेंट कर बता दीजिए ।
धन्यवाद

उपन्यास- मौत की पहली रात
लेखक-    शौकत जैदी
प्रकाशक- पारस पब्लिकेशन,मेरठ (मदन सैन जैन)
पृष्ठ-         128


1 comment:

  1. डॉक्टर नो जेम्स बॉन्ड का भी एक किरदार था। नाम तो उससे ही प्रेरित लगता है। उपन्यास की विषय वस्तु रोचक लग रही है। और शौकत ज़ैदी का नाम भी मेरे लिए नया है। रोचक रहेगा इस उपन्यास को पढ़ना।

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