Pages

Saturday, 14 February 2026

प्रेतात्मा की डायरी - कर्नल रंजीत

अलौकिक शक्तियां और मर्डर मिस्ट्री
प्रेतात्मा की डायरी - कर्नल रंजीत

मनुष्य के जीवन में बहुत कुछ ऐसा घटित होता है जो उसकी कल्पनाओं से बाहर का होता है। भारत प्रसिद्ध जासूस मेजर बलवंत के जीवन में भी एक ऐसा केस आया था जिसकी कल्पना मेजर बलवंत ने कभी नहीं की थी। वैसे तो मेजर भूत-प्रेत पर यकीन नहीं करता लेकिन 'प्रेतात्मा की डायरी' में उसे कुछ अलग कल ताकतों का आभास होता है। मेरे विचार से कर्नल रंजीत का यह एकमात्र उपन्यास ही ऐसा होना चाहिए जिसमें अलौकिक शक्ति का वर्णन है अन्यथा कर्नल रंजीत भूत-प्रेत जैसी बातों का खण्डन करते नजर आते हैं।
  
रहस्यपूर्ण हत्याएं
सुबह से ही आकाश पर बादल छाए हुए थे। और शाम होते-होते मटियाले और भूरे बादलों ने काली घटाओं का रूप ले लिया था। शाम के सूरज के डूबते ही हवा में तेजी आ गई थी जिसके कारण हिमाचल प्रदेश के उस पर्वतीय भाग में सदियों के बीत जाने पर भी सर्दी बढ़ गई थी।
ऐसा लग रहा था जैसे सर्दी का मौसम फिर लौटकर आ गया हो।
रामनगर शहर से लगभग पांच मील दूर छोटा-सा गांव राजनगर रात की बांहों में लिपटा शान्त सोया पड़ा था। अचानक सर्दी बढ़ जाने के कारण लोग शाम से ही अपने-अपने घर में जा घुसे थे। जो धन सम्पन्न थे वे गर्म बिस्तरों में पड़े सर्दी मिटाने की कोशिश कर रहे थे। और जो निर्धन थे वे अलाव के पास बैठे सर्दी भगाने का असफल प्रयास कर रहे थे ।
हवा के तेज झोंकों से जब कमरा बर्फ की तरह ठंडा हो गया तो राजेश ने हाथ बढ़ाकर खिड़की बन्द कर दी और पर्दा गिरा दिया।
(प्रेतात्मा की डायरी- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)
    ठाकुर सत्यनारायण सिंह और कुंवर मानवेन्द्र सिंह दोनों हिमाचल प्रदेश के रामनगर के धनाढ्य और प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति थे। दोनों की मृत्यु भी संदिग्ध अवस्था में हुयी थी। ठाकुर सत्यनारायण सिंह के पुत्र राजेश को अपने पिता की मृत्यु पर पूर्ण संदेह था । इसलिए राजेश भारत प्रसिद्ध जासूस मेजर बलवंत से मिलना चाहता था।
मेजर बलवंत इन दिनों मुम्बई शहर के धनाढ्य व्यक्तियों की संदिग्ध मृत्यु की जांच में व्यस्त थे । मुम्बई के सेठ नगीनदास और डाक्टर रवि भण्डारी की हत्या वास्तव में ऐसी हत्याएं जिनसे सभी चकित थे। डाक्टर रवि भण्डारी की हत्या तो एक विजिटिंग कार्ड से ही हो गयी ।
इन दिनों जब रामनगर से राजेश मेजर बलवंत से मिलने आया तो मेजर ने अपनी व्यस्तता के विषय में राजेश को बताया।
राजेश की बात सुनकर मेजर बलवंत कुछ देर चुपचाप बैठा रहा फिर बोला, "राजेश बाबू, हो सकता है आपके अनुमान सच हों । लेकिन इन दिनों मैं डॉक्टर रविकुमार भंडारी और सेठ नगीनदास की रहस्यपूर्ण हत्याओं की छानबीन में व्यस्त हूं।" जब तक इस काम को समाप्त नहीं कर लेता बम्बई से बाहर जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। इस काम से छुट्टी पा लेने दीजिए फिर आपके साथ आपके गांव चलूंगा । अगर आप यहां रुक न सके, तो सविता को पता दे जाइए मैं खुद आ जाऊंगा ।''(पृष्ठ- 44) (सविता डाक्टर रवि भण्डारी के परिवार से है)
      सेठ नगीनदास की हत्या की जांच करते वक्त मेजर बलवंत को एक रोचक तथ्य पता चलता है और वह तथ्य यह था कि सेठ नगीनदास माँ दुर्गा के परम भक्त थे और माँ दुर्गा की कृपा से वह अमीर बने थे ।
नौकर मोहन ने मेजर बलवंत को जो बताया वह आश्चर्यजनक था -"मोहन काका, मां दुर्गा मुझे बुला रही हैं। मेरे जाने का इसी समय इन्तजाम करो।" और फिर उसी समय जो भी हवाई जहाज मिलता था उससे रामनगर पहुंच जाते थे और जब तक मां का आदेश नहीं मिलता था वहीं रहते थे। मां दुर्गा साकार प्रगट होकर उनसे बातें किया करती थी।"
   यही चमत्कार मेजर बलवंत को रामनगर जाने के लिए प्रेरित करता है। और मेजर बलवंत अपनी टीम सोनिया, डोरा, सुधीर, सुनील और मालती के साथ जा पहुंचते हैं रामनगर के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर ।
रामनगर में यूं तो कई धर्मशालाएं थीं लेकिन मेजर बलवंत ने उस धर्मशाला में रहना पसन्द किया जो देवी के मन्दिर के ठीक सामने थी । जिसके ऊपरी बरामदे में बैठकर मन्दिर में आने वाले प्रत्येक यात्री पर नजर रखी जा सकती थी। यही नहीं मन्दिर का एक बड़ा भाग भी उस बरामदे से स्पष्ट दिखाई देता था । (पृष्ठ-64)
   यहां मेजर बलवंत को कुछ विदेशी नजर आते हैं जो दर्शनार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। मंदिर पुजारी भी उनकी अभ्रदता पर मौन रहता है और यही बात मेजर बलवंत को खटकती है।
मेजर बलवंत अपने साथियों के साथ मन्दिर के प्रवेश-द्वार पर पहुंचा तो विदेशी युवक-युवतियों की वह टोली प्रवेश-द्वार के पास ही खड़ी थी और हर आने-जाने वाले को बड़े ध्यान से देख रही थी। जब भी कोई सुन्दर स्त्री उस ओर से गुजरती थी' अधबूढ़े विदेशी के बदन में जैसे बिजली का करेंट दौड़ जाता था । वह किसी चिड़िया की तरह फुदक-फुदककर किसी अंग्रेजी रोमांटिक गीत की कड़ियां गुनगुनाने लगता था । (पृष्ठ-67)
    रहस्यमयी हत्याओं से आरम्भ यह कहानी मुम्बई से हिमालय प्रदेश के क्षेत्र रामनगर पहुंचती है और यहाँ कुछ विदेशी लोग सक्रिय नजर आते हैं । जिनके साथ दुर्गा मंदिर के पुजारी भी हैं और मेजर बलवंत जानता है इस शहर पर पुजारी परिवार का अच्छा दबदबा है उनकी इजाजत के बिना तो पुलिस भी निष्क्रिय नजर आती है।
   मेजर बलवंत राजेश के मामा की हवेली और फिर कुंवर साहब के महल में रहते हैं लेकिन हर जगह उन्हें रहस्यमयी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन वह वास्तविकता तक नहीं पहुच पाते। यह वह हवेली है जहां उन्हें एक प्रेतात्मा की डायरी मिलती है जो उन्हें आगे का रास्ता भी दिखाती है। हालांकि रास्ता तो दिखता है लेकिन मुम्बई से लेकर रामनगर तक और अतीत से लेकर वर्तमान तक हो रही हत्याओं और विदेशी लोगों की भूमिका, जंगल में हो रहे धमाके आदि का रहस्य जानना भी आवश्यक था ।
ठाकुर हरगोविन्द सिंह की हवेली में पहुंचकर जब मेजर बलवंत अपने बिस्तर पर लेटा तो उसे लगा जैसे उसका दिमाग सोचते-सोचते फट जाएगा। सेठ नगीनदास और डॉक्टर रवि-कुमार भंडारी की रहस्यपूर्ण हत्याएं - विदेशियों का यह गिरोह और आज रात देखी हुई रहस्यपूर्ण स्त्री- उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि इन सब घटनाओं का एक साथ सामने आ जाने का अर्थ क्या है ? देखने में ये सभी घटनाएं एक दूसरे से सर्वथा असम्बद्ध दिखाई दे रही थीं। एक घटना का दूसरी घटना से कोई सम्बन्ध हो सकता है। कोई भी ऐसा सूत्र नहीं था जो इस बात का संदेह तक पैदा कर पाता। फिर ये घटनाएं एक के बाद एक उसके सामने आती चली गई थीं।
काफी देर तक वह इन घटनाओं पर विभिन्न दृष्टिकोणों से विचार करता रहा लेकिन वह किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाया ।
(पृष्ठ-104,5)
एक तरफ अलौकिक घटनाएं घटित होती हैं, दूसरी तरफ दुश्मन कुंवर के महल पर तोपों से हमला करता है‌ । मेजर अपने लोगों की सहायता और बुद्धिबल से हर एक समस्या का समाधान निकालता है।
कुछ विशेष:-
कर्नल रंजीत के उपन्यासों में कभी-कभी अतिशय वर्णन देखने को मिलता है और ऐसा वर्णन सिर्फ कर्नल साहब भी कर सकते हैं । जिसे पढकर एक ही शब्द निकलता है- अविश्वसनीय ।
उसने देखा लाश की पथराई हुई आंखों में भय, आश्चर्य, घृणा, क्रोध और क्रूरता की छाया थी। (पृष्ठ- 32)
अब एक लाश की आंखों में भय, आश्चर्य, घृणा, क्रोध और क्रूरता जैसे अनेक भाव एक साथ देखते की अद्भुत क्षमता मेजर बलवंत में ही हो सकती है।
- कर्नल रंजीत के उपन्यासों में भूत-प्रेत का वर्णन नहीं होता, कर्नल रंजीत तो भूत- प्रेत का खण्डन करते हैं लेकिन प्रस्तुत उपन्यास में अलौकिक शक्तियों को चित्रण मिलता है।
- कर्नल रंजीत कुछ पात्रों का नामकरण उसकी विशेषता के साथ करते हैं । जैसे प्रस्तुत में एक पात्र को हर जगह 'अधबूढा मार्श' लिखा है। उपन्यास 'टेडा मकान' में 'कंजूस पाराशर' लिखा है।
प्रेतात्मा की डायरी 
पुजारी शिवदत्त और उनका बेटा गणेश एक साथ तीन अपराधों के दोषी हैं। नम्बर एक स्त्रियों का अपहरण, नम्बर दो- जाली नोटों के व्यवसाय में साझेदारी और नम्बर तीन प्रेसी के षड्यंत्र में सहयोग ।
यह सारा रहस्य मेजर बलवंत को 'प्रेतात्मा की डायरी' से पता चला, यह डायरी उसे कैसे मिली इसकी कहानी सुनाते हुए मेजर कहता है, "और उसी रात जब सारा महल नींद की बांहों में लिपटा बेसुध पड़ा था कुंवर मानवेन्द्रसिंह की आत्मा मुझे उस गोल कमरे में ले गई, जहां वे अकसर बैठा करते थे। वहीं एक रैक में मुझे कुछ फाइलें और चमड़े की एक डायरी मिली । उन फाइलों को पढ़ने के बाद सारा केस मेरे सामने स्पष्ट हो गया ।"
पुजारी शिवदत्त और गणेश का इस केस में क्या हाथ था ? 
प्रेसी कौन थी ? 
कुंवर मानवेन्द्र की आत्मा क्यों भटकती रही ? 
इत्यादि प्रश्नों का जवाब जानने के लिए पढ़िए कर्नल रंजीत का नया उपन्यास - प्रेतात्मा की डायरी ।
रहस्य, रोमांच, सस्पेंस, षड्यंत्र, हिंसा, हत्या, रोमांस का जाल बिछाए यह उपन्यास उन विदेशी ताकतों के घिनौने इरादों का पर्दाफाश करता है, जो इस देश की तसवीर बिगाड़ने के इरादे रखते हैं।
पहली बार एक नई जमीन पर लिखा गया अद्भुत अपूर्व जासूसी उपन्यास । (आवरण पृष्ठ से )
कर्नल रंजीत द्वारा लिखित उपन्यास 'प्रेतात्मा की डायरी' एक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है। जिसका कथानक अतीत से वर्तमान तक विस्तृत है। उपन्यास में अलौकिक शक्ति का वर्णन और विदेशी लोगों के षड्यंत्र का रोचक वर्णन मिलता है।
उपन्यास रोचक और पठनीय है।

उपन्यास-   प्रेतात्मा की डायरी
लेखक-      कर्नल रंजीत
संस्करण-  1982
पृष्ठ-
प्रकाशन- हिंद पॉकेट बुक्स, दिल्ली

कर्नल रंजीत के अन्य उपन्यासों की समीक्षा
पीले बिच्छू ।। भयानक बौने ।। देख लिया तेरा कानून ।। सांप की बेटी ।। काली आंधी ।। हत्या का रहस्य ।। सांप की बेटी ।। काला चश्मा ।। अधूरी औरत ।। सिरकटी लाशें ।। हत्यारा पुल ।। टेडा मकान ।। आग का समंदर ।।

No comments:

Post a Comment